Wednesday, June 17, 2026
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ट्रक की टक्कर से दो मजदूरों की मौत, एक गंभीर; संतकबीरनगर में दर्दनाक हादसा

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के Sant Kabir Nagar जिले में मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में दो मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा Khalilabad कोतवाली क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग पर बूधा कला पेट्रोल पंप के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार तीन लोगों को टक्कर मार दी।

कैसे हुआ हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, डारीडीहा गांव निवासी चंद्रभूषण (45), उनके छोटे भाई चंद्रभान (35) और पुत्र चंद्रहास (25) मंगलवार सुबह बाइक से मजदूरी के लिए खलीलाबाद जा रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग दूर जा गिरे। हादसे में चंद्रभान और चंद्रहास की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चंद्रभूषण गंभीर रूप से घायल हो गए।

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अस्पताल में भर्ती, हालत नाजुक

घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल चंद्रभूषण को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

पुलिस जांच में जुटी, चालक फरार

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार ट्रक चालक की तलाश की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

परिवार में मचा कोहराम

इस दर्दनाक हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया। गांव में शोक का माहौल है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के मुद्दे पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

IIT BHU Student Election: पियूष यादव ने रचा इतिहास, रिकॉर्ड जीत से गांव में जश्न

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के छोटे से गांव भागलपुर के होनहार युवा पियूष यादव ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए IIT BHU (वाराणसी) की छात्र संसद (स्टूडेंट पार्लियामेंट) के चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उनकी इस रिकॉर्ड जीत ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव और जिले को गौरवान्वित कर दिया है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले पियूष यादव आज युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं।

साधारण पृष्ठभूमि से असाधारण सफलता तक का सफर

मईल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भागलपुर गांव में जन्मे पियूष यादव (पुत्र सुभाष यादव उर्फ नागा बाबा) ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूलों से पूरी की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखी और आगे चलकर Lucknow University से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

पियूष की शैक्षणिक यात्रा आसान नहीं रही, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर प्रतिष्ठित परीक्षाओं जैसे JRF (Junior Research Fellowship) और GATE (Graduate Aptitude Test in Engineering) को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया। वर्तमान में वह IIT BHU के भौतिकी विभाग में पीएचडी कर रहे हैं।

छात्र राजनीति में ऐतिहासिक जीत

हाल ही में आयोजित IIT BHU छात्र संसद चुनाव में पियूष यादव ने भारी मतों से जीत हासिल की। यह जीत केवल एक सामान्य जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे छात्र राजनीति के इतिहास में एक रिकॉर्ड के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव में उनकी लोकप्रियता और छात्रों के बीच मजबूत पकड़ ने उन्हें यह ऐतिहासिक सफलता दिलाई।

सूत्रों के अनुसार, पियूष यादव को छात्रों का व्यापक समर्थन मिला, जो उनके नेतृत्व क्षमता, स्पष्ट सोच और छात्रों के मुद्दों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस जीत के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची निष्ठा और मेहनत के बल पर कोई भी ऊंचाइयों को छू सकता है।

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जीत पर क्या बोले पियूष यादव

अपनी इस शानदार जीत के बाद पियूष यादव ने कहा कि यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार, गांव और उन सभी लोगों की जीत है जिन्होंने उन पर विश्वास जताया। उन्होंने कहा:

“मैं छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाने और उनकी समस्याओं का समाधान कराने के लिए पूरी ईमानदारी से काम करूंगा।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि छात्र हित उनके लिए सर्वोपरि हैं और वे छात्र समुदाय के विकास के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

गांव और जिले में जश्न का माहौल

पियूष यादव की इस उपलब्धि के बाद पूरे भागलपुर गांव और Deoria जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। गांव में लोगों ने मिठाई बांटकर और एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी खुशी का इजहार किया। परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों ने पियूष की इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया।

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पियूष ने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। वहीं युवाओं के लिए वह एक रोल मॉडल बनकर उभरे हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने पियूष यादव

आज के दौर में जब ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के सामने कई चुनौतियां होती हैं, ऐसे में पियूष यादव की सफलता यह संदेश देती है कि अगर दृढ़ संकल्प और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

उनकी कहानी यह साबित करती है कि:

• सीमित संसाधन सफलता में बाधा नहीं बन सकते
• शिक्षा और मेहनत से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है
• गांव का युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है

शिक्षा और नेतृत्व का बेहतरीन उदाहरण

पियूष यादव की सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके नेतृत्व कौशल का भी प्रमाण है। छात्र संसद चुनाव में उनकी जीत यह दर्शाती है कि वे न केवल एक अच्छे छात्र हैं, बल्कि एक सक्षम नेता भी हैं।

छात्र राजनीति में उनका यह कदम आने वाले समय में उन्हें और बड़े मंचों तक पहुंचा सकता है। उनकी सोच और दृष्टिकोण से यह उम्मीद की जा रही है कि वे छात्रों के हित में कई सकारात्मक बदलाव लाएंगे।

UP Home Guard Exam 2026: कड़ी सुरक्षा में संपन्न हुई भर्ती परीक्षा, 65 हजार से अधिक अभ्यर्थी शामिल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ द्वारा आयोजित होमगार्ड्स एनरोलमेंट-2025 की लिखित परीक्षा जनपद में कड़ी सुरक्षा और व्यापक व्यवस्थाओं के बीच सकुशल संपन्न हो गई। 25, 26 और 27 अप्रैल 2026 तक चली इस परीक्षा की सभी 6 पालियां शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष ढंग से पूरी कराई गईं, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली।

जनपद के 24 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में प्रत्येक पाली में 10,848 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। इस तरह कुल 65,088 अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा आयोजित की गई। हर दिन दो पालियों—सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक और दोपहर 3:00 बजे से 5:00 बजे तक—परीक्षा कराई गई।

परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की भारी भीड़ के बावजूद सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारु रहीं। कहीं से भी अव्यवस्था या किसी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली। परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक केंद्र पर सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी। इसके अलावा पर्याप्त पुलिस बल की मौजूदगी में सघन चेकिंग और फ्रिस्किंग के बाद ही अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया गया।

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सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए डीआईजी रेंज एस. चन्नप्पा, जिलाधिकारी दीपक मीणा, एसएसपी डॉ. कोस्तुभ और एसपी सिटी निमिष पाटिल लगातार परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करते रहे। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस को अस्थायी डबल लॉक के रूप में इस्तेमाल किया गया, जहां कड़ी निगरानी में प्रश्नपत्र व अन्य सामग्री सुरक्षित रखी गई। वितरण प्रक्रिया भी अधिकारियों की उपस्थिति में पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई।

अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे और रोडवेज विभाग के साथ समन्वय कर अतिरिक्त ट्रेनों और बसों का संचालन कराया गया। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहा।

तीन दिनों तक चले इस बड़े आयोजन के शांतिपूर्ण समापन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने संतोष जताते हुए कहा कि सभी व्यवस्थाएं बेहतर रहीं और परीक्षा निष्पक्ष तरीके से सम्पन्न कराई गई।

Sonauli Border Smuggling: गुप्त चैंबर से 2570 किलो विदेशी अखरोट बरामद, पुलिस-SSB की बड़ी कार्रवाई

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और Sashastra Seema Bal (SSB) की संयुक्त टीम ने तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। Sonauli Border पर चेकिंग के दौरान एक ट्रक में बनाए गए गुप्त चैंबर से 2570 किलोग्राम विदेशी अखरोट बरामद किए गए।

गुप्त केबिन में छिपाई गई करोड़ों की खेप

जानकारी के अनुसार, पुलिस अधीक्षक Shakti Mohan Awasthi के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत 27 अप्रैल को संदिग्ध ट्रक (RJ 14 GJ 5722) को रोका गया।

तलाशी में सामने आया:
• ट्रक में विशेष रूप से बनाया गया हिडन चैंबर (गुप्त केबिन)
• 103 बोरियों में भरे 2570 किलो विदेशी अखरोट
• सामान्य जांच में पकड़ना बेहद मुश्किल

टीम की सतर्कता से तस्करी की यह बड़ी कोशिश नाकाम हुई।

नेपाल से दिल्ली जा रही थी खेप

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि:

• खेप काठमांडू से दिल्ली ले जाई जा रही थी
• खाद्य सामग्री की आड़ में तस्करी
• बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और अवैध कमाई की आशंका

चालक हिरासत में, नेटवर्क की जांच तेज

मौके से:

• ट्रक चालक साहिब खान (हरियाणा निवासी) को हिरासत में लिया गया
• उससे पूछताछ जारी है

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं:

• किन राज्यों का नेटवर्क जुड़ा है
• सीमा पार किन गिरोहों की भूमिका है

तस्करी का नया तरीका: खाद्य सामग्री की आड़

अधिकारियों के अनुसार:
• अब तस्कर सिर्फ नशीले पदार्थ ही नहीं
• बल्कि अखरोट, मसाले और अन्य सामान के जरिए भी तस्करी कर रहे हैं
• गुप्त चैंबर बनाकर माल छिपाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है

कस्टम को सौंपा गया माल

बरामद:
• अखरोट और ट्रक को कब्जे में लेकर
• आगे की कार्रवाई के लिए कस्टम कार्यालय नौतनवां को सौंप दिया गया है

सीमा पर सख्ती का असर

इस कार्रवाई से:
• तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका
• सीमा पार अवैध कारोबारियों में हड़कंप
• पुलिस और SSB की सतर्कता की सराहना

अधिकारियों ने साफ किया है कि भविष्य में ऐसे अभियान और तेज किए जाएंगे।

पतंग बनी काल: गोरखपुर में 14 साल के बच्चे के गले में आर-पार हुई सरिया

गोरखपुर में दर्दनाक हादसा: पतंग उड़ाते समय 14 वर्षीय हर्ष के गले-सिर के आर-पार हुई सरिया, हालत नाजुक


गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) में एक बेहद हृदयविदारक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के इलाहीबाग निवासी 14 वर्षीय हर्ष के साथ हुआ यह हादसा न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके के लिए सदमे की वजह बन गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, हर्ष अपने घर की छत पर पतंग उड़ा रहा था। छत पर रखे स्टील के ड्रम पर चढ़कर वह पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह पीछे की ओर गिर पड़ा और छत पर निकली लोहे की सरिया पर जा गिरा। सरिया उसके गले से होते हुए सिर के आर-पार निकल गई। घटना इतनी भयावह थी कि मौके पर मौजूद लोगों की चीख निकल गई।
हर्ष की आवाज सुनकर परिजन दौड़े और उसे उस हालत में देखकर अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों की मदद से सरिया को छत से काटा गया। इसके लिए पहले पुलिस को बुलाया गया, जिसके बाद लोहे काटने वाली मशीन से सरिया काटकर बच्चे को उसी स्थिति में जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए ऑपरेशन कर सरिया को बाहर निकाल दिया है, लेकिन हर्ष की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, अगले 3-4 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं, जिसके बाद ही उसकी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
हर्ष के पिता अमरीश श्रीवास्तव, जो एक निजी संस्थान में चपरासी का काम करते हैं, ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण वे बच्चों की पढ़ाई भी ठीक से नहीं करा पा रहे हैं। परिवार में तीन बच्चे हैं और यह हादसा उनके लिए बड़ी त्रासदी बन गया है।
पुलिस का कहना है कि यह हादसा लापरवाही के कारण हुआ है, हालांकि हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है। पूरे इलाके में इस घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अमेरिका-ईरान युद्ध विराम 2026: क्या मध्य पूर्व में युद्ध की आहट तेज हो रही है?


हॉर्मुज़ संकट और अमेरिकी सैन्य तैनाती: वैश्विक शांति पर बड़ा खतरा


तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी: शक्ति प्रदर्शन या युद्ध की तैयारी?

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम: नाजुक संतुलन और अनिश्चित भविष्य

दुनिया आज एक ऐसे संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है, जहां हर निर्णय वैश्विक शांति और स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव 2026 में एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है।
मध्य पूर्व में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर—यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश, यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड—की एक साथ तैनाती सामान्य सैन्य गतिविधि नहीं मानी जा सकती। यह संकेत देता है कि क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील हैं और अमेरिका अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करना चाहता है।
सैन्य तैनाती: शक्ति प्रदर्शन या युद्ध का संकेत?
आमतौर पर अमेरिका किसी क्षेत्र में एक या दो कैरियर तैनात करता है, लेकिन तीन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की एक साथ मौजूदगी असाधारण है। प्रत्येक कैरियर अपने साथ फाइटर जेट, मिसाइल सिस्टम, डेस्ट्रॉयर और पनडुब्बियों का नेटवर्क लेकर चलता है, जो इसे एक चलता-फिरता सैन्य अड्डा बनाता है।
यह तैनाती ईरान के लिए स्पष्ट संदेश है कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब तुरंत और व्यापक होगा।
अस्थायी युद्ध विराम: विश्वास की कमी बड़ी चुनौती
8 अप्रैल 2026 से लागू 14 दिन का अस्थायी युद्ध विराम अब 27 अप्रैल तक अत्यंत नाजुक स्थिति में पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास इस विराम को कमजोर बना रहा है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव और ईरानी जहाज की जब्ती जैसी घटनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जहां ईरान इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है, वहीं अमेरिका इसे वैश्विक तेल आपूर्ति की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रहा है।
कूटनीतिक प्रयासों में गतिरोध
पाकिस्तान की मध्यस्थता में प्रस्तावित वार्ता फिलहाल ठप पड़ चुकी है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाइयों को अस्वीकार्य बताते हुए समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है।
दूसरी ओर, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्ष अपने-अपने हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा संकट का केंद्र
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
ईरान द्वारा संभावित नाकाबंदी और अमेरिका की सैन्य प्रतिक्रिया की तैयारी ने तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इसके गंभीर वैश्विक आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
रूस की भूमिका और बहुपक्षीय कूटनीति
ईरान द्वारा रूस के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाना यह दर्शाता है कि वह अमेरिका के दबाव का संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। रूस की संभावित मध्यस्थता युद्ध विराम को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
यह घटनाक्रम वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का भी संकेत देता है, जहां बहुपक्षीय कूटनीति की भूमिका बढ़ रही है।
भविष्य की स्थिति: युद्ध या समाधान?
27 अप्रैल 2026 तक की स्थिति यह संकेत देती है कि युद्ध विराम टूटने की कगार पर है। यदि कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो सैन्य संघर्ष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि, यदि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता सफल होती है, तो स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति संभव है।
निष्कर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच वर्तमान स्थिति केवल द्विपक्षीय तनाव नहीं, बल्कि वैश्विक शांति, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की बड़ी परीक्षा है। यह समय संतुलित कूटनीति, संयम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का है।

लेखक-✍️ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
(कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि)
गोंदिया, महाराष्ट्र

आरसेटी देवरिया में जूनियर ब्यूटी प्रैक्टिशनर बैच का स्टेट डायरेक्टर ने किया उद्घाटन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) देवरिया में सोमवार को जूनियर ब्यूटी प्रैक्टिशनर बैच का शुभारंभ किया गया। इस बैच का उद्घाटन मुख्य अतिथि स्टेट डायरेक्टर दया शंकर मिश्रा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि दया शंकर मिश्र मिश्रा ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना, उनकी आय में वृद्धि करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से युवा स्वरोजगार के क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं तलाश सकते हैं।
इस बैच में जनपद देवरिया के 16 विकास खंडों से कुल 30 प्रशिक्षु शामिल हुए हैं।
संस्थान के निदेशक विशाल गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कार्यक्रम में संस्थान के वरिष्ठ संकाय सोमनाथ मिश्रा, संकाय विनय शंकर मणि त्रिपाठी, कार्यालय सहायक अभिषेक तिवारी सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहें।

चुनावी रंजिश में जान से मारने की धमकी, युवक ने प्रशासन से लगाई सुरक्षा की गुहार

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बांसगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत कनईचा गांव में चुनावी रंजिश को लेकर जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक ने उच्च अधिकारियों से अपनी और परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कनईचा गांव निवासी संदीप कुमार राय उर्फ सुदर्शन राय ने आरोप लगाया है कि 25 अप्रैल 2026 को सुबह करीब 9:24 बजे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दीपक राय ने मोबाइल फोन के जरिए उन्हें और उनके नाबालिग बेटे को जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि “एफआईआर करके क्या कर लोगे…” और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

पीड़ित का कहना है कि इस घटना के बाद से उनका परिवार दहशत में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी का पूर्व में आपराधिक इतिहास रहा है और वह एक दोहरे हत्या मामले में सजा काट चुका है तथा वर्तमान में जमानत पर है, जिससे धमकी को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

संदीप राय ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस संरक्षण की भी मांग की है। फिलहाल इस मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सड़क हादसे मे युवती की मौत

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

महरो गांव में दर्दनाक सड़क हादसे में 24 वर्षीय युवती की मौके पर ही मौत हो गई। महरो गांव निवासी पूजा सिंह, पुत्री शिवजी सिंह, अपने भाई दीपक सिंह के साथ बाइक से घर लौट रही थीं। बताया जा रहा है कि वह गोरखपुर से कृषक एक्सप्रेस द्वारा बेल्थरारोड स्टेशन पहुंचीं थीं, जहां से टेम्पो के माध्यम से नवांनगर तक आईं। इसके बाद अपने भाई के साथ बाइक से अपने गांव महरो जा रही थीं।इसी दौरान रास्ते में तेज रफ्तार से आ रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उनकी बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पूजा सिंह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। बाइक पर चालक के साथ एक पांच साल का बच्चा भी था, चालक व छोटा बच्चा सुरखित हैं! हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग तुरंत सहायता के लिए दौड़े। पूजा सिंह के दो भाई हैं जो भारतीय सेना मे कार्यरत हैं, दोनों भाइयो मे सबसे छोटी थी!ग्रामीणों की मदद से घायल युवती को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया है और पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई है। घटना 10.30बजे हुई हैं! वह 29अप्रैल को एक तिलक समारोह मे शामिल होने आ रही थी! घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक की तलाश की जा रही है। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार हो गया।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तेज रफ्तार वाहनों पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कुम्हारों को मुफ्त विद्युत चाक मशीन 27 मई तक करें आवेदन

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी वीरेन्द्र प्रसाद ने बताया कि उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की समन्वित विकास कार्यक्रम योजना के तहत मिट्टी के बर्तन, खिलौने एवं मूर्तियां बनाकर जीविकोपार्जन करने वाले कुम्हारों और पारंपरिक कारीगरों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक मशीन उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद को 45 विद्युत चालित चाक मशीनों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इस योजना के लिए लाभार्थी की आयु 18 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा प्रत्येक परिवार से केवल एक व्यक्ति ही आवेदन कर सकता है। जिन परिवारों को पूर्व में किसी सरकारी योजना के तहत चाक का लाभ मिल चुका है, वे इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।
इसके अतिरिक्त जनपद को 2 पगमिल मशीनों का भी लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इसके लिए वही अभ्यर्थी पात्र होंगे, जो वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के अंतर्गत वित्तपोषित हो चुके हैं।
जिला ग्रामोद्योग अधिकारी ने बताया कि दोनों योजनाओं में आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन है। इच्छुक अभ्यर्थी विभाग की वेबसाइट upmatikalaboard.in पर आवेदन कर सकते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, जिला पंचायत भवन (प्रथम तल), देवरिया से संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि 27 मई 2026 निर्धारित है। आवेदन के साथ अभ्यर्थियों को फोटो, आधार कार्ड, राशन कार्ड, शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम प्रधान द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र तथा जाति प्रमाण पत्र की प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा।

टैक्ट्रर-ट्रॉली से टकराकर स्कॉर्पियो सवार 3 दोस्तों की मौत

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जिले के गोला थाना क्षेत्र में बेकाबू स्कॉर्पियो सड़क किनारे खड़ी गेहूं लदी ट्रॉली से टकरा गई। हादसे में तीन युवकों की मौत हो गई। हादसा गोला थाना क्षेत्र में रामजानकी मार्ग पर रविवार रात करीब 11.30 बजे का बताया जा रहा है। स्कॉर्पियो सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से पीछे से टकराई। कार का अगला हिस्सा ट्रॉली में घुस गया। हादसे में स्कॉर्पियो का बोनट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
हादसे के बाद चीख-पुकार सुनकर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। साथ ही तीनों युवकों को अस्पताल पहुंचाया गया।
आगे बैठे दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि पीछे बैठे घायल युवक ने एम्स गोरखपुर ले जाते समय दम तोड़ दिया।
बताया जा रहा है कि ट्रॉली पर सरकारी अनाज लदा था। टक्कर के बाद बोरे सड़क पर बिखर गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस को क्षतिग्रस्त वाहन से शवों को निकालने के लिए जेसीबी बुलानी पड़ी। तीनों मृतक रविवार शाम को एक साथ घर से घूमने निकले थे। बताया जा रहा है तीनों दूर के रिश्तेदार थे। पुलिस ने वाहनों को कब्जे में लेकर बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामला गोला थाना क्षेत्र के रामजानकी महामार्ग पर भर्रोह का है।
गोला क्षेत्र के कोहड़ी बुजुर्ग गांव के रहने वाले कुणाल यादव (20) पुत्र देवेंद्र यादव, अमन उर्फ अजय यादव (21) पुत्र रविन्द्र यादव और अंकुर उर्फ प्रसून यादव (22) पुत्र दिनेश यादव रविवार शाम 6 बजे स्कॉर्पियो से घूमने एक साथ निकले थे। देर रात बड़हलगंज से गोला की तरफ लौटते समय स्कॉर्पियो अनियंत्रित हो गई। कार भर्रोह में गोला की ओर सड़क मार्ग पर खड़ी ट्रॉली से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा ट्रॉली में जा घुसा और उसके परखच्चे उड़ गए।
हादसे में तीन युवकों की जान चली गई। पुलिस ने बताया कि दो ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जबकि एक की एम्स
गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई।
घटना की
तेज आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहन को खुलवाया तो चालक सीट पर बैठे कुणाल यादव और बगल की सीट पर बैठे अमन उर्फ अजय यादव की मौके पर ही मौत हो चुकी थी।
पीछे बैठे अंकुर उर्फ प्रसून यादव गंभीर रूप से घायल थे। उन्हें तत्काल बड़हलगंज के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर एम्स गोरखपुर रेफर कर दिया गया।
एम्स पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें भी मृत घोषित कर दिया।

तीनों मृतक गोला थाना क्षेत्र के कोहड़ी बुजुर्ग गांव के निवासी थे। वे रविवार शाम करीब 6 बजे एक साथ घर से निकले थे। पुलिस ने कुणाल और अमन के शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा है, जबकि अंकुर का पोस्टमार्टम एम्स में कराया जाएगा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो और ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में ले लिया है।
वाहनों को हटाने के लिए जेसीबी बुलानी पड़ी
मृतक कुणाल यादव इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा था। वह दो भाइयों में बड़ा था और उसके पिता वाहन चालक हैं। अमन उर्फ अजय तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था, जिसके पिता खेती-किसानी करते हैं।
अंकुर उर्फ प्रसून दो भाइयों में छोटा था और उसके पिता भी कृषि कार्य करते हैं। तीनों परिवारों की आर्थिक स्थिति सामान्य बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलने पर गांव में शोक का माहौल है।
बताया गया है कि ट्रॉली पर सरकारी गेहूं लदा था। टक्कर के बाद गेहूं के बोरे सड़क पर बिखर गए। क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए पुलिस को जेसीबी बुलानी पड़ी।

बारात में विवाद के बाद हिंसा, युवक की मौत से गांव में तना

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। संत कबीर नगर के धनघटा थाना क्षेत्र के गायघाट पूर्वी गांव में रविवार रात बारात के दौरान हुए विवाद में एक युवक की मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित कर गांव में सुरक्षा बढ़ा दी है।
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा के अनुसार, परछावन की रस्म के दौरान डीजे पर नाच रहे युवकों के बीच कुछ लोगों द्वारा लड़कियों पर पत्थर फेंकने की घटना से विवाद शुरू हुआ। विरोध करने पर दो पक्ष आमने-सामने आ गए और लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से हमला होने लगा।
इस हिंसक झड़प में कई लोग घायल हुए, जिनमें अनिल कपूर की हालत गंभीर हो गई। उन्हें इलाज के लिए पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और फिर गोरखपुर के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां सोमवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई।
मौत की सूचना मिलते ही गांव में आक्रोश फैल गया और भीड़ ने आरोपित जोगिंदर के घर पर पथराव कर दिया। पुलिस के पहुंचने पर विरोध हुआ, जिसके चलते अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। बाद में स्थिति को काबू में किया गया।
पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले की जांच जारी है। गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस और पीएसी तैनात है।

ऑपरेशन ‘दहन’ का बड़ा वार –करोड़ों के नशे पर चला बुल्डोजर, पुलिस का सख्त संदेश

महराजगंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 96.301 किलो मादक पदार्थ भस्म, 2.36 करोड़ का जखीरा नष्ट

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से महराजगंज पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘दहन’ के तहत एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया गया। उत्तर प्रदेश शासन एवं पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के क्रम में पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के कुशल नेतृत्व में यह अभियान संचालित किया गया, जिसके तहत विभिन्न थानों में दर्ज मामलों से संबंधित भारी मात्रा में अवैध मादक पदार्थों को विधिवत भस्म (निस्तारण) किया गया।
इस विशेष कार्रवाई के अंतर्गत थाना सिंदुरिया, ठूठीबारी, कोल्हुई एवं नौतनवां से जुड़े कुल 13 अभियोगों में न्यायालय के आदेशानुसार जब्त किए गए 96.301 किलोग्राम मादक पदार्थ — जिनमें चरस, गांजा और हेरोइन शामिल हैं — को नष्ट किया गया। इन मादक पदार्थों की अनुमानित अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 2 करोड़ 36 लाख 39 हजार 50 रुपये आंकी गई है, जो इस कार्रवाई की गंभीरता और जनपद में फैले नशे के नेटवर्क के पैमाने को दर्शाती है।
नशीले पदार्थों के निस्तारण की प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए यह कार्रवाई नौतनवां स्थित मैसर्स ए.वी. बायोमेडिकल वेस्ट सर्विसेज में कराई गई। यहां उच्च क्षमता वाले अत्याधुनिक इंसीनरेटर के माध्यम से मादक पदार्थों को पूरी तरह भस्मीभूत किया गया। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया गया, जिससे किसी प्रकार का हानिकारक प्रभाव वातावरण पर न पड़े।
पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाए रखने के लिए क्षेत्राधिकारी फरेंदा की उपस्थिति में एक अधिकृत समिति गठित की गई थी, जिसकी निगरानी में निस्तारण की कार्यवाही संपन्न हुई। समिति द्वारा प्रत्येक चरण का निरीक्षण किया गया और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन ‘दहन’ केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ चलाया जा रहा व्यापक जन-जागरूकता और दमनात्मक अभियान है। इसके माध्यम से पुलिस यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि जनपद में अवैध मादक पदार्थों के निर्माण, तस्करी और बिक्री में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
महराजगंज पुलिस की इस कार्रवाई से जहां एक ओर करोड़ों रुपये के नशे के कारोबार पर करारा प्रहार हुआ है, वहीं दूसरी ओर नशा तस्करों और असामाजिक तत्वों में भय का माहौल भी व्याप्त हुआ है। पुलिस प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आगे भी इस तरह की कठोर और प्रभावी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

सिकन्दरपुर में खराब पड़े RO वॉटर कूलर बने शोपीस, भीषण गर्मी में जनता परेशान

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सिकन्दरपुर नगर पंचायत क्षेत्र में भीषण गर्मी के बीच पेयजल की गंभीर समस्या सामने आ रही है। नगर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए RO वॉटर कूलर लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की अनदेखी के चलते ये जलस्रोत केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, सिकन्दरपुर परिसर में लगा RO वॉटर कूलर खराब है, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल पा रहा है। वहीं, प्रसिद्ध जल्पा मन्दिर परिसर में भी RO वॉटर कूलर के साथ-साथ जल प्याऊ भी बंद पड़ा है, जिससे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को गर्मी में पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।इसके अलावा, बस स्टेशन चौराहे पर स्थित चौधरी चरण सिंह पुस्तकालय के नीचे लगा RO वॉटर कूलर भी लंबे समय से खराब है। यह स्थान नगर का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। बावजूद इसके, पेयजल की सुविधा ठप है। इसी क्रम में सपना बाग नर्सरी के पास लगा वॉटर कूलर भी काम नहीं कर रहा है, जिससे आसपास के लोगों और राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत द्वारा लगाए गए ये वॉटर कूलर जनता की सुविधा के लिए थे, लेकिन रखरखाव के अभाव में ये बेकार हो चुके हैं। भीषण गर्मी में जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बेहद आवश्यक है।नगरवासियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि जल्द से जल्द इन खराब पड़े RO वॉटर कूलरों को ठीक कराया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्त्री को देह से आगे देखने की आवश्यकता

समाज की प्रगति केवल इमारतों, तकनीक और आर्थिक विकास से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि वह अपने नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, को किस दृष्टि से देखता है। यदि किसी समाज में स्त्री को केवल उसके रूप, देह या पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाए, तो वह समाज आधा सच देख रहा होता है। प्रस्तुत रचना इसी अधूरे और संकीर्ण दृष्टिकोण पर करारा प्रहार करती है। कवि यह प्रश्न उठाता है कि क्यों स्त्रियों की उपलब्धियों, उनके ज्ञान, श्रम, संघर्ष और आत्मबल को उतनी प्रमुखता नहीं मिलती, जितनी उनके बाहरी स्वरूप को मिलती है। यह प्रश्न केवल साहित्यिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से जुड़ा हुआ प्रश्न है।

आज जब दुनिया विज्ञान, तकनीक, शिक्षा और नेतृत्व के नए आयाम छू रही है, तब महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी क्षमता सिद्ध कर रही हैं। अंतरिक्ष में जाने वाली महिलाएँ केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनती हैं। वे यह संदेश देती हैं कि आकाश भी सीमा नहीं है। भारत सहित विश्व के अनेक देशों में महिला वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष यात्रियों और शोधकर्ताओं ने ऐसे कार्य किए हैं, जिनसे आने वाली पीढ़ियों का मार्ग प्रशस्त हुआ है। लेकिन दुखद सत्य यह है कि उनकी उपलब्धियों की चर्चा अक्सर सीमित दायरों में रह जाती है, जबकि उनके व्यक्तित्व की सतही बातों को अधिक महत्व दिया जाता है।

कवि ने “मैथमेटिक्स पढ़ाती महिलाओं” का उल्लेख करके एक महत्वपूर्ण संकेत दिया है। गणित जैसे विषय को लंबे समय तक पुरुष प्रधान क्षेत्र माना जाता रहा। विज्ञान और गणित में महिलाओं की भागीदारी को कम आँका गया, जबकि इतिहास में अनेक महिलाओं ने गणित, भौतिकी, खगोलशास्त्र और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में अद्भुत योगदान दिया है। आज भी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हजारों महिला शिक्षिकाएँ नई पीढ़ी को ज्ञान दे रही हैं। वे केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ातीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और तर्कशीलता का संस्कार भी देती हैं। फिर भी समाज अक्सर उनके योगदान को सामान्य मानकर अनदेखा कर देता है।

इसी प्रकार “परिवार को पालती औरतों” का जिक्र इस रचना का अत्यंत संवेदनशील पक्ष है। घर चलाना, बच्चों का पालन-पोषण करना, बुजुर्गों की सेवा करना, आर्थिक जिम्मेदारियों में भागीदारी निभाना—ये सब ऐसे कार्य हैं, जिन्हें समाज लंबे समय तक स्वाभाविक मानता रहा और इन पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। घर संभालने वाली महिला का श्रम अक्सर अदृश्य माना जाता है। यदि वही श्रम किसी संस्था या नौकरी के रूप में किया जाए, तो उसका मूल्य तय होता है; पर घर के भीतर किए गए श्रम को प्रेम और कर्तव्य कहकर सामान्य बना दिया जाता है। यह सोच बदलने की आवश्यकता है। परिवार की नींव को मजबूत रखने में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय होती है, और इसे सम्मानपूर्वक स्वीकार करना समय की मांग है।

रचना की सबसे प्रभावशाली बात यह है कि यह केवल शिकायत नहीं करती, बल्कि समाज को आईना दिखाती है। अंतिम पंक्ति—जो लोग स्त्री को केवल शरीर तक देखते हैं, वे अभागे हैं—बहुत गहरा अर्थ रखती है। यहाँ “अभागे” शब्द केवल आलोचना नहीं, बल्कि दया का भाव भी व्यक्त करता है। ऐसे लोग स्त्री के वास्तविक स्वरूप को समझने की क्षमता से वंचित हैं। वे उसकी संवेदना, बुद्धिमत्ता, सृजनशीलता, संघर्षशीलता और नेतृत्व क्षमता को नहीं देख पाते। वास्तव में वे स्त्री का नहीं, अपनी सोच का नुकसान करते हैं।

आज सोशल मीडिया और विज्ञापन की दुनिया में स्त्री की छवि को लेकर अनेक चुनौतियाँ मौजूद हैं। अक्सर महिलाओं को आकर्षण की वस्तु बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। उनकी योग्यता से अधिक उनके पहनावे, रूप-रंग और निजी जीवन पर चर्चा होती है। सार्वजनिक जीवन में सफल महिलाओं को भी कई बार उनकी उपलब्धियों से अधिक उनके बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर आँका जाता है। यह प्रवृत्ति केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीति, खेल, शिक्षा और कॉर्पोरेट जगत में भी दिखाई देती है। यह मानसिकता बदलने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

शिक्षा इस बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम है। यदि बचपन से लड़कों और लड़कियों दोनों को समानता, सम्मान और संवेदनशीलता का संस्कार दिया जाए, तो आने वाली पीढ़ियाँ अधिक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण कर सकती हैं। स्कूलों में ऐसी कहानियाँ, उदाहरण और पाठ होने चाहिए जो महिलाओं की उपलब्धियों को सामने लाएँ। बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि स्त्री केवल एक संबंध नहीं, बल्कि स्वतंत्र व्यक्तित्व है। उसकी पहचान उसके सपनों, परिश्रम और उपलब्धियों से बनती है।

मीडिया की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाचार, फिल्में, धारावाहिक और डिजिटल मंच समाज की सोच को प्रभावित करते हैं। यदि मीडिया महिलाओं को केवल परंपरागत भूमिकाओं या बाहरी आकर्षण तक सीमित दिखाएगा, तो समाज भी उसी दृष्टि को अपनाएगा। इसके विपरीत यदि महिला वैज्ञानिकों, शिक्षिकाओं, उद्यमियों, किसानों, खिलाड़ियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की कहानियों को प्रमुखता दी जाए, तो समाज की चेतना सकारात्मक दिशा में बढ़ेगी। आज आवश्यकता है कि प्रेरक महिला चरित्रों को अधिक स्थान मिले।

कार्यस्थलों पर भी महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव जरूरी है। महिला कर्मचारी या अधिकारी को उसकी क्षमता, नेतृत्व और कार्यकुशलता के आधार पर सम्मान मिलना चाहिए, न कि उसके लिंग के आधार पर पूर्वाग्रहों से देखा जाए। समान वेतन, सुरक्षित वातावरण और अवसरों की समानता केवल नीतिगत विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के मूल तत्व हैं। जब महिलाएँ बिना भेदभाव के काम कर पाएँगी, तभी समाज अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुँच सकेगा।

परिवार स्तर पर भी बदलाव की आवश्यकता है। अक्सर बेटियों को सीमाओं और बेटों को स्वतंत्रता के साथ पाला जाता है। यह अंतर बचपन से ही असमानता को जन्म देता है। यदि परिवार बेटियों को भी सपने देखने, निर्णय लेने और आगे बढ़ने का समान अवसर दें, तो समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव है। साथ ही बेटों को भी यह सिखाया जाना चाहिए कि सम्मान, साझेदारी और संवेदना ही मजबूत रिश्तों की नींव हैं।

यह रचना हमें यह भी समझाती है कि स्त्री का सम्मान केवल नारों से नहीं होगा। महिला दिवस पर शुभकामनाएँ देना पर्याप्त नहीं, यदि रोजमर्रा के व्यवहार में भेदभाव बना रहे। सम्मान का अर्थ है—उसकी बात सुनना, उसकी मेहनत को स्वीकार करना, उसके निर्णयों का आदर करना और उसे स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार करना। यह बदलाव भाषा, व्यवहार, सोच और व्यवस्था—चारों स्तरों पर होना चाहिए।

इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं को अवसर मिले हैं, उन्होंने असाधारण उपलब्धियाँ हासिल की हैं। राजनीति से विज्ञान तक, साहित्य से खेल तक, शिक्षा से उद्यमिता तक—हर क्षेत्र में महिलाओं ने नई ऊँचाइयाँ छुई हैं। इसलिए यह कहना कि स्त्री किसी क्षेत्र में कमतर है, केवल पूर्वाग्रह है, सत्य नहीं। समाज को चाहिए कि वह महिलाओं को प्रेरणा, नेतृत्व और परिवर्तन की शक्ति के रूप में देखे।

रचना की शक्ति इसी में है कि वह सरल शब्दों में गहरी बात कहती है। यह कविता केवल स्त्री की प्रशंसा नहीं करती, बल्कि समाज से प्रश्न पूछती है—क्या हम अब भी स्त्री को आधा देखकर संतुष्ट हैं? क्या हम उसकी उपलब्धियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं? क्या हम उसे बराबरी की दृष्टि से देखने का साहस रखते हैं? ये प्रश्न हर व्यक्ति के सामने खड़े हैं।

समय आ गया है कि हम स्त्री को देह से आगे देखें—विचार के रूप में, संघर्ष के रूप में, सृजन के रूप में, नेतृत्व के रूप में और पूर्ण मनुष्य के रूप में। जब समाज यह दृष्टि अपनाएगा, तभी वास्तविक समानता संभव होगी। स्त्री को सीमित देखने वाली मानसिकता जितनी जल्दी बदलेगी, उतनी जल्दी समाज भी आगे बढ़ेगा। क्योंकि स्त्री को सम्मान देना केवल महिला अधिकारों का विषय नहीं, बल्कि सभ्यता की परिपक्वता का प्रमाण है।

डॉ. प्रियंका सौरभ कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक