ग्लेशियल झील फटने से हड़कंप! असम-बंगाल पर बाढ़ का खतरा, हजारों लोग सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाए गए

Ai निर्मित

✍️ नई दिल्ली/अलीपुरद्वार राष्ट्र की परम्परा डेस्क। भूटान के पहाड़ी इलाके में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) की घटना ने भारत के सीमावर्ती मैदानी क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। झील से निकला पानी नदियों के रास्ते तेजी से नीचे की ओर बढ़ने की सूचना के बाद पश्चिम बंगाल और असम के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। संकोश नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जरूरत पड़ने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने एहतियाती कदम तेज करते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट पर रखा है। मिली जानकारी के मुताबिक, भूटान के लेमथांग इलाके में ग्लेशियल झील का पानी ओवरफ्लो होने के बाद मो छू नदी के रास्ते संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी झील फटने की सूचना मिलने की बात कही है। शुरुआती आशंका के अनुसार, पानी अगले कुछ घंटों में मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। हालांकि, पानी पहुंचने के वास्तविक समय और संभावित प्रभाव का आकलन नदी के जलस्तर तथा बहाव की निगरानी के आधार पर किया जा रहा है। स्थिति को देखते हुए दार्जिलिंग की पहाड़ियों, तराई और डुआर्स क्षेत्र के लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों से अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से लें और खतरे की आशंका होने पर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल जाएं। NDRF-SDRF अलर्ट, राहत और बचाव की तैयारी तेज एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित बाढ़ से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय किया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को अलर्ट किया गया है, जबकि राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को भी तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की टीमें नदियों के जलस्तर, पानी की गति और संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रख रही हैं। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि पानी का बहाव बढ़ने की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को नदी के पास जाने, उफनते पानी को पार करने और पुलों या तटबंधों के आसपास भीड़ लगाने से बचने की सलाह दी गई है। 4 से 5 हजार लोग राहत शिविरों में पहुंचाए गए अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ के मुताबिक, प्रशासन भूटान के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। पुलिस, जिला प्रशासन, प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO) और संबंधित विभागों की टीमें मिलकर हालात पर नजर रख रही हैं। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, लगभग 4 से 5 हजार लोगों को स्कूल भवनों में बनाए गए राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। इसके अतिरिक्त 6 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजे जाने की जानकारी दी गई है। राहत शिविरों में सूखा राशन, पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना और संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना है। लोगों से अपील की गई है कि वे घबराहट में कोई कदम न उठाएं, लेकिन चेतावनी को हल्के में भी न लें। पानी का बहाव कुछ कम, फिर भी संकोश नदी पर रेड अलर्ट अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने बताया कि ताजा जानकारी के अनुसार पानी के बहाव की तीव्रता में कुछ कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद संकोश नदी प्रणाली के लिए रेड अलर्ट जारी है और प्रशासन किसी तरह की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि बाढ़ के पानी के साथ मृत मछलियां, लकड़ी के बड़े टुकड़े और कंक्रीट का मलबा भी बहकर आ सकता है। ऐसे में नदी के किनारे बसे गांवों, निचले इलाकों और पुलों के आसपास खतरा बढ़ सकता है। पानी का स्तर कम दिखाई देने पर भी लोगों को नदी के पास नहीं जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि पहाड़ी नदियों में जलस्तर अचानक बदल सकता है। भूटान के अधिकारियों के साथ समन्वय, अफवाहों से बचने की अपील भारतीय प्रशासन भूटान के संबंधित अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए है, ताकि झील से निकलने वाले पानी और नदी के बहाव से जुड़ी ताजा जानकारी समय पर मिलती रहे। SDRF की टीम तैनात है और NDRF की टीम को भी राहत एवं बचाव कार्यों के लिए तैयार रखा गया है। नागरिक सुरक्षा दलों को भी आवश्यक कार्यों में लगाया गया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट संदेशों को आगे न बढ़ाएं और किसी भी चेतावनी की स्थिति में प्रशासन तथा स्थानीय पुलिस के निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। क्या है GLOF और क्यों मच सकती है तबाही? ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF एक ऐसी अचानक आने वाली बाढ़ है, जो ग्लेशियरों के पास बनी झील का पानी रोकने वाला प्राकृतिक अवरोध टूटने या क्षतिग्रस्त होने से पैदा होती है। इसे हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ भी कहा जाता है। कुछ संदर्भों में ऐसी घटनाओं के लिए आइसलैंडिक शब्द ‘जोकुलह्लॉप’ (Jökulhlaup) का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऊंचे पर्वतीय इलाकों में ग्लेशियरों के पिघलने से झीलें बन जाती हैं। इनका पानी अक्सर बर्फ, चट्टानों और मिट्टी से बने प्राकृतिक बांधों के पीछे जमा रहता है। यदि यह बांध टूट जाए या उसमें बड़ी दरार पड़ जाए, तो पानी बेहद तेज गति से नीचे की ओर बहने लगता है। अपने साथ चट्टानें, मिट्टी, पेड़ और भारी मलबा लेकर आने वाला यह पानी नदी किनारे बसे गांवों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। भूटान की मौजूदा घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को सामने ला दिया है। फिलहाल प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर और पानी के बहाव पर टिकी है। आने वाले समय में स्थिति किस दिशा में बढ़ती है, यह ताजा निगरानी और आधिकारिक सूचनाओं से स्पष्ट होगा। लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि वे सतर्क रहें, सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देशों का पालन करें और किसी भी तरह की लापरवाही से बचें। राष्ट्र की परम्परा | जनहित में सतर्कता, सुरक्षा और सही सूचना।