मॉक संसद में खरगे का बड़ा हमला! CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, SIR पर उठाए 6 सवाल; देशद्रोह के मुकदमे की भी कही बात

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित विपक्षी गठबंधन INDIA के प्रतीकात्मक जन-महाभियोग कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखे आरोप लगाए। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अगुआई में आयोजित मॉक संसद में खरगे ने उनके खिलाफ छह आरोपों वाला प्रस्ताव पेश किया और पद से हटाने की मांग उठाई। उन्होंने SIR की प्रक्रिया रोकने की भी वकालत की। इस कार्यक्रम ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयुक्तों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
खरगे का आरोप—SIR से विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाने की कोशिश
मॉक संसद को संबोधित करते हुए खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने अचानक SIR की घोषणा की और इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य भाजपा के विरोधियों के मतदाताओं के नाम सूची से हटाना है। उन्होंने कहा कि विपक्ष घुसपैठियों को बचाने की लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि वैध मतदाताओं के मतदान के अधिकार की रक्षा करना चाहता है। खरगे ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों का मुद्दा उठाया जा रहा है। हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक बयान हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि और चुनाव आयोग का पक्ष अलग से देखा जाना जरूरी है।
2014 से वोट चोरी की साजिश का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद से सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए राजनीतिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने सांसदों को तोड़ने, राजनीतिक दलों में विभाजन कराने, सरकारें गिराने और चुनावी बॉन्ड, प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। खरगे ने दावा किया कि विपक्ष के पास कथित वोट चोरी के सैकड़ों उदाहरण हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित दिसंबर 2023 में पारित कानून पर भी सवाल उठाए। खरगे के अनुसार, विपक्षी सांसदों के निलंबन के दौरान पारित इस कानून ने चुनाव आयुक्तों को ऐसा कानूनी संरक्षण दिया, जिस पर गंभीर बहस होनी चाहिए।
CEC को हटाने और मुकदमा चलाने की मांग
कार्यक्रम में खरगे ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयुक्तों को दिया गया कानूनी संरक्षण जवाबदेही के रास्ते में बाधा बन सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशद्रोह के मुकदमे की मांग भी की और इसे संविधान तथा जनता के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया। हालांकि, मॉक संसद में पारित या प्रस्तुत प्रतीकात्मक प्रस्ताव अपने आप में किसी संवैधानिक पदाधिकारी को पद से हटाने का आधिकारिक आदेश नहीं होता। इसी तरह, किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करते।
अब चुनाव आयोग के रुख पर निगाहें
SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियों और चुनाव आयोग की जिम्मेदारियों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। असली सवाल यही है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में वैध मतदाताओं के अधिकार कैसे सुरक्षित रहेंगे और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किस तरह होगा। राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर तथ्यों, आधिकारिक जवाब और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही इस विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
