Category: लेख

साईं झूलेलाल साहिब की 1076वीं जयंती 20 मार्च 2026 –चेटीचंड महोत्सव और ईद-उल-फितर का अद्भुत संयोग

विश्वव्यापी आस्था, संस्कृति और सद्भाव का संगम – समग्र विश्लेषण दुनिया में जब-जब अत्याचार और अन्याय बढ़ा है, तब-तब ईश्वर…

9 मार्च को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति: यूरी गागरिन, ज़ाकिर हुसैन, शशि थरूर सहित कई दिग्गजों का जन्मदिन

इतिहास के पन्नों में 9 मार्च का दिन कई महान और प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के जन्म के लिए जाना जाता है।…

24 साल की उम्र में अमर हो गए आज़ाद: जानें पूरी गाथा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, चंद्रशेखर आज़ाद का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। 27 फरवरी…

बिजोलिया आंदोलन के नायक और स्वतंत्रता संघर्ष के अग्रदूत

विजय सिंह पथिक, बिजोलिया आंदोलन, स्वतंत्रता संग्राम, राजस्थान किसान आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल बड़े राष्ट्रीय नेताओं तक…

भौतिक प्रगति बनाम नैतिक पतन: क्या हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं?

काम, क्रोध, लोभ और मोह की आग में झुलसता मानव जीवन: आधुनिकता की दौड़ में नैतिक पतन का गंभीर संकट…

एआई कंपनी के एक बयान से शेयर बाजार में भूचाल- निवेशकों का निर्णय तर्कसंगत गणनाओं के साथ मनोवैज्ञानिक संकेतों से भी प्रभावित होता है- 24 फरवरी 2026 की गिरावट का अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण

आज के दौर में पूंजी बाजार संभावतःकेवल मौलिक आर्थिक संकेतकों,जीडीपी वृद्धि, मुद्रास्फीति या ब्याज दर से संचालित नहीं होते, बल्कि…

होली महोत्सव 24 फरवरी से 3 मार्च 2026- होलाष्टक से धूलिवंदन तक-चंद्रग्रहण,आस्था, ज्योतिष और व्यवहारिकता के बीच संतुलन

होलाष्टक की मान्यताएं हमें संयम,अनुशासन और आत्मचिंतन का संदेश देती हैं, जबकि होली का रंगोत्सव हमें प्रेम, क्षमा और नई…

स्कूल सुरक्षा नीति पर बड़ा सवाल: क्या प्रशासन तैयार है?

35 बच्चों की सामूहिक घटना ने बढ़ाई चिंता: क्या सुरक्षित हैं हमारे स्कूल? गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत 142 करोड़…

कलह ही दरिद्रता की जड़: संवाद और सौहार्द से ही समृद्धि संभव

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।समाज और परिवार की प्रगति का मूल आधार शांति, विश्वास और सतत संवाद है। जब आपसी मतभेद…

बजट 2026-27 आर्थिक समस्याएं और औंधी रणनीति

लेखक – राजेंद्र शर्मा अब जबकि पूंजीवाद का सर्वोच्च दूत, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तक भारत के जीडीपी के अनुमानों की…

स्वास्थ्य के नाम पर निजीकरण का खेल

✍️ लेखक: संजय पराते सरकार आदिवासी हितों की बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन बजट और नीतियों की परतें जैसे-जैसे खुलती…