महिला आयोग की सख्ती! 44 शिकायतें पहुंचीं, घरेलू हिंसा-दहेज उत्पीड़न पर अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
एक सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट तलब, अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान बोलीं—महिलाओं की हर शिकायत के निस्तारण पर रहेगा जोर

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और भरण-पोषण जैसी समस्याओं से जूझ रही महिलाओं की शिकायतों पर अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने शुक्रवार को आगरा के नवीन सर्किट हाउस में आयोजित महिला जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को पीड़िताओं की समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ सुनवाई करने और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनसुनवाई में कुल 44 शिकायतें सामने आईं। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, गुजारा भत्ता और पेंशन से जुड़े मामले प्रमुख रहे।
लंबित मामलों पर सख्ती, एक सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
जनसुनवाई के दौरान आयोग अध्यक्ष ने पिछली सुनवाई में प्राप्त शिकायतों और समीक्षा बैठक के निर्देशों पर हुई कार्रवाई की जानकारी ली। लंबित प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने तथा संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर आयोग के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। विभिन्न शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही के साथ काम करने को कहा गया।
अध्यक्ष ने जनसुनवाई में आए मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थानाध्यक्षों से फोन पर बातचीत की और शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित महिलाओं को न्याय पाने के लिए अनावश्यक रूप से भटकना नहीं पड़े, इसके लिए विभागों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
थानों में सम्मानजनक व्यवहार जरूरी
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि महिला आयोग में आने वाले प्रत्येक प्रार्थना पत्र के निस्तारण को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और वे अपनी समस्याओं को लेकर आयोग तथा पुलिस तक पहुंच रही हैं।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से अपील की कि महिलाओं की शिकायतों को संवेदनशीलता और गंभीरता से सुना जाए। थानों में सम्मानजनक व्यवहार और समयबद्ध कार्रवाई से पीड़ित महिलाओं को राहत मिल सकती है।
घरेलू हिंसा के मामलों पर चिंता जताते हुए आयोग अध्यक्ष ने अभिभावकों से बेटियों की सुरक्षा और भावनाओं को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रताड़ना की स्थिति में केवल सामाजिक दबाव के कारण बेटियों को दोबारा ससुराल भेजने से बचना चाहिए। गलत रिश्ते की सजा किसी बेटी को पूरी जिंदगी नहीं भुगतनी चाहिए।
महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
बैठक में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अंतर्गत महिलाओं को दिए जा रहे प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। अध्यक्ष ने अधिकारियों को योजनाओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार करने और अधिकाधिक महिलाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण से जोड़ने के निर्देश दिए, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने विवाह से पहले युवक-युवतियों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आपसी समझ, संवाद और पारिवारिक सामंजस्य घरेलू विवादों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जनसुनवाई में एसडीएम नरेंद्र गंगवार, एसीपी सुनीता चौहान, डिप्टी सीएमओ डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, जिला कौशल प्रबंधक अमित धाकरे, सहायक श्रमायुक्त शगुन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
