Tuesday, April 28, 2026
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सुखान्त मृत्यु ही मोक्ष हैं

जीवन में जन्म लेने के उद्देश्य,
योनियों से मोक्ष प्राप्ति होते हैं,
धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों
पुरुषार्थ जिसके माध्यम होते हैं।

जिदगी जीने के लिये हम सबको
कर्म तो करना पड़ता है, कर्म में ही
जीवन का बीज भी है, जड़ें भी हैं,
पेड़ के पत्ते, फूल और फल भी हैं।

खाद पानी निरंतर कर्म हैं, ईश्वर
पर आस्था ही निरंतर रखवाली है,
जो इसमें स्वयं भी व्यस्त रहता है,
वह ही सच्चा भक्त बन पाता है।

वही सुंदर पुष्प और फल पाता है,
सच्चाई, ईमानदारी,कठिन परिश्रम
से यह सब कुछ आसान हो जाता है,
क्योंकि स्वयं ईश्वर साथ होता है।

आदित्य ईश्वर भक्ति धर्म है,
पेड़, पत्ते, फूल, फल अर्थ हैं,
उनकी रक्षा सुरक्षा ही कर्म हैं,
और सुखान्त मृत्यु ही मोक्ष हैं।

•कर्नल आदि शंकर मिश्र’आदित्य’

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