Tuesday, June 23, 2026
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Delhi Riots Case: उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अन्य आरोपियों को मिली जमानत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि कोर्ट ने इसी मामले में आरोपी बनाए गए गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।

“लंबी हिरासत जमानत का आधार नहीं”

जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की दो-जजों की पीठ ने साफ कहा कि लंबे समय तक जेल में रहना या ट्रायल में देरी अपने-आप में जमानत का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने चेताया कि यदि ट्रायल में देरी को “ट्रंप कार्ड” की तरह इस्तेमाल किया गया, तो इससे यूएपीए जैसे कानूनों में मौजूद वैधानिक सुरक्षा उपाय निष्प्रभावी हो सकते हैं।

उमर और शरजील की स्थिति अन्य आरोपियों से अलग

पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर है। अदालत के अनुसार, दोनों के खिलाफ यूएपीए के तहत प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं और कानून में तय शर्तें इस स्तर पर जमानत देने की अनुमति नहीं देतीं।

10 दिसंबर 2025 को सुरक्षित रखा गया था फैसला

सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद 10 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने दोनों पक्षों को 18 दिसंबर तक अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।
जमानत न मिलने पर उमर खालिद के पिता की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद उमर खालिद के पिता इलियास ने कहा कि उन्हें इस पर कुछ नहीं कहना है। उन्होंने केवल इतना कहा कि “फैसला सबके सामने है।”

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पुलिस का दावा: हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता

दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि उमर खालिद, शरजील इमाम सहित अन्य आरोपी फरवरी 2020 की हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता थे। पुलिस के मुताबिक इस हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा CAA और NRC के विरोध के दौरान भड़की, लेकिन पुलिस का दावा है कि इसका उद्देश्य केवल विरोध नहीं, बल्कि राजधानी में अस्थिरता फैलाना था।

कब और कहां हुई थी दिल्ली हिंसा?

साल 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली के कई इलाकों में उस समय हिंसा और आगजनी हुई थी, जब नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। बाद में दिल्ली पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता (अब भारतीय न्याय संहिता) के तहत गंभीर आरोप लगाए।

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Haryana Crime News: बेल्ट से पत्नी की हत्या, फिर पति ने तालाब में कूदकर दी जान; रात 1 बजे क्या हुआ था?

हरियाणा (राष्ट्र की परम्परा)। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। लाडवा थाना क्षेत्र के गांव दबखेड़ा में एक व्यक्ति ने पहले अपनी पत्नी की बेल्ट से गला घोंटकर हत्या कर दी और इसके बाद खुद तालाब में कूदकर आत्महत्या कर ली। यह सनसनीखेज वारदात रविवार रात करीब एक बजे की बताई जा रही है।

मृतक दंपती की पहचान, दो बेटे हुए अनाथ

मृतक दंपती की पहचान रणजीत सिंह और उनकी पत्नी निशा के रूप में हुई है। दोनों के दो बेटे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सुबह मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।

पत्नी का शव घर में मिला, पति का तालाब से निकाला गया शव

पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं, गोताखोर प्रगट सिंह की मदद से रणजीत सिंह का शव तालाब से बाहर निकाला गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।

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हत्या–आत्महत्या की वजह अब भी रहस्य

फिलहाल इस घटना के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस दंपती के बीच किसी घरेलू विवाद की आशंका से इनकार नहीं कर रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।

पुलिस कर रही गहन जांच

पुलिस ने बताया कि—

• परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है

• मृतकों के मोबाइल फोन और निजी सामान की जांच की जा रही है

• घटनास्थल से जुड़े हर पहलू को खंगाला जा रहा है

पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।

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उत्तर प्रदेश पर्व : हमारी संस्कृति–हमारी पहचान के तहत संस्कृति उत्सव का आयोजन

चयनित कलाकारों को किया जाएगा सम्मानित : जिला सूचना अधिकारी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जिला सूचना अधिकारी धनपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक परम्परा प्राचीन काल से धर्म, दर्शन, कला, साहित्य और संगीत के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी रही है। इस समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा “उत्तर प्रदेश पर्व : हमारी संस्कृति–हमारी पहचान” के अंतर्गत संस्कृति उत्सव 2025-26 का आयोजन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में शास्त्रीय, उप-शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत और लोक नाट्य की सुदृढ़ परम्परा रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली कलाकार मौजूद हैं, जो मंच और पहचान के अभाव में मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाते। ऐसे कलाकारों को अवसर प्रदान कर उनकी कला प्रतिभा को सामने लाने के उद्देश्य से यह उत्सव आयोजित किया जा रहा है।

संस्कृति उत्सव का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक ग्राम, पंचायत, ब्लॉक और तहसील स्तर पर प्रतियोगिताओं के माध्यम से किया जाएगा। इसके बाद 17 और 19 जनवरी 2026 को जनपद स्तर पर चयनित कलाकारों की प्रतियोगिता आयोजित होगी। चयनित कलाकारों को 22 जनवरी 2026 को मंडल स्तर पर प्रतिभाग के लिए भेजा जाएगा।

मंडल स्तर से चयनित कलाकारों का 23 जनवरी 2026 को लखनऊ में पूर्वाभ्यास कराया जाएगा। इसके पश्चात 24 से 26 जनवरी 2026 तक उत्तर प्रदेश पर्व के अवसर पर अंतिम रूप से चयनित कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी, साथ ही उन्हें सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा।

जिला सूचना अधिकारी ने जनपद के समस्त कलाकारों से अपील की कि वे इस प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर अपनी कला प्रतिभा के माध्यम से प्रदेश और देश का मान बढ़ाए

Cyber Fraud News: गूगल सर्च के जरिए डाउनलोड की फर्जी PNB ऐप, बुजुर्ग महिला से 5.02 लाख की ठगी

चंडीगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)। मोहाली में साइबर ठगों ने अब गूगल सर्च इंजन को भी अपने जाल में शामिल कर लिया है। ताजा मामला सेक्टर-41 की रहने वाली 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला से जुड़ा है, जिनके बैंक खाते से साइबर ठगों ने 5.02 लाख रुपये उड़ा लिए। पीड़िता ने गूगल सर्च के जरिए PNB की फर्जी मोबाइल एप डाउनलोड की थी, जिसके बाद यह बड़ी ठगी सामने आई।

फर्जी ऐप डाउनलोड करते ही खाली हुआ खाता

पीड़िता सविता बाला ने सेक्टर-17 स्थित साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने बैंक खाते से जुड़े लेन-देन की जांच शुरू कर दी है। सविता बाला ने बताया कि वह मोहाली स्थित नाइलिट कंप्यूटर सेंटर से सेवानिवृत्त हैं और उनके खाते में सरकारी नौकरी की पेंशन आती है।

उन्होंने बताया कि 27 दिसंबर को उन्होंने गूगल सर्च इंजन के जरिए PNB मोबाइल एप डाउनलोड की थी, जो बाद में फर्जी निकली।

ATM से पैसे निकाले, कुछ घंटे बाद दिखा जीरो बैलेंस

पीड़िता के अनुसार, 30 दिसंबर को उन्होंने सेक्टर-23 स्थित PNB ATM से 25 हजार रुपये निकाले। इसके बाद दोपहर करीब 2:30 बजे वह बाजार गईं। शाम करीब 4 बजे घर लौटकर जब उन्होंने मोबाइल ऐप चेक किया, तो खाते में जीरो बैलेंस दिखा।
खाते में पहले से करीब 5 लाख 2 हजार रुपये जमा थे, जो पूरी तरह निकाल लिए गए थे।

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1930 पर दी सूचना, साइबर थाने में शिकायत

घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर ठगी की सूचना दी और बैंक पहुंचीं। अगले दिन 31 दिसंबर को उन्होंने पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी।
साइबर क्राइम पुलिस ने जांच में बताया कि महिला द्वारा डाउनलोड की गई PNB ऐप पूरी तरह फर्जी थी, जिसके जरिए ठगों ने खाते की पूरी जानकारी हासिल कर ली।

पुलिस की अपील: गूगल सर्च से ऐप डाउनलोड करने में बरतें सावधानी

साइबर थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बैंक या सरकारी ऐप केवल Google Play Store या आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। गूगल सर्च पर दिखने वाले अनजान लिंक और विज्ञापनों पर क्लिक करना खतरनाक हो सकता है।

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महिला आयोग की सदस्य जनक नंदिनी की अध्यक्षता में 7 जनवरी को महिला जनसुनवाई

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र ने जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्या जनक नंदिनी की अध्यक्षता में 7 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 11 बजे से महिला जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
महिला जनसुनवाई कार्यक्रम के उपरांत आयोग की सदस्या द्वारा आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनसुनवाई के दौरान पीड़ित महिलाएं उपस्थित होकर अपनी समस्याएं रख सकती हैं, जिनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

संपूर्ण समाधान दिवस में अधिकारियों ने सुनीं जनसमस्याएं

तहसील मेहदावल में डीएम-एसपी ने किया जनसुनवाई

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की तीनों तहसीलों में सोमवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तहसील मेहदावल में जिलाधिकारी आलोक कुमार एवं पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना की मौजूदगी में जनसुनवाई की गई। समाधान दिवस में बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे।
जनसुनवाई के दौरान राजस्व, पुलिस, विकास, बिजली, जलापूर्ति सहित विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक ने पुलिस से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने फरियादियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का निष्पक्ष समाधान किया जाएगा।
संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान जनपद स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे और मौके पर ही कई शिकायतों का निस्तारण किया गया। शेष प्रकरणों को निर्धारित समय-सीमा में निस्तारित करने के निर्देश दिए गए।

डिजिटल इंडिया का सपना साकार हुआ, तो सही मायनों में देश का हो जाएगा बेड़ा पार

डिजिटल इंडिया का

डिजिटल इंडिया का सपना अगर सच हो जाए, तो जो काम आज आम नागरिक के लिए सिरदर्द बने हुए हैं, वे चुटकियों में पूरे हो सकते हैं। यही भावना भारत की डिजिटल क्रांति की आत्मा है। डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने, सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और ऑनलाइन उपलब्ध कराने तथा आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से की गई थी। दस वर्षों के बाद, 2026 की शुरुआत में यह स्पष्ट दिखता है कि यह पहल कई अहम मुकाम हासिल कर चुकी है, हालांकि कुछ चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।2014 में जहां देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या मात्र 25 करोड़ थी, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा 97 करोड़ से अधिक पहुंच गया। दुनिया में सबसे सस्ते डेटा दरों के कारण डिजिटल सेवाएं अब शहरों तक सीमित नहीं रहीं। भारतनेट परियोजना के माध्यम से 2.2 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा गया, जिससे गांवों में पांच लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर्स स्थापित हुए और ग्रामीण-शहरी डिजिटल अंतर काफी हद तक कम हुआ।डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने देश में लेनदेन की संस्कृति ही बदल दी। हर महीने 1.2 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म बन चुका है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए 34 लाख करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचे, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी बल्कि करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये की बचत भी संभव हुई। कोविड-19 काल में CoWIN ऐप ने दो अरब से अधिक वैक्सीन डोज का डिजिटल प्रबंधन कर यह साबित कर दिया कि भारत बड़े स्तर पर तकनीक को सफलतापूर्वक लागू कर सकता है।स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी डिजिटल इंडिया ने मजबूत हस्तक्षेप किया। आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी से 50 करोड़ से अधिक नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड की सुविधा मिली। PM eVidya के तहत सैकड़ों टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से शिक्षा को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाया गया। DigiLocker में 7.5 अरब से अधिक दस्तावेज सुरक्षित किए गए, जबकि GeM पोर्टल ने सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया। इसी डिजिटल माहौल ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, जहां एक लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 114 यूनिकॉर्न्स भारत की नवाचार क्षमता का प्रमाण हैं।ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत छह करोड़ से अधिक परिवारों को डिजिटल ज्ञान से जोड़ा गया। 220 से अधिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसकी सराहना G20 जैसे मंचों पर भी हुई।इसके बावजूद डिजिटल इंडिया की राह पूरी तरह आसान नहीं रही। आज भी ग्रामीण आबादी का एक बड़ा हिस्सा विश्वसनीय इंटरनेट सुविधा से वंचित है। भारतनेट परियोजना का कार्य अपेक्षित गति से पूरा नहीं हो पाया और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं में भी कई जगह देरी देखी गई। प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर आधार और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठते रहे हैं। साइबर फ्रॉड, डेटा लीक और तकनीकी खामियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल विस्तार के साथ मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य है। साथ ही, रोजगार सृजन और नीति क्रियान्वयन में देरी जैसी समस्याएं भी डिजिटल विकास के समानांतर ध्यान मांगती हैं।आने वाले समय में डिजिटल इंडिया को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए और मजबूत करने की आवश्यकता है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना, डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों को जिम्मेदारी के साथ अपनाना जरूरी होगा। डिजिटल इंडिया एक्ट के माध्यम से AI, IoT और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों के लिए स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। साथ ही, डिजिटल साक्षरता, ग्रामीण कनेक्टिविटी, मुफ्त Wi-Fi और मजबूत प्राइवेसी कानूनों पर विशेष जोर देना होगा।अंततः डिजिटल इंडिया केवल तकनीक का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समावेशी विकास की एक व्यापक सोच है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे। यदि यह सपना सही मायनों में साकार होता है, तो न केवल प्रशासन सरल होगा, बल्कि सचमुच देश का बेड़ा पार हो जाएगा।

नहर विभाग की लापरवाही से किसानों पर टूटा कहरबंधा टूटने से सैकड़ों बीघे की फसल जलमग्न, मुआवजे की मांग

महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के ग्राम मुहम्मदपुर सिवान में नहर विभाग की लापरवाही ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। जर्जर नहर बंधा टूटने से नहर का पानी खेतों में घुस गया, जिससे सैकड़ों बीघे में खड़ी गेहूं, सरसों समेत अन्य रबी फसलें जलमग्न हो गईं। अचानक आई इस आपदा से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और किसान खेतों की ओर दौड़ पड़े, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
ग्रामीणों का आरोप है कि नहर का बंधा वर्षों से कमजोर स्थिति में है। कई बार शिकायत के बावजूद सिंचाई विभाग ने केवल अस्थायी मरम्मत कर जिम्मेदारी से बचने का काम किया। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी मरम्मत कराई जाती, तो यह नुकसान टाला जा सकता था।
स्थानीय किसान उदयभान यादव ने बताया कि उनके खेत के सामने हर साल नहर का बंधा टूटता है और हर बार फसल बर्बाद होती है। पहले से अधिक नमी, ठंड और समय पर सिंचाई न मिलने से फसल कमजोर थी, ऊपर से नहर टूटने से हालात और बिगड़ गए। जल निकासी की ठोस व्यवस्था न होने से खेतों में भरा पानी निकल नहीं पा रहा, जिससे फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
इस घटना में विमला देवी, सूर्यभान यादव, उमेश गुप्ता, उमेंद्र गुप्ता, मुराली गुप्ता सहित दर्जनों किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। कई किसानों की पूरी फसल डूब चुकी है, जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर नुकसान का सर्वे कराने, नहर बंधे की स्थायी मरम्मत और तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग के जिलेदार प्रकाश अग्रवाल के निर्देश पर नहर का फाटक बंद कराया गया, जिससे पानी का बहाव कुछ हद तक नियंत्रित हुआ।
अवर अभियंता, सिंचाई परतावल प्राची गुप्ता ने बताया कि ओवरफ्लो के कारण बंधा क्षतिग्रस्त हुआ है। विभागीय कर्मचारियों को मौके पर भेजकर मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।
हालांकि किसानों का कहना है कि जब तक बंधे की पुख्ता और स्थायी मरम्मत नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान और मुआवजा नहीं मिला तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

उच्च शिक्षा में नई इबारत लिखती पूर्वांचल की बेटियाँ

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय और उसके 355 संबद्ध महाविद्यालयों के सत्र 2025–26 के प्रवेश आँकड़े यह साबित करते हैं कि पूर्वांचल, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में उच्च शिक्षा अब सामाजिक परिवर्तन की सबसे सशक्त धुरी बन चुकी है। कुल 1,15,562 प्रवेशों में 74,009 छात्राओं की भागीदारी केवल संख्या नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिबिंब है जिसमें बेटियों की शिक्षा को भविष्य निर्माण का आधार माना जा रहा है।
गोरखपुर जिले में 23,859 छात्राओं का प्रवेश यह दर्शाता है कि शैक्षणिक और प्रशासनिक केंद्र होने के कारण यह जिला छात्राओं के लिए करियर-उन्मुख शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। विश्वविद्यालय परिसर में 4,493 छात्राओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि तकनीकी, शोध और उच्चस्तरीय पाठ्यक्रमों में भी बेटियाँ पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
देवरिया जिले में 25,609 छात्राओं का प्रवेश ग्रामीण समाज में आई सकारात्मक सोच को उजागर करता है। यहाँ बेटियों की पढ़ाई को अब बाधा नहीं, बल्कि परिवार और समाज की प्रगति से जोड़ा जा रहा है। वहीं कुशीनगर जिले में 20,048 छात्राओं का प्रवेश यह संकेत देता है कि सीमावर्ती और ग्रामीण अंचलों में भी शिक्षा को सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के साधन के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
तीनों जिलों में फैला 355 संबद्ध महाविद्यालयों का नेटवर्क, गोरखपुर में 158, देवरिया में 121 और कुशीनगर में 76 छात्राओं को घर के पास सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। डिजिटल प्रवेश प्रणाली, समयबद्ध परीक्षा एवं परिणाम, महिला प्रकोष्ठ, अनुशासन और NAAC A++ जैसी गुणवत्ता मान्यता ने इस भरोसे को और मजबूत किया है।
पिछले तीन वर्षों में छात्राओं के प्रवेश में निरंतर वृद्धि 2023–24 में 62,840 से बढ़कर 2025–26 में 74,009 तक पहुँचना, यह स्पष्ट करती है कि यह बदलाव स्थायी है। यह केवल विश्वविद्यालय की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की सामाजिक चेतना का प्रमाण है।
उच्च शिक्षा में आगे बढ़ती पूर्वांचल की बेटियाँ न केवल अपने परिवारों का, बल्कि समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण कर रही हैं। यह नई इबारत आत्मविश्वास, समान अवसर और सशक्त भारत की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

सेवा से सत्ता तक का सफर: स्वार्थ के अखाड़े में बदलती राजनीति पर गंभीर सवाल

महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। कभी राजनीति को जनसेवा का सर्वोच्च माध्यम माना जाता था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में राजनीति त्याग, बलिदान, सिद्धांत और राष्ट्रहित का पर्याय थी। उस समय नेता सत्ता के नहीं, बल्कि सेवा और संघर्ष के प्रतीक होते थे। लेकिन समय के साथ राजनीति का स्वरूप तेजी से बदलता चला गया। आज राजनीति जनसेवा का मंच कम और स्वार्थ, सत्ता और वर्चस्व की लड़ाई का अखाड़ा अधिक बनती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

विचारधाराओं की जगह वोट बैंक की राजनीति

लोकतांत्रिक व्यवस्था में विचारधाराओं का टकराव स्वाभाविक और आवश्यक माना जाता है, क्योंकि इसी से बेहतर नीतियों और योजनाओं का जन्म होता है। दुर्भाग्यवश आज यह टकराव सिद्धांतों और नीतियों से हटकर व्यक्तिगत लाभ, जाति, धर्म और वोट बैंक की गणित पर केंद्रित होता जा रहा है।

चुनाव आते ही लोक-लुभावन वादों की बाढ़ आ जाती है—बड़े-बड़े घोषणा पत्र, मुफ्त योजनाओं के आकर्षक वादे और खोखले दावे। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही अधिकांश वादे फाइलों में दफन हो जाते हैं, जिससे जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती है।

मूल मुद्दे हाशिये पर

आज की राजनीति का एक बड़ा संकट यह है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान और महंगाई जैसे मूलभूत मुद्दे राजनीतिक प्राथमिकताओं की सूची में लगातार पीछे धकेले जा रहे हैं। संसद और विधानसभाएं, जो जनसमस्याओं के समाधान का सबसे बड़ा मंच होनी चाहिए थीं, अक्सर आरोप-प्रत्यारोप, शोर-शराबे और हंगामे का केंद्र बन जाती हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे को घेरने में व्यस्त रहते हैं, जबकि आम जनता की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।

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राजनीति में अपराधीकरण और धनबल का असर

चिंताजनक पहलू यह भी है कि राजनीति में अपराधीकरण और धनबल का बढ़ता प्रभाव लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रहा है। चुनाव लड़ने में बढ़ता खर्च, बाहुबल का इस्तेमाल और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की बढ़ती भागीदारी ने ईमानदार, शिक्षित और विचारशील नागरिकों को राजनीति से दूर कर दिया है। परिणामस्वरूप राजनीति में ऐसे चेहरे बढ़ते जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य सेवा नहीं, बल्कि सत्ता के जरिए निजी स्वार्थ साधना है।

जनता का विश्वास और लोकतंत्र

जब राजनीति स्वार्थ का अखाड़ा बन जाती है, तो आम नागरिक का व्यवस्था से विश्वास धीरे-धीरे उठने लगता है। लोकतंत्र केवल कानूनों और संस्थाओं से नहीं चलता, बल्कि जनता के विश्वास से मजबूत होता है। यदि यह विश्वास कमजोर पड़ता है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था खोखली हो जाती है। यही कारण है कि आज समाज के हर वर्ग में राजनीति को लेकर निराशा और असंतोष बढ़ता जा रहा है।

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समाधान: सेवा और उत्तरदायित्व की राजनीति

आज सबसे बड़ी आवश्यकता है कि राजनीति को फिर से सेवा, नैतिकता और उत्तरदायित्व के मार्ग पर लौटाया जाए। नेताओं को यह समझना होगा कि सत्ता कोई निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनकल्याण का साधन है। वहीं मतदाताओं की भूमिका भी बेहद अहम है। जनता को जागरूक होकर ऐसे प्रतिनिधियों का चयन करना होगा, जो जाति, धर्म और खोखले वादों से ऊपर उठकर कार्य और ईमानदारी के आधार पर अपनी प्रतिबद्धता साबित करें।

टैरिफ और तेल नीति पर टकराव, नई दिल्ली–वॉशिंगटन रिश्तों की परीक्षा

अमेरिका की भारत को कड़ी चेतावनी: रूस से तेल आयात और व्यापार नीति पर फिर टैरिफ का दबाव


वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की एनर्जी और ट्रेड पॉलिसी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी एक ऑडियो क्लिप में ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि भारत की नीतियां अमेरिकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहीं, तो भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बहुत जल्द बढ़ाए जा सकते हैं। इस बयान से भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।
ऑडियो में ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले पर असंतोष जताते हुए इसे अपनी “नाखुशी” से जोड़ा। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत प्रशंसा भी की और कहा कि मोदी एक अच्छे इंसान हैं, जो यह जानते थे कि अमेरिका खुश नहीं है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत ने उनके रुख को ध्यान में रखते हुए अपना तरीका बदला।

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रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने दोहराया कि ट्रेड के हथियार के रूप में टैरिफ अमेरिका के लिए प्रभावी साधन हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि टैरिफ बढ़ाना “बहुत जल्दी” संभव है और इसके परिणाम भारत के लिए नकारात्मक हो सकते हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से तेल आयात को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त पेनल्टी लगाई थी, जिससे कुछ श्रेणियों में कुल ड्यूटी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस फैसले से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा था।

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हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें व्यापारिक मतभेदों के बावजूद द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। उसी समय दोनों देशों के वार्ताकारों ने टैरिफ गतिरोध सुलझाने के लिए नए दौर की बातचीत शुरू की। हालांकि, अमेरिकी कृषि उत्पादों पर इंपोर्ट ड्यूटी और भारत के कृषि–डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर मतभेद अब भी बने हुए हैं।

तड़के आए भूकंप से असम और पड़ोसी राज्यों में दहशत

असम के मोरीगांव में 5.1 तीव्रता का भूकंप, पूर्वोत्तर के कई राज्यों में महसूस हुए झटके


गोहाटी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)असम के मोरीगांव जिले में सोमवार तड़के भूकंप के तेज झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप सुबह 04:17:40 बजे (IST) आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.1 मापी गई। भूकंप का केंद्र ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित मोरीगांव जिला रहा, जबकि इसकी गहराई करीब 50 किलोमीटर बताई गई है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप का केंद्र 26.37 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 92.29 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। झटके इतने तेज थे कि लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों की ओर भागते नजर आए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि तत्काल किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

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भूकंप के झटके असम के कई जिलों में महसूस किए गए। इनमें कामरूप महानगर, नगांव, होजाई, दीमा हसाओ, गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, चराइदेव, कछार, करीमगंज, हैलाकांडी, धुबरी, दक्षिण शालमारा-मानकाचर और ग्वालपाड़ा शामिल हैं। इसके अलावा ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित दर्रांग, सोनितपुर, नलबाड़ी, बारपेटा, बक्सा, चिरांग, कोकराझार, बोंगाईगांव और लखीमपुर जिलों में भी कंपन महसूस किया गया।
असम के साथ-साथ भूकंप के झटके मेघालय की राजधानी शिलांग, अरुणाचल प्रदेश के मध्य-पश्चिमी हिस्सों, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में भी महसूस किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इसका असर भूटान के मध्य-पूर्वी हिस्सों, बांग्लादेश और चीन के कुछ क्षेत्रों तक देखा गया।

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भूकंप वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत उच्च भूकंपीय क्षेत्र में आता है, जहां अलग-अलग तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। हाल ही में नेपाल में आए भूकंपों की श्रृंखला के बाद असम में यह गतिविधि दर्ज की गई है। रविवार रात को नेपाल के उदयपुरा जिले में 4.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जबकि इससे पहले ताप्लेजुंग जिले में 4.6 तीव्रता का झटका महसूस किया गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र टेक्टोनिक रूप से अत्यंत सक्रिय है, इसलिए सतर्कता बेहद जरूरी है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

Phone Mic Problem: फोन में बोलते रह जाते हैं हैलो-हैलो, फिर भी सामने वाले तक नहीं पहुंचती आवाज? जानें कारण और आसान समाधान

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आज के समय में फोन का माइक्रोफोन ठीक से काम न करना एक आम समस्या बन गई है। कई बार कॉल के दौरान हम लगातार “हैलो-हैलो” बोलते रहते हैं, लेकिन सामने वाले को आवाज ठीक से सुनाई ही नहीं देती। खासकर जो लोग बस, ऑटो या बाइक से ज्यादा सफर करते हैं, उनके फोन में पसीना, धूल-मिट्टी और नमी के कारण माइक्रोफोन जाम हो जाता है।

हालांकि माइक्रोफोन खराब होने की वजह सिर्फ धूल ही नहीं, बल्कि गलत कवर, सॉफ्टवेयर बग और ऐप परमिशन भी हो सकते हैं। आइए जानते हैं फोन के माइक खराब होने के कारण और उसे ठीक करने के आसान तरीके।

माइक्रोफोन की सफाई है सबसे जरूरी

अगर कॉल पर आपकी आवाज बार-बार कट रही है या सामने वाले तक नहीं पहुंच रही, तो सबसे पहले फोन के माइक्रोफोन को साफ करें।

• एक सॉफ्ट टूथब्रश से माइक के छेद को हल्के हाथ से साफ करें

• जरूरत हो तो टूथपिक का इस्तेमाल करें, लेकिन उसे ज्यादा अंदर न डालें

अक्सर धूल निकलते ही आवाज साफ हो जाती है।

फोन का कवर हटाकर जरूर जांचें

कई बार फैंसी या मोटे कवर माइक्रोफोन को ढक देते हैं।

• एक बार कवर हटाकर कॉल करें

• अगर आवाज साफ आने लगे, तो समस्या कवर के डिजाइन में है

सॉफ्टवेयर अपडेट पर ध्यान दें

अगर आपके फोन का सॉफ्टवेयर पुराना है, तो माइक्रोफोन से जुड़ी दिक्कत आ सकती है।

• Settings > Software Update में जाकर अपडेट चेक करें

• लेटेस्ट अपडेट इंस्टॉल करने से कई बग और क्रैश अपने आप ठीक हो जाते हैं।

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ऐप्स की माइक्रोफोन परमिशन चेक करें

अगर सामान्य कॉल ठीक है लेकिन WhatsApp, Google Meet या Zoom पर आवाज नहीं जा रही, तो यह परमिशन की समस्या हो सकती है।

• ऐप की Settings में जाएं

• Microphone Permission को Allow करें

फोन री-स्टार्ट करना भी है कारगर

कई बार बैकग्राउंड में चल रहे खराब प्रोसेस माइक को प्रभावित करते हैं।

• फोन को एक बार Restart करने से यह समस्या अक्सर ठीक हो जाती है।

कब जाएं सर्विस सेंटर?

अगर ऊपर बताए गए सभी उपायों के बाद भी माइक्रोफोन काम नहीं कर रहा, तो संभव है कि हार्डवेयर डैमेज हो गया हो। ऐसे में फोन को अधिकृत सर्विस सेंटर में दिखाना ही सही विकल्प है।

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Agra Road Accident: घने कोहरे के कारण ग्वालियर हाईवे पर भीषण हादसा, 6 वाहन टकराए; 2 की मौत, कई घायल

आगरा/उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। सोमवार तड़के एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। ग्वालियर हाईवे पर घने कोहरे के कारण आधा दर्जन से अधिक वाहन आपस में टकरा गए। इस भीषण दुर्घटना में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तड़के इरादतनगर थाना क्षेत्र में हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह हादसा थाना इरादतनगर क्षेत्र के गांव नगला इमली के पास तड़के करीब सुबह 6 बजे हुआ। घना कोहरा होने की वजह से दृश्यता लगभग शून्य हो गई थी, जिसके चलते हाईवे पर एक के बाद एक वाहन आपस में भिड़ते चले गए।

एक के बाद एक टकराए वाहन

बताया जा रहा है कि पहले एक वाहन ने सामने चल रहे वाहन को टक्कर मारी, जिसके बाद पीछे से आ रहे अन्य वाहन भी अनियंत्रित होकर आपस में भिड़ गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई लोग गाड़ियों में फंस गए।

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पुलिस और ग्रामीणों ने चलाया राहत-बचाव कार्य

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस और ग्रामीणों की मदद से गाड़ियों में फंसे घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।

स्थानीय ग्रामीण सत्येंद्र सिंह चाहर ने बताया कि कोहरा इतना घना था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे यह भीषण हादसा हुआ।

कुछ समय तक बाधित रहा यातायात

हादसे के बाद ग्वालियर हाईवे पर यातायात कुछ समय के लिए बाधित रहा। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाकर बाद में यातायात को सामान्य कराया। पुलिस ने कोहरे के मौसम में वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।

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महंगी होती शिक्षा, सस्ता होता भविष्य: बढ़ती फीस और घटते रोजगार के बीच फंसा युवा वर्ग

कैलाश सिंह 

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा को हमेशा से विकास और उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव माना गया है, लेकिन मौजूदा हालात इस धारणा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आज शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जबकि रोजगार के अवसर सिमटते जा रहे हैं। ऐसे में युवा वर्ग बढ़ती शिक्षा लागत और घटती नौकरियों के बीच असमंजस की स्थिति में फंसता नजर आ रहा है।

शिक्षा का बढ़ता बोझ, परिवारों पर आर्थिक दबाव

शहरों से लेकर कस्बों और गांवों तक अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी आय से कहीं अधिक खर्च करने को मजबूर हैं। निजी स्कूलों की भारी फीस, महंगी किताबें, यूनिफॉर्म, परिवहन शुल्क और कोचिंग संस्थानों का बढ़ता दबाव मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़ रहा है। कई परिवार बच्चों की शिक्षा के लिए कर्ज लेने तक को विवश हैं, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और उसके परिणामों पर सवाल बने हुए हैं।

डिग्री है, नौकरी नहीं

आज हालात यह हैं कि युवाओं के हाथ में डिग्रियां तो हैं, लेकिन रोजगार की कोई गारंटी नहीं। सरकारी आंकड़े और जमीनी हकीकत दोनों बताते हैं कि शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंजीनियर, स्नातक और परास्नातक युवा वर्षों की पढ़ाई के बाद भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में सीमित पदों के लिए लाखों आवेदन निराशा और हताशा को जन्म दे रहे हैं।

शिक्षा का निजीकरण बना बड़ी चुनौती

शिक्षा का बढ़ता निजीकरण इसे सेवा के बजाय व्यवसाय में बदलता जा रहा है। निजी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय मुनाफे की दौड़ में फीस बढ़ा रहे हैं, वहीं कोचिंग माफिया सफलता के सपने महंगी फीस के साथ बेच रहा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर आर्थिक वर्ग के मेधावी छात्रों को उठाना पड़ रहा है, जो संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाते हैं।

बढ़ती असमानता और सामाजिक असर

शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को और गहरा कर रही है। महंगे संस्थानों में पढ़ने वाले कुछ छात्रों को बेहतर अवसर मिल जाते हैं, जबकि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले युवा केवल संघर्ष और प्रतीक्षा में अपने कीमती वर्ष गंवा देते हैं। इसका असर देश के सामाजिक संतुलन और आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा है।

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शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

शिक्षाविदों का मानना है कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार समय की मांग है। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित बनाना होगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता, डिजिटल स्किल्स और नैतिक मूल्यों को शिक्षा का हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि छात्र पढ़ाई के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।

सरकारी संस्थानों को मजबूत करना जरूरी

सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाना बेहद आवश्यक है। इससे निजी संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और शिक्षा फिर से आम आदमी की पहुंच में आएगी।
यदि शिक्षा लगातार महंगी और भविष्य लगातार सस्ता होता गया, तो यह स्थिति देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे के लिए घातक साबित हो सकती है।

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