Wednesday, July 8, 2026
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आलेखशिक्षा वह खजाना है जिसे कोई चुरा नहीं सकता यह जीवन को दिशा और सफलता को ऊँचाई देती

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“शिक्षा वह खजाना है जिसे कोई चुरा नहीं सकता।”
इसका अर्थ है कि जो ज्ञान और शिक्षा हम अर्जित करते हैं, वह हमारी सबसे बड़ी पूँजी होती है। धन, वस्तुएँ या पद छीने जा सकते हैं, लेकिन शिक्षा हमेशा हमारे साथ रहती है और हमें जीवन भर सही दिशा दिखाती रहती है।
शिक्षा मानव जीवन का सबसे अनमोल रत्न है। यह ऐसा खजाना है, जिसे जितना बाँटा जाए उतना बढ़ता जाता है। धन-संपत्ति, आभूषण या अन्य भौतिक वस्तुएँ समय के साथ नष्ट हो सकती हैं या किसी के द्वारा छीनी जा सकती हैं, लेकिन शिक्षा ऐसा निवेश है जो जीवन भर साथ रहता है और हर परिस्थिति में व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत बनता है।
शिक्षा का उद्देश्य नौकरी प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं है।शिक्षा मानव का सर्वांगीण विकास करती है।यह व्यक्ति के विचारों, चरित्र और व्यक्तित्व को भी निखारने के साथ उसे सही-गलत का भेद करने,समस्या के कारण को समझने और निर्णय लेने की क्षमता को विकसित करती है।शिक्षा आस-पास के माहौल के साथ ही अपने भीतर के गूढ़ रहस्यों को समझने में मदद करती है। यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत बनाती है।
समाज में भी शिक्षा का अत्यधिक महत्व है। शिक्षित नागरिक स्वयं की प्रगति के साथ-साथ समाज की प्रगति का आधार होते हैं। एक शिक्षित व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी जागरूक और सक्षम बनाने में योगदान देता है। यही कारण है कि शिक्षा को सबसे बड़ा धन कहा गया है।आज के प्रतिस्पर्धी युग में शिक्षा सफलता की कुंजी है। यह हमें बेहतर अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भरता प्रदान करती है। शिक्षा से व्यक्ति में न केवल आर्थिक उन्नति होती है, बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास भी संभव होता है।
अतः हमें शिक्षा के महत्व को समझते हुए इसे जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। हमें शिक्षा को आत्मसात करने के साथ ही इसे भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने में अपना योगदान देना चाहिए।
अच्छी शिक्षा से बेहतर कैरियर और आय के अवसर मिलते हैं।शिक्षा सोचने-समझने और संवाद करने की क्षमता को निखारती है जिससे व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है।यह सही आदर्श, संस्कार और मूल्यों की समझ देती है।
शिक्षित समाज में भेदभाव, अंधविश्वास और रूढ़िवादिता कम होते हैं। शिक्षा समाज में एकता और भाईचारे की भावना को प्रबल करती है।
शिक्षित लोग कानून, नियम और सामाजिक कर्तव्यों का पालन बेहतर तरीके से करते हैं।
शिक्षित मानव संसाधन देश की आर्थिक वृद्धि में योगदान देते हैं। शोध और नवाचार से देश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाते हैं।लोकतंत्र की मजबूती में शिक्षित नागरिक जागरूक मतदाता बनकर लोकतंत्र को मजबूत करते हैं।
शिक्षा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और आपसी सहयोग दोनों में अहम भूमिका निभाती है।
यह विश्व शांति, स्थिरता और सतत विकास की दिशा में योगदान देती है।
शिक्षा प्राप्त करने के अनेक माध्यम है, जो समय, संसाधन, रुचि और उद्देश्य के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। इन्हें मुख्य रूप से निम्न वर्गों में बाँटा जा सकता है:

औपचारिक शिक्षा (Formal Education)
यह संगठित और संस्थागत शिक्षा होती है, जिसमें तय पाठ्यक्रम और स्तर होते हैं।
विद्यालयी शिक्षा – प्राथमिक,उच्च प्राथमिक ,माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर तक।
उच्च शिक्षा – कॉलेज, विश्वविद्यालय, प्रोफेशनल कोर्स (जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट)।
व्यावसायिक/तकनीकी शिक्षा – आईटीआई, पॉलिटेक्निक, डिप्लोमा कोर्स इत्यादि।

अनौपचारिक शिक्षा (Informal Education)
यह घर, समाज, कार्यस्थल और अनुभव से प्राप्त होती है।परिवार या समुदाय से सीखना।
जीवन के अनुभवों और सामाजिक मेलजोल से ज्ञान अर्जित करना।
सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से सीखना।

गैर-औपचारिक शिक्षा (Non-Formal Education)
यह औपचारिक प्रणाली से बाहर, लचीले तरीके से दी जाती है।
दूरस्थ शिक्षा (Distance Learning) – पत्राचार या ऑनलाइन माध्यम से।
प्रौढ़ शिक्षा (Adult Education) – बुजुर्गों या वयस्कों के लिए साक्षरता अभियान।
स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम – अल्पावधि प्रशिक्षण और कार्यशालाएँ।

ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा (Online & Digital Learning)
आज के समय में शिक्षा का सबसे उभरता हुआ मार्ग:
ऑनलाइन कोर्स और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म – जैसे Coursera, Udemy, Byju’s, Khan Academy आदि।
वर्चुअल क्लासरूम और वेबिनार।
मोबाइल ऐप्स और डिजिटल पुस्तकालय।

स्व-अध्ययन (Self-learning)
जिसे व्यक्ति अपनी रुचि और प्रयास से करता है।
किताबें, शोध-पत्र और लेख पढ़ना।
यूट्यूब, पॉडकास्ट और ओपन-सोर्स सामग्री से सीखना।
प्रयोग और अभ्यास के माध्यम से कौशल विकसित करना।

व्यावहारिक या अनुभवात्म

शिक्षण
सीखने का यह तरीका “करके सीखना”के द्वारा अर्जित किया जाता है। (Learning by Doing) कहलाता है।इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षण,रिसर्च प्रोजेक्ट्स, फील्ड वर्क,स्वयंसेवी कार्य और सामाजिक इसके अन्तर्गत आते है।

चंद्रकांत सी पुजारी -गुजरात

1 अक्टूबर से बदले बड़े नियम: एलपीजी सिलेंडर, यूपीआई ट्रांजैक्शन, रेलवे टिकट बुकिंग और NPS में आया बदलाव

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। अक्टूबर 2025 की शुरुआत के साथ ही कई बड़े नियम बदल गए हैं, जो सीधे आपकी जेब और रोजमर्रा की सुविधाओं पर असर डालेंगे। ये बदलाव रेलवे टिकट बुकिंग, यूपीआई ट्रांजैक्शन, एलपीजी गैस सिलेंडर और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े हैं। अगर आप समय रहते इन नियमों के बारे में जान जाएंगे तो न केवल फायदा उठा सकेंगे बल्कि अनावश्यक परेशानी से भी बचेंगे।

रेलवे टिकट बुकिंग के नियमों में बदलाव

आज से रेलवे रिजर्वेशन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है।

अब टिकट बुकिंग खुलने के पहले 15 मिनट तक केवल वही यात्री टिकट बुक कर सकेंगे, जिनका आधार वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है।

यह नियम आईआरसीटीसी वेबसाइट और मोबाइल ऐप दोनों पर लागू रहेगा।

NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में नया नियम

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नया मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क लागू किया है।

इसके तहत अब नॉन-गवर्नमेंट सेक्टर के सब्सक्राइबर्स एक ही PAN या PRAN के तहत कई योजनाओं में निवेश कर सकेंगे।

इससे निवेशकों को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का फायदा मिलेगा।

यूपीआई (UPI) से जुड़े बदलाव

आज से UPI P2P (Person-to-Person) मनी रिक्वेस्ट फीचर बंद कर दिया गया है।

इसका मतलब है कि अब कोई भी सीधे किसी से UPI ऐप पर पैसे नहीं मांग सकेगा।

बढ़ती फ्रॉड और धोखाधड़ी को रोकने के लिए NPCI ने यह कदम उठाया है।

अच्छी खबर यह है कि अब UPI से आप 5 लाख रुपये तक का ट्रांजैक्शन कर पाएंगे, जबकि पहले लिमिट केवल 1 लाख रुपये थी।

एलपीजी सिलेंडर के दामों में बदलाव

अक्टूबर की शुरुआत में कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा हो गया है।

दिल्ली में पहले 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 1580 रुपये का था, जिसकी कीमत बढ़कर 1595.50 रुपये हो गई है।

यानी इसमें 15.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

राहत की बात यह है कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्यों जरूरी है इन बदलावों की जानकारी?

हर महीने की पहली तारीख को होने वाले नियमों में बदलाव सीधे आपके घरेलू बजट, वित्तीय लेन-देन और यात्रा योजनाओं को प्रभावित करते हैं।
अगर आप इन अपडेट्स को समय पर जान लेंगे तो बचत और सुविधा दोनों सुनिश्चित कर सकते हैं।

आरएसएस के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी हुए शामिल, जारी किया स्मारक डाक टिकट और 100 रुपये का सिक्का

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने संघ की 100 साल की गौरवमयी यात्रा को समर्पित एक विशेष स्मारक डाक टिकट और 100 रुपये का स्मृति सिक्का जारी किया।

पीएम मोदी का संबोधन

दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह सौभाग्य है कि हम संघ का शताब्दी वर्ष देख रहे हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं दीं और संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विजयादशमी अन्याय पर न्याय, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आरएसएस की स्थापना भी विजयादशमी के दिन ही हुई थी, जो हजारों साल पुरानी राष्ट्र चेतना की परंपरा का पुनरुत्थान है।

विशेष सिक्का और डाक टिकट की झलक

100 रुपये के स्मृति सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिन्ह और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद-मुद्रा में भारत माता की छवि अंकित है।

स्मारक डाक टिकट पर संघ की 100 वर्षों की यात्रा को दर्शाया गया है।

आरएसएस की 100 साल की यात्रा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. हेडगेवार ने की थी। संगठन का उद्देश्य अनुशासन, सेवा, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।

पिछले 100 वर्षों में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है। स्वयंसेवकों ने बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्यों में सक्रिय सहयोग दिया है। साथ ही, संघ के सहयोगी संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों के सशक्तिकरण में भी योगदान दिया है।

राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक योगदान

शताब्दी समारोह केवल आरएसएस की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान ही नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा में इसके स्थायी योगदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी रेखांकित करता है।

केंद्र ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के विकल्प चुनने की अंतिम तारीख 30 नवंबर तक बढ़ाई

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत विकल्प चुनने की अंतिम तारीख अब 30 नवंबर 2025 तक बढ़ा दी है। इससे पहले यह अंतिम तारीख 31 अक्टूबर थी।

यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) 2021 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को पेंशन योजना के दो विकल्पों—परंपरागत पेंशन योजना और नई निधि आधारित पेंशन योजना (NPS) के बीच चयन का अवसर देना है। सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया है ताकि अधिक से अधिक कर्मचारी और पेंशनभोगी समय रहते अपने विकल्प का चुनाव कर सकें।

कर्मचारी अपनी पेंशन योजना का विकल्प ऑनलाइन पोर्टल या संबंधित विभाग के माध्यम से भर सकते हैं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि 30 नवंबर के बाद कोई विकल्प स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए सभी संबंधित लोग समय पर अपना चयन कर लें।

सभी विभागों में विशेष हेल्पडेस्क और जानकारी केंद्र खोले गए हैं, जहां पेंशनभोगी और कर्मचारी किसी भी तरह की मदद ले सकते हैं। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाना और कर्मचारियों को वित्तीय योजना में मदद करना है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPS विकल्प चुनने के बाद कर्मचारी को अपनी पेंशन योजना में बदलाव करने का कोई और अवसर नहीं मिलेगा, इसलिए सभी को सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी गई है।

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RBI MPC Meeting: आरबीआई ने रेपो रेट 5.5% पर बरकरार रखा, EMI पर नहीं पड़ेगा असर

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अक्टूबर 2025 की बैठक में नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। तीन दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को इस फैसले की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने मौद्रिक नीति रुख को ‘तटस्थ’ बनाए रखने की घोषणा की।

EMI ग्राहकों को राहत, ब्याज दर जस की तस

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से गृह ऋण, वाहन ऋण और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। फरवरी 2025 से अब तक आरबीआई कुल 100 आधार अंक की कटौती कर चुका है। जून 2025 में ही रेपो रेट 50 आधार अंक घटाकर 5.5% किया गया था।

अनुकूल मानसून और कम मुद्रास्फीति से अर्थव्यवस्था को सहारा

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि अनुकूल मानसून, खाद्य कीमतों में कमी और कम मुद्रास्फीति के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 2.07% के छह साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी।

GST सुधारों से मिलेगा महंगाई पर काबू

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि GST सुधारों और अन्य नीतिगत बदलावों से महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उपभोग और विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि मजबूत रेमिटेंस और सुधारात्मक कदमों के चलते चालू खाता घाटा (CAD) टिकाऊ रहने की उम्मीद है।

टैरिफ का असर दूसरी छमाही पर

हालांकि, गवर्नर ने चेतावनी दी कि टैरिफ संबंधी घटनाक्रम इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि की गति को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी, जीएसटी और अन्य सुधारों के चलते बाहरी दबाव का असर सीमित रहने की संभावना है।

आज का इतिहास, डाक टिकट से वृद्धजन दिवस, काफी दिवस , प्रमुख जन्म दिन तक आइए जानते है

1 अक्टूबर: इतिहास, जन्मदिन और पर्वों का अद्भुत संगम – डाक टिकट से चीन गणराज्य तक की गवाही देता दिन
1854 में भारत में डाक टिकट की शुरुआत, 1949 में चीन जनवादी गणराज्य की स्थापना, साथ ही अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस, कॉफी दिवस और शाकाहारी दिवस का वैश्विक उत्सव।
नई दिल्ली।
1 अक्टूबर का दिन इतिहास, संस्कृति और वैश्विक पर्वों के लिहाज से बेहद खास है। इस तिथि ने कई महत्वपूर्ण घटनाओं और ऐतिहासिक पलों को दर्ज किया है।
1854 में ब्रिटिश शासन ने भारत में डाक टिकट की शुरुआत की। इस टिकट पर महारानी विक्टोरिया की तस्वीर छपी थी और इसकी कीमत आधा आना (1/32 रुपये) रखी गई थी।
1949 को माओ-त्से-तुंग ने चीन जनवादी गणराज्य की स्थापना की, जिसने विश्व राजनीति की दिशा बदल दी।
1967 में भारत में पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए भारतीय पर्यटन विकास निगम (ITDC) की स्थापना हुई।
2000 में सिडनी में आयोजित 27वें ओलंपिक खेलों का समापन इसी दिन हुआ।
इतिहास के पन्नों में झाँकें तो इस दिन 1919 में ब्रिटिश सरकार ने ‘हन्टर समिति’ का गठन किया, 1953 को आंध्र प्रदेश अलग राज्य बना और 1960 को नाइजीरिया को स्वतंत्रता मिली।
प्रमुख जन्मदिवस
रामनाथ कोविंद (1945): भारत के पूर्व राष्ट्रपति
एनी बेसेंट (1847): समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी
मजरूह सुल्तानपुरी (1919): मशहूर शायर और गीतकार
लियाक़त अली ख़ाँ (1895): पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री
जिमी कार्टर (1924): अमेरिका के 39वें राष्ट्रपति
शिवाजी गणेशन (1927): दिग्गज तमिल अभिनेता
शारदा सिन्हा (1952): लोकप्रिय लोकगायिका
अवसर एवं उत्सव
1 अक्टूबर को हर साल कई वैश्विक दिवस मनाए जाते हैं—
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: बुजुर्गों के अधिकार और योगदान को सम्मानित करने हेतु।
राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस: मानव सेवा के महत्व को रेखांकित करता दिन।
अंतरराष्ट्रीय कॉफी दिवस: 2015 में पहली बार मिलान में शुरू हुआ।
विश्व शाकाहारी दिवस: पर्यावरण, स्वास्थ्य और जीवनशैली के प्रति जागरूकता का प्रतीक।

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नवरात्रि 2025: गरबा-डांडिया में फूहड़ता पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की नसीहत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरे देश में गरबा और डांडिया महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस बीच बागेश्वर धाम सरकार के महाराज धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस परंपरा में बढ़ती फूहड़ता और अशोभनीय परिधानों को लेकर चिंता जताई है।

महाराज का कहना है कि गरबा और डांडिया भारतीय संस्कृति और देवी दुर्गा की महिमा का हिस्सा हैं, लेकिन कम कपड़े पहनकर केवल रील और फोटो बनाने के लिए इसमें शामिल होना माता का पुण्य नहीं देता।

“परंपरा का मजाक न बने गरबा”

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट किया कि गरबा अवश्य किया जाए, लेकिन श्रद्धा और परंपरा का मजाक नहीं बनना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि गरबा पंडालों में केवल वे युवक-युवतियां प्रवेश पाएं जिनकी पोशाक पूरी और सम्मानजनक हो।

“अन्य धर्मों को हमारे उत्सवों में दखल नहीं देना चाहिए”

शास्त्री जी ने आगे कहा कि जैसे सनातन धर्मावलंबी अन्य धर्मों के आयोजनों में शामिल नहीं होते, वैसे ही अन्य धर्मों के लोगों को भी हमारे धार्मिक उत्सवों में दखल नहीं देना चाहिए।

श्रद्धा और संयम पर जोर

बागेश्वर धाम सरकार ने नवरात्रि में श्रद्धा और संयम के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सनातन धर्म की असली महिमा का मजाक बनाना हमारी संस्कृति के लिए हानिकारक है। उनका संदेश साफ है—उत्सव आनंद देने के लिए हैं, लेकिन माता की पूजा और परंपरा का सम्मान करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

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सीमा से सटे जिलों में मतदाता सूची से लाखों नाम गायब

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया के बाद बिहार की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नेपाल और बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती जिलों में लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए हैं।
इससे एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या बीते वर्षों में घुसपैठिए बिहार की वोटर लिस्ट में शामिल थे और क्या अब उन्हें बाहर कर दिया गया है।
किन जिलों में कितने वोटर घटे
मधुबनी – 2,66,900 वोटर घटे ,सीतामढ़ी – 1,77,474 वोटर घटे
पूर्णिया – 1,90,858 वोटर घटे,किशनगंज – 1,04,488 वोटर घटे
सुपौल – 1,03,675 वोटर घटे,पूर्वी चंपारण – 7,834 वोटर घटे
यानी, सिर्फ इन छह सीमावर्ती जिलों में ही करीब 8 लाख वोटर कम हो गए हैं।
🗳️ चुनाव आयोग बनाम राजनीति
इस बड़े बदलाव को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं भाजपा लगातार घुसपैठियों को चुनावी मुद्दा बना रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों में नए वोटर बनने के लिए युवाओं ने अपेक्षा से कम आवेदन किए हैं, जबकि बीएलओ और बीएलए पहले से ज्यादा सक्रिय रहे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की पटना बैठक
भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार 3 अक्टूबर को पटना पहुंचेंगे।
4 अक्टूबर को वे राजनीतिक दलों से बैठक करेंगे।
इसके बाद जिलाधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के साथ विस्तृत समीक्षा करेंगे।
अंत में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची से जुड़े अपडेट साझा किए जाएंगे।
इस बैठक में मतदाता सूची से नाम कटने, सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा और समन्वय पर खास चर्चा होगी।

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6.9 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप : 31 से अधिक की मौत, कई घायल

राष्ट्र की परम्परा डेस्क फिलीपींस के मध्य विसाय क्षेत्र में मंगलवार देर रात आए 6.9 तीव्रता के भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में 31 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। भूकंप का केंद्र सेबू प्रांत के तटीय शहर बोगो से 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था।तेज़ झटकों के कारण सैकड़ों इमारतें और घर क्षतिग्रस्त हो गए, बिजली आपूर्ति ठप पड़ गई और लोग अपने घरों से निकलकर खुले में रात बिताने को मजबूर हो गए।

बोगो और सैन रेमिगियो में सबसे अधिक जनहानि
आपदा प्रबंधन अधिकारी रेक्स यगोट ने बताया कि अकेले बोगो शहर में 14 लोगों की मौत हुई है, और संख्या और बढ़ने की आशंका है। वहीं, सैन रेमिगियो कस्बे में छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिनमें तटरक्षक बल के तीन जवान, एक अग्निशमन कर्मी और एक बच्चा शामिल है।
सैन रेमिगियो के उप-महापौर अल्फी रेन्स ने बताया कि भूकंप से कस्बे की जल आपूर्ति व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई है, जिससे पीने के पानी और भोजन की किल्लत बढ़ गई है।
इमारतें ध्वस्त, चर्च और स्कूलों को नुकसान
बंटायन कस्बे में एक व्यावसायिक भवन और एक स्कूल पूरी तरह ढह गया। चर्च की इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं। प्रत्यक्षदर्शी मार्थम पैकिलन ने कहा
“मैंने चर्च की ओर से जोरदार धमाका सुना, पत्थर गिरते देखे, लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। मैं सन्न रह गया और केवल झटकों के रुकने का इंतज़ार करता रहा।”
सरकार का अपील: “शांत रहें और खुले क्षेत्रों में जाएं”
सेबू प्रांतीय गवर्नर पामेला बारिकुआत्रो ने फेसबुक लाइव पर जनता से अपील की कि वे घबराएँ नहीं, खुले स्थानों में रहें और भूकंप के बाद आने वाले झटकों (Aftershocks) से सावधान रहें।
सुनामी का खतरा नहीं
यूएसजीएस ने भूकंप की तीव्रता प्रारंभ में 7.0 बताई थी, जिसे बाद में घटाकर 6.9 कर दिया गया। प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने साफ किया कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है।
क्यों आता है बार-बार भूकंप?
फिलीपींस प्रशांत “रिंग ऑफ़ फायर” पर स्थित है, जो भूकंपीय गतिविधियों का सबसे सक्रिय क्षेत्र है। यहां प्रतिदिन छोटे-बड़े झटके आते हैं, लेकिन बड़े और विनाशकारी भूकंप अचानक और अप्रत्याशित रूप से आ जाते हैं।

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संजय शुक्ला बने उभांव कोतवाली इंचार्ज

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बेल्थरा रोड स्थित इंडियन क्लब दुर्गा पूजा पंडाल में सोमवार देर रात सड़क हादसे के बाद हंगामा खड़ा हो गया। आरोप है कि मौके पर पहुंचे उभांव थानाध्यक्ष ने हालात संभालने की बजाय समिति सदस्यों पर लाठियां चलवा दीं। इससे श्रद्धालु आक्रोशित हो गए और पंडाल की लाइट बंद कर धरने पर बैठ गए।

सूचना पाकर सीओ समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। समिति की मांग पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उभांव थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया। उनकी जगह संजय शुक्ला को नया एसएचओ नियुक्त किया गया।

थानाध्यक्ष हटाए जाने की घोषणा के बाद माहौल कुछ हद तक शांत हुआ। समिति ने प्रशासनिक निर्णय का स्वागत किया और भरोसा जताया कि इससे लोगों का विश्वास कायम रहेगा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि नवरात्रि और दशहरा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शांति व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

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एन्नोर थर्मल पावर प्लांट हादसा: असम के 9 मजदूरों की मौत, पीएम मोदी व सीएम स्टालिन ने की मुआवजे की घोषणा

तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में एन्नोर थर्मल पावर प्लांट निर्माण स्थल पर मचान गिरने से बड़ा हादसा – मृतकों में सभी असम के प्रवासी श्रमिक, घायलों का चेन्नई के स्टेनली अस्पताल में इलाज


तिरुवल्लूर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले के एन्नोर थर्मल पावर प्लांट (Ennore Thermal Power Plant) में निर्माण कार्य के दौरान मचान ढह जाने से असम के 9 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा हो गया।

स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, चार श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पाँच अन्य ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल कई मजदूरों का इलाज चेन्नई के स्टेनली सरकारी अस्पताल में जारी है।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने दुर्घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने और शवों को असम तक सुरक्षित पहुंचाने का निर्देश दिया।
सीएम स्टालिन ने लिखा – “एन्नोर में बीएचईएल द्वारा चल रहे निर्माण कार्य के दौरान असम के 9 मजदूरों की मौत दुखद है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ।”
मुख्यमंत्री ने विद्युत मंत्री एस.एस. शिवशंकर और टीएएनजेडको (TANGEDCO) अध्यक्ष के. राधाकृष्णन को राहत कार्य की निगरानी के लिए मौके पर भेजा।
प्रधानमंत्री का शोक संदेश व सहायता राशि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे को “बेहद दुखद” बताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि की घोषणा की। पीएमओ ने एक्स (Twitter) पर लिखा – “इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूँ।”
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागई ने भी गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

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सीआर पार्क दुर्गा पूजा: दिल्ली की सांस्कृतिक धड़कन और प्रधानमंत्री मोदी के अनुशासन का प्रेरक संदेश

कृष्णा राव पार्क में सजी भव्य दुर्गा पूजा, बंगाली परंपरा और कला का अनूठा संगम – प्रधानमंत्री मोदी का नवरात्रि व्रत बना चर्चा का विषय

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)दिल्ली का सीआर पार्क (कृष्णा राव पार्क) हर साल दुर्गा पूजा के मौके पर धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों का केंद्र बन जाता है। इस वर्ष भी नवरात्रि और अष्टमी के अवसर पर पूरा क्षेत्र आकर्षक पंडालों, जगमगाती रोशनी, भव्य प्रतिमाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हो उठा।

सीआर पार्क को राजधानी का “लघु कोलकाता” भी कहा जाता है, जहां बंगाली समाज दशकों से अपनी परंपराओं के साथ दुर्गा पूजा का आयोजन करता आ रहा है। यहां पूजा-पाठ के साथ-साथ सामाजिक संवाद, कला-संस्कृति और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मिलकर इसे एक अद्वितीय उत्सव बना देती हैं। रंगीन पंडाल, शिल्पकला से सजी प्रतिमाएं और सांस्कृतिक मंचन—सब मिलकर इसे राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाते हैं।

इस वर्ष का उत्सव और भी खास रहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नवरात्रि व्रत एक बार फिर चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री प्रतिवर्ष नवरात्रि पर कठिन व्रत रखते हैं और इस दौरान सिर्फ गर्म पानी का सेवन करते हैं। यह अनुशासन न केवल उनके आत्मसंयम और धार्मिक निष्ठा का प्रतीक है, बल्कि जनता के लिए प्रेरणादायक भी है। पूजा-अर्चना और ध्यान के साथ-साथ वे प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि आस्था और सार्वजनिक जिम्मेदारी का संतुलन कैसे साधा जा सकता है।

सीआर पार्क दुर्गा पूजा अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। प्रधानमंत्री का मंदिर में आगमन इस आयोजन की गरिमा को और बढ़ा गया। साथ ही, इस अवसर ने यह स्पष्ट कर दिया कि त्योहारों के दौरान धार्मिक उत्सव, सामाजिक जीवन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है।

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2 अक्टूबर 2025: गांधी जयंती, शास्त्री जयंती और विजयादशमी का ऐतिहासिक संगम – दो पर्व, एक ही संदेश

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत एक ऐसा देश है जिसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा हजारों वर्षों से दुनियाँ को राह दिखाती रही है। यहां के पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि उनमें जीवन-दर्शन, नैतिकता और सामाजिक संदेश भी निहित होते हैं। वर्ष 2025 में ऐसा ही एक ऐतिहासिक अवसर सामने आ रहा है। 2 अक्टूबर 2025 को महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री जयंती और विजयादशमी (दशहरा) एक साथ मनाई जाएगी। गांधीव शास्त्री जयंती हर साल 2 अक्टूबर को निश्चित रूप से आती है, जबकि विजयादशमी हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार बदलती रहती है,किंतु मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस बार दोनों का एक साथ पड़ना भारतीय समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक गहरी प्रेरणा देता है।यह केवल तिथियों का मेल नहीं है,बल्कि मूल्यों का संगम है।गांधी जयंती सत्य,अहिंसा और नैतिकता का प्रतीक है,जबकि विजयादशमी अच्छाई की बुराई पर जीत का स्मरण कराती है।
साथियों बात अगर हम महात्मा गांधी लाल बहादुर शास्त्री जयंती क़े महत्व को समझने की करें तो,महात्मा गांधी का नाम भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति,अहिंसा और सत्य के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात)में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने अपने जीवन को साधारण वस्त्र,सरल जीवनशैली और उच्च आदर्शों के लिए समर्पित कर दिया।उनका सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन भारत की आज़ादी के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की सबसे बड़ी ताकत को बिना हिंसा और हथियार के चुनौती दी और यह सिद्ध कर दिया कि अहिंसा ही सबसे बड़ी शक्ति है।गांधीजी का योगदान केवल भारत की स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रहा। उनका प्रभाव विश्वभर में पड़ा। मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन के लिए गांधी के अहिंसात्मक तरीकों को अपनाया नेल्सन मंडेला ने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष में गांधी की शिक्षाओं को प्रेरणा बनाया।संयुक्त राष्ट्र ने भी 2 अक्टूबर को “इंटरनेशनल डे ऑफ़ नॉन- वाओलेंस” घोषित कर गांधी के विचारों की वैश्विक मान्यता को स्वीकार किया।इस दृष्टि से 2 अक्टूबर न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणादायक दिन है,लाल बहादुर शास्त्री जयंती का महत्व 2 अक्टूबर 1904 को जन्मे लाल बहादुर शास्त्री भारतीय राजनीति के ऐसे आदर्श नेता थे, जिन्होंने अपनी सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति से देशवासियों के दिलों में अमिट स्थान बना लिया। वे भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने और अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने देश को कठिन परिस्थितियों में संभालने का काम किया। शास्त्रीजी का जीवन बेहद सरल था। वे मानते थे कि नेता का आचरण उसके शब्दों से अधिक प्रभावी होना चाहिए।1965 के भारत-पाक युद्ध में शास्त्रीजी का नेतृत्व ऐतिहासिक रहा। उन्होंने पूरे देश को “जय जवान,जय किसान”का नारा दिया,जिसने देश की एकता और आत्मनिर्भरता को मजबूती दी। यह नारा आज भी भारत की रीढ़,सेना और किसान, की अहमियतको दर्शाता है।शास्त्रीजी का योगदान यह साबित करता है कि नेतृत्व केवल बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि सादगी और कर्मनिष्ठा से भी किया जा सकता है।
साथियों बात अगर हम विजयादशमी (दशहरा) का सांस्कृतिक महत्व को समझने की करें तो,विजयादशमी भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो हर वर्ष आश्विन मास की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीराम ने इस दिन रावण का वध किया और सीता माता को मुक्त कराया। इसलिए दशहरा को “विजयादशमी” कहा जाता है। इस दिन देशभर में रामलीलाओं का मंचन होता है और रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले दहन किए जाते हैं।दशहरे का संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि दार्शनिक भी है। यह हमें यह सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो,अंततः सत्य और धर्म की विजय होती है। रावण विद्वान और पराक्रमी ब्राह्मण था,लेकिन उसका अहंकार और क्रोध ही उसके विनाश का कारण बने। इस प्रकार दशहरा हमें यह शिक्षा देता है कि मानव जीवन में विनम्रता, संयम और धर्म का पालन ही स्थायी सुख और सफलता दिला सकता है।आज भी भारत के कोने-कोने में दशहरा रावण-दहन के साथ मनाया जाता है। यह केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि समाज को यह याद दिलाने का प्रतीक है कि बुराइयों का अंत करना ही जीवन का उद्देश्य है।
साथियों बात अगर हम 2025 का संयोग: गांधी और राम का मिलन को समझने की करें तोअब जब हम 2 अक्टूबर 2025 की ओर देखते हैं, तो यह केवल कैलेंडर का संयोग नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता है।गांधी ने अंग्रेज साम्राज्य के अहंकार और अत्याचार को अहिंसा और सत्याग्रह से हराया।श्रीराम ने रावण जैसे अत्याचारी राजा को धर्म और शौर्य से
पराजित किया।दोनों ही प्रसंग हमें बताते हैं कि बुराई चाहे हिंसा, लालच, घमंड या अन्याय के रूप में हो, उसका अंत निश्चित है। गांधी और राम दोनों ने हमें यह सिखाया कि अच्छाई की शक्ति हमेशा बुराई से बड़ी होती है,बस हमें धैर्य और साहस से उसका सामना करना चाहिए।महात्मा गांधी ने ब्रिटिश साम्राज्य जैसे “रावण” को सत्य और अहिंसा से हराया।श्रीराम ने रावण जैसे राक्षस को धर्म और शौर्य से पराजित किया।दोनों ही प्रसंग हमें यह बताते हैं कि बुराई चाहे किसी भी रूप में आए, बाहरी आक्रमण हो या आंतरिक लालच और घमंड,उसका अंत निश्चित है।यह संयोग हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि गांधी जी के मूल्यों और रामायण की शिक्षाओं को आज की दुनिया में किस तरह लागू किया जा सकता है।
साथियों बात अगर हम रावण और गांधी: दोनों के विरोधाभास को समझने की करें तो,इतिहास और पुराणों में जब हम रावण और गांधी को देखते हैं, तो दोनों एकदम विपरीत ध्रुव दिखाई देते हैं।रावण अत्यधिक विद्वान और ब्राह्मण होते हुए भी अपने अहंकार और वासनाओं के कारण पतन का कारण बना।गांधी एक साधारण परिवार से होते हुए भी आत्मसंयम, सत्य और अहिंसा के कारण “महात्मा” कहलाए।यह तुलना हमें यह सिखाती है कि व्यक्ति का मूल्य केवल उसके ज्ञान या शक्ति से नहीं,बल्कि उसके चरित्र और आदर्शों से तय होता है।रावण ने ज्ञान का उपयोग सत्ता और दंभ के लिए किया, जबकि गांधी ने आत्मज्ञान का उपयोग स्वतंत्रता और न्याय के लिए किया।बुराई पर अच्छाई की विजय: साझा संदेश-गांधी जयंती और विजयादशमी दोनों का मूल संदेश एक ही है- अंततः सत्य और अच्छाई ही विजयी होती है।दशहरा कहता है कि बुराई का अंत शौर्य और धर्म से होता है।गांधी जयंती कहती है कि हिंसा और अन्याय का अंत सत्य और अहिंसा से किया जा सकता है।आज की दुनियाँ में यह संदेश और भी प्रासंगिक है, जहां आतंकवाद, युद्ध, हिंसा, भेदभाव और पर्यावरणीय संकट जैसे “आधुनिक रावण” सामने खड़े हैं,ऐसे में राम और गांधी दोनों के आदर्श हमें रास्ता दिखाते हैं।
साथियों बात अगर हम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को समझने की करें तो,2 अक्टूबर 2025 को यह डबल अवसर भारत को एक अनूठा संदेश देगा:राष्ट्रीय स्तर पर, यह हमें याद दिलाएगा कि हमें न केवल अपने अतीत के नायकों का सम्मान करना है, बल्कि उनके मूल्यों को आज के समाज में जीवित रखना है।अंतरराष्ट्रीय स्तरपर, दुनिया देखेगी कि भारत का सांस्कृतिक संदेश केवल धार्मिक या राजनीतिक सीमाओं तक नहीं है, बल्कि यह सार्वभौमिक मानवता का प्रतीक है।गांधी का संदेश पश्चिम से लेकर अफ्रीका तक आज भी प्रासंगिक है, और रामायण के आदर्श एशिया से कैरिबियन तक लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं।गांधी जी केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। दक्षिण अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक उनके विचारों ने बड़े आंदोलनों को जन्म दिया। मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने गांधी के अहिंसा के सिद्धांत को अपनाकर अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलन को सफल बनाया। नेल्सन मंडेला ने भी अपार्थाइड के खिलाफ गांधी से प्रेरणा ली।वहीं, रामायण केवल भारत तक नहीं बल्कि पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया,इंडोनेशिया, थाईलैंड,कंबोडिया,मलेशिया,तक अपनी छाप छोड़ चुकी है।इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम-बहुल देशमें भी रामायण कासांस्कृतिक महत्व है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि 2 अक्टूबर 2025 केवल एक तारीख नहीं,बल्कि तीन महान संदेशों का संगम है। गांधीजी ने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया, शास्त्रीजी ने सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का आदर्श प्रस्तुत किया और विजयादशमी ने यह सिद्ध कर दिया किअच्छाई हमेशा बुराई पर विजय पाती है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें न केवल व्यक्तिगत जीवन में, बल्कि राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर भी इन मूल्यों को आत्मसात करना होगा।इस संयोग को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक नई दिशा तय करने के अवसर के रूप में देखना चाहिए। यह दिन भारत को दुनिया के सामने शांति,नैतिकता और सहिष्णुता का प्रतीक बनाने का अवसर देता है। वास्तव में, 2 अक्टूबर 2025 मानवता को एक नई रोशनी और नई राह दिखाने वाला ऐतिहासिक दिन बन सकता है।

संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318

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लखनऊ में धर्मांतरण रैकेट का खुलासा: इलाज और मदद के बहाने 500 से ज्यादा हिंदू बने ईसाई, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी के निगोहां क्षेत्र के बख्तौरीखेड़ा गांव में बड़ा धर्मांतरण रैकेट पकड़ा गया है। बीमारियों का इलाज कराने और आर्थिक मदद देने के नाम पर लोगों को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा था।

पुलिस जांच में सामने आया कि इस रैकेट का मास्टरमाइंड मलखान उर्फ मैथ्यूज पिछले दो साल से धर्मांतरण की गतिविधियों में शामिल था। उसका प्रार्थना स्थल और ‘चंगाई सभा’ मायालोक को प्रशासन ने सील कर दिया है और अब उसकी विदेशी फंडिंग की जांच की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, गरीब और दलित वर्ग को राशन, आर्थिक सहायता और मुफ्त इलाज का लालच देकर उन्हें सभा में बुलाया जाता था। यहाँ खाने-पीने का इंतज़ाम भी होता था। धर्मांतरण के बाद महिलाओं ने सिंदूर और बिंदी लगाना बंद कर दिया।

अब तक की जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के जरिए 500 से ज्यादा लोग ईसाई बनाए जा चुके हैं। पुलिस अन्य सदस्यों और विदेशी कनेक्शन की गहराई से जांच कर रही है।

कनाडा भेजने का झांसा देकर युवक से 24 लाख की ठगी, तीन आरोपियों पर केस दर्ज

कैथल (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। हरियाणा के कैथल जिले में कनाडा भेजने के नाम पर एक युवक से 24 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपियों में एक दंपत्ति और एक अन्य युवक शामिल है।

पासपोर्ट और दस्तावेज लेकर ठगे लाखों

गांव रसूलपुर निवासी राजपाल ने गुहला थाना में दी शिकायत में बताया कि वह विदेश जाना चाहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात अमनदीप, उसकी पत्नी मानसी और आर्यन वर्मा से हुई। आरोपियों ने उसे कनाडा भेजने का झांसा दिया और पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज अपने पास ले लिए।

राजपाल के अनुसार, अक्टूबर 2024 से लेकर अलग-अलग समय पर आरोपियों ने उससे ऑनलाइन और नकद मिलाकर 24 लाख रुपये ले लिए।

न विदेश भेजा, न पैसे लौटाए

रुपये लेने के बाद आरोपी शुरू में उसे जल्द कनाडा भेजने का आश्वासन देते रहे। लेकिन बाद में उन्होंने टालमटोल शुरू कर दी। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया।

पुलिस ने दर्ज किया केस

गुहला थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है।

लगातार बढ़ रहे विदेश भेजने के नाम पर फ्रॉड

हाल के दिनों में हरियाणा सहित देशभर में विदेश भेजने का झांसा देकर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को किसी भी एजेंट को पैसे देने से पहले उसकी वैधता की पूरी तरह जांच कर लेनी चाहिए और केवल सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंटों पर ही भरोसा करना चाहिए।