Thursday, June 25, 2026
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28 दिसंबर: समय की धरोहर में दर्ज वह दिन, जिसने इतिहास की दिशा बदली

28 दिसंबर का दिन विश्व इतिहास, भारतीय राजनीति, विज्ञान, साहित्य और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। अलग–अलग युगों में इस तिथि ने सत्ता परिवर्तन, वैज्ञानिक प्रयोग, सांस्कृतिक उपलब्धियाँ और त्रासद घटनाएँ देखी हैं। आइए जानते हैं 28 दिसंबर को घटित उन ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में, जिन्होंने समय के प्रवाह पर गहरी छाप छोड़ी।
2013 – दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार
28 दिसंबर 2013 को भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ा, जब आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाई। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में बनी यह सरकार पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने वाली मानी गई और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजे राजनीतिक बदलाव का प्रतीक बनी।
2008 – साहित्यकार प्रो. सुरेश वात्स्यायन का निधन
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि और साहित्यकार प्रो. सुरेश वात्स्यायन का 28 दिसंबर 2008 को निधन हुआ। हिंदी साहित्य में उनके योगदान को विशेष सम्मान प्राप्त है। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, दर्शन और सामाजिक यथार्थ का गहन समावेश देखने को मिलता है।
2007 – ईरान के लिए रूस की परमाणु ईंधन खेप
28 दिसंबर 2007 को रूस ने ईरान के बुशेहर परमाणु विद्युत संयंत्र के लिए परमाणु ईंधन की दूसरी खेप भेजी। यह घटना वैश्विक कूटनीति और परमाणु अप्रसार बहस के संदर्भ में बेहद अहम मानी गई, क्योंकि इस पर अमेरिका और पश्चिमी देशों की कड़ी निगाह थी।
2003 – इस्रायल का दूसरा वाणिज्य उपग्रह प्रक्षेपण
इस्रायल ने 28 दिसंबर 2003 को कज़ाकिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष स्टेशन से अपना दूसरा वाणिज्यिक उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। इस उपलब्धि ने इस्रायल को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में उभरती शक्ति के रूप में स्थापित किया और उसकी व्यावसायिक अंतरिक्ष क्षमताओं को बल दिया।
2003 – विमानों में स्काई मार्शल की तैनाती का फैसला
इसी वर्ष अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से ब्रिटेन के कुछ विमानों में स्काई मार्शल यानी सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का निर्णय लिया। 9/11 के बाद वैश्विक विमानन सुरक्षा को लेकर उठाए गए यह कदम अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में नए सुरक्षा मानक स्थापित करने वाला साबित हुआ।
2002 – फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़र हर्वे रिट्स का निधन
28 दिसंबर 2002 को विश्वप्रसिद्ध फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़र हर्वे रिट्स का लॉस एंजेल्स में निधन हुआ। उन्होंने फैशन और सेलिब्रिटी फोटोग्राफी को एक नई कलात्मक पहचान दी। उनके कैमरे से खिंची तस्वीरें आज भी आधुनिक फोटोग्राफी की प्रेरणा मानी जाती हैं।
2000 – वीरता पुरस्कार विजेताओं पर डाक टिकट
भारतीय डाक विभाग ने 28 दिसंबर 2000 को वीरता पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में पाँच डाक टिकटों का विशेष सेट जारी किया। इनमें 3 रुपये का सचित्र डाक टिकट भी शामिल था, जो देश के वीर सपूतों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक बना।
1995 – दोनों ध्रुवों पर ध्वज फहराने वाले पहले व्यक्ति
पोलैंड के अन्वेषक मारके कार्मिस्की 28 दिसंबर 1995 को एक ही वर्ष में उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों पर झंडा फहराने वाले विश्व के पहले व्यक्ति बने। यह साहसिक उपलब्धि मानव जिज्ञासा, धैर्य और चरम परिस्थितियों में विजय का उदाहरण मानी जाती है।
1984 – राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की जीत
28 दिसंबर 1984 को राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीत इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सहानुभूति लहर और युवा नेतृत्व की उम्मीदों का परिणाम मानी गई, जिसने भारतीय राजनीति को नई दिशा दी।

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1976 – अमेरिका का नेवादा में परमाणु परीक्षण
अमेरिका ने 28 दिसंबर 1976 को नेवादा में परमाणु परीक्षण किया। शीत युद्ध के दौर में हुए ये परीक्षण सैन्य शक्ति प्रदर्शन का माध्यम थे, लेकिन साथ ही पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर उनके दुष्प्रभावों को लेकर व्यापक आलोचना भी हुई।
1974 – पाकिस्तान में भीषण भूकंप
28 दिसंबर 1974 को पाकिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें लगभग 5200 लोगों की मृत्यु हुई। यह प्राकृतिक आपदा आपातकालीन प्रबंधन और भूकंपरोधी ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करने वाली घटनाओं में गिनी जाती है।
1966 – चीन का लोप नोर में परमाणु परीक्षण
चीन ने 28 दिसंबर 1966 को लोप नोर क्षेत्र में परमाणु परीक्षण किया। इस परीक्षण ने चीन को विश्व की प्रमुख परमाणु शक्तियों की पंक्ति में स्थापित किया और एशियाई भू-राजनीति में शक्ति संतुलन को प्रभावित किया।
1957 – सोवियत संघ का परमाणु परीक्षण
28 दिसंबर 1957 को सोवियत संघ ने परमाणु परीक्षण कर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया। यह घटना अमेरिका-सोवियत प्रतिद्वंद्विता के चरम शीत युद्ध काल की याद दिलाती है, जब परमाणु हथियार वैश्विक राजनीति का केंद्र बने हुए थे।
1950 – ब्रिटेन का पहला राष्ट्रीय उद्यान
द पीक डिस्ट्रिक्ट को 28 दिसंबर 1950 को ब्रिटेन का पहला राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जाता है।
1942 – अटलांटिक पर 100 उड़ानें
रॉबर्ट सुलिवन 28 दिसंबर 1942 को अटलांटिक महासागर के ऊपर सौ बार उड़ान भरने वाले पहले पायलट बने। द्वितीय विश्व युद्ध के दौर में यह उपलब्धि विमानन इतिहास में साहस और तकनीकी दक्षता का प्रतीक बनी।
1928 – भारत की पहली बोलती फ़िल्म
28 दिसंबर 1928 को कोलकाता में पहली बार बोलती फ़िल्म मेलोडी ऑफ लव प्रदर्शित हुई। इसने भारतीय सिनेमा में मूक फिल्मों के युग से सवाक फिल्मों की ओर परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।
1926 – भारत–इंग्लैंड हवाई सेवा की शुरुआत
इंपिरियल एयरवेज ने 28 दिसंबर 1926 को भारत और इंग्लैंड के बीच यात्री और डाक सेवा शुरू की। यह कदम भारत में आधुनिक नागरिक उड्डयन के विकास की आधारशिला माना जाता है।
1908 – इटली के मेसिना में भूकंप
28 दिसंबर 1908 को इटली के मेसिना शहर में आए भीषण भूकंप में हजारों लोग मारे गए। यह यूरोप के इतिहास की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है।
1906 – इक्वाडोर का उदारवादी संविधान
दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर ने 28 दिसंबर 1906 को अपना दूसरा उदारवादी संविधान अंगीकार किया। इसने चर्च और राज्य को अलग करने तथा नागरिक स्वतंत्रताओं को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
1896 – ‘वंदे मातरम्’ का प्रथम गायन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन में 28 दिसंबर 1896 को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। यह गीत आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरक राष्ट्रगीत बन गया।
1885 – कांग्रेस का पहला अधिवेशन
28 दिसंबर 1885 को बंबई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यहीं से संगठित भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
1836 – मेक्सिको की स्वतंत्रता को मान्यता
स्पेन ने 28 दिसंबर 1836 को मेक्सिको की स्वतंत्रता को औपचारिक मान्यता दी। यह घटना औपनिवेशिक युग के अंत और नए राष्ट्रों के उदय का प्रतीक थी।
1767 – थाईलैंड में राजा ताकसिन का राज्याभिषेक
किंग ताकसिन 28 दिसंबर 1767 को थाईलैंड के राजा बने और थोनबुरी को राजधानी बनाया। उन्होंने देश को राजनीतिक स्थिरता दी और विदेशी आक्रमणों के बाद राष्ट्र को पुनर्गठित किया।
1668 – संभाजी महाराज की मृत्यु
मराठा शासक शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी की 28 दिसंबर 1668 को मुग़ल शासक औरंगज़ेब की कैद में यातनाओं के कारण मृत्यु हुई। यह घटना मराठा–मुग़ल संघर्ष के इतिहास में एक अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है।

भारतीय साहित्य और कला के अमर हस्ताक्षर

28 दिसंबर – वे व्यक्तित्व जिनकी जन्मतिथि ने भारत के इतिहास, उद्योग और राजनीति को नई दिशा दी

भारत के इतिहास में कुछ तिथियाँ केवल कैलेंडर की तारीख नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र की चेतना, प्रगति और आत्मनिर्भरता की कहानी कहती हैं। 28 दिसंबर ऐसी ही एक ऐतिहासिक तिथि है, जिस दिन भारत को राजनीति, उद्योग, साहित्य और कला के ऐसे महान व्यक्तित्व मिले, जिन्होंने अपने कर्म, विचार और नेतृत्व से देश की दिशा बदल दी। इस लेख में हम 28 दिसंबर को जन्मे उन महान भारतीयों के जीवन, जन्म-स्थल और राष्ट्रहित में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाल रहे हैं।
अरुण जेटली (जन्म: 28 दिसंबर 1952)
अरुण जेटली का जन्म नई दिल्ली, दिल्ली (भारत) में हुआ। वे भारतीय राजनीति के एक प्रभावशाली नेता, कुशल वक्ता और अर्थशास्त्रीय दृष्टि रखने वाले प्रशासक थे। उन्होंने भारत के वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री के रूप में कार्य करते हुए जीएसटी लागू करने, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) जैसे ऐतिहासिक आर्थिक सुधारों में अहम भूमिका निभाई। राष्ट्रहित में उनके निर्णयों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को पारदर्शिता और मजबूती दी। वे लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त करने वाले दूरदर्शी राजनेता माने जाते हैं।
रतन टाटा (जन्म: 28 दिसंबर 1937)
जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र (भारत)
रतन टाटा भारतीय उद्योग जगत का वह नाम हैं, जो नैतिकता, नवाचार और राष्ट्रसेवा का पर्याय बन चुका है। टाटा समूह के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने टाटा को वैश्विक पहचान दिलाई। टाटा नैनो, जगुआर-लैंड रोवर अधिग्रहण, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास में उनका योगदान भारत की सामाजिक संरचना को मजबूत करता है। देशहित में उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि उद्योग भी सेवा का माध्यम हो सकता है।
धीरूभाई अंबानी (जन्म: 28 दिसंबर 1932)
जन्म स्थान: चोरवाड़, जिला जूनागढ़, गुजरात (भारत)
धीरूभाई अंबानी भारतीय उद्यमिता के प्रतीक थे। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की नींव रखी और आम भारतीय को शेयर बाजार से जोड़ा। उन्होंने “सोच बड़ी हो तो साधन स्वयं बनते हैं” को साकार किया। देश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को उन्होंने दशकों पहले जीवंत कर दिया।

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नेरेला वेणु माधव (जन्म: 28 दिसंबर 1932)
जन्म स्थान: आंध्र प्रदेश (भारत)
नेरेला वेणु माधव भारत के प्रसिद्ध मिमिक्री कलाकार थे। उन्होंने अपनी आवाज़ और अभिनय कौशल से भारतीय मनोरंजन जगत को नई पहचान दी। वे पहले ऐसे कलाकारों में थे जिन्होंने मिमिक्री को एक सशक्त कला के रूप में स्थापित किया। उनका योगदान भारतीय सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और हास्य परंपरा को समृद्ध करता है।
गजानन त्र्यंबक माडखोलकर (जन्म: 28 दिसंबर 1900)
जन्म स्थान: महाराष्ट्र (भारत)
गजानन त्र्यंबक माडखोलकर मराठी साहित्य के प्रतिष्ठित उपन्यासकार, आलोचक और पत्रकार थे। उनके साहित्य में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाएँ और नैतिक मूल्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उन्होंने मराठी भाषा को वैचारिक गहराई दी और समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। साहित्य के माध्यम से राष्ट्रहित में चेतना जगाने का उनका योगदान अमूल्य है।

28 दिसंबर को जन्मे ये महान व्यक्तित्व राजनीति, उद्योग, कला और साहित्य के ऐसे स्तंभ हैं, जिनका प्रभाव आज भी भारत की सोच और दिशा में दिखाई देता है। इनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

पैसे देकर मिलने वाला सम्मान: शिक्षा की आत्मा पर हमला

शिक्षा पुरस्कार घोटाला: अब चुप नहीं रहेंगे शिक्षक, सम्मान के नाम पर हो रहा संगठित व्यापार

पटना (राष्ट्र की परम्परा) शिक्षा को किसी भी सभ्य समाज की नैतिक रीढ़ माना जाता है। यहीं से ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक मूल्यों की नींव पड़ती है। लेकिन हाल के वर्षों में शिक्षा जगत से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक सच सामने आया है, जिसे अब “शिक्षा पुरस्कार घोटाला” कहा जा रहा है। सम्मान और उपलब्धि के नाम पर शिक्षकों से पैसे वसूलने की यह प्रवृत्ति न केवल शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुँचाती है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
कैसे रचा जा रहा है शिक्षा पुरस्कार घोटाले का जाल
देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय कई तथाकथित शैक्षिक संगठन, फाउंडेशन और निजी अवार्ड कमेटियाँ शिक्षकों को फोन कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के माध्यम से संपर्क करती हैं। उन्हें यह बताया जाता है कि उनके कार्य को “राष्ट्रीय” या “अंतरराष्ट्रीय स्तर” पर सराहा गया है और वे किसी बड़े पुरस्कार के लिए चयनित हुए हैं। शुरुआती संवाद इतना सम्मानजनक होता है कि शिक्षक स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है।

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लेकिन इसके बाद असली खेल शुरू होता है। पुरस्कार समारोह में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग चार्ज, सेरेमनी फीस, गेस्ट मैनेजमेंट या डॉक्यूमेंटेशन कॉस्ट जैसे कई नामों से मोटी रकम माँगी जाती है। कई मामलों में यह राशि हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुँच जाती है।
सम्मान नहीं, अब सौदा बन चुका है पुरस्कार
शिक्षाविदों का मानना है कि जहाँ सम्मान पाने के लिए भुगतान अनिवार्य हो, वहाँ योग्यता और निष्पक्षता का कोई स्थान नहीं बचता। सच्चा सम्मान वह होता है, जो बिना किसी शर्त और शुल्क के दिया जाए। यदि पुरस्कार के लिए पैसे देने पड़ें, तो वह सम्मान नहीं बल्कि एक व्यावसायिक सौदा बन जाता है।
इस प्रक्रिया में शिक्षक सम्मानित नहीं, बल्कि ग्राहक बन जाता है और शिक्षा एक बाजार में तब्दील हो जाती है। यह स्थिति समाज को यह गलत संदेश देती है कि उपलब्धियाँ खरीदी जा सकती हैं और पहचान पैसे से मिलती है।

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शिक्षक समुदाय पर गहरा मानसिक और सामाजिक प्रभाव
इस शिक्षा पुरस्कार घोटाले का सबसे खतरनाक असर शिक्षकों की मानसिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा पर पड़ रहा है। कई शिक्षक सामाजिक दबाव और “सम्मान छूट जाने” के डर से भुगतान करने को मजबूर हो जाते हैं। बाद में उन्हें यह एहसास होता है कि वे एक योजनाबद्ध शोषण का शिकार बने हैं।
धीरे-धीरे समाज में यह धारणा बनने लगती है कि पुरस्कार वास्तविक उपलब्धियों का प्रमाण नहीं, बल्कि आर्थिक सामर्थ्य का परिणाम हैं। इससे ईमानदारी से कार्य करने वाले शिक्षकों का मनोबल टूटता है।
टीचर्स ऑफ बिहार ने खोला मोर्चा
इसी पृष्ठभूमि में टीचर्स ऑफ बिहार संगठन ने शिक्षा पुरस्कार घोटाले के खिलाफ खुलकर आवाज़ बुलंद की है। संगठन के फाउंडर शिव कुमार और टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सम्मान को व्यापार बनाना शिक्षकों का ही नहीं, पूरे समाज का अपमान है।

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संगठन के प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार और प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार ने संयुक्त बयान जारी कर ऐसे फर्जी और सशुल्क पुरस्कार आयोजनों पर तत्काल रोक लगाने की माँग की। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि किसी भी ऐसे पुरस्कार को स्वीकार न करें, जिसमें किसी भी प्रकार का शुल्क लिया जाए।
चमक-दमक के पीछे छिपा शोषण
भव्य मंच, बड़े-बड़े बैनर, आकर्षक ट्रॉफियाँ और सोशल मीडिया प्रचार के जरिए इन आयोजनों को प्रतिष्ठित दिखाया जाता है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे शिक्षक का आर्थिक और मानसिक शोषण छिपा होता है।
टीचर्स ऑफ बिहार ने साफ संदेश दिया है—
“अगर सम्मान देना है, तो बिना पैसे दीजिए;
अगर पैसे लेने हैं, तो उसे सम्मान मत कहिए।”
सोशल मीडिया पर भी तेज हो रहा विरोध
इस मुद्दे को जन-जन तक पहुँचाने के लिए संगठन ने सोशल मीडिया पर No Paid Awards अभियान को तेज किया है। शिक्षक, अभिभावक और शिक्षाविद इस अभियान के माध्यम से शिक्षा पुरस्कार घोटाले के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
सच्चा सम्मान वही है जो गरिमा बढ़ाए
विशेषज्ञों का मानना है कि सच्चा पुरस्कार वही होता है, जो शिक्षक के कार्य, समर्पण और योगदान की गरिमा बढ़ाए, न कि उसकी जेब पर बोझ डाले। जब तक समाज और शिक्षक वर्ग इस अंतर को स्पष्ट रूप से नहीं समझेगा, तब तक शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे संगठित घोटाले पनपते रहेंगे।
अब समय आ गया है कि शिक्षक चुप्पी तोड़ें, संगठित हों और शिक्षा पुरस्कार घोटाले के खिलाफ निर्णायक संघर्ष करें, ताकि सम्मान फिर से सम्मान ही रहे, व्यापार न बने।

बोरे में मिली नवजात बच्ची: समय पर इंसानियत ने बचाई मासूम की जान, जिला अस्पताल में भर्ती

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।घुघली कस्बे में शनिवार को मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जहां हट्ठी माता मंदिर के पास बगीचे में एक बोरे के अंदर नवजात बच्ची मिली। ठंड और भूख से रोती मासूम की आवाज सुनकर स्थानीय युवक मनीष ने तत्परता दिखाते हुए उसकी जान बचाई। यह घटना क्षेत्र में चर्चा और संवेदना का विषय बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 09 निवासी मनीष टहलने निकले थे। इसी दौरान मंदिर के पास रखे बोरे से तेज रोने की आवाज सुनाई दी। संदेह होने पर जब उन्होंने बोरा खोला, तो अंदर एक नवजात बच्ची पड़ी मिली, जिसकी हालत बेहद नाजुक थी। बिना देर किए मनीष बच्ची को अपने घर ले गए, जहां उनकी मां फूलमती ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए बच्ची को दूध पिलाया और गर्माहट देकर प्राथमिक देखभाल की।

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बच्ची की हालत गंभीर देखते हुए फूलमती उसे तुरंत घुघली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचीं। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा। स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। समय पर इलाज मिलने से नवजात की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष कुंवर गौरव सिंह ने बताया कि बच्ची को सुरक्षित जिला अस्पताल भेजकर चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है और बच्ची को छोड़ने वालों की तलाश जारी है।

इधर, फूलमती ने कानूनन अनुमति मिलने पर बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई है, जिसे लेकर क्षेत्र में सकारात्मक चर्चा हो रही है। यह घटना जहां समाज की संवेदनहीनता को उजागर करती है, वहीं समय पर दिखाई गई इंसानियत ने एक मासूम की जिंदगी बचा ली।

भीषण ठंड से जूझती जनता, चौराहों पर राहत व्यवस्था नदारद,प्रशासनिक उदासीनता उजागर

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जनपद में इन दिनों हाड़ कपा देने वाली ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट के बीच सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, मजदूरों, राहगीरों और छोटे दुकानदारों को झेलनी पड़ रही है। जनपद के प्रमुख चौराहों—सुरौली, पकड़ी बाजार, बराव, कपरवार पैना, कुनडोली, कंचनपुर और बघौचघाट—पर ठंड से बचाव की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि देर शाम और सुबह के समय ठंड इतनी तीव्र हो जाती है कि खुले में खड़ा रहना मुश्किल हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद कहीं भी अलाव या गर्माहट की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। बुजुर्ग ठंड से कांपते नजर आ रहे हैं, वहीं दिहाड़ी मजदूर और रिक्शा चालकों के लिए यह मौसम और भी जानलेवा साबित हो रहा है।

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प्रशासन द्वारा हर वर्ष ठंड के मौसम में अलाव, कंबल वितरण और रैन बसेरों की व्यवस्था के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। प्रमुख चौराहों पर न तो अलाव जल रहे हैं और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि की सक्रियता दिख रही है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और प्रशासन की सुस्ती से आमजन में रोष बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सभी प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था की जाए, रैन बसेरों को सक्रिय किया जाए और जरूरतमंदों को कंबल उपलब्ध कराए जाएं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ठंड से होने वाली बीमारियों और दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।
यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा है, बल्कि आमजन के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा भी है, जिस पर तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।

न्यायालय आदेश की अनदेखी के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

थाना समाधान दिवस में भूमि विवादों का दबदबा, लिलकर दियारा प्रकरण बना चर्चा का केंद्र

सिकंदरपुर, बलिया (राष्ट्र की परम्परा) शनिवार को थाना सिकंदरपुर परिसर में आयोजित थाना समाधान दिवस में एक बार फिर भूमि विवादों का बोलबाला देखने को मिला। फरियादियों की भारी भीड़ और लगातार सामने आ रहे जमीन व मकान से जुड़े मामलों ने क्षेत्र में व्याप्त विवादों की गंभीरता को उजागर कर दिया। अधिकांश शिकायतें वर्षों से लंबित प्रकरणों से संबंधित रहीं, जिनका अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
समाधान दिवस के दौरान सिकंदरपुर तहसील अंतर्गत लिलकर दियारा भूमि विवाद सबसे अधिक चर्चा में रहा। यह मामला कई बार राजस्व टीम द्वारा नापी जा चुका है, लेकिन सीमा निर्धारण को लेकर दोनों पक्षों में सहमति न बनने से विवाद लगातार बना हुआ है। शनिवार को दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करते हुए प्रभारी निरीक्षक ने दोनों पक्षों को सोमवार को एडीएम बलिया के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया और स्पष्ट किया कि वहां से प्राप्त निर्णय का कड़ाई से अनुपालन कराया जाएगा।

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इसी क्रम में मझवलिया गांव से आए एक मामले में पीड़ित अंकित ने आरोप लगाया कि न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद विपक्षी दबंगई के बल पर खेत की जुताई-बुवाई करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
वहीं डोमनपुरा निवासी जितेंद्र प्रसाद ने किरायेदारों द्वारा मकान खाली न करने की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि आवश्यकता होने के बावजूद किरायेदार मकान खाली करने से इनकार कर रहे हैं।
थाना समाधान दिवस में आए छोटे और सामान्य मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि जटिल और गंभीर विवादों को उच्च अधिकारियों के समक्ष भेजा गया।

शीतलहर से कराह रहा महराजगंज, गांव-गांव से कंबल वितरण की उठी मांग

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद महराजगंज इस समय भीषण शीतलहर और घने कोहरे की चपेट में है। लगातार गिरते तापमान ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सबसे अधिक संकट ग्रामीण अंचलों में रहने वाले गरीब, असहाय, बुजुर्ग, दिव्यांग और बेसहारा लोगों पर मंडरा रहा है। ठंड इतनी तीव्र हो गई है कि रात और सुबह के समय घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बागापार के ग्राम प्रधान एवं समाजसेवी विवेक प्रताप सिंह उर्फ निक्कू सिंह ने बताया कि ठंड का असर दिन-प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। बागापार, परासखाड़, बेलवा काजी, विजयपुर, बड़हरा राजा और कटहरा जैसे गांवों में कच्चे मकानों व झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों के पास ठंड से बचाव के पर्याप्त साधन नहीं हैं। कई जरूरतमंदों के लिए एक अदद कंबल भी जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

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वहीं मिठौरा ब्लॉक के ग्राम प्रधान दिनेश चंद्र मिश्र ने कहा कि बसंतपुर राजा, परसा राजा, नदुआं बाजार, रेंहाव, बेलभरियां, बरवा राजा, चैनपुर और दरहटा जैसे गांवों में बुजुर्गों व बीमार लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। ठंड के कारण जोड़ों का दर्द, सर्दी-खांसी और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। कुछ स्थानों पर अलाव की व्यवस्था जरूर की गई है, लेकिन यह जरूरत के अनुपात में बेहद कम है।
ग्रामीणों का कहना है कि खुले में जीवन यापन करने वाले मजदूर, दिहाड़ी कामगार और गंभीर रूप से बीमार लोग शीतलहर से सबसे अधिक प्रभावित हैं। यदि समय रहते राहत नहीं पहुंची, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शीतलहर को देखते हुए गांव-गांव सर्वे कर वास्तविक जरूरतमंदों की सूची तैयार की जाए और उन्हें तत्काल कंबल व अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि ठंड से राहत मिल सके।

🔢 मूलांक 1 से 9 वालों का आज का दिन कैसा रहेगा? जानिए करियर, धन, शिक्षा और भविष्य

अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तिथि से निकला मूलांक व्यक्ति के स्वभाव, सोच, निर्णय क्षमता और आज के दिन के प्रभाव को दर्शाता है। 28 दिसंबर 2025 का दिन किन मूलांकों के लिए शुभ रहेगा और किन्हें सतर्क रहना होगा—आइए जानते हैं पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा प्रस्तुत विस्तृत अंक राशिफल।

🔴 मूलांक 1 (1, 10, 19, 28 को जन्मे)
आज का प्रभाव:
आज आत्मचिंतन का दिन है। कार्यक्षेत्र में नए निर्णय लेने से पहले ठहराव जरूरी है।
कार्य/व्यवसाय: नेतृत्व क्षमता उभरेगी, लेकिन जल्दबाजी से नुकसान संभव
शिक्षा: पढ़ाई में मन लगेगा, प्रतियोगी छात्रों को धैर्य रखना होगा
कला/संगीत: रचनात्मकता बढ़ेगी
राजनीति/प्रशासन: उच्च अधिकारियों से संवाद लाभ देगा
आर्थिक स्थिति: खर्च नियंत्रित रखें
शुभ रंग: लाल
शुभ अंक: 1
पूजन: सूर्य देव की आराधना करें
🟠 मूलांक 2 (2, 11, 20, 29)
आज का प्रभाव:
भावनाओं में बहने से बचें। रिश्तों में संवेदनशीलता बनी रहेगी।
कार्य/व्यवसाय: टीमवर्क से लाभ
शिक्षा: ध्यान भटक सकता है, मेडिटेशन करें
कला/संगीत: गायन व लेखन में रुचि
राजनीति: जनसंपर्क मजबूत होगा
आर्थिक स्थिति: सामान्य
शुभ रंग: सफेद
शुभ अंक: 2
पूजन: मां दुर्गा की पूजा करें

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🟡 मूलांक 3 (3, 12, 21, 30)
आज का प्रभाव:
जिम्मेदारियों में वृद्धि होगी, लेकिन अनुभव काम आएगा।
कार्य/व्यवसाय: वरिष्ठों की सलाह से सफलता
शिक्षा: शिक्षक व मार्गदर्शक का सहयोग
कला/संगीत: मंचीय कला में अवसर
राजनीति: वक्तव्य सोच-समझकर दें
आर्थिक स्थिति: निवेश टालें
शुभ रंग: पीला
शुभ अंक: 3
पूजन: गुरु बृहस्पति

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🟢 मूलांक 4 (4, 13, 22, 31)
आज का प्रभाव:
परिश्रम अधिक रहेगा, परिणाम धीरे मिलेंगे।
कार्य/व्यवसाय: तकनीकी व निर्माण क्षेत्र में लाभ
शिक्षा: गणित व विज्ञान में फोकस
कला: डिजाइनिंग में रुचि
प्रशासन: दस्तावेजी कार्य सावधानी से करें
आर्थिक स्थिति: स्थिर
शुभ रंग: नीला
शुभ अंक: 4
पूजन: भगवान गणेश
🔵 मूलांक 5 (5, 14, 23)
आज का प्रभाव:
तेजी और परिवर्तन का दिन है।
कार्य/व्यवसाय: मार्केटिंग, मीडिया में सफलता
शिक्षा: नए विषय सीखने का योग
कला/संगीत: अभिनय व लेखन में अवसर
राजनीति: बयान वायरल हो सकता है
आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकता है
शुभ रंग: हरा
शुभ अंक: 5
पूजन: भगवान विष्णु
🟣 मूलांक 6 (6, 15, 24)
आज का प्रभाव:
सुख-सुविधा और रिश्तों का दिन।
कार्य/व्यवसाय: फैशन, होटल, ब्यूटी सेक्टर में लाभ
शिक्षा: कला विषयों में प्रगति
कला/संगीत: संगीत व चित्रकला में मन
राजनीति: जनसमर्थन बढ़ेगा
आर्थिक स्थिति: खर्च व आनंद दोनों
शुभ रंग: गुलाबी
शुभ अंक: 6
पूजन: मां लक्ष्मी
मूलांक 7 (7, 16, 25)
आज का प्रभाव:
आत्मविश्लेषण और एकांत प्रिय रहेगा।
कार्य/व्यवसाय: रिसर्च व आध्यात्मिक क्षेत्र शुभ
शिक्षा: गहन अध्ययन लाभकारी
कला: लेखन व फोटोग्राफी
प्रशासन: निर्णय सोच-समझकर
आर्थिक स्थिति: सामान्य
शुभ रंग: बैंगनी
शुभ अंक: 7
पूजन: भगवान शिव
🟤 मूलांक 8 (8, 17, 26)
आज का प्रभाव:
संघर्ष के बाद सफलता का संकेत।
कार्य/व्यवसाय: मेहनत रंग लाएगी
शिक्षा: धैर्य जरूरी
कला: सामाजिक विषयों पर रचना
राजनीति: विरोध का सामना संभव
आर्थिक स्थिति: धीरे सुधार
शुभ रंग: काला
शुभ अंक: 8
पूजन: शनि देव
🔴 मूलांक 9 (9, 18, 27)
आज का प्रभाव:
ऊर्जा से भरपूर दिन, लेकिन क्रोध पर नियंत्रण जरूरी।
कार्य/व्यवसाय: अधूरे कार्य पूरे होंगे
शिक्षा: खेल व सैन्य क्षेत्र शुभ
कला: नृत्य व मंचीय कला
राजनीति: आक्रामकता से बचें
आर्थिक स्थिति: लाभ के योग
शुभ रंग: केसरिया
शुभ अंक: 9
पूजन: हनुमान जी
⚠️ डिस्क्लेमर
यह अंक राशिफल पंडित सुधीर तिवारी (अंतिम बाबा) द्वारा अंक ज्योतिष के आधार पर प्रस्तुत है।
राष्ट्र की परम्परा इस अंक ज्योतिष की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता।
कृपया किसी भी निर्णय से पहले अपनी जन्मकुंडली किसी विशेषज्ञ से अवश्य दिखाएं।

सूर्य देव का शास्त्रीय रहस्य: आत्मा से धर्म तक की दिव्य यात्रा

“सूर्य देव: आत्मबोध का प्रकाश — जब भीतर उगता है धर्म, सत्य और साहस शास्त्रोक्त सूर्य कथा
🪔 प्रस्तावना – सनातन धर्म में सूर्य केवल आकाश में प्रकाशित होने वाला एक ग्रह नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण, धर्म के बोध और जीवन की दिशा का दैवी प्रतीक हैं। वे प्रत्यक्ष देव हैं—जिन्हें देखा जा सकता है, अनुभव किया जा सकता है और जिनसे जीवन का प्रत्येक प्राणी ऊर्जा पाता है।
शास्त्र कहते हैं—
“आदित्यः आत्मा जगतस्तस्थुषश्च”
अर्थात सूर्य सम्पूर्ण चराचर जगत की आत्मा हैं।
पिछले एपिसोड में हमने सूर्य के बाह्य तेज की चर्चा की थी। एपिसोड 6 में हम सूर्य की उस आंतरिक समानता, धर्मबोध और आत्मचेतना की कथा को शास्त्रोक्त प्रमाणों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं, जहाँ सूर्य मनुष्य को स्वयं के भीतर झाँकने का मार्ग दिखाते हैं।

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☀️ शास्त्रोक्त सूर्य की महिमा
ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और उपनिषद—सभी में सूर्य को ज्ञान का दीपक माना गया है।
ऋग्वेद (1.50.10) में कहा गया—
“उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः।”
अर्थात सूर्य देव अपने प्रकाश से अज्ञान के अंधकार को नष्ट करते हैं।
सूर्य का प्रकाश केवल नेत्रों तक सीमित नहीं रहता, वह बुद्धि, विवेक और संस्कारों को भी प्रकाशित करता है। यही कारण है कि गायत्री मंत्र सूर्य को ही संबोधित है—क्योंकि वही बुद्धि को प्रेरित करते हैं।
🔥 सूर्य और समानता का शास्त्रीय सिद्धांत
सूर्य देव की सबसे बड़ी विशेषता है—समान दृष्टि।
वे राजा और रंक, धनी और निर्धन, पापी और पुण्यात्मा—सब पर समान रूप से प्रकाश डालते हैं।
महाभारत में कहा गया है—
“न सूर्यः पक्षपाती भवति।”
सूर्य कभी पक्षपात नहीं करता।
यही संदेश मनुष्य के लिए भी है—
जब तक दृष्टि समान नहीं होगी, तब तक धर्म अधूरा रहेगा।

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🌅 शास्त्रोक्त कथा: आत्मबोध का सूर्य
प्राचीन काल में धर्मकेतु नामक एक राजा था। वह प्रतिदिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देता, मंत्र जप करता, परंतु उसके भीतर क्रोध और अहंकार प्रबल था।
एक दिन उसने महर्षि विवस्वान से पूछा—
“मैं सूर्य की पूजा करता हूँ, फिर भी शांति क्यों नहीं मिलती?”
महर्षि मुस्कराए और बोले—
“राजन्, तुम सूर्य को आकाश में खोजते हो, पर अपने भीतर नहीं।”
उन्होंने राजा को निर्देश दिया—
“कल सूर्योदय से पूर्व नदी किनारे बैठकर सूर्य को नहीं, अपने मन को देखना।”
अगले दिन राजा ने ऐसा ही किया। जैसे ही सूर्य उदित हुआ, उसकी किरणें जल में प्रतिबिंबित हुईं। तभी महर्षि बोले—
“राजन्, जैसे सूर्य जल को नहीं बदलता, पर जल की प्रकृति के अनुसार प्रतिबिंब बदलता है—वैसे ही सूर्य सभी को समान देता है, पर फल कर्म से मिलता है।”
उस क्षण राजा को बोध हुआ—
धर्म पूजा से नहीं, आत्मशुद्धि से प्रकट होता है।
उस दिन से राजा ने न्याय, करुणा और सत्य को अपनाया। शास्त्र कहते हैं—
जिस दिन मनुष्य के भीतर सूर्य उदित होता है, उसी दिन उसका जीवन धर्ममय बनता है।

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🌞 सूर्य और मानव जीवन की समानता
सूर्य
मनुष्य
अंधकार मिटाता है
अज्ञान दूर करता है
नियमित उदय
अनुशासन
समान प्रकाश
समता
ऊष्मा देता है
साहस देता है
जीवन का आधार
कर्म का आधार
सूर्य हमें सिखाता है—
प्रतिदिन नया बनो, पर मूल न बदलो।

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🕉️ सूर्योपासना का आध्यात्मिक रहस्य
शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्य की उपासना से—
आत्मबल बढ़ता है
रोग नष्ट होते हैं
भय समाप्त होता है
धर्म का बोध जागृत होता है
इसलिए सनातन संस्कृति में सूर्य नमस्कार केवल योग नहीं, बल्कि आत्म साधना है।

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निष्कर्ष
सूर्य बाहर उगता है—पर जागरण भीतर होता है।
जो मनुष्य अपने भीतर सत्य, अनुशासन और साहस का सूर्य जगा लेता है, उसका जीवन स्वतः धर्ममय हो जाता है।
सूर्य देव हमें यही शास्त्रोक्त संदेश देते हैं—
“प्रकाश बनो, दिशा दो, और बिना भेद के जगत को आलोकित करो।”

ड्राई और फ्रिजी बालों के लिए रामबाण घरेलू नुस्खा

केमिकल डैमेज बालों का घरेलू इलाज: एलोवेरा–अलसी–चावल से बनाएं डीप कंडीशनिंग हेयर मास्क

आजकल स्मूद, सिल्की और शाइनी बालों की चाहत में महिलाएं बार-बार केमिकल ट्रीटमेंट और हीट स्टाइलिंग का सहारा लेती हैं। शुरुआत में बाल आकर्षक लगते हैं, लेकिन कुछ समय बाद यही ट्रीटमेंट बालों को रूखा, फ्रिजी और कमजोर बना देते हैं। लगातार केमिकल्स के इस्तेमाल से हेयर फॉल बढ़ना, स्प्लिट एंड्स और नैचुरल शाइन खत्म होना आम समस्या बन गई है।
ऐसे में अगर आप भी केमिकल डैमेज बालों के लिए घरेलू हेयर मास्क तलाश रही हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है। एलोवेरा, अलसी के बीज और चावल से बना यह नेचुरल डीप कंडीशनिंग हेयर मास्क बालों को पोषण देने के साथ उनकी खोई हुई चमक भी लौटाने में मदद करता है।
क्यों असरदार है यह नेचुरल हेयर मास्क?
एलोवेरा बालों को हाइड्रेशन देता है और स्कैल्प को शांत रखता है। अलसी के बीजों का जेल ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होता है, जो बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है। वहीं चावल में मौजूद प्रोटीन और स्टार्च बालों को स्मूद और सिल्की बनाने में सहायक होता है। यही कारण है कि यह मास्क ड्राई और फ्रिजी हेयर्स के लिए किसी नेचुरल स्पा ट्रीटमेंट से कम नहीं।
घर पर ऐसे बनाएं डीप कंडीशनिंग हेयर मास्क
सबसे पहले ताजा एलोवेरा की पत्ती लें और उसका जेल निकाल लें। चाहें तो मार्केट का प्योर और ऑर्गेनिक एलोवेरा जेल भी इस्तेमाल कर सकती हैं।
अब एक पैन में डेढ़ कप पानी डालकर उसमें 3 चम्मच अलसी के बीज उबालें। जब पानी गाढ़े जेल जैसा हो जाए, तो हल्का गुनगुना रहने पर कपड़े से छान लें।
इसके बाद चावल को 20–30 मिनट भिगोकर रखें और फिर उबाल लें। चावल पक जाने पर बचे हुए पानी को फेंकें नहीं।
अब मिक्सर में एलोवेरा जेल, अलसी का जेल और उबले हुए चावल डालकर स्मूद पेस्ट बना लें। अंत में एक चम्मच नारियल तेल, ऑलिव ऑयल या सरसों का तेल मिलाएं। आपका हेयर मास्क तैयार है।
हेयर मास्क लगाने का सही तरीका
इस मास्क को हफ्ते में एक बार बालों की लंबाई पर लगाएं, स्कैल्प पर न लगाएं। करीब 30 मिनट तक छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से बाल धो लें। बाद में हल्का सा सीरम लगा सकती हैं। कुछ ही इस्तेमाल में बाल ज्यादा मुलायम, चमकदार और मजबूत नजर आने लगेंगे।
केमिकल ट्रीटमेंट से दूरी क्यों जरूरी?
बार-बार कराए गए केमिकल ट्रीटमेंट बालों की नैचुरल नमी छीन लेते हैं। अगर आप लंबे समय तक हेल्दी बाल चाहती हैं, तो नेचुरल हेयर केयर रूटीन अपनाना ही सबसे बेहतर उपाय है। यह घरेलू हेयर मास्क न सिर्फ सस्ता है, बल्कि साइड इफेक्ट्स से भी मुक्त है।

28 दिसम्बर का साहित्य,कला और जनसेवा की अमर विरासत

28 दिसंबर: वे अमर नाम, जिनके जाने से इतिहास ने एक युग को विदा कहा

28 दिसंबर भारतीय इतिहास के उन दिनों में शामिल है, जब देश ने राजनीति, साहित्य, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में अमूल्य रत्नों को खोया। ये वे व्यक्तित्व थे, जिनका जीवन राष्ट्र निर्माण, जनसेवा और सांस्कृतिक चेतना से गहराई से जुड़ा रहा। आइए, 28 दिसंबर को हुए महत्वपूर्ण निधन के माध्यम से उन महान विभूतियों को स्मरण करें, जिनकी विरासत आज भी हमारे मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ती है।
विजयकान्त (निधन: 28 दिसंबर 2023)
जन्म: मदुरै जिला, तमिलनाडु, भारत
विजयकान्त तमिल सिनेमा के अत्यंत लोकप्रिय अभिनेता और प्रभावशाली राजनेता थे। “कैप्टन” के नाम से मशहूर विजयकान्त ने अपने अभिनय से आम जनता की आवाज़ को पर्दे पर उतारा। उन्होंने देसीय मुरपोक्कु द्रविड़ कझगम (DMDK) की स्थापना कर तमिलनाडु की राजनीति में एक वैकल्पिक स्वर प्रस्तुत किया। जनसरोकार, ईमानदार छवि और सामाजिक न्याय के लिए उनका योगदान तमिल समाज में आज भी प्रेरणास्रोत है।
सुंदर लाल पटवा (निधन: 28 दिसंबर 2016)
जन्म: मंदसौर जिला, मध्य प्रदेश, भारत
सुंदर लाल पटवा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के 11वें मुख्यमंत्री रहे। वे अनुशासित संगठनकर्ता, कुशल रणनीतिकार और जनहितकारी नीतियों के लिए जाने जाते थे। राज्य में प्रशासनिक स्थिरता, ग्रामीण विकास और राजनीतिक शुचिता को सुदृढ़ करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे भारतीय राजनीति में वैचारिक दृढ़ता के प्रतीक माने जाते हैं।
शान्ता राव (निधन: 28 दिसंबर 2007)
जन्म: कर्नाटक, भारत
शान्ता राव भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत की प्रतिष्ठित कलाकार थीं। उन्होंने भरतनाट्यम और अन्य शास्त्रीय नृत्य शैलियों को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नृत्य को आध्यात्मिक अनुशासन और सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बनाने में उनका योगदान भारतीय कला इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है।
कुशाभाऊ ठाकरे (निधन: 28 दिसंबर 2003)
जन्म: धार जिला, मध्य प्रदेश, भारत
कुशाभाऊ ठाकरे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष (1998–2000) रहे। वे संगठन निर्माण के शिल्पकार माने जाते हैं। कार्यकर्ताओं को विचारधारा से जोड़ना, जमीनी स्तर पर पार्टी को सशक्त करना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती देना उनके जीवन का ध्येय रहा। उनका योगदान आधुनिक भारतीय राजनीति की नींव को मजबूत करता है।

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सुमित्रानंदन पंत (निधन: 28 दिसंबर 1977)
जन्म: कौसानी, अल्मोड़ा जिला, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश), भारत
सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य के छायावादी युग के स्तंभ थे। प्रकृति, सौंदर्य और मानवीय संवेदना उनकी कविताओं के केंद्र में रही। उन्होंने हिंदी कविता को दार्शनिक गहराई और सौंदर्यात्मक ऊँचाई प्रदान की। साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को समृद्ध करने में उनका योगदान अमर है।
हीरा लाल शास्त्री (निधन: 28 दिसंबर 1974)
जन्म: जोबनेर, जयपुर जिला, राजस्थान, भारत
हीरा लाल शास्त्री राजस्थान के प्रथम मुख्यमंत्री थे। उन्होंने नवगठित राज्य में प्रशासनिक ढाँचे की नींव रखी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त किया। सामाजिक समरसता, शिक्षा और ग्रामीण विकास उनके कार्यकाल की प्राथमिकताएँ रहीं। वे सरलता और सेवा-भाव के प्रतीक थे।
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (निधन: 28 दिसंबर 1972)
जन्म: होसुर, तमिलनाडु, भारत
राजगोपालाचारी स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल, प्रख्यात लेखक और दार्शनिक थे। वे महात्मा गांधी के निकट सहयोगी रहे। प्रशासन, नीति-निर्माण और नैतिक राजनीति में उनका योगदान भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को दिशा देने वाला रहा।
अकबर हयद्री (निधन: 28 दिसंबर 1948)
जन्म: हैदराबाद राज्य, भारत
अकबर हयद्री एक प्रतिष्ठित सिविल सेवक और राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने प्रशासनिक दक्षता, सामाजिक सुधार और सार्वजनिक सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के बीच समन्वय स्थापित करना उनकी विशेष पहचान थी।
सुन्दरलाल शर्मा (निधन: 28 दिसंबर 1940)
जन्म: छत्तीसगढ़ क्षेत्र, भारत
सुन्दरलाल शर्मा सामाजिक क्रांति के अग्रदूत और जनजागरणकर्ता थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में शिक्षा, सामाजिक चेतना और स्वाधीनता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी और समाज सुधार के सशक्त प्रतीक रहे।

कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने को लेकर पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल

उप निरीक्षकों के तबादले, कई थानों के प्रभारी बदले

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने जनहित में उप निरीक्षकों के तबादले करते हुए कई थानों के प्रभार में बदलाव किया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जारी इस प्रशासनिक आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिकारियों को उनके नाम के सम्मुख अंकित नवीन तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
तबादला आदेश के अनुसार थानाध्यक्ष तरकुलवा और थानाध्यक्ष भटनी के बीच प्रभार परिवर्तन किया गया है। इसके तहत उप निरीक्षक मृत्युंजय कुमार राय को थानाध्यक्ष रामपुर कारखाना से स्थानांतरित कर थानाध्यक्ष भाटपाररानी बनाया गया है, जबकि उप निरीक्षक अभिषेक कुमार राय को भाटपाररानी से रामपुर कारखाना भेजा गया है। वहीं उप निरीक्षक देवेंद्र कुमार सिंह को भी थानाध्यक्ष भाटपाररानी से रामपुर कारखाना स्थानांतरित किया गया है।

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इसके अतिरिक्त प्रशासनिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए उप निरीक्षक भूपेन्द्र सिंह को पीआरओ, पुलिस अधीक्षक कार्यालय से एसएसआई तरकुलवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप निरीक्षक बलराम सिंह को चौकी प्रभारी हेतिमपुर (थाना महुआडीह) से हटाकर पीआरओ, पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजा गया है। उनकी जगह उप निरीक्षक अजीत कुमार यादव को पुलिस लाइन से चौकी प्रभारी हेतिमपुर नियुक्त किया गया है।
इसी क्रम में उप निरीक्षक संतोष कुमार सिंह को पुलिस लाइन से चौकी प्रभारी भागलपुर (थाना मईल) तथा उप निरीक्षक रवि कुमार राय को चौकी प्रभारी बैतालपुर (थाना गौरीबाजार) बनाया गया है।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि जनहित में उप निरीक्षकों के तबादले पूरी तरह प्रशासनिक आवश्यकता, क्षेत्रीय संतुलन और बेहतर पुलिसिंग को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं। इन बदलावों से अपराध नियंत्रण, त्वरित कार्रवाई और आमजन में सुरक्षा की भावना और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

देवरिया में यातायात पुलिस का सख्त अभियान, 126 वाहनों का ई-चालान, 4 वाहन सीज

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)सड़क सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस देवरिया ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में 27 दिसंबर 2025 को यातायात पुलिस द्वारा शहर क्षेत्र में व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना और आमजन को नियमों के प्रति जागरूक करना रहा।
यातायात प्रभारी देवरिया श्री गुलाब सिंह के नेतृत्व में मालवीय रोड और शाही कटरा जैसे व्यस्त इलाकों में विशेष रूप से कार्रवाई की गई। अभियान के दौरान सड़क पर अवैध रूप से वाहन खड़ा कर सवारी भरने वाले ऑटो और टेंपो चालकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान किया गया। वहीं, शाही कटरा क्षेत्र में नो-पार्किंग जोन में खड़े वाहनों पर भी सख्त कार्रवाई करते हुए चालान और सीज की प्रक्रिया अपनाई गई।
इस विशेष अभियान में यातायात पुलिस देवरिया द्वारा कुल 126 वाहनों का ई-चालान किया गया, जबकि 4 वाहनों को नियमों के गंभीर उल्लंघन के चलते सीज किया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी इस प्रकार के अभियान नियमित रूप से जारी रहेंगे।
यातायात नियमों के पालन पर जोर
इस कार्रवाई का उद्देश्य वाहन चालकों को यह संदेश देना है कि यातायात नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण
अवैध पार्किंग और सड़क पर सवारी भरने जैसी गतिविधियां दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती हैं, जिन पर नियंत्रण आवश्यक है।
नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई
यातायात पुलिस देवरिया ने साफ किया कि नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासन की इस पहल से शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

रामग्राम पर्यटन परियोजना व स्तूप का डीएम ने किया निरीक्षण, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता के दिए निर्देश

महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन महत्व की राम ग्राम पर्यटन परियोजना को लेकर जिला प्रशासन गंभीर नजर आ रहा है। शनिवार को जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने चौक स्थित निर्माणाधीन रामग्राम पर्यटन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
इस दौरान उन्होंने कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप शीघ्र पूर्ण किए जाएं, ताकि आमजन और पर्यटकों को समय पर इसका लाभ मिल सके। उन्होंने दो टूक कहा कि परियोजना में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने परियोजना परिसर में स्थित सरोवर का भी अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षभर सरोवर में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तकनीकी और प्रबंधकीय उपाय तत्काल किए जाएं, जिससे परियोजना की सुंदरता और उपयोगिता बनी रहे। इसके साथ ही उन्होंने परिसर में मौजूद वृक्षों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए उनकी सुरक्षा, नियमित देखभाल और समुचित सुंदरीकरण के निर्देश दिए, ताकि पर्यावरण संतुलन के साथ स्थल की प्राकृतिक छटा भी बरकरार रह सके। उन्होंने शौचालय निर्माण के डिजाइन में भी बदलाव के निर्देश दिए। उन्होंने महिला और पुरुष शौचालयों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि रामग्राम परियोजना में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटकों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करने की पूरी क्षमता है, इसलिए इसे हर दृष्टि से बेहतर और सुविधाजनक बनाया जाए।
इससे पूर्व परियोजना प्रबंधक ने जानकारी दी कि रामग्राम पर्यटन परियोजना की कुल लागत लगभग 8.5 करोड़ रुपये है और अब तक लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण किया जा चुका है। परियोजना की दूसरी किश्त अभी प्राप्त होना शेष है, जबकि उपभोग प्रमाण पत्र शासन को प्रेषित किया जा चुका है।
इसके उपरांत जिलाधिकारी ने सोहगीबरवा स्थित ऐतिहासिक रामग्राम स्तूप का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्तूप के आस-पास संचालित पर्यटन गतिविधियों, साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, सूचना पट्ट और अन्य मूलभूत सुविधाओं का गहन अवलोकन किया और इन्हें और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रामग्राम का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अंतर्राष्ट्रीय स्तर का है, ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देना प्रशासन की प्राथमिकता है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, सहायक पर्यटक अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी, नायब तहसीलदार देश दीपक त्रिपाठी, परियोजना प्रबंधक यूपीपीसीएल ए.पी. सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

डीएम ने लगाई ग्राम चौपाल, योजनाओं की दी जानकारी, ग्रामीणों की सुनी समस्याएं

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। प्रशासन गांव की ओर अभियान के तहत मिठौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत परसा राजा में जिलाधिकारी सन्तोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया। चौपाल में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही, जहां जिलाधिकारी ने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी और ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
चौपाल के दौरान जिलाधिकारी ने वीबी–जी राम जी योजना को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्थान पर वीबी–जी राम जी योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत ग्रामीणों को न्यूनतम 125 दिन का रोजगार मिलेगा, जबकि मनरेगा में 100 दिन का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका सृजित करना है। इसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों में आधारभूत ढांचे का विकास किया जाएगा।
उन्होंने आयुष्मान भारत योजना पर भी विस्तार से जानकारी दी और बताया कि इसके तहत पात्र लाभार्थियों को पांच लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिलता है। उन्होंने कहा कि जनपद में आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।
ग्रीन चौपाल की चर्चा करते हुए वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और मानव–वन्य जीव संघर्ष के प्रति जागरूकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जो ग्रामीण पौधरोपण करना चाहते हैं, उन्हें वन विभाग द्वारा निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही पीएम सूर्य घर योजना की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना में उपभोक्ताओं को 1.08 लाख रुपये तक का अनुदान मिलता है, जिससे न केवल बिजली बिल में कमी आती है, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय भी अर्जित की जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांवों में लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता के लिए कार्यस्थल पर सूचना पट्ट अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। उन्होंने ग्रामीणों से भी योजनाओं के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
चौपाल में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। उन्होंने रुबीना का गोदभराई संस्कार कराया तथा नवजात खुशी और अक्षय का अन्नप्राशन भी किया। इस दौरान 219 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई, 16 आयुष्मान कार्ड बनाए गए, 47 लोगों का सीएम युवा योजना में आवेदन कराया गया और पांच बच्चों का टीकाकरण किया गया। कार्यक्रम को मुख्य विकास अधिकारी ने भी संबोधित किया।जबकि संचालन परियोजना निदेशक रामदरश चौधरी ने किया।
इस अवसर पर डीएफओ निरंजन सुर्वे, सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला, जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया, एसडीएम सदर जितेंद्र कुमार सहित अनेक अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहें।