
नेपाल में मूसलाधार बारिश से उत्तर बिहार में बढ़ा बाढ़ का खतरा, गंडक-कोसी-बागमती उफान पर
रांची/पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। नेपाल के तराई, पहाड़ी और जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब उत्तर बिहार की नदियों पर साफ दिखाई देने लगा है। गंडक, कोसी और बागमती नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने से सीमावर्ती और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालात को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
वाल्मीकिनगर बराज से बढ़ा पानी का डिस्चार्ज
वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को जहां छह घंटे के दौरान डिस्चार्ज करीब 57 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था, वहीं बाद में यह बढ़कर करीब 2.67 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। नेपाल के देवा घाट से भी करीब 2.76 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है।
पिछले 24 घंटे से बढ़ते जलदबाव को देखते हुए वाल्मीकिनगर गंडक बराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। निचले इलाकों में संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
कोसी में 2026 का अब तक सबसे अधिक डिस्चार्ज
सुपौल के भीमनगर कोसी बराज पर भी पानी का दबाव तेजी से बढ़ा है। शुक्रवार शाम छह बजे यहां नदी का डिस्चार्ज 2,70,740 क्यूसेक तक पहुंच गया। यह वर्ष 2026 में अब तक दर्ज किया गया सर्वाधिक डिस्चार्ज बताया जा रहा है।
मधुबनी जिले के मधेपुर प्रखंड में भी नदी की धाराओं में पानी बढ़ने लगा है। गढ़गांव, बसीपट्टी के पूर्वी हिस्से, भरगामा और बकुआ पंचायतों की मुख्य धाराओं पर बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है।
गंडक और बागमती भी खतरे के करीब
पश्चिम चंपारण और आसपास के इलाकों में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर जा रहा है। मोतिहारी के डुमरियाघाट और चनपटिया क्षेत्र में गंडक का पानी लाल निशान के करीब पहुंच गया है। वहीं सीतामढ़ी में बागमती नदी सोनाखान के पास खतरे के निशान से करीब 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन संभावित जलभराव और बाढ़ की स्थिति को लेकर लगातार स्थिति का आकलन कर रहा है।
नेपाल में भूस्खलन से हाईवे बंद, आवाजाही प्रभावित
नेपाल के पहाड़ी और तराई इलाकों में भारी बारिश ने जनजीवन को भी प्रभावित किया है। चितवन जिले में नारायणगढ़-मुगलिन राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा सड़क पर गिरने से कई हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चितवन जिला प्रशासन ने शुक्रवार को इस मार्ग पर वाहनों का परिचालन तत्काल प्रभाव से रोक दिया। इससे भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवाजाही प्रभावित हुई है। सड़क मार्ग बंद होने के कारण यात्रियों और वाहनों के फंसने की स्थिति भी बनी हुई है।
प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में जारी बारिश का सीधा असर भारतीय सीमा से सटे इलाकों में दिखाई दे रहा है। गंडक के बढ़ते जलस्तर के कारण पश्चिम चंपारण के तटीय और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
पश्चिम चंपारण जिला प्रशासन ने लोगों से नदियों, तटवर्ती क्षेत्रों और जलभराव वाले स्थानों पर अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की है। प्रशासन ने लोगों को मौसम संबंधी सूचना और स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है।
स्थिति पर लगातार नजर: जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन बढ़ते जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
