Category: कविता

हाथ कंगन को आरसी क्या

हाथ कंगन को आरसी क्या,पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या,सरकार आरक्षण दे या न दे,जातीय वर्गीकरण ख़त्म करे। सत्य साहस यदि जुटा लेता है,सारी व्यवस्था सुधर जाएगी,हम सब में सामाजिक समरसता,व…

प्रेम शक्ति व भय शक्ति

शक्ति प्रेम की और भय शक्ति मेंबिलकुल विपरीत स्थिति होतीं हैं,नैतिक बल और अनैतिक बल जैसीदोनो की अनुभूति अलग होती है । प्रेम शक्ति सहृदय इंसानों को प्रेमसहित जोड़ने की…

महाकुम्भ की भगदड़

भारत भर में प्रयाग महाकुम्भ कासंगम में पवित्र डुबकी लगाने का,त्रिबेणी में पवित्र स्नान करने का,जन सैलाब उमड़ घुमड़ जाने का। उत्साह तरंगित भारत का जन जन,पावन तीर्थ, महाकुंभ प्रयाग…

सिमटे आँगन रोज

बिखर रहे चूल्हे सभी, सिमटे आँगन रोज।नई सदी ये कर रही, जाने कैसी खोज॥ दादा-दादी सब गए, बिखर गया संसार।चाचा, ताऊ सँग करें, बच्चे अब तकरार॥ एक साथ भोजन कहाँ,…

मैंने ऐसा कुछ सीखा

धरा पर नीम के वृक्ष काटे जा रहे हैंदिलों में कड़वाहट बढती जा रही है।जीभ स्वाद कड़वा होता जा रहा है,वाणी में मधुरता कम होती जा रही है। शरीर में…

कर्मफल

यह संसार मनुष्य की कर्मभूमि व भोगभूमि दोनों है,मनुष्य के कर्मफल का भण्डार अक्षय सुख दुःख में है,उसे भोगने के लिए ही जीव चौरासी लाख योनियों में,जन्म जन्म तक विभिन्न…

लकीर खींची है?

कोई व्यक्ति अपने मस्तिष्क मेंबिल्कुल स्पष्ट विचार रखता है,उसका अचार व्यवहार हमेशा,पूर्ण संतुलित, सकारात्मक होता है। मस्तिष्क का कूड़ेदान सा उपयोगजिसमें ग़ुस्सा, घृणा व ईर्ष्या जैसेदुर्गुण अवयव जमा न किए…

शीलहरण की कहे कथाएँ

महाभारत हो रहा फिर से अविराम।आओ मेरे कृष्णा, आओ मेरे श्याम॥ शकुनि चालें चल रहा है,पाण्डुपुत्रों को छल रहा है।अधर्म की बढ़ती ज्वाला में,संसार सारा जल रहा है। ।बुझा डालो…

जीवनसाथी !

हमारे माता-पिता, पति-पत्नी,पुत्र-पुत्री, मित्र, सगे सम्बन्धी,क्या वास्तव में ये जीवनसाथी हैं,नहीं, जीवनसाथी तो शरीर है । शरीर साँसे लेना बंद कर देता है,तब कहाँ कोई भी साथ देता है,हमारा शरीर…

नई कहानी बन

हिसार (राष्ट्र की परम्परा)बस दिल से सच्चा हिंदुस्तानी बन।आये देश के काम वह जवानी बन॥ क्यों जला रहा ख़ुद से ही ख़ुद को,अगर वह आग तो तू पानी बन। क्या…

‘शब्द और स्टैंज़ा’ कविता संग्रह का कुलपति ने किया विमोचन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हीरक जयंती समारोह के अवसर पर अंग्रेजी विभाग में बुधवार को एक विशेष कार्यक्रम में ‘ शब्द और स्टैंज़ा: बाइलिंग्वल क्रिएटिव…

सैनिक

हम भारत देश के सैनिक हैं,जमीन का महत्व व फौजी कासाहस कभी कम नहीं हो सकते हैं,ये राष्ट्र की शान बनाये रखते हैं।हम भारत देश के सैनिक हैं। दिल तोड़ने…

वादा दिवस, पतिदेव की कहानी

वादा करो कि बेलन का उपयोगचपाती बनाने के लिये ही करोगी,वादा दिवस, पति देव की कहानीसुनिये कहानी उन्हीं की ज़ुबानी। प्रेम विवाह और उनकी ज़िंदगी,घर से भाग कोर्ट में कर…

निधिवन

मथुरा(राष्ट्र की परम्परा)निधिवन की लताओं में,बसते हैं श्याम मेरे lइसकी रज को माथे पर लगा,बन जाते बिगड़े काम मेरे।कदम रखते ही इस धरा पर-पैरों की थिरकन बढ़ जाती है lदेख…

पुरुष के प्रकार चार

चार प्रकार के जीव संत बतलाते हैं,इन चारों के लिए चार प्रकार के हीव्यवहार भी यथानिम्न वताये जाते हैंसत्पुरुष, शठ, खल और मूर्ख पुरुष। चारों पुरुषों को जानने व इनकीप्रकृति…