Wednesday, July 8, 2026
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लखनऊ में धर्मांतरण रैकेट का खुलासा: इलाज और मदद के बहाने 500 से ज्यादा हिंदू बने ईसाई, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी के निगोहां क्षेत्र के बख्तौरीखेड़ा गांव में बड़ा धर्मांतरण रैकेट पकड़ा गया है। बीमारियों का इलाज कराने और आर्थिक मदद देने के नाम पर लोगों को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड मलखान उर्फ मैथ्यूज पिछले दो साल से धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल था। उसका प्रार्थना स्थल और ‘चंगाई सभा’ मायालोक को प्रशासन ने सील कर दिया है और अब उसकी विदेशी फंडिंग की जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, गरीब और दलित वर्ग को राशन, आर्थिक सहायता और मुफ्त इलाज का लालच देकर उन्हें सभा में बुलाया जाता था। यहाँ खाने-पीने का इंतज़ाम भी होता था। धर्मांतरण के बाद महिलाओं ने सिंदूर और बिंदी लगाना बंद कर दिया।

अब तक की जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के जरिए 500 से ज्यादा लोग ईसाई बनाए जा चुके हैं। पुलिस अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।

कनाडा भेजने का झांसा देकर युवक से 24 लाख की ठगी, तीन आरोपियों पर केस दर्ज

कैथल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हरियाणा के कैथल जिले में कनाडा भेजने के नाम पर एक युवक से 24 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपियों में एक दंपत्ति और एक अन्य युवक शामिल है।

पासपोर्ट और दस्तावेज लेकर ठगे लाखों

गांव रसूलपुर निवासी राजपाल ने गुहला थाना में दी शिकायत में बताया कि वह विदेश जाना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात अमनदीप, उसकी पत्नी मानसी और आर्यन वर्मा से हुई। आरोपियों ने उसे कनाडा भेजने का झांसा दिया और पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज अपने पास ले लिए।

राजपाल के अनुसार, अक्टूबर 2024 से लेकर अलग-अलग समय पर आरोपियों ने उससे ऑनलाइन और नकद मिलाकर 24 लाख रुपये ले लिए।

न विदेश भेजा, न पैसे लौटाए

रुपये लेने के बाद आरोपी शुरू में उसे जल्द कनाडा भेजने का आश्वासन देते रहे। लेकिन बाद में उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया।

पुलिस ने दर्ज किया केस

गुहला थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है।

लगातार बढ़ रहे विदेश भेजने के नाम पर फ्रॉड

हाल के दिनों में हरियाणा सहित देशभर में विदेश भेजने का झांसा देकर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को किसी भी एजेंट को पैसे देने से पहले उसकी वैधता की पूरी तरह जांच कर लेनी चाहिए और केवल सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंटों पर ही भरोसा करना चाहिए।

UPSC IES/ISS Result 2025: भारतीय आर्थिक और सांख्यिकी सेवा परीक्षा के नतीजे घोषित, ऐसे करें डाउनलोड

(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)

UPSC IES/ISS Result 2025 Declared: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने भारतीय आर्थिक सेवा (IES) और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) परीक्षा 2025 के लिखित परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। जिन उम्मीदवारों ने यह परीक्षा दी थी, वे अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट http://upsc.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक और डाउनलोड कर सकते हैं।

कब हुई थी परीक्षा और इंटरव्यू?

यूपीएससी ने IES/ISS लिखित परीक्षा का आयोजन 20 से 22 जून 2025 तक किया था। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों के लिए सितंबर 2025 में व्यक्तित्व परीक्षण (Interview) आयोजित किए गए।

यूपीएससी अध्यक्ष ने दी बधाई

यूपीएससी अध्यक्ष अजय कुमार ने चयनित उम्मीदवारों को बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा—
“नए भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा अधिकारियों को हार्दिक शुभकामनाएँ।”

कुछ उम्मीदवारों का परिणाम अनंतिम

जारी परिणाम पीडीएफ में योग्यता क्रम के आधार पर अनुशंसित उम्मीदवारों की सूची शामिल है। हालांकि, कुछ उम्मीदवारों के परिणाम अनंतिम (Provisional) रखे गए हैं। ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्ति तभी होगी जब वे आयोग को आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर देंगे।

अनंतिम स्थिति केवल 3 महीने के लिए वैध रहेगी।

यदि तय समय सीमा में दस्तावेज जमा नहीं किए गए तो उम्मीदवार की उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी।

ऐसे करें UPSC IES/ISS Result 2025 डाउनलोड

  1. सबसे पहले UPSC की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं।
  2. What’s New सेक्शन पर क्लिक करें।
  3. “IES/ISS Result 2025” लिंक पर क्लिक करें।
  4. PDF फाइल खुलेगी, इसमें अपना रोल नंबर खोजें।
  5. रिजल्ट डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंट निकाल लें।

निष्कर्ष

यूपीएससी IES/ISS Result 2025 का इंतजार कर रहे उम्मीदवार अब आसानी से अपना परिणाम देख सकते हैं। चयनित अभ्यर्थियों के लिए यह सुनहरा अवसर है, जबकि जिनका परिणाम अनंतिम है उन्हें समय पर दस्तावेज जमा करना बेहद जरूरी है।

US में 120 ईरानी हिरासत में, जर्मनी में चीन के लिए जासूसी पर जेल, नॉर्ड स्ट्रीम केस में गिरफ्तारी

(राष्ट्र की परम्परा डेस्क)

अमेरिका में 120 ईरानी घुसपैठिए पकड़े गए

अमेरिका ने अवैध रूप से सीमा पार कर देश में दाखिल हुए 120 ईरानी नागरिकों को हिरासत में लिया है। ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, अमेरिका-ईरान समझौते के तहत करीब 400 ईरानी स्वदेश लौटेंगे। पहला जत्था अगले 1-2 दिनों में तेहरान पहुंचेगा।

जर्मनी: चीन के लिए जासूसी पर पूर्व सहायक को जेल

जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी AFD (Alternative for Germany) के शीर्ष नेता के पूर्व सहायक को चीन की खुफिया एजेंसियों को सूचना देने के आरोप में 5 साल जेल की सजा सुनाई गई। अभियुक्त की पहचान जियान जी के रूप में हुई है, जिसने पूर्व सांसद मैक्सिमिलियन क्राह के साथ रहते हुए यूरोपीय संसद की जानकारी चीन को सौंपी थी।

नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइन विस्फोट: एक और यूक्रेनी गिरफ्तार

पोलैंड पुलिस ने नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइन विस्फोट (2022) मामले में एक और यूक्रेनी नागरिक को गिरफ्तार किया। इससे पहले अगस्त में इटली में एक संदिग्ध पकड़ा गया था। विस्फोट से रूस और जर्मनी के बीच पाइपलाइन को भारी नुकसान पहुंचा था।

गैबोन चुनाव: राष्ट्रपति न्गुएमा की पार्टी को बढ़त

मध्य अफ्रीकी देश गैबोन में संसदीय चुनावों में राष्ट्रपति ब्राइस क्लोटेयर ओलिगी न्गुएमा की पार्टी UDB (Democratic Union of Builders) ने सबसे ज्यादा 55 सीटें जीतीं। पूर्व राष्ट्रपति अली बोंगो की पार्टी PDG को सिर्फ 3 सीटें मिलीं। शेष 77 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को दूसरा चरण होगा।

पाकिस्तान: खैबर पख्तूनख्वा में धमाके, 9 की मौत

पाकिस्तान के दक्षिण वज़ीरिस्तान जिले में दो अलग-अलग धमाकों में 9 लोगों की मौत हो गई। पहले हादसे में सड़क पर बम विस्फोट से 5 ग्रामीण मारे गए। दूसरी घटना में 4 आतंकी IED लगाते समय धमाके में मारे गए, जिनमें कमांडर यार मुहम्मद मुस्लिम भी शामिल था।

फ्रांस: दक्षिण अफ्रीकी राजदूत मृत पाए गए

फ्रांस के पेरिस में दक्षिण अफ्रीका के राजदूत इमैनुएल नकोसिनाथी मथेथ्वा (नाथी मथेथ्वा) का शव एक लक्ज़री होटल से बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है। राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया।

शिकागो में सैनिक तैनात करने की तैयारी

शिकागो में फेडरल एजेंटों की गिरफ्तारी और छापों के कारण तनाव बढ़ गया है। इलिनोइस के गवर्नर जेबी प्रिट्ज़कर ने कहा कि स्थिति संभालने के लिए 100 सैनिक तैनात किए जा सकते हैं। लातिनो समुदाय ने इस कार्रवाई को नस्लीय भेदभाव करार दिया।

फाइजर घटाएगी दवाओं की कीमत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 100% दवा आयात टैरिफ लागू होने से पहले फाइजर ने घोषणा की कि वह सभी मेडिकेड प्रोग्राम की दवाओं की कीमतें घटाएगी। व्हाइट हाउस जल्द ही “TrumpRx” नाम की डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर वेबसाइट लॉन्च करेगा, जहां दवाइयाँ सीधे उपभोक्ताओं को मिलेंगी।

श्रेया घोषाल ने जुबीन गर्ग को दिया म्यूजिकल ट्रिब्यूट, वुमन वर्ल्ड कप ओपनिंग सेरेमनी में भावुक हुए फैंस

गुवाहाटी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। महिला वनडे विश्व कप 2025 (Women’s ODI World Cup 2025) के उद्घाटन समारोह में बॉलीवुड सिंगर श्रेया घोषाल (Shreya Ghoshal) ने दिवंगत गायक जुबीन गर्ग (Zubeen Garg) को म्यूजिकल ट्रिब्यूट दिया। भारत-श्रीलंका मैच के मध्यांतर में आयोजित इस प्रस्तुति के दौरान करीब 25,000 दर्शकों ने स्टेडियम में मौजूद रहकर इस यादगार पल को जिया।

13 मिनट की संगीत यात्रा, स्टेडियम गूंजा ‘जय जुबीन दा’

श्रेया घोषाल ने लगभग 13 मिनट तक जुबीन के हिट गानों को महिला विश्व कप थीम सॉन्ग ‘ब्रिंग इट होम’ के साथ प्रस्तुत किया। उन्होंने अंत में जुबीन का मशहूर गीत ‘मायाबिनी रातिर बुकुट’ गाया। फैंस के लिए यह बेहद भावुक पल था क्योंकि जुबीन की इच्छा थी कि उनके निधन के बाद यही गाना गूंजे। स्टेडियम ‘जय जुबीन दा’ के नारों से गूंज उठा और हजारों प्रशंसकों ने बैनर लहराकर अपने प्रिय कलाकार को श्रद्धांजलि दी।

जुबीन गर्ग की याद में खास आयोजन

असम क्रिकेट संघ (ACA) ने इस ओपनिंग सेरेमनी को जुबीन गर्ग की स्मृति को समर्पित किया। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने कहा—

“यह आयोजन दो स्थितियों के बीच है—जुबीन गर्ग के लिए शोक और दुर्गा पूजा का उत्सव। हम चाहते थे कि उद्घाटन समारोह में असम के इस सपूत को श्रद्धांजलि दी जाए।”

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इस मौके पर जुबीन गर्ग फैन क्लब के लिए 5,000 टिकट आरक्षित किए गए और 10,000 मुफ्त पास बांटे गए ताकि अधिक से अधिक फैंस इस भावुक पल का हिस्सा बन सकें।

फैंस की भावनाएँ

स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की आँखें नम हो गईं। गुवाहाटी की 23 वर्षीय छात्रा ने कहा—

“जुबीन दा हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। वह असम के नंबर 1 आइकन हैं। हमने भूपेन हजारिका को नहीं देखा, लेकिन जुबीन हममें से एक थे और हमेशा हमारे साथ रहेंगे।”

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महिला वनडे विश्व कप 2025: भारत की विजयी शुरुआत, श्रीलंका को 59 रनों से हराया; दीप्ति शर्मा चमकीं

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गुवाहाटी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने महिला वनडे विश्व कप 2025 (Women’s ODI World Cup 2025) की शानदार शुरुआत करते हुए श्रीलंका को डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम से 59 रनों से हराया। इस मैच में दीप्ति शर्मा (Deepti Sharma) ने बल्ले और गेंद दोनों से ऑलराउंड प्रदर्शन कर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई।

भारत की पारी: दीप्ति-अमनजोत की शतकीय साझेदारी

भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 47 ओवर में 8 विकेट पर 269 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और स्मृति मंधाना (8 रन) जल्दी आउट हो गईं। इसके बाद इनोका रानावीरा ने एक ही ओवर में हरलीन देओल (48), जेमिमा रोड्रिग्स (0) और कप्तान हरमनप्रीत कौर (21) को आउट कर भारतीय पारी को संकट में डाल दिया।

लेकिन दीप्ति शर्मा (53 रन) और अमनजोत कौर (57 रन) ने सातवें विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर पारी को संभाला। स्नेह राणा ने 15 गेंदों पर नाबाद 28 रन बनाकर टीम का स्कोर 269 तक पहुंचाया। श्रीलंका के लिए रानावीरा ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए।

श्रीलंका की पारी: लगातार गिरे विकेट

बारिश से प्रभावित इस मुकाबले में श्रीलंका को DLS के तहत 271 रनों का लक्ष्य मिला। हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने शानदार गेंदबाजी की और श्रीलंका की टीम 45.4 ओवर में 211 रन पर ऑलआउट हो गई।
कप्तान चामरी अट्टापट्टू (43 रन), निलाक्षी डि सिल्वा (35 रन) और हर्षिता समरविक्रमा (29 रन) ही कुछ देर टिक सकीं।

भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने 3 विकेट झटके, जबकि स्नेह राणा और श्री चरनी ने 2-2 विकेट हासिल किए।

दीप्ति शर्मा का ऑलराउंड शो

दीप्ति शर्मा ने न सिर्फ 53 रनों की अहम पारी खेली बल्कि गेंदबाजी में भी श्रीलंका की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। उनका यह प्रदर्शन भारत की जीत का सबसे बड़ा कारण रहा।

श्रेया घोषाल ने जुबीन गर्ग को दी श्रद्धांजलि

मैच से पहले 14वें महिला विश्व कप का उद्घाटन समारोह एसीए बरसापारा स्टेडियम, गुवाहाटी में हुआ। बॉलीवुड गायिका श्रेया घोषाल ने दिवंगत गायक जुबीन गर्ग को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके लोकप्रिय गीत गाए। लगभग 25,000 दर्शकों की भीड़ ने ‘जय जुबीन दा’ के नारों से माहौल गूंजा दिया।

मुख्य बिंदु:

भारत ने श्रीलंका को DLS नियम से 59 रनों से हराया।

दीप्ति शर्मा का ऑलराउंड प्रदर्शन (53 रन और 3 विकेट)।

अमनजोत कौर ने 57 रनों की अहम पारी खेली।

श्रीलंका की ओर से इनोका रानावीरा ने 4 विकेट लिए।

उद्घाटन समारोह में श्रेया घोषाल ने जुबीन गर्ग को दी श्रद्धांजलि।

आज का मौसम अपडेट: कई राज्यों में बारिश के आसार, उमस से मिलेगी राहत

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मौसम विभाग (IMD Weather Update) के अनुसार, आज 30 सितंबर 2025 को देश के कई हिस्सों में मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। उत्तर भारत के राज्यों में जहां आंशिक बादल और हल्की बारिश की संभावना है, वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के आसार जताए गए हैं।

उत्तर भारत

दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में आज सुबह से ही हल्की ठंडी हवाएँ चल रही हैं। दोपहर बाद बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इससे अधिकतम तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है।

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पूर्वी भारत

बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में आंशिक बारिश की संभावना है। कोलकाता में दिनभर उमस बनी रहेगी लेकिन शाम को बारिश से राहत मिलेगी।

दक्षिण भारत

केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

पश्चिम भारत

राजस्थान और गुजरात में मौसम शुष्क रहेगा, हालांकि तापमान सामान्य से थोड़ा कम रह सकता है।

आज का औसत तापमान (IMD Forecast):

दिल्ली: अधिकतम 33°C, न्यूनतम 25°C

मुंबई: अधिकतम 30°C, न्यूनतम 26°C

कोलकाता: अधिकतम 32°C, न्यूनतम 27°C

चेन्नई: अधिकतम 31°C, न्यूनतम 26°C

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले 24 घंटों में मानसून की विदाई प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।

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बचपन के त्योहारों की छुट्टियाँ: रिश्तों का संगम और मामा के घर की रौनक

(वशिष्ठ सिंह)

🎉 त्योहार आते ही सिर्फ छुट्टियाँ और मेले का आनंद नहीं मिलता था, बल्कि पूरा परिवार एकजुट होकर रिश्तों की मिठास का उत्सव मनाता था। उस दौर में त्योहार परिवारिक मिलन का सबसे बड़ा अवसर होते थे।
👴 बाबा-नाना का आशीर्वाद और बच्चों की चहचहाहट
त्योहार पर जब सभी घरवाले जुटते, तो सबसे पहले बच्चे बाबा और नाना के पास भागते। उनके स्नेहिल हाथ सिर पर फिरते और आशीर्वाद स्वरूप दस पैसा, चवन्नी, अठन्नी या रुपया बच्चों की मुट्ठी में आता। यह सिक्के बच्चों के लिए खजाने जैसे होते थे।
इन पैसों से मेले में खरीदे गए खिलौने, बर्फ़ के गोले या रंगीन गुब्बारे ही मानो सबसे बड़ी संपत्ति लगते थे।
👨‍👩‍👧‍👦 चाचा-चाची और बुआ-मौसी की महफ़िलें
गाँव का आँगन त्योहारों पर रिश्तों की महफ़िल से गुलजार हो जाता।
चाचा-चाची को प्रणाम करना और उनके लाड़-प्यार में डूब जाना,
बुआ का मायके आना और पूरे घर को रौनक से भर देना,
मौसी का मामा के घर आना और बच्चों को झूले या मेले में साथ ले जाना,
यह सब त्योहार की असली पहचान थे। बुआ और भाभियों का आपस में मिलना, हंसी-ठिठोली और ताना-बाना मानो घर की दीवारों तक में गूंज जाता।
👰 नई दुल्हन को देखने की परंपरा
त्योहार के समय अगर परिवार में नई शादी हुई हो तो रिश्तेदार और पड़ोसी खासतौर पर “नई दुल्हन” को देखने जाते। दुल्हन का घूँघट उठाने की झलक पाना बच्चों और औरतों के लिए उतना ही रोमांचक होता जितना मेले का आनंद।
नई दुल्हन को देख कर बुआ या मौसी अक्सर हंसी-मज़ाक करतीं— “अरे, हमारे घर आई तो मानो चाँद उतर आया है!”
🤹 बच्चों के झगड़े और मेल-मिलाप
त्योहार में जितना प्यार और मिठास होता, उतनी ही बच्चों की नोंक-झोंक भी।
कोई भाई अपनी बहन की टॉफी छीन लेता,
कोई चचेरा भाई गुब्बारा फोड़ देता,
तो कभी दो ममेरे-फुफेरे भाई अठन्नी बाँटने को लेकर झगड़ पड़ते।
लेकिन यही झगड़े थोड़ी देर में हंसी-मज़ाक और खेल में बदल जाते। दादी या नानी डाँटकर बच्चों को एक ही थाली में बिठाकर मिठाई खिला देतीं, और सब फिर दोस्त बन जाते।
🚞 वापसी का समय और बिछड़ने का दर्द
त्योहार की छुट्टियाँ जब खत्म होने लगतीं, तो बच्चों का मन उदास हो जाता।
मौसी और बुआ अपने-अपने घर लौटने लगतीं।
मामा, दादा और नाना बच्चों की जेब में आशीर्वाद के रूप में सिक्के रख देते।
छोटे बच्चे रोते-रोते स्टेशन या बस अड्डे तक साथ जाते।
उस समय बिछड़ने का दर्द आँखों में आँसू और मन में अगले त्योहार तक इंतजार की टीस छोड़ जाता।

त्योहारों की इन छुट्टियों में सिर्फ मेले और मिठाइयाँ ही नहीं थीं, बल्कि रिश्तों का अपनापन, बड़ों का आशीर्वाद, बच्चों की मासूम नोंक-झोंक और परिवारिक मिलन की रौनक शामिल थी। यही वजह है कि 80 और 90 के दशक के ये त्योहार आज भी दिल के कोनों में बसे हुए हैं।

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1980-90 के दशक का दशमी का मेला: संस्कृति, श्रद्धा और लोकजीवन की जीवंत झलक

भारत की सांस्कृतिक परंपरा में दशहरा और दुर्गा पूजन का पर्व सदियों से विशेष स्थान रखता है। 1980 से 1990 के दशक का दौर ग्रामीण और कस्बाई जीवन में मेलों और उत्सवों का स्वर्णकाल कहा जा सकता है। उस समय न तो मोबाइल फोन थे, न इंटरनेट और न ही मनोरंजन के इतने साधन। गाँव और कस्बों में सालभर लोग इसी इंतज़ार में रहते थे कि दशमी का मेला कब आएगा। यह मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि लोकजीवन, व्यापार, मनोरंजन और सामाजिक मेलजोल का अनोखा अवसर होता था।

  1. पर्व की पृष्ठभूमि और धार्मिक आस्था
    1980-90 के दशकों में दशहरा और दुर्गा पूजन का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा था। गाँव-गाँव और कस्बों में दुर्गा पूजा पंडाल सजते थे। मिट्टी की प्रतिमाओं में माँ दुर्गा और उनके परिवार को बेहद भावनात्मक रूप से पूजा जाता। श्रद्धालु उपवास रखते, भजन-कीर्तन होते और दुर्गा सप्तशती का पाठ गाँव के पंडितजी या भजन मंडली द्वारा सामूहिक रूप से किया जाता।

दशमी के दिन रावण दहन और मेला दोनों का उत्साह अपने चरम पर होता। उस समय लोग इसे केवल मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि अच्छाई की बुराई पर जीत के प्रतीक के रूप में देखते थे।

  1. मेले की तैयारी और उत्सुकता
    मेले की तैयारियाँ लगभग एक माह पहले से शुरू हो जाती थीं। गाँव के लड़के नये कपड़ों की आस लगाते, महिलाएँ विशेष पकवान बनाने की योजना बनातीं और दुकानदार अपनी झोपड़ीनुमा दुकानों के लिए सजावटी सामग्री जुटाते।

उस समय बिजली की उपलब्धता सीमित थी , इसलिए मेले में अधिकतर जगह लालटेन और जनरेटर की रोशनी होती थी। पंडालों को बाँस, बल्लियों और रंगीन कागज से सजाया जाता। गाँव-कस्बों की गलियाँ पुताई कर साफ की जातीं और जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए जाते।

  1. मेले का दृश्य
    जैसे ही दशमी का दिन आता, सुबह से ही बच्चों और युवाओं में उत्साह छलक उठता। सिर पर रूमाल बाँधे लड़के और चुन्नी ओढ़े लड़कियाँ, नए कपड़ों में सजी महिलाएँ, धोती-कुर्ता पहने बुजुर्ग—सभी मेलास्थल की ओर बढ़ते।

मेले में पहुँचते ही ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि और रामायण मंडली के गीत गूँज उठते। जगह-जगह हलवे-जलेबी, चाट, समोसे और गन्ने के रस की दुकानें सजी होतीं। बच्चों के लिए लकड़ी के खिलौने, बाँसुरी, गुब्बारे, प्लास्टिक की बंदूकें और रंगीन चकरी (पंखे) उपलब्ध रहते। उस दौर में यही बच्चों के लिए बड़े खजाने होते।

  1. रावण दहन और नाटक मंडली
    दशमी के मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रावण दहन होता। गाँव या कस्बे के युवकों की टोली महीनों पहले से बाँस, कागज और पटाखों से विशालकाय रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण का पुतला बनाती। जब रात को इनका दहन होता, तो हजारों लोग तालियाँ बजाकर जय-जयकार करते।

इसके अलावा मेले में रामलीला मंडली भी खूब प्रसिद्ध होती। कलाकार साधारण कपड़ों और मेकअप से ही श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और रावण का अभिनय करते। लोग मंत्रमुग्ध होकर रातभर नाटक देखते। उस दौर में टीवी सबके घरों में नहीं था, इसलिए यह लाइव नाटक लोगों के लिए जादुई अनुभव जैसा होता।

  1. लोककलाओं और झूलों का आकर्षण
    मेले का सबसे बड़ा आनंद झूले में होता। लकड़ी और लोहे के झूले, मौत का कुआँ, सर्कस, कठपुतली का खेल—ये सभी दर्शकों को लुभाते। बच्चे झूले के टिकट के लिए मिन्नतें करते और माता-पिता उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश करते।
    बाँसुरी की मधुर धुन, बायस्कोप में चलने वाले पाँच मिनट के फिल्मी दृश्य और लोक कलाकारों के नृत्य-गान से पूरा मेला जीवंत हो उठता।
  2. सामाजिक मेलजोल और रिश्तों का ताना-बाना
    दशमी का मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि रिश्तों को जोड़ने और निभाने का माध्यम भी था। गाँव के बिछुड़े लोग मेलों में मिलते, रिश्तेदार एक-दूसरे के घर जाते और आपसी संवाद से संबंध मजबूत होते।
    महिलाएँ इस अवसर पर अपनी सहेलियों से मिलतीं और नए कपड़े-गहने दिखाकर खुशी बाँटतीं। युवाओं के लिए यह अपने दोस्तों के साथ हँसी-ठिठोली और भविष्य की योजनाएँ बनाने का समय होता।
  3. मेले की आर्थिक गतिविधियाँ
    ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दशमी का मेला महत्वपूर्ण योगदान देता था। छोटे दुकानदार, खिलौना बनाने वाले, मिठाई बेचने वाले और कलाकार इस मौके पर अच्छा लाभ कमाते। यही कारण था कि कई परिवार सालभर इस मेले की कमाई पर निर्भर रहते थे।
  4. 1990 के बाद बदलती तस्वीर
    90 के दशक के बाद जैसे-जैसे टीवी, वीडियो गेम और शहरी संस्कृति का प्रसार हुआ, मेले की पारंपरिक चमक थोड़ी कम होने लगी। बड़े शहरों के आकर्षण ने गाँवों और कस्बों के मेलों की गरिमा को प्रभावित किया। फिर भी, आज भी इन मेलों में उस दौर की झलक मिल जाती है।
  5. अनुभव और स्मृतियाँ
    आज भी जो लोग 80-90 के दशक में दशमी के मेले का हिस्सा बने थे, उनकी यादों में वह दौर अमिट छाप छोड़ गया है। उस समय का निष्कपट उत्साह, सादगी, मेलजोल और लोकजीवन की झलक आज की कृत्रिम चकाचौंध में कहीं खो सी गई है।
    1980 से 1990 के दशक का दशमी का मेला भारतीय समाज की जीवंत संस्कृति का दर्पण था। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक जीवन का उत्सव था, जिसमें श्रद्धा, मनोरंजन, व्यापार और सामाजिक जुड़ाव सब कुछ एक साथ दिखाई देता था। आधुनिक समय में भले ही इन मेलों का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन उस दौर की स्मृतियाँ आज भी पीढ़ियों को अपनी ओर खींचती हैं।

✍️ संघ का शताब्दी वर्ष: डॉ. हेडगेवार के विचारों से शुरू हुई एक सदी की संगठन यात्रा

🚩 100 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार द्वारा आरंभ किया गया यह संगठन आज विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में गिना जाता है। किसी भी संस्था के लिए सौ वर्ष की यात्रा केवल समय का अंकन नहीं, बल्कि विचारों, संघर्ष और समाज परिवर्तन की सदी का प्रतीक होती है।

🧭 संघ स्थापना की पृष्ठभूमि

डॉ. हेडगेवार स्वयं एक क्रांतिकारी थे, जिन्होंने अपने समय में चल रहे सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके अनुसार भारत भले ही अंग्रेज़ों से स्वतंत्र हो जाए, लेकिन यदि समाज की आंतरिक कमजोरियाँ बनी रहीं तो फिर से परतंत्रता से बचना संभव नहीं होगा।

वे अक्सर कहते थे—”स्वतंत्रता कब मिलेगी, यह प्रश्न नहीं है; बल्कि स्वतंत्रता गई क्यों, इसका उत्तर ढूँढना होगा।” उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि असंगठित समाज, आपसी विखंडन और राष्ट्रभावना की कमी के कारण ही भारत गुलाम बना। इसी सोच से “हिन्दू संगठन” का विचार जन्मा।

🌿 शाखा प्रणाली और संगठन की शक्ति

डॉ. हेडगेवार ने शाखा की अभिनव कार्यपद्धति विकसित की। उनका मानना था कि ऐसा संगठन खड़ा होना चाहिए, जो किसी भी राष्ट्रीय आपदा या सामाजिक संकट का सामना कर सके। उस दौर में आलोचक कहते थे—”हिन्दू समाज को संगठित करना मेढ़कों को तौलने जैसा है।” लेकिन डॉ. हेडगेवार ने अपने जीवनकाल में ही यह साबित कर दिया कि हिन्दू समाज एक दिशा में चल सकता है और राष्ट्रहित में एकजुट हो सकता है।

संघ का मूल ध्येय वाक्य है— “परम् वैभवन् नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्” अर्थात राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जाना।

🌍 श्री गुरुजी का नेतृत्व और स्वतंत्रता काल

3 जुलाई 1940 को डॉ. हेडगेवार के निधन के बाद माधव राव सदाशिवराव गोलवलकर (श्री गुरुजी) ने सरसंघचालक का दायित्व संभाला। उस समय स्वतंत्रता संग्राम अपने चरम पर था और अंग्रेज़ों की “फूट डालो और राज करो” नीति से देश विभाजन की ओर बढ़ रहा था। ऐसे कठिन दौर में संघ ने संगठन विस्तार और राष्ट्रीय एकता पर विशेष बल दिया।

🕉️ 100 वर्षों की उपलब्धियाँ

आज संघ न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में भारतीय संस्कृति, मूल्यों और राष्ट्रभावना का संदेश पहुँचा रहा है। शिक्षा, सेवा, संस्कार, समाज सुधार और राष्ट्ररक्षा जैसे विविध क्षेत्रों में संघ की भूमिका उल्लेखनीय रही है।

अक्टूबर 2025 पंचांग – 01 और 02 अक्टूबर | Hindu Panchang October 2025

01 अक्टूबर 2025 • Wednesday – शुक्ल नवमी
तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष नवमी (07:01 PM तक)
विक्रम संवत: 2082, कालयुक्त
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा 08:06 AM तक, तत्पश्चात उत्तराषाढ़ा
योग: अतिगण्ड 12:33 AM तक, तत्पश्चात सुकर्मा
करण: बालव 06:39 AM तक, बाद कौलव 07:01 PM तक, बाद तैतिल
राहु काल: 12:16 PM – 01:44 PM
चन्द्रमा का स्थान: धनु से 02:27 PM तक, तत्पश्चात मकर राशि
शुभ मुहूर्त: 12:30 PM – 03:00 PM
व्रत/पूजा: नवमी व्रत, गणेश वंदना

02 अक्टूबर 2025 • Thursday – शुक्ल दशमी
तिथि: आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी (07:11 PM तक)
विक्रम संवत: 2082, कालयुक्त
शक संवत: 1947 (विश्वावसु संवत्सर)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा 09:13 AM तक, तत्पश्चात श्रवण
योग: सुकर्मा 11:28 PM तक, तत्पश्चात धृति
करण: तैतिल 07:12 AM तक, बाद गर 07:11 PM तक, बाद वणिज
राहु काल: 01:44 PM – 03:12 PM
चन्द्रमा का स्थान: मकर राशि
शुभ मुहूर्त: 07:30 AM – 10:00 AM
व्रत/पूजा: दशमी व्रत, दुर्गा पूजा

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01 अक्टूबर 2025 – सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल और पूजन सुझाव

मेष (Aries)
आज का दिन उत्साह और ऊर्जा से भरपूर रहेगा। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, पुराने प्रोजेक्ट में सफलता मिलेगी। आर्थिक मामलों में लाभ दिखाई दे रहा है। प्रेम जीवन में रोमांस बढ़ेगा, परिवार के साथ समय बिताना सुखद रहेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
शुभ रंग: लाल | शुभ अंक: 9 | शुभ दिशा: पूर्व
पूजन/देवता: भगवान हनुमान का हनुमान चालीसा पाठ लाभकारी रहेगा।
वृषभ (Taurus)
नए व्यापारिक सौदे और आर्थिक लाभ के योग हैं। पारिवारिक जीवन में सुख और सहयोग मिलेगा। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। करियर में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा, वरिष्ठों से समर्थन मिलेगा। स्वास्थ्य स्थिर रहेगा।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 6 | शुभ दिशा: उत्तर
पूजन/देवता: भगवान विष्णु या देवी लक्ष्मी का पूजन करें।
मिथुन (Gemini)
आज संयम और सतर्कता जरूरी है। करियर में किसी बड़े निर्णय को टालना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में अनावश्यक खर्च से बचें। परिवार और मित्रों के साथ विवाद संभव है। स्वास्थ्य में सिरदर्द और थकान हो सकती है।
शुभ रंग: हल्का पीला | शुभ अंक: 5 | शुभ दिशा: पश्चिम
पूजन/देवता: बुद्धदेव का ध्यान या पूजा लाभकारी रहेगा।
कर्क (Cancer)
परिवार में खुशियों और सहयोग के योग हैं। नए अवसर मिल सकते हैं, खासकर रियल एस्टेट या संपत्ति से जुड़े मामलों में। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम जीवन मधुर रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ रंग: सफेद | शुभ अंक: 2 | शुभ दिशा: उत्तर-पूर्व
पूजन/देवता: देवी पार्वती/शक्ति माता का पूजन लाभकारी।
सिंह (Leo)
करियर में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। प्रमोशन या नए प्रोजेक्ट के मौके मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
शुभ रंग: सुनहरा | शुभ अंक: 1 | शुभ दिशा: दक्षिण
पूजन/देवता: सूर्य देवता का पूजन और अरग्य देना शुभ रहेगा।
कन्या (Virgo)
आज नई जिम्मेदारियां और अवसर मिल सकते हैं। करियर में कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। आर्थिक लाभ के योग हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। प्रेम जीवन में समझदारी और धैर्य जरूरी है।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 8 | शुभ दिशा: पश्चिम
पूजन/देवता: देवी सरस्वती का पूजन लाभकारी रहेगा।
तुला (Libra)
सकारात्मक बदलाव और नए अवसर का दिन है। करियर में पुरानी समस्याओं का समाधान मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार और निवेश में लाभ संभव है। प्रेम संबंध मजबूत होंगे। स्वास्थ्य में हल्की थकान रहेगी।
शुभ रंग: गुलाबी | शुभ अंक: 4 | शुभ दिशा: दक्षिण-पूर्व
पूजन/देवता: भगवान वेंकटेश्वर या लक्ष्मी नारायण पूजन करें।
वृश्चिक (Scorpio)
वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी। आर्थिक मामलों में सुधार संभव है। करियर में स्थिरता रहेगी, लेकिन विवादों से बचें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ रंग: काला | शुभ अंक: 3 | शुभ दिशा: उत्तर-पश्चिम
पूजन/देवता: भगवान भैरव या कालभैरव का पूजन लाभकारी।
धनु (Sagittarius)
आज उत्साह और सफलता के दिन हैं। करियर और व्यवसाय में लाभ मिलेगा। आर्थिक मामलों में लाभ होगा। प्रेम जीवन में रोमांस और सामंजस्य बना रहेगा।
शुभ रंग: बैंगनी | शुभ अंक: 7 | शुभ दिशा: पूर्व
पूजन/देवता: भगवान द्रव्यनाथ या देवी महालक्ष्मी का पूजन करें।
मकर (Capricorn)
संयम और सतर्कता का दिन है। करियर में किसी नए निर्णय को टालें। आर्थिक मामलों में अनावश्यक खर्च से बचें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
शुभ रंग: भूरा | शुभ अंक: 9 | शुभ दिशा: दक्षिण
पूजन/देवता: भगवान शिव का पूजन और रुद्राभिषेक लाभकारी।
कुंभ (Aquarius)
नए अवसर और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने के योग हैं। करियर में नए प्रोजेक्ट और प्रमोशन संभव हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। प्रेम जीवन में सामंजस्य और समझ बढ़ेगी।
शुभ रंग: नीला | शुभ अंक: 2 | शुभ दिशा: उत्तर-पूर्व
पूजन/देवता: भगवान गणेश का पूजन और विशेष रूप से मंगलमय कार्यों के लिए ध्यान।

मीन (Pisces)
वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार और लाभ के योग हैं। करियर में स्थिरता रहेगी। प्रेम जीवन में मधुरता और समझ बढ़ेगी।
शुभ रंग: हरा | शुभ अंक: 6 | शुभ दिशा: पश्चिम
पूजन/देवता: भगवान वराह या देवी लक्ष्मी का पूजन लाभकारी।

यमुना एक्सप्रेसवे पर विकास की रफ्तार रहेगी बरकरार, सीईओ का कार्यकाल बढ़ा

यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल बढ़ा, विकास योजनाओं में मिलेगी नई रफ़्तार

नोएडा/ग्रेटर नोएडा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राकेश कुमार सिंह का कार्यकाल सरकार ने एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले से न सिर्फ़ प्राधिकरण की चल रही महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति मिलेगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी और मज़बूत होगा।

राकेश कुमार सिंह ने अपने कार्यकाल में यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को औद्योगिक और आवासीय विकास का हब बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, फिल्म सिटी प्रोजेक्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी योजनाओं को लेकर उन्होंने बेहतर कार्ययोजना और तेज़ गति से काम को आगे बढ़ाया है।

सरकार का मानना है कि उनके अनुभव और नेतृत्व में प्राधिकरण की परियोजनाओं को नई दिशा और मजबूती मिलेगी। विकास के इस मॉडल से न केवल स्थानीय लोगों को रोज़गार के अवसर मिलेंगे बल्कि यूपी को निवेश की दृष्टि से और अधिक आकर्षक गंतव्य बनाया जा सकेगा।

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सरयू की धारा में समाए तीन युवक, पूरे गाँव में पसरा मातम

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। बरहज थाना क्षेत्र के लहछुवा गाँव में सोमवार को दुर्गा प्रतिमा स्थापना की तैयारी कर रहे युवाओं पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। सरयू नदी के नर्वदेश्वर घाट से कलश भरने गए छह युवकों में से तीन की तेज धारा में डूबने से मौत हो गई। इस हृदय विदारक हादसे ने पूरे गाँव को शोक में डुबो दिया। घटना के बाद से गाँव के किसी भी घर में चूल्हा तक नहीं जला।

घटना सोमवार सुबह लगभग 8:40 बजे की है। गाँव के छह युवक ई-रिक्शा से गौरा स्थित नर्वदेश्वर घाट पहुँचे थे। कलश भरने से पहले उन्होंने जयकारा लगाया और स्नान करने लगे। तभी विवेक (16 वर्ष), पुत्र बेचन, का पैर फिसल गया और वह तेज धारा में बहने लगा। उसे बचाने के लिए रंजीत (17 वर्ष), पुत्र अच्छे लाल, और चंद्रशेखर (17 वर्ष), पुत्र कोमल, भी नदी में उतर गए, लेकिन तीनों गहरे पानी में समा गए।

साथ गए अन्य युवकों ने शोर मचाकर लोगों को बुलाया। स्थानीय लोगों ने गांगुली नामक युवक को तो बचा लिया, परंतु तीनों किशोर नदी की धारा में डूब गए।

सूचना पाकर थानाध्यक्ष राहुल सिंह टीम के साथ मौके पर पहुँचे और एसडीआरएफ को बुलाया। लगभग 28 घंटे तक चलाए गए अभियान में मंगलवार को सुबह दस बजे रंजीत का शव बरामद हुआ, जबकि दोपहर करीब दो बजे विवेक और चंद्रशेखर के शव भी नदी से निकाल लिए गए। पुलिस ने पंचनामा कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक दीपक मिश्रा शाका, उपजिलाधिकारी विपिन त्रिवेदी, नायब तहसीलदार रविंद्र मौर्य, क्षेत्राधिकारी, सपा नेता गेनालाल यादव, मुरली जायसवाल, राज्यसभा की पूर्व सदस्य कनकलता सिंह और अन्य जनप्रतिनिधि भी घाट पर पहुँचे और पीड़ित परिवारों को ढाढ़स बंधाया।

गाँव में कोहराम का आलम यह रहा कि हर किसी की आँखें नम थीं। तीनों ही मृतक अपने परिवार के सबसे छोटे बेटे थे। शव मिलने के बाद परिजन दहाड़ें मारकर रो पड़े और मौके पर मौजूद हजारों लोग भी गमगीन हो उठे।

गाँव के लोगों का कहना है कि माँ दुर्गा की सेवा और उत्साह में निकले ये किशोर कभी लौटकर नहीं आएंगे, यह सोचकर विश्वास करना भी कठिन हो रहा है।

कानूनगो रामाश्रय का भावपूर्ण विदाई समारोह

संविधान पुष्प स्मृति चिन्ह से किया गया सम्मानित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सदर तहसील सभागार में मंगलवार को आयोजित एक भव्य और भावपूर्ण समारोह में कानूनगो रामाश्रय को सेवानिवृत्ति के अवसर पर गर्मजोशी के साथ विदा किया गया। इस अवसर पर परंपरा से अलग हटकर उन्हें ‘संविधान पुष्प’ स्मृति चिन्ह भेंट किया गया, जिसने समारोह को और भी विशेष बना दिया। कार्यक्रम का आयोजन एसडीएम सदर दीपक गुप्ता के नेतृत्व में हुआ। इस मौके पर डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार देवेंद्र यादव, राकेश शुक्ला, आकांक्षा पासवान और अरविंद नाथ पांडेय, लेखपाल संघ जिलाध्यक्ष जगदीश प्रसाद, तहसील अध्यक्ष अनिल राय समेत कानूनगो और लेखपाल मौजूद रहे। रामाश्रय ने वर्ष 1991 में गोला तहसील से लेखपाल पद पर सेवा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने सदर तहसील और चौरी-चौरा क्षेत्र में लेखपाल पद पर अपनी सेवाएं दीं। पदोन्नति प्राप्त कर कानूनगो बने और खोराबार, नौशाड़ व बेलवर क्षेत्रों में ईमानदारी व निष्ठा से कार्य किया। 34 वर्षों के लंबे कार्यकाल में उन्होंने निष्पक्षता और कर्तव्यपरायणता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
समारोह में संबोधित करते हुए एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने कहा, “रामाश्रय जी ने अपने पूरे कार्यकाल में इतनी ईमानदारी और लगन से काम किया कि कभी उन्हें अलग से बुलाने या समझाने की नौबत नहीं आई। 34 वर्षों तक उन्होंने बिना किसी शिकायत के जनता की सेवा की। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। मैं उनके सुखमय और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं। डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह ने कहा, “रामाश्रय जी का कार्यकाल पूरी तरह निष्ठा और समर्पण से भरा रहा। उनका सौम्य और सहयोगी स्वभाव सदैव प्रेरणादायक रहेगा।
लेखपाल संघ जिलाध्यक्ष जगदीश प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा, “रामाश्रय जी ने हमेशा मेरा मार्गदर्शन और सहयोग किया। आज मैं जिस पद पर हूं, उसमें उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उनके अनुभव और स्नेह ने हम सभी कर्मचारियों को दिशा दी है। भावुक होते हुए सेवानिवृत्त कानूनगो रामाश्रय ने कहा, “मेरे लिए यह पूरा कार्यकाल परिवार जैसा रहा। मैंने हमेशा कर्तव्य को सर्वोपरि रखा और सहयोगियों के स्नेह को अपनी सबसे बड़ी पूंजी माना। आप सभी का सहयोग और आशीर्वाद मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।” कार्यक्रम का संचालन तहसील अध्यक्ष अनिल राय ने किया। अंत में सहयोगियों ने संविधान पुष्प स्मृति चिन्ह, पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर उन्हें विदाई दी। देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंजता रहा और माहौल भावुक लेकिन गौरवपूर्ण बना रहा।
गोरखपुर जनपद के रुस्तमपुर, आजाद चौक निवासी 1991 में गोला तहसील से लेखपाल पद पर नियुक्ति। सदर तहसील और चौरी-चौरा में कार्य, बाद में पदोन्नति पाकर कानूनगो बने। सदर तहसील के खोराबार, नौसढ़ और बेलवर क्षेत्र में सेवाएं दीं 34 वर्ष तक निष्ठा और ईमानदारी से जनता की सेवा एक पुत्री, जो वर्तमान में एम.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
रामाश्रय पूरे कार्यकाल में कभी कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई। सौम्य स्वभाव, सहयोगी व्यवहार और कर्तव्यनिष्ठा के लिए चर्चित रहे।