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भेष के अनुरूप आचरण क्यों ज़रूरी? नाम से नहीं, कर्म से बनती है पहचान

राष्ट्र की परम्परा डेस्क दिलीप पाण्डेय– एक प्रेरक कहानी समाज में अक्सर कहा जाता है कि “जैसा भेष, वैसा आचरण होना चाहिए।” लेकिन कई बार नाम और पहनावा तो ताक़तवर…