आगरा शिक्षक चुनाव में बड़ी कार्रवाई: 6 अधिकारी निलंबित करने के निर्देश, सुलतानपुर में फर्जी हस्ताक्षर से वोट काटने की कोशिश पर FIR; आज विधान परिषद चुनाव की मतगणना



✍️लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद निर्वाचन को लेकर चुनाव आयोग सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आने पर भारत निर्वाचन आयोग ने छह अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, सुलतानपुर में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए मतदाता सूची से 26 लोगों के नाम कटवाने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। दूसरी ओर, मंगलवार 27 अक्टूबर को विधान परिषद के पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना सुबह आठ बजे से शुरू होगी। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन तंत्र ने सुरक्षा से लेकर निगरानी तक व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
आगरा में 23 अक्टूबर को हुए शिक्षक निर्वाचन के मतदान के दौरान दो मतदेय स्थलों पर पर्यवेक्षण में कमी, मतदान केंद्रों के भीतर और आसपास समुचित नियंत्रण नहीं रख पाने जैसी गंभीर चूक सामने आई। आयोग के निर्देश पर सैंया स्थित क्षेत्र पंचायत कार्यालय के कक्ष संख्या-1 और फतेहाबाद स्थित क्षेत्र पंचायत कार्यालय के कक्ष संख्या-1 से जुड़े छह अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सैंया के मतदेय स्थल संख्या-21 के मामले में सेक्टर मजिस्ट्रेट ओपी चक, जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी, आगरा; सेक्टर पुलिस अधिकारी हरिशरण सिंह, इंस्पेक्टर अपराध शाखा; तथा उपनिरीक्षक संदीप कुमार, एत्माद्दौला थाना, आगरा को निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी तरह मतदेय स्थल संख्या-26, क्षेत्र पंचायत कार्यालय फतेहाबाद के कक्ष संख्या-1 के मामले में सेक्टर मजिस्ट्रेट विशाल राठौर, क्षेत्रीय वनाधिकारी फतेहाबाद; सेक्टर पुलिस अधिकारी पुरुषोत्तम पाल, एडिशनल इंस्पेक्टर फतेहाबाद; और उपनिरीक्षक सुमित त्यागी, एकता थाना, आगरा के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने इन मतदान केंद्रों पर तैनात दो पीठासीन अधिकारियों, तीन मतदान अधिकारियों, पांच हेड कांस्टेबलों और 11 कांस्टेबलों के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने को कहा है। मतदान के दौरान सुरक्षा और निगरानी में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करने के संकेत दिए गए हैं।
सुलतानपुर में 26 मतदाताओं के नाम कटवाने के आवेदन पर एफआईआर
मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर के इस्तेमाल का मामला भी निर्वाचन अधिकारियों के संज्ञान में आया है। समाजवादी पार्टी ने 15 अक्टूबर को प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया था कि सुलतानपुर में नन्द लाल के फर्जी हस्ताक्षर से फार्म-7 भरवाकर मतदाताओं के नाम कटवाने की साजिश की गई।
इस शिकायत पर जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 189-सदर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी से जांच कराई गई। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, बूथ संख्या-96 स्थित प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर, कक्ष संख्या-1 पर नन्द लाल के हस्ताक्षर वाले आवेदन के जरिए 26 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने का अनुरोध किया गया था।
जांच में सामने आया कि इन फार्म-7 में आवेदक का नाम, मतदाता पहचान पत्र संख्या और मोबाइल नंबर जैसी जरूरी जानकारियां दर्ज नहीं थीं। आवेदन अपूर्ण होने के कारण बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) ने किसी भी आवेदन पर कार्रवाई नहीं की। निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, 26 व्यक्तियों के नाम हटाने के लिए दिए गए इन आवेदनों में से एक भी फार्म स्वीकार नहीं किया गया।
हालांकि, आवेदक की पहचान सुनिश्चित किए बिना अपूर्ण फार्म प्राप्त करने को निर्वाचन कार्य में लापरवाही मानते हुए संबंधित बीएलओ को निर्वाचन कार्य से मुक्त कर दिया गया है। उसके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की गई है।
इस मामले में संबंधित बीएलओ सुपरवाइजर की ओर से 24 अक्टूबर को गोसाईगंज थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3), 340(2) और 318(4) के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। फर्जी हस्ताक्षर और कथित साजिश से जुड़े आरोपों की जांच में आगे की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
27 अक्टूबर को 11 निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक चुनाव-2026 की मतगणना मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शुरू होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं।
मतगणना केंद्रों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति के साथ वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में ऑटो स्विच जनरेटर आदि उपलब्ध रखने को कहा गया है। सुरक्षा बलों की पर्याप्त तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। मतगणना समाप्त होने तक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने तथा अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
मतगणना में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी समय से तय करने, प्रत्येक टेबल पर पर्याप्त स्टेशनरी उपलब्ध कराने और प्रशिक्षित कर्मचारियों को रिजर्व में रखने पर भी जोर दिया गया है। विधान परिषद चुनाव में एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के तहत आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था होने के कारण मतगणना में अधिक समय लग सकता है। इसलिए अतिरिक्त प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता को जरूरी माना गया है।
अभ्यर्थियों को मतगणना अभिकर्ताओं की नियुक्ति से जुड़े नियमों की जानकारी देने और उनके लिए आवश्यक बैज उपलब्ध कराने के भी निर्देश हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना का काम निर्धारित नियमों और आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही पूरा किया जाए। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।
निर्वाचन आयोग की इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि मतदान से लेकर मतगणना तक की प्रक्रिया में नियमों के पालन, सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आगरा में अधिकारियों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई और सुलतानपुर में दर्ज एफआईआर के बाद अब मतगणना की प्रक्रिया पर भी सबकी निगाहें रहेंगी।
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