Category: लखनऊ

मुफ़्तखोरी बुरी चाहत

जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो,तो समझना चाहिये कि इसकी कोईबड़ी कीमत पाने वाले को चुकानी है,उनकी आज़ादी छीनी जा सकती है। नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने कहा था,“जब…

मात-पिता का सदैव आदर होता है

वृद्धाश्रम का रिवाज भारत में,पाश्चात्य सोच से ही प्रेरित है,नर्सिंग होम पश्चिम में होते हैं,जहाँ वृद्ध वरिष्ठ निवास करते हैं। अठारह वर्ष के बच्चे पश्चिम केस्वतः कमाने लग जाते हैं…

प्रकृति सुरक्षा

वह चराचर जगत के स्वामी हैं,सारा संसार उन्हीं पर आश्रित है,वह देवों के देव हैं, महानतम हैं,शक्तिशालियों में शक्तिशाली हैं। ऐसे जगत के स्वामी ईश्वर कोअंतःकरण में ग्रहण करना चाहिये,सबके…

इंसान की शक्ल सूरत का क्या

हर इंसान दूसरे इंसान के लिये शायदअच्छा भी और बुरा भी हो सकता है,पर यह निश्चित है कि हर इंसान मेंस्वयं कुछ अच्छा तो कुछ बुरा होता है। लफ्ज ही…

कलियाँ जो हवा पानी धूप पाती हैं

समय के संघर्ष से जीत जीवन मेंजो व्यक्ति तक़दीर बदल लेता है,कल क्या होने वाला है उससे बेफ़िक्रक़र्म करे वह इंसान सफल होता है। वक्त का क्या मालूम कल क्या…

उधार का दिया : उधार का लिया

उधार देने वाले जब उधार दिया हुआवापस माँगते हैं वो भिखारी हो जाते हैं,और वही उधार लेने वाले धन्नासेठ कीतरह तारीख़ पर तारीख़ देते जाते हैं। रहिमन वे नर मर…

भारतीय श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन का द्वितीय स्थापना दिवस ससमारोह संपन्न

पत्रकार के दु:ख-दर्द के लिए संस्था हमेशा खड़ी है और खड़ी रहेगी: शशिकांत शुक्ला सीतापुर (राष्ट्र की परम्परा)। सन 2022 मे यूपी श्रमजीवी पत्रकार एसोसिएशन की आधार शिला रखी गयी…

सुभाषित ही ख़ुशी देते हैं

सुभाषित ही ख़ुशी देते हैं हम सबको,सुभाषित ही घावों का मरहम करते हैं,भाषा ही ग़मों का कारण बनती है,कुभाषित ही वाणी की पीड़ा देते हैं। ख़ुशियाँ सब कुछ पा लेने…

संस्कार से चरित्र

उत्तम शिक्षा और अच्छे संस्कारजीवन में विकास के मूल मंत्र हैं,शिक्षा से ज्ञान विज्ञान बढ़ते हैं,संस्कारों से चरित्र श्रेष्ठ बनते हैं। जो शिक्षित है उसे अज्ञानी की तरहकिसी से झुकने…

पर इंसान, इंसान नहीं रह पाते हैं

चुनाव का दौर, जाति धर्म के नारे,जनता को भी क्या लगते हैं प्यारे,वोट माँगते हैं दोनो हाथ जोड़कर,मालामाल करेंगे चुनाव जीतकर। फ़क़ीर बनकर जो वोट माँगता है,माननीय बनता है, जीत…

संस्कारशीलता व संस्कारहीनता

हमारी मानसिकता यह दर्शाती है,हम किसी तथ्य को कैसे समझते हैं,कोई अपना परोसा भोजन भी किसीकी ज़रूरत देख समर्पित करते हैं। स्वार्थ में कोई किसी के पेट पर पैरकी ठोकर…

ज्ञानार्जन की अद्भुत बातें

जिसके शब्दों में ऐसा प्रेम भरा,उसमे ख़ुद कितना प्रेम भरा होगा,जिसकी बातें ही इतनी सुंदर हैं,उसके भावों में कैसा प्रेम भरा होगा। जो अपना नहीं हो सका कभी,वह किसी और…

उपवन जैसे झाड़ झंखाड़ न हों

हाथ की अंगूठी उँगली में हमारेरिश्तों की तरह सुंदर लगती है,उँगली से निकालते ही अपनानिशान उँगली पर छोड़ देती है। रिश्ते भी जब टूटने लगते हैं तोउँगली के निशान जैसा…

वट सावित्री

स्त्री तो माता लक्ष्मी है,पार्वती व सरस्वती है,दुर्गा काली भी वह है,सत्यवान की सावित्री है। झाँसी की रानी है,स्त्री इंदिरा गांधी है,कल्पना चावला है,नीरजा भनोट भी है। स्मृति ईरानी भी…