Thursday, June 25, 2026
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सुझावों की भीड़ में खोता विवेक, एक प्रेरक प्रसंग

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मो. मोइजुद्दीन | राष्ट्र की परम्परा
(रांची, झारखंड)

एक व्यक्ति ने खोली अगरबत्ती की दुकान,
सुगंध से भरी, किस्मत की थी पहचान।
बोर्ड लगाया बाहर उसने सरल सा एक,
“यहाँ सुगंधित अगरबत्तियां मिलती हैं” — नेक।

धंधा चला, ग्राहक आए, बातें हुईं हजार,
एक ने कहा— सुगंधित शब्द है बेकार।
अगरबत्ती में दुर्गंध की कल्पना कौन करे?
मान ली बात, शब्द मिटा, सोच लिया— सुधरे।

अब बोर्ड कहे— यहाँ अगरबत्तियां मिलती हैं,
दूसरा बोला— “यहाँ” क्यों? दुकान यहीं दिखती है।
मान ली सलाह, शब्द फिर हटा दिया,
बोर्ड छोटा होता गया, विवेक सिमटता गया।

फिर किसी ने कहा— “इतना क्यों लिखते हो भाई?
सिर्फ ‘अगरबत्ती’ ही काफी है, सच्चाई!”
मान ली बात, बोर्ड बस एक शब्द रह गया,
व्यापार नहीं, सुझावों का बोझ बढ़ गया।

अंत में आया एक ज्ञानी, शिक्षक का रूप,
कहा— “बोर्ड ही क्यों? दुकान खुद है प्रमाण, स्वरूप!”
बोर्ड हट गया, दुकान मौन हो गई,
पहचान बिना, बिक्री धीरे-धीरे खो गई।

समय बीता, चिंता बढ़ी, व्यापार हुआ मंद,
मित्र आया वर्षों बाद, देखा पूरा प्रबंध।
सब सुनकर बोला— “तू ठगा गया, मित्र!
सबसे पहले जो था, वही था तेरा मंत्र।”

“इतनी बड़ी दुकान और एक बोर्ड नहीं?
लिख देता— यहाँ सुगंधित अगरबत्तियां मिलती हैं — सही!”

शिक्षा (Life Lesson)

जीवन में हर कदम पर मिलेंगे सुझाव,
बिन विशेषज्ञ बने, देंगे ज्ञान का बहाव।
हर सलाह मानोगे, तो राह भटक जाओगे,
अपनी ही समझ से दूर, खुद को खो जाओगे।

हर विषय के लिए सुनो सही विशेषज्ञ की बात,
या अपने अंतरात्मा की सच्ची आवाज़ साथ।
क्योंकि तुम्हें तुमसे बेहतर कोई नहीं जानता,
यही जीवन का सत्य है, यही अनुभव बताता।

रेलवे की बड़ी योजना: अगले 5 वर्षों में ट्रेनों की संचालन क्षमता होगी दोगुनी, वाराणसी भी शामिल

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय रेलवे ने बढ़ती यात्री मांग और व्यस्त स्टेशनों पर ट्रैफिक को सुचारू बनाने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों से संचालित होने वाली रेल गाड़ियों की शुरुआती संचालन क्षमता को दोगुना किया जाएगा। रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के 48 प्रमुख शहरों में ट्रेन संचालन क्षमता दोगुनी करना है, जिसमें वाराणसी शहर भी शामिल है।

भारतीय रेलवे के अनुसार, व्यस्त स्टेशनों पर क्षमता वृद्धि के लाभ शीघ्र प्राप्त करने के लिए अल्पकालिक और मध्यम अवधि के उपायों पर काम किया जा रहा है। मौजूदा बुनियादी ढांचे का विस्तार कर भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जाएगा।

वाराणसी में रेलवे अवसंरचना का तेज विस्तार

वाराणसी शहर में पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत दो प्रमुख स्टेशन — बनारस रेलवे स्टेशन और वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन — यात्रियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। दोनों स्टेशनों पर क्षमता विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए जा चुके हैं और कई परियोजनाएं प्रगति पर हैं।

बनारस रेलवे स्टेशन की वर्तमान स्थिति

बनारस स्टेशन पर वर्तमान में:
• 08 प्लेटफॉर्म
• 04 वॉशिंग पिट
• 04 स्टेबलिंग लाइन
• कुल 10 रनिंग लाइन

इन सुविधाओं के माध्यम से प्रतिदिन 104 सवारी गाड़ियां और 14 मालगाड़ियां संचालित की जा रही हैं। साथ ही, यहां से प्रतिदिन 52 ट्रेनें ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती हैं।
क्षमता विस्तार के तहत 01 नई स्टेबलिंग लाइन का कार्य स्वीकृत है, जिसके पूरा होने के बाद और अधिक ट्रेनों का संचालन संभव होगा। इसके अलावा, अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत किए गए विकास कार्यों से यात्री प्रबंधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

वाराणसी सिटी स्टेशन पर भी बड़ा विस्तार

वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन पर वर्तमान में:
• 05 प्लेटफॉर्म
• 01 वॉशिंग पिट
• 01 स्टेबलिंग लाइन
• कुल 09 रनिंग लाइन

यहां से प्रतिदिन 108 सवारी गाड़ियां और 14 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं, जबकि 28 ट्रेनें प्रतिदिन ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती हैं।
क्षमता विस्तार के लिए यहां 02 रनिंग लाइन, 01 आइलैंड प्लेटफॉर्म, 02 स्टेबलिंग लाइन और 01 डॉक लाइन के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद स्टेशन से ट्रेनों का संचालन और अधिक बढ़ सकेगा।

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दोहरीकरण और विद्युतीकरण से बढ़ी रेल क्षमता

वाराणसी से जुड़े कई महत्वपूर्ण रेल खंडों पर दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिनमें शामिल हैं:

• बनारस–प्रयागराज
• वाराणसी सिटी–मऊ
• वाराणसी सिटी–औड़िहार–जौनपुर
• वाराणसी सिटी–औड़िहार–मऊ–आजमगढ़–शाहगंज
• वाराणसी सिटी–गाजीपुर–बलिया–बकुलहा

इसके अलावा बकुलहा–मांझी और बेल्थरा रोड–पिविकोल रेल खंड के दोहरीकरण का कार्य अंतिम चरण में है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से वाराणसी क्षेत्र में रेलवे क्षमता में और अधिक वृद्धि होगी।

2030 तक लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका

भारतीय रेलवे द्वारा वाराणसी शहर में रेल संचालन क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने में बनारस और वाराणसी सिटी स्टेशनों पर किए जा रहे क्षमता विस्तार कार्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इससे न केवल ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को भी बेहतर सुविधाएं और सुगम यात्रा अनुभव मिलेगा।

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नेताजी के कंधे पर चढ़कर गांधी पर प्रहार और हिंदू राष्ट्र का भागवत एलान

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लेखक: बादल सरोज
कोलकाता/नागपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ नेतृत्व द्वारा दिए जा रहे बयानों ने एक बार फिर महात्मा गांधी, स्वतंत्रता संग्राम और भारत की संवैधानिक आत्मा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि आरएसएस ने अपने 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर गांधी के विचारों पर परोक्ष प्रहार और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम का राजनीतिक उपयोग शुरू कर दिया है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा हाल ही में नागपुर और कोलकाता में दिए गए भाषणों को इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। कोलकाता में ‘RSS @100’ विषय पर दिए गए व्याख्यान में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के प्रतीकों, विशेषकर गांधी के चरखे, पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “केवल चरखा चलाने से आज़ादी नहीं मिली।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी सीधे तौर पर गांधी और उनके नेतृत्व में चले जनआंदोलन पर सवाल खड़ा करती है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर वैचारिक दावा

अपने वक्तव्य में भागवत ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आरएसएस का लक्ष्य एक ही था — भारत को शक्तिशाली बनाना, भले ही रास्ते अलग रहे हों। उन्होंने नेताजी को “आधुनिक भारत के शिल्पकारों” में शामिल करते हुए उनके राष्ट्रवाद को अपनाने की अपील की।

हालांकि इतिहासकारों और विद्वानों का कहना है कि नेताजी का राष्ट्रवाद धर्मनिरपेक्ष और समावेशी था, जो हिंदू या मुस्लिम राष्ट्र की अवधारणा से कोसों दूर था। नेताजी ने 1944 में टोक्यो विश्वविद्यालय में दिए अपने प्रसिद्ध व्याख्यान “मेरे सपनों का भारत” में स्पष्ट कहा था कि स्वतंत्र भारत की सरकार सभी धर्मों के प्रति समान रूप से तटस्थ होगी।

हिंदू राष्ट्र पर खुला एलान

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में यह दावा भी किया कि “भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है और इसके लिए संविधान की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने संसद और संविधान को दरकिनार करते हुए इसे “सत्य” बताया। इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है, क्योंकि यह भारत के संवैधानिक ढांचे और धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना से टकराता है।

इतिहास बनाम संघ का दावा

इतिहास के दस्तावेज़ बताते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस हिंदू महासभा और सांप्रदायिक राजनीति के कट्टर विरोधी थे। 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग से जुड़े लोगों को कांग्रेस की समितियों से बाहर करने का प्रस्ताव पारित कराया था।
यह तथ्य स्वयं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की डायरी और सरकारी अभिलेखों में दर्ज हैं।

इतना ही नहीं, आज़ाद हिंद फ़ौज के संघर्ष के दौरान हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग से जुड़े नेताओं द्वारा अंग्रेज सरकार के साथ सहयोग के प्रमाण भी राष्ट्रीय अभिलेखागार में मौजूद हैं।

गांधी, हिंदू राष्ट्र और संघ की असहजता

विश्लेषकों का कहना है कि गांधी संघ के लिए आज भी असुविधाजनक हैं, क्योंकि वे कट्टर धार्मिक आस्था के बावजूद हिंदू राष्ट्र के प्रबल विरोधी थे। गांधी का स्पष्ट मत था कि चाहे देश की पूरी आबादी एक ही धर्म की क्यों न हो, राज्य को धर्म से अलग रखा जाना चाहिए।
संघ के हालिया बयानों को कई लोग गांधी के विचारों को धीरे-धीरे हाशिए पर धकेलने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। मनरेगा जैसे कार्यक्रमों से गांधी नाम हटाने की बहस को भी इसी वैचारिक दिशा से जोड़कर देखा जा रहा है।

सृष्टि चौहान बनीं भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट

जलालाबाद की बेटी ने बढ़ाया जिले का मान

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की विधानसभा जलालाबाद की राजपूत समाज की बेटी सृष्टि चौहान ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर जिले और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे जनपद में खुशी और गर्व का माहौल है। सृष्टि चौहान ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल कर नारी शक्ति का एक और सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है।

भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित होकर सृष्टि ने यह साबित कर दिया है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। देश सेवा का जज्बा और राष्ट्र के प्रति समर्पण उनकी सफलता का मूल आधार रहा। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र की बेटियों को आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने की प्रेरणा मिलेगी।

सृष्टि चौहान की सफलता पर क्षेत्रीय लोगों, समाजसेवियों और शुभचिंतकों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य और देश सेवा के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने आशा जताई कि वह भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देकर देश और समाज का गौरव बढ़ाती रहेंगी।

नगर आयुक्त ने किया कान्हा उपवन का निरीक्षण, गौवंश संरक्षण व शीतकालीन व्यवस्थाओं को लेकर दिए सख्त निर्देश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। नगर निगम क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों और पशु संरक्षण व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के लिए नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने शनिवार को महेवा स्थित कान्हा उपवन का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिदिन पकड़कर लाए जा रहे सांड एवं गायों की संख्या, उनके रखरखाव और उपलब्ध सुविधाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कान्हा उपवन परिसर में जल निकासी की समस्या के समाधान के लिए पिछले करीब 20 दिनों से नाला निर्माण का कार्य प्रगति पर है। नगर आयुक्त ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।

शीतकालीन व्यवस्थाओं पर विशेष जोर

ठंड के मौसम को देखते हुए नगर आयुक्त ने गौवंश के लिए बने शेड की दीवारों को ऊँचा कराने तथा चारों ओर ठंड से बचाव के लिए पर्दे लगाए जाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कान्हा उपवन परिसर में अलाव की संख्या बढ़ाने के भी आदेश दिए गए, ताकि ठंड से गौवंश को सुरक्षित रखा जा सके।

नगर आयुक्त ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गौवंश संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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सीएम ग्रिड फेज-1 व फेज-2 कार्यों का संयुक्त निरीक्षण

इसी क्रम में नगर आयुक्त एवं मुख्य अभियंता द्वारा सीएम ग्रिड फेज-1 एवं फेज-2 के कार्यों का संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और निर्धारित समय-सीमा की गहन समीक्षा की गई।

नगर आयुक्त ने निर्देश दिए कि सीएम ग्रिड फेज-1 का कार्य फरवरी माह तक हर हाल में पूरा किया जाए, जबकि सीएम ग्रिड फेज-2 के कार्यों को तीन अलग-अलग स्थानों से शीघ्र प्रारंभ कर तय समय-सीमा में पूरा किया जाए।

निरीक्षण के दौरान नाले के बेड लेवल को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। यूनिवर्सिटी चौराहा से गणेश चौक तथा गणेश चौक से विजय चौक तक नाले के बेड लेवल को दुरुस्त करने और नाले के पानी को यूनिवर्सिटी चौराहा तक ले जाने के निर्देश दिए गए।

नगर आयुक्त ने अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि कार्य की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए और सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी करते हुए उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

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अंतर्जनपदीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में शामिल हुए सांसद बहराइच

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में भानीरामका अतिथि गृह में 24 से 28 दिसंबर तक आयोजित अंतर्जनपदीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में बहराइच सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने जनपद आगरा से आए युवाओं को बहराइच और श्रावस्ती के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों की विस्तृत जानकारी दी।

सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने जनपद आगरा से आए 37 प्रतिभागियों को बहराइच एवं श्रावस्ती के प्रमुख दर्शनीय स्थलों—चित्तौरा झील के तट पर स्थित महाराजा सुहेलदेव स्मारक, पयागपुर स्थित बघेल ताल वेटलैंड, कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार तथा भगवान गौतम बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती—के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया।

युवाओं को आत्मनिर्भर बनने का दिया संदेश

सांसद ने युवाओं को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भर भारत, युवा सशक्तिकरण और रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न युवा कल्याण योजनाओं की जानकारी देते हुए सभी प्रतिभागियों से इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

पांच दिवसीय कार्यक्रम की गतिविधियों की जानकारी

कार्यक्रम का संचालन माय भारत केंद्र के विशेष कार्याधिकारी (लेखा एवं कार्यक्रम पर्यवेक्षक) इंद्रसेन चौधरी ने किया। उन्होंने बताया कि इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में जनपद आगरा के 35 युवक-युवतियां और दो ग्रुप लीडर प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम के अंतर्गत क्षेत्र भ्रमण, विषय विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

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सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखा उत्साह

कार्यक्रम में जनहित फाउंडेशन कल्पीपारा के अध्यक्ष उमेश चंद्र, जिला प्रशिक्षक विनय श्रीवास्तव, मानस इंटर कॉलेज के प्राचार्य रमेश चंद्र मिश्र, युवा समाजसेवी नरेंद्र कुमार यादव, आशीष पांडेय, महिला युवा समाजसेवी सोनम वर्मा, प्रिंसी वर्मा और सुधा मिश्रा सहित अन्य वक्ताओं ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान विधायक सदर अनुपमा जायसवाल के प्रतिनिधि अशोक जायसवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रीय गीत और लोकगीतों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम पर्यवेक्षक इंद्रसेन चौधरी ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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भारतीय युवक पर नेपाली नागरिक होने का आरोप

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र में एक भारतीय युवक पर नेपाली नागरिक होने का गंभीर आरोप सामने आया, हालांकि पुलिस की निष्पक्ष जांच में युवक को पुस्तैनी भारतीय नागरिक पाया गया। मामला पारिवारिक जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

नवाबगंज थाना क्षेत्र के सीमावर्ती गांव गुलरिया निवासी शैलेश कुमार शर्मा पुत्र बावन प्रसाद शर्मा ने बताया कि वह जन्म से भारतीय नागरिक हैं और उनके माता-पिता तथा दादा-दादी सहित पूरा परिवार भारतीय नागरिक है। पारिवारिक भरण-पोषण के लिए वह पड़ोसी देश नेपाल के नेपालगंज उप-महानगरपालिका, वार्ड संख्या-11 स्थित न्यू टंडन ज्वेलर्स में कार्यरत हैं।

भारतीय दूतावास में कराया गया है विधिवत पंजीकरण

शैलेश कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि नेपाल में रोजगार के उद्देश्य से उन्होंने भारतीय राजदूतावास, काठमांडू में विधिवत पंजीकरण कराया है, जिसका पंजीकरण क्रमांक 1873/ऑब्लिक/2025 है। इसके बावजूद पारिवारिक स्तर पर चले आ रहे जमीनी विवाद के कारण उनके चाचा और चचेरे भाइयों द्वारा उन्हें नेपाली नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया गया।

आरोप निराधार, सामाजिक छवि खराब करने का प्रयास

शैलेश कुमार शर्मा का कहना है कि लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी पक्ष के पास नेपाल नागरिकता से संबंधित कोई भी वैधानिक या दस्तावेजी प्रमाण है, तो उसे कानूनन पुलिस या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, न कि झूठे आरोप लगाकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जाए।

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पुलिस जांच में खुलासा, कई पीढ़ियों से भारतीय

इस मामले में थाना नवाबगंज पुलिस एवं पुलिस चौकी सतलियाँ द्वारा निष्पक्षता और विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए जांच की गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि शैलेश कुमार शर्मा की कई पीढ़ियां भारत की नागरिक रही हैं।

थाना प्रभारी निरीक्षक रमाशंकर यादव ने बताया कि युवक पर लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की गई है। जांच में सामने आया है कि वह और उसका परिवार पुस्तैनी रूप से भारतीय है। आरोप लगाने वाले स्वयं उसके चाचा और चचेरे भाई हैं।

मामला न्यायालय में विचाराधीन

पुलिस के अनुसार, फिलहाल यह प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम सत्यता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। पुलिस ने कानून के दायरे में रहते हुए आवश्यक कदम उठाए हैं।

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भयानक मानवीय संकट से जूझ रहा अफगानिस्तान, भुखमरी की चपेट में करोड़ों लोग

(राष्ट्र की परम्परा), अफगानिस्तान इस समय अपने सबसे गंभीर मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। भुखमरी, बेरोजगारी, ठंड और आर्थिक बदहाली ने लाखों लोगों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। हालात इतने भयावह हैं कि देश की करीब आधी आबादी आज जीवित रहने के लिए अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता पर निर्भर है, लेकिन अब वही मदद भी तेजी से घटती जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (ICRC) के अनुसार, 2025 में अफगानिस्तान की लगभग 2.29 करोड़ आबादी, यानी देश की करीब 50 प्रतिशत जनसंख्या को किसी न किसी रूप में मानवीय सहायता की आवश्यकता पड़ी है। इसका सीधा अर्थ यह है कि करोड़ों लोग बिना बाहरी मदद के अपना पेट भरने में असमर्थ हैं।

घटती अंतरराष्ट्रीय मदद ने बढ़ाई चिंता

सबसे बड़ी चिंता यह है कि अफगानिस्तान को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में भारी कटौती की गई है। अमेरिका समेत कई देशों द्वारा सहायता कम किए जाने के कारण वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) जैसे संगठन सीमित संसाधनों के साथ काम करने को मजबूर हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि इस सर्दी में करीब 1.7 करोड़ अफगान गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 लाख अधिक है। ठंड, बढ़ती महंगाई और रोजगार के अवसरों की कमी ने हालात को और भयावह बना दिया है।

सूखा, भूकंप और कमजोर अर्थव्यवस्था से बिगड़े हालात

अफगानिस्तान पहले ही कमजोर अर्थव्यवस्था से जूझ रहा है। ऊपर से सूखा, भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं और पड़ोसी देशों से लाखों शरणार्थियों की वापसी ने संकट को विस्फोटक बना दिया है। भोजन, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संसाधन तेजी से कम पड़ते जा रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कई वर्षों में पहली बार है जब सर्दियों के दौरान लगभग कोई अंतरराष्ट्रीय खाद्य वितरण नहीं हो पाया। जहां 2024 में करीब 56 लाख लोगों को खाद्य सहायता दी गई थी, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर मात्र 10 लाख रह गई।
फंड की कमी के चलते संयुक्त राष्ट्र ने संकेत दिया है कि 2026 में केवल 39 लाख सबसे जरूरतमंद लोगों पर ही ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे बाकी आबादी के लिए संकट और गहरा सकता है।

71 लाख शरणार्थियों की वापसी से बढ़ा बोझ

अफगानिस्तान के शरणार्थी मामलों के मंत्री अब्दुल कबीर के अनुसार, पिछले चार वर्षों में लगभग 71 लाख अफगान शरणार्थी देश लौट चुके हैं। इनमें से कई लोगों के पास न रोजगार है, न घर और न ही जीवनयापन के पर्याप्त साधन।

रहीमुल्लाह भी इन्हीं लौटने वालों में शामिल हैं। वह पहले अफगान सेना में कार्यरत थे। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद वह पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन दो साल बाद उन्हें वापस अफगानिस्तान भेज दिया गया। अब वह भी भुखमरी और बेरोजगारी से जूझ रहे लाखों लोगों की कतार में खड़े हैं।

मानवता के सामने बड़ा सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते अफगानिस्तान के लिए सहायता नहीं बढ़ाई, तो यह संकट और अधिक जानलेवा रूप ले सकता है। आने वाले महीनों में भुखमरी, कुपोषण और बीमारियों से मरने वालों की संख्या में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।

ठंड व शीतलहर के बीच डीएम ने वृद्धाश्रमों का किया निरीक्षण, सुविधाओं का लिया जायजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। ठंड व शीतलहर से बचाव के दृष्टिगत जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जनपद के किसान सेवा संस्थान द्वारा संचालित वृद्धाश्रम सियारा सांथा का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने वृद्धजनों से कुशल-क्षेम जाना तथा ठंड से बचाव हेतु कंबल सहित आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित बनाए रखने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। अधिकारियों ने बताया कि वृद्धजनों के लिए कंबल सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था कर दी गई है।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने वृद्धजनों से संवाद कर वृद्धाश्रम में उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं और सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने वृद्धाश्रम के संचालक को भोजन, नाश्ता, रहने की व्यवस्था, साफ-सफाई सहित सभी सुविधाओं को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए, ताकि ठंड के मौसम में बुजुर्गों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इसके पश्चात जिलाधिकारी ने केरमुआ में निर्माणाधीन वृद्धाश्रम का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता एवं अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी, तहसीलदार खलीलाबाद आनंद ओझा, जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार तथा ओएसडी राकेश कुमार उपस्थित रहे।

यूं ही कोई जेटली नहीं बन जाता

भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि प्रभाव से होती है। अरुण जेटली ऐसे ही नेता थे। राजनीति, कानून और नीति निर्माण, तीनों क्षेत्रों में समान अधिकार रखने वाले जेटली को अनौपचारिक रूप से “पढ़े-लिखे विद्वान मंत्री” के रूप में देखा जाता था। वे भारतीय जनता पार्टी के लिए केवल एक वरिष्ठ नेता नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में समाधान निकालने वाले संकटमोचक भी थे।
सौम्य स्वभाव, संतुलित भाषा और स्पष्ट दृष्टि उनकी राजनीतिक पहचान थी। वे बिना शोर-शराबे के बड़े निर्णयों को दिशा देने वाले नेता थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी और सरकार के लिए वे सेतु की भूमिका निभाते रहे। चाहे संगठन के भीतर समन्वय हो या विपक्ष के साथ संवाद, जेटली हर मोर्चे पर संतुलन साधने में सक्षम थे। स्वास्थ्य कारणों से उनका सक्रिय राजनीतिक जीवन समय से पहले थम गया, लेकिन उनका योगदान भारतीय राजनीति में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
जेटली की सबसे बड़ी शक्ति उनका संवाद कौशल था। कानून की शिक्षा ने उन्हें तार्किक सोच दी, वहीं सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव ने उनकी बातों में विश्वसनीयता पैदा की। इसी वजह से उन्होंने कानून, वाणिज्य और वित्त जैसे जटिल मंत्रालयों को कुशलता से संभाला। वस्तु एवं सेवा कर जैसे ऐतिहासिक सुधार उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि रहे, जिसने देश की कर प्रणाली को नई दिशा दी।
राजनीतिक रणनीति के स्तर पर भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। “मोदी है तो मुमकिन है” जैसे प्रभावी नारे की परिकल्पना और रणनीति में उनकी भूमिका मानी जाती है। बिहार में भाजपा के विस्तार और जदयू जैसे दलों के साथ समन्वय बनाने में भी जेटली की अहम भूमिका रही। वे विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए भी मध्यम मार्ग के समर्थक थे। यही कारण था कि विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनका संवाद बना रहता था। संसद में वे जितने प्रखर थे, व्यक्तिगत रिश्तों में उतने ही सहज और उदार।
वाजपेयी काल से लेकर मोदी काल तक के दौर में भाजपा को संघर्ष और सत्ता दोनों का अनुभव हुआ। संघर्ष के वर्षों में जेटली जैसे नेताओं की राजनीतिक सूझबूझ ने कार्यकर्ताओं में विश्वास बनाए रखा। वे मानते थे कि राजनीति केवल टकराव नहीं, बल्कि धैर्य, संवाद और निरंतरता का अभ्यास है।
राजनीति के साथ-साथ उनका कानूनी जीवन भी उतना ही सशक्त रहा। 1977 में वकालत की शुरुआत कर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अपनी पहचान बनाई। 1990 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामांकन, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की जिम्मेदारी और कई चर्चित मामलों में सहभागिता उनकी विधिक क्षमता का प्रमाण रही। कानून और समसामयिक विषयों पर उनके लेख आज भी गंभीर विमर्श के संदर्भ माने जाते हैं।
अरुण जेटली का जीवन इस बात का उदाहरण है कि विचार, संवाद और संतुलन के जरिए राजनीति को गरिमा दी जा सकती है। वे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन राजनीति में विवेक, संयम और संवाद की जो परंपरा उन्होंने स्थापित की, वह आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती रहेगी।

प्रकृति के सुकुमार महाकवि सुमित्रानंदन पंत: शब्दों में बसी संवेदना की अमर यात्रा

पुनीत मिश्र

हिंदी साहित्य की वह उजली धारा, जिसमें प्रकृति, मानवता और सौंदर्य एक साथ प्रवाहित होते हैं। उसका नाम सुमित्रानंदन पंत है। उनकी पुण्यतिथि पर स्मरण करते हुए यह स्पष्ट होता है कि पंत केवल कवि नहीं थे, बल्कि हिंदी कविता को नई दृष्टि, नई भाषा और नई संवेदना देने वाले युगप्रवर्तक साहित्यकार थे।
पंत का काव्य जीवन प्रकृति से गहरे जुड़ाव का उदाहरण है। हिमालय की गोद में पले-बढ़े पंत की रचनाओं में पर्वत, वन, पुष्प, पवन, नदी और आकाश केवल दृश्य नहीं, बल्कि जीवंत अनुभूतियाँ बनकर उपस्थित होते हैं। उनकी कविता में प्रकृति मानवीय संवेदना से संवाद करती है। कभी आनंद देती है, कभी करुणा, तो कभी आत्मचिंतन का अवसर।
छायावाद के प्रमुख स्तंभों में गिने जाने वाले पंत ने हिंदी कविता को कोमलता, लय और सौंदर्य से समृद्ध किया। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ होते हुए भी सहज और प्रवाहमयी है। “पल्लव”, “गुंजन”, “युगांत”, “लोकायतन” जैसी कृतियाँ उनके काव्य-विकास की विविध दिशाओं को रेखांकित करती हैं। प्रारंभिक काव्य में जहां प्रकृति और सौंदर्य का स्वप्निल संसार है, वहीं आगे चलकर उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानव-मूल्य और प्रगतिशील चेतना का स्पष्ट स्वर दिखाई देता है।
पंत का साहित्य केवल भावनाओं का संसार नहीं रचता, बल्कि विचारों की जमीन भी तैयार करता है। वे व्यक्ति को प्रकृति से जोड़ते हैं, समाज से जोड़ते हैं और अंततः मानवता के व्यापक सरोकारों से जोड़ते हैं। उनकी कविताएँ पाठक को भीतर से परिष्कृत करती हैं। संवेदनशील बनाती हैं, सोचने को विवश करती हैं।
हिंदी साहित्य में उनके अवदान को पद्मभूषण, ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों द्वारा मान्यता मिली। ये सम्मान उनकी रचनात्मक ऊँचाइयों और साहित्यिक प्रभाव की स्वीकृति हैं, परंतु उनकी वास्तविक उपलब्धि वह पीढ़ियाँ हैं जो आज भी उनकी कविताओं में सौंदर्य, शांति और मानवीय मूल्य खोजती हैं।
पुण्यतिथि पर सुमित्रानंदन पंत का स्मरण केवल अतीत को नमन करना नहीं, बल्कि उस काव्य-दृष्टि को जीवित रखना है जो प्रकृति के साथ सामंजस्य, मनुष्य के भीतर करुणा और समाज में सौंदर्य की स्थापना करती है। पंत की कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। क्योंकि प्रकृति, संवेदना और मानवता की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती।

छत्तीसगढ़ की माटी की सुगंध: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ‘मास्टरजी’ की साहित्यिक विरासत

डॉ. संदीप मिश्र

छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज, वन और नदियों के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यह ऐसी विभूतियों की जन्मस्थली भी रही है जिन्होंने अपने साहित्य से भारतवर्ष की चेतना को गहराई तक स्पर्श किया। इन्हीं अनमोल रत्नों में एक नाम है, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘मास्टरजी’ कहा गया। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण करना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि उस विचार-धारा को पुनः जीवित करना है, जिसने साहित्य को जीवन से जोड़ दिया।
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का व्यक्तित्व सरलता और गंभीरता का अनूठा संगम था। शिक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को केवल अक्षर-ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि जीवन-मूल्यों की शिक्षा भी दी। इसी कारण ‘मास्टरजी’ नाम उनके व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा बन गया। साहित्य उनके लिए मनोरंजन या प्रतिष्ठा का साधन नहीं, बल्कि समाज से संवाद करने का माध्यम था।
उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की माटी की महक स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। ग्रामीण जीवन, लोकसंस्कृति, सामाजिक विषमताएँ और मानवीय संवेदनाएँ ये सब उनके साहित्य के केंद्र में रहीं। उन्होंने सरल भाषा में गहरी बातें कहने की कला विकसित की। यही कारण है कि उनका लेखन सामान्य पाठक से लेकर गंभीर अध्येता तक सभी को समान रूप से आकर्षित करता है।
मास्टरजी का साहित्य आदर्शवाद और यथार्थवाद के बीच संतुलन स्थापित करता है। वे समाज की कमजोरियों को पहचानते भी हैं और उन्हें सुधारने का मार्ग भी सुझाते हैं। उनकी रचनाओं में नैतिकता उपदेश के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के स्वाभाविक अनुभव के रूप में सामने आती है। यही गुण उन्हें अपने समय के अन्य साहित्यकारों से अलग पहचान देता है।
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का योगदान केवल साहित्य-सृजन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने हिंदी साहित्य को छत्तीसगढ़ की लोक-चेतना से जोड़ा और क्षेत्रीय अनुभवों को राष्ट्रीय साहित्यिक मंच तक पहुँचाया। इस दृष्टि से वे सेतु की तरह हैं। लोक और शास्त्र, ग्राम और राष्ट्र, अनुभव और विचार के बीच।
आज उनकी पुण्यतिथि पर जब हम उन्हें स्मरण करते हैं, तो यह स्मरण केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक संकल्प भी है कि साहित्य को जीवन से, समाज से और संवेदना से जोड़े रखा जाए। मास्टरजी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके शब्द, उनके विचार और उनकी साहित्यिक सुगंध आज भी भारतवर्ष को महकाए हुए हैं। यही उनकी सच्ची अमरता है।

भारत की राजनीतिक फंडिंग प्रणाली पर अंतरराष्ट्रीय नजर: इलेक्टोरल ट्रस्ट्स मॉडल कितना निष्पक्ष?

लोकतंत्र और राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता का प्रश्न- 2024-25 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि इलेक्टोरल ट्रस्ट्स मॉडल भी सत्ता संतुलन की समस्या से मुक्त नहीं है

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक के बाद जिस तरह से चंदे का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा दलों, विशेषकर सत्तारूढ़ पार्टी, की ओर केंद्रित हुआ है,वह लोकतंत्र के लिए नए प्रश्न खड़े करता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता केवल एक प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है।चुनाव प्रचार, संगठन विस्तार, मीडिया अभियान और जमीनी स्तरपर कार्यकर्ताओं की गतिविधियों के लिए राजनीतिक दलों को भारी मात्रा में धन की आवश्यकता होती है।यही आवश्यकता राजनीतिक फंडिंग को जन्म देती है। नियमानुसार, राजनीतिक दलों को 20 हज़ार रूपए से अधिक के प्रत्येक चंदे की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है।इलेक्टोरल बॉन्ड योजना (2017-2024) के तहत 16,000 करोड़ रूपए से अधिक का गुमनाम चंदा जुटाया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।अब सभी चंदे पारदर्शी माध्यमों (चेक/डिजिटल) से लिए जा रहे हैं। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में यह प्रश्न और भी संवेदनशील हो जाता है कि राजनीतिक दलों को धन कहां से मिलता है, किसने दिया, कितना दिया और बदले में क्या अपेक्षा की गई।इसी संदर्भ में इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की अवधारणा सामने आती है, जिसे लंबे समय तक राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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साथियों बातें कर हम इलेक्टोरल बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट का बैन और बदला हुआ परिदृश्य इसको समझने की करें तो, इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक फंडिंग का परिदृश्य अचानक बदल गया। बॉन्ड के जरिए मिलने वाला गोपनीय चंदा बंद होने के बाद इलेक्टोरल ट्रस्ट्स एक बार फिर राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा वैध माध्यम बनकर उभरे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पहले ही वर्ष में राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल ट्रस्ट्स के माध्यम से 3,811 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ,जो पिछले वर्ष की तुलना में असाधारण वृद्धि को दर्शाता है।2024-25 के आंकड़े: अभूतपूर्व वृद्धि और सत्ता का केंद्रीकरण इलेक्टोरल ट्रस्ट्स द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट्स के अनुसार,वर्ष 2024- 25 में कुल नौ इलेक्टोरल ट्रस्ट्स ने राजनीतिक दलों को 3,811 करोड़ रुपये का चंदा दिया। यह राशि वर्ष 2023-24 में दिए गए 1,218 करोड़ रुपये की तुलना में 200 प्रतिशत से अधिक और लगभग तीन गुना है। इस चंदे का सबसे बड़ा हिस्सा 3,112 करोड़ रुपये, यानें लगभग 82 प्रतिशत, केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्राप्त हुआ। यह आंकड़ा अपने आप में भारत की राजनीतिक फंडिंग में सत्ता के केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है। यह जानकारी इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की ओर से चुनाव आयोग को सौंपी गई रिपोर्ट्स से सामने आई है। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाकी सभी दलों को मिलाकर करीब 400 करोड़ रूपए (10 प्रतिशत) फंड मिला।

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इसमें कांग्रेस को 299 करोड़ रूपए मिले, जो कुल चंदे का 8 प्रतिशत से भी कम है।चुनाव आयोग के पास उपलब्ध रिपोर्ट्स और पारदर्शिता का प्रश्न-20 दिसंबर तक के आंकड़ों के अनुसार, चुनाव आयोग के पास कुल 19 में से 13 इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की रिपोर्ट्स उपलब्ध थीं। इनमें से 9 ट्रस्ट्स ने सक्रिय रूप से 2024- 25 में चंदा दिया। यह तथ्य एक ओर जहां कानूनी पारदर्शिता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठाता है कि शेष ट्रस्ट्स की निष्क्रियता या रिपोर्टिंग में देरी क्यों है। उपरोक्त सभी आंकड़े और जानकारी चुनाव आयोग की वेबसाइट और मीडिया में उपलब्ध जानकारी से ली गई है।

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साथियों बात अगर हम इलेक्टोरल ट्रस्ट क्या हैं, अवधारणा उत्पत्ति और उद्देश्य इसको समझने की करें तो, इलेक्टोरल ट्रस्ट एक ऐसी रजिस्टर्ड गैर-लाभकारी संस्था होती है जिसका मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट कंपनियों,समूहों और व्यक्तियों से प्राप्त चंदे को विधिसम्मत तरीके से राजनीतिक दलों तक पहुंचाना होता है।भारत में इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की अवधारणा को औपचारिक रूप से 2013 में आयकर नियमों के तहत मान्यता दी गई, ताकि राजनीतिक चंदे को अधिक पारदर्शी,नियंत्रित और दस्तावेजीकृत बनाया जा सके।इन ट्रस्ट्स को इस शर्त पर मान्यता दी जाती है कि वे अपने पास आने वाले हर एक रुपये का पूरा हिसाब रखें और यह जानकारी नियमित रूप से भारत निर्वाचन आयोग को सौंपें। इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राजनीतिक फंडिंग अज्ञात स्रोतों से न आए और जनता को यह जानने का अधिकार मिले कि किस राजनीतिक दल को किसने और कितना धन दिया है।

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इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की संरचना और कानूनी ढांचा-इलेक्टोरल ट्रस्ट्स को आयकर अधिनियम के तहत पंजीकृत किया जाता है। ये ट्रस्ट्स किसी भी राजनीतिक दल से सीधे जुड़े नहीं होते और सिद्धांत रूप में इन्हें तटस्थ संस्था के रूप में काम करना होता है। इनके संचालन के लिए ट्रस्टी बोर्ड बनाया जाता है,जिसमें आमतौर पर कॉर्पोरेट क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी,कानूनी विशेषज्ञ, वित्तीय सलाहकार और स्वतंत्र सदस्य शामिल होते हैं। कानून के अनुसार, इलेक्टोरल ट्रस्ट को प्राप्त कुल चंदे का कम-से-कम 95 प्रतिशत हिस्सा उसी वित्तीय वर्ष में राजनीतिक दलों को वितरित करना अनिवार्य होता है। ट्रस्ट स्वयं धन को अपने पास जमा करके रखने या निवेश करने का अधिकार नहीं रखता। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि ट्रस्ट केवल एक माध्यम के रूप में कार्य करे,न कि शक्ति केंद्र के रूप में।इलेक्टोरल ट्रस्ट्स द्वारा चुनाव आयोग को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट्स,इलेक्टोरल ट्रस्ट्स की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है,चुनाव आयोग को विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट सौंपना।इस रिपोर्ट में यह जानकारी देना अनिवार्य होता है कि किस कॉर्पोरेट या व्यक्ति से कितना चंदा प्राप्त हुआ,वह चंदा किस राजनीतिक दल को दिया गया और किस तारीख को दिया गया।इन रिपोर्ट्स के माध्यम से पहली बार यह संभव हुआ कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले बड़े कॉर्पोरेट चंदे का एक औपचारिक और सार्वजनिक रिकॉर्ड तैयार हो। चुनाव आयोग इन रिपोर्ट्स को अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराता है, जिससे मीडिया, शोधकर्ता और आम नागरिक राजनीतिक फंडिंग के रुझानों का विश्लेषण कर सकें।

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साथियों बातें अगर हम इलेक्टोरल ट्रस्ट्स को क्या फायदा होता है? इसको समझने की करें तो,सैद्धांतिक रूप से इलेक्टोरल ट्रस्ट्स गैर-लाभकारी संस्थाएं होती हैं, यानी इन्हें सीधे आर्थिक मुनाफा कमाने की अनुमति नहीं होती। फिर भी इनके अस्तित्व से जुड़े कुछ अप्रत्यक्ष लाभ स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।पहला,ट्रस्ट्स के माध्यम से कॉर्पोरेट कंपनियों को यह सुविधा मिलती है कि वे राजनीतिक दलों को चंदा देते समय प्रत्यक्ष रूप से सामने न आएं, जबकि कानूनन उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज रहता है।दूसरा, ट्रस्ट्स राजनीतिक और कॉर्पोरेट जगत के बीच एक संगठित संवाद का मंच बन जाते हैं। इससे नीति निर्माण, आर्थिक सुधारों और उद्योग हितों पर प्रभाव डालने की क्षमताअप्रत्यक्ष रूप से बढ़ जाती है। तीसरा, ट्रस्ट के ट्रस्टी और सदस्य नीति, शासन और सत्ता संरचना के बेहद करीब आ जाते हैं, जिससे सामाजिक और संस्थागत प्रभाव बढ़ता है।इलेक्टोरल ट्रस्ट्स के सदस्य कौन होते हैं-इलेक्टोरल ट्रस्ट्स के सदस्य और ट्रस्टी आमतौर पर बड़े कॉर्पोरेट समूहों,उद्योग संगठनों, वित्तीय संस्थानों और कभी-कभी पूर्व नौकरशाहों या पेशेवर विशेषज्ञों में से होते हैं। इनमें से कई लोग नीति-निर्माण प्रक्रिया की गहरी समझ रखते हैं। हालांकि कानून यह कहता है कि ट्रस्ट किसी राजनीतिक दल के नियंत्रण में नहीं हो सकता,लेकिन व्यावहारिक रूप से ट्रस्ट्स का झुकाव अक्सर कुछ विशेष दलों की ओर अधिक दिखाई देता है।

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साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: भारत बनाम वैश्विक लोकतंत्र इसको समझने की करें तो,यदि भारतकी तुलना अमेरिका,ब्रिटेन या जर्मनी जैसे लोकतंत्रों से की जाए, तो वहां राजनीतिक फंडिंग पर कहीं अधिक सख्त सीमाएं और निगरानी तंत्र मौजूद हैं। कई देशों में कॉर्पोरेट चंदे पर सीमाएं हैं या उन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। भारत में इलेक्टोरल ट्रस्ट्स एक मध्य मार्ग के रूप में सामने आए, लेकिन 2024-25 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि यह मॉडल भी सत्ता संतुलन की समस्या से मुक्त नहीं है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि पारदर्शिता से आगे जवाबदेहीकी जरूरत,इलेक्टोरल ट्रस्ट्स ने निस्संदेह भारत में राजनीतिक चंदे को दस्तावेजीकृत और अपेक्षाकृत पारदर्शी बनाया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड पर रोक के बाद जिस तरह से चंदे का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा दलों, विशेषकर सत्तारूढ़ पार्टी, की ओर केंद्रित हुआ है, वह लोकतंत्र के लिए नए प्रश्न खड़े करता है।अब आवश्यकता केवल पारदर्शिता की नहीं, बल्कि जवाबदेही, संतुलन और समान अवसर की है। इलेक्टोरल ट्रस्ट्स यदि वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करना चाहते हैं, तो उन्हें केवल कानूनी औपचारिकताओं से आगे बढ़कर राजनीतिक वित्तपोषण की नैतिकता पर भी खरा उतरना होगा।

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-संकलनकर्ता लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) महाराष्ट्र

आज का राशिफल जानें करियर, धन, शिक्षा, राजनीति और शुभ उपाय

28 दिसंबर 2025 का आज का राशिफल ,जानें करियर, धन, शिक्षा, राजनीति और शुभ उपाय

लेखक: पंडित सत्य प्रकाश पाण्डेय


वैदिक ज्योतिष के अनुसार 28 दिसंबर 2025, दिन रविवार है। रविवार का संबंध सूर्य देव से है, जो आत्मबल, मान-सम्मान, प्रशासनिक शक्ति और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माने जाते हैं। आज ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कुछ राशियों को उन्नति और लाभ दे सकती है, वहीं कुछ राशियों के लिए संयम और सतर्कता आवश्यक रहेगी।
यह राशिफल सामान्य ग्रह गणनाओं पर आधारित है, इसे अंतिम सत्य न मानें।
मेष राशि (Aries)
अक्षर: चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ
आज आप ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरे रहेंगे।
कार्य क्षेत्र/व्यवसाय: नई जिम्मेदारी या नेतृत्व की भूमिका मिल सकती है। व्यापार में नए सौदे लाभदायक रहेंगे।
शिक्षा: प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को फोकस बनाए रखना होगा।
कला/संगीत: रचनात्मक विचारों से पहचान बनेगी।
राजनीति/प्रशासन: प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मान मिल सकता है।
आर्थिक स्थिति: आय के नए स्रोत बनेंगे, लेकिन जल्दबाजी में निवेश न करें।
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 9
पूज्य देवता: सूर्य देव

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वृषभ राशि (Taurus)
अक्षर: ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो
आज मेहनत का पूरा फल मिलने का योग है।
कार्य क्षेत्र: नौकरी में प्रशंसा और स्थिरता मिलेगी।
व्यवसाय: पुराने अटके पैसे वापस मिल सकते हैं।
शिक्षा: पढ़ाई में निरंतरता से सफलता मिलेगी।
कला: गायन या कला से जुड़े लोगों को मंच मिल सकता है।
आर्थिक स्थिति: धन लाभ के योग मजबूत हैं।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता लक्ष्मी
मिथुन राशि (Gemini)
अक्षर: का, की, कू, घ, छ, के, को, ह
आज संवाद कौशल आपकी ताकत बनेगा।
कार्य क्षेत्र: मीडिया, लेखन, मार्केटिंग में सफलता।
शिक्षा: नई स्किल सीखने का दिन।
कला/संगीत: शब्दों और विचारों से लोगों को प्रभावित करेंगे।
आर्थिक स्थिति: खर्चों पर नियंत्रण रखें।
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान गणेश
कर्क राशि (Cancer)
अक्षर: ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो
आज भावनात्मक संतुलन जरूरी है।
कार्य क्षेत्र: धैर्य से काम लें, जल्दबाजी नुकसान दे सकती है।
शिक्षा: मन एकाग्र रखने की जरूरत।
कला: लेखन और अभिनय में गहराई आएगी।
आर्थिक स्थिति: सामान्य रहेगी।
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूज्य देवता: चंद्र देव
सिंह राशि (Leo)
अक्षर: मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे
आज आत्मविश्वास चरम पर रहेगा।
कार्य क्षेत्र/प्रशासन: उच्च पदस्थ लोगों से लाभ।
राजनीति: लोकप्रियता बढ़ेगी।
शिक्षा: नेतृत्व क्षमता निखरेगी।
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकते हैं।
शुभ रंग: सुनहरा
शुभ अंक: 1
पूज्य देवता: सूर्य देव
कन्या राशि (Virgo)
अक्षर: टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो
आज जिम्मेदारियां बढ़ेंगी लेकिन सफलता मिलेगी।
कार्य क्षेत्र: सीनियर्स का सहयोग मिलेगा।
शिक्षा: विश्लेषण क्षमता मजबूत होगी।
आर्थिक स्थिति: स्थिर रहेगी।
शुभ रंग: आसमानी
शुभ अंक: 5
पूज्य देवता: भगवान विष्णु

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तुला राशि (Libra)
अक्षर: रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते
आज संतुलन बनाकर चलने का दिन है।
कार्य क्षेत्र: योजनाओं में सफलता।
कला: फैशन, डिजाइन से जुड़े लोगों को लाभ।
आर्थिक स्थिति: सुधार के संकेत।
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूज्य देवता: माता दुर्गा
वृश्चिक राशि (Scorpio)
अक्षर: तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू
आज नए विचार लाभ देंगे।
कार्य क्षेत्र: रिसर्च और तकनीकी कामों में सफलता।
राजनीति: रणनीति सफल होगी।
आर्थिक स्थिति: धीरे-धीरे मजबूत।
शुभ रंग: मरून
शुभ अंक: 8
पूज्य देवता: भगवान शिव
धनु राशि (Sagittarius)
अक्षर: ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भे
आज संयम जरूरी है।
कार्य क्षेत्र: निर्णय सोच-समझकर लें।
शिक्षा: उच्च शिक्षा में अवसर।
आर्थिक स्थिति: मध्यम।
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
मकर राशि (Capricorn)
अक्षर: भो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गी
आज मानसिक मजबूती बढ़ेगी।
कार्य क्षेत्र: योजनाबद्ध तरीके से काम करें।
प्रशासन: जिम्मेदारी बढ़ सकती है।
आर्थिक स्थिति: स्थिर।
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 10
पूज्य देवता: शनि देव
कुंभ राशि (Aquarius)
अक्षर: गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा
आज भाग्य साथ देगा।
कार्य क्षेत्र: नौकरी में उन्नति।
शिक्षा: तकनीकी शिक्षा में लाभ।
आर्थिक स्थिति: अच्छा धन लाभ।
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 11
पूज्य देवता: भगवान शिव
मीन राशि (Pisces)
अक्षर: दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची
आज मन शांत रहेगा।
कार्य क्षेत्र: रचनात्मक कामों में सफलता।
कला/संगीत: साधना और भक्ति से प्रेरणा।
आर्थिक स्थिति: सामान्य से बेहतर।
शुभ रंग: हल्का पीला
शुभ अंक: 7
पूज्य देवता: भगवान विष्णु
डिस्क्लेमर
यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। राष्ट्र की परम्परा इस ज्योतिष को प्रमाणित नहीं करता। अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ को अवश्य दिखाएं।

हिंदू पंचांग शुभ–अशुभ मुहूर्त, संकेत और यात्रा योग

पंचांग 28 दिसंबर 2025 | आज का सम्पूर्ण हिंदू पंचांग, शुभ–अशुभ मुहूर्त, राशिफल संकेत और यात्रा योग
आज का पंचांग: 28 दिसंबर 2025 (रविवार)
दिनांक: 28/12/2025
वार: रविवार
स्थान: भारत (द्रिक पंचांग आधारित)
🕉️ तिथि विवरण
शुक्ल पक्ष अष्टमी: 27 दिसंबर 01:10 PM से 28 दिसंबर 11:59 AM तक
शुक्ल पक्ष नवमी: 28 दिसंबर 11:59 AM से 29 दिसंबर 10:12 AM तक
व्रत/पर्व: दुर्गाष्टमी व्रत
🌟 नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा: 27 दिसंबर 09:09 AM से 28 दिसंबर 08:43 AM तक
रेवती: 28 दिसंबर 08:43 AM से 29 दिसंबर 07:40 AM तक
गण्डमूल नक्षत्र: रेवती (08:43 AM के बाद प्रारम्भ)
📜 संवत विवरण
विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)
शक संवत: 1947 (विश्वावसु)
चन्द्र मास: पौष (अमांत एवं पूर्णिमांत)
राष्ट्रीय पंचांग: पौष 7, शक 1947
🔆 योग
वरीयान योग: 27 दिसंबर 12:21 PM से 28 दिसंबर 10:13 AM तक
परिघ योग: 28 दिसंबर 10:13 AM से 29 दिसंबर 07:36 AM तक
🔔 करण
बव: 28 दिसंबर 12:39 AM से 12:00 PM तक
बालव: 12:00 PM से 11:10 PM तक
कौलव: 11:11 PM से 29 दिसंबर 10:12 AM तक

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☀️ सूर्य एवं 🌙 चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 07:11 AM
सूर्यास्त: 05:45 PM
चन्द्रोदय: 12:30 PM
चन्द्रास्त: 29 दिसंबर 01:26 AM
🌌 राशि स्थिति
सूर्य राशि: धनु
चंद्र राशि: मीन (पूरे दिन-रात)
शुभ काल
ब्रह्म मुहूर्त: 05:35 AM – 06:23 AM
अमृत काल: 05:22 AM – 06:54 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:07 PM – 12:49 PM
सर्वार्थसिद्धि योग: 07:11 AM – 08:43 AM
(उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र एवं रविवार के कारण)
⚠️ अशुभ काल
राहुकाल: 04:26 PM – 05:45 PM
यमगण्ड: 12:28 PM – 01:47 PM
कुलिक काल: 03:07 PM – 04:26 PM
दुर्मुहूर्त: 04:21 PM – 05:03 PM
वर्ज्यम्: 08:12 PM – 09:44 PM
🧭 दिशा शूल एवं यात्रा फल
रविवार को यात्रा वर्जित दिशा: पश्चिम
यदि यात्रा आवश्यक हो तो क्या खाकर जाएँ:
👉 गुड़ या घी सेवन कर यात्रा करें
लाभकारी दिशा:
👉 पूर्व दिशा – मान-सम्मान, सफलता और सूर्य कृपा का योग
🌙 चंद्रबल
29 दिसंबर 07:11 AM तक शुभ राशियाँ:
वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
ताराबल
28 दिसंबर 08:43 AM तक शुभ नक्षत्र:
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्षा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वभाद्रपदा, रेवती
इसके बाद (29 दिसंबर 07:11 AM तक):
अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आद्रा, पुष्य, मघा, पूर्व फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तरभाद्रपदा
दिन का चौघड़िया
लाभ: 09:49 AM – 11:09 AM
अमृत: 11:09 AM – 12:28 PM
शुभ: 01:47 PM – 03:07 PM
🌙 रात का चौघड़िया
शुभ: 05:45 PM – 07:26 PM
अमृत: 07:26 PM – 09:07 PM
📌 नोट:इस पंचांग में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए ‘राष्ट्र की परम्परा’ उत्तरदायी नहीं है। किसी भी विशेष कार्य, व्रत या यात्रा से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श अवश्य लें।
🙏 आपका दिन शुभ, सफल और मंगलमय हो