गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कृषि संकाय में शुक्रवार को “सतत कृषि विकास के मूल स्तंभ” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता पर्यावरणविद् भुवनेश्वर नाथ पांडेय ने कहा कि सतत कृषि ही भविष्य की समृद्ध, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल कृषि व्यवस्था का आधार है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया।
उन्होंने अपने व्याख्यान में कृषि के पाँच प्रमुख स्तंभ मिट्टी, बीज, उर्वरक, सिंचाई और फसल उत्पादन—को कृषि विकास की मजबूत नींव बताते हुए कहा कि इन सभी घटकों का वैज्ञानिक प्रबंधन ही कृषि को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बना सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी है। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ इन पाँच स्तंभों को अपनाकर खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण जैसे लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. विमल कुमार दुबे ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. सच्चिदानंद सिंह, सहायक आचार्य (एग्रोनॉमी) ने किया। व्याख्यान में बी.एससी. (कृषि) प्रथम एवं चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सतत कृषि ही भविष्य की समृद्धि का आधार: भुवनेश्वर नाथ पांडेय
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