Tuesday, June 23, 2026
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Dausa News: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, शव तीन घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा

दौसा/राजस्थान (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान के दौसा जिले के राहुवास थाना क्षेत्र में स्थित दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर रविवार देर रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया। अज्ञात वाहन की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत हो गई, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक का शव करीब तीन घंटे तक सड़क पर पड़ा रहा, जिसके ऊपर से लगातार वाहन गुजरते रहे।

शव हुआ पूरी तरह क्षत-विक्षत

हादसे के बाद वाहनों के लगातार गुजरने से शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया। शरीर के अंग करीब 50 फीट दूर-दूर तक बिखर गए, जिससे घटनास्थल पर भयावह दृश्य बन गया। देर से सूचना मिलने और अंधेरे के कारण समय रहते यातायात नहीं रोका जा सका।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची

घटना की जानकारी मिलने पर राहुवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एक्सप्रेसवे की एंबुलेंस की मदद से शव को दौसा जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। फिलहाल पुलिस मृतक की शिनाख्त करने में जुटी हुई है।

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11:30 बजे मिली थी कंट्रोल रूम को सूचना

राहुवास थाना अधिकारी गोपाल शर्मा ने बताया कि रविवार रात करीब 11:30 बजे कंट्रोल रूम से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के चेनेज संख्या 208 पर दुर्घटना की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही एक्सप्रेसवे एंबुलेंस शव को अस्पताल पहुंचा चुकी थी।

प्रथम दृष्टया मंदबुद्धि प्रतीत हो रहा मृतक

थाना अधिकारी के अनुसार, प्रथम दृष्टया मृतक मंदबुद्धि प्रतीत हो रहा है। उसके पास से एक प्लास्टिक का कैरी बैग मिला है, जिसमें कपड़े, दवाइयां और कुछ अन्य सामान मौजूद था। पुलिस ने आसपास के थाना क्षेत्रों में सूचना भिजवा दी है।

सीसीटीवी फुटेज से तलाश जारी

पुलिस अज्ञात वाहन की पहचान के लिए एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही मृतक की पहचान के लिए सोशल मीडिया और स्थानीय थानों की मदद ली जा रही है।

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US: उपराष्ट्रपति जेडी वांस के घर पर हमला, खिड़कियां टूटीं, एक संदिग्ध हिरासत में

सिनसिनाटी/अमेरिका (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका के सिनसिनाटी शहर में उपराष्ट्रपति जेडी वांस के आवास पर रात के समय हमला किए जाने की खबर सामने आई है। इस हमले में घर की कई खिड़कियां टूट गईं, जिसके बाद सीक्रेट सर्विस और स्थानीय पुलिस हरकत में आ गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

सीक्रेट सर्विस और पुलिस की त्वरित कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही सीक्रेट सर्विस के एजेंट सोमवार सुबह तड़के ईस्ट वालनट हिल्स स्थित उपराष्ट्रपति के घर पहुंचे। स्थानीय पुलिस ने बताया कि एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, हालांकि उसके खिलाफ मामला दर्ज हुआ है या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय टीवी चैनल WCPO के अनुसार, पुलिस ने संदिग्ध को कस्टडी में लेने की बात कही है, लेकिन जांच से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा नहीं की गईं।

घटना के समय घर पर थे या नहीं जेडी वांस?

फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि हमले के समय उपराष्ट्रपति जेडी वांस घर पर मौजूद थे या नहीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वांस को शुक्रवार को फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ देखा गया था, जहां उन्होंने वेस्ट पाम बीच स्थित राष्ट्रपति के गोल्फ क्लब में समय बिताया।

वेनेजुएला मुद्दे पर हुई थी चर्चा

बताया जा रहा है कि जेडी वांस और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने की रणनीति पर चर्चा हुई थी। हालांकि, सुरक्षा कारणों के चलते वांस मार-ए-लागो में सैन्य अभियान का सीधा प्रसारण देखने नहीं गए।
इसके बजाय उन्होंने सुरक्षित वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अमेरिकी सैन्य अभियान की निगरानी की और अभियान समाप्त होने के बाद सिनसिनाटी लौट आए। उपराष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, वांस इस पूरी प्रक्रिया और योजना में सक्रिय रूप से शामिल थे।

जांच जारी, सुरक्षा और कड़ी

हमले के बाद से उपराष्ट्रपति के आवास और आसपास के इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस और सीक्रेट सर्विस मामले की गहन जांच कर रही है और सभी संभावित पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

संपूर्ण समाधान दिवस में उमड़ा जनसैलाब, 117 शिकायतें दर्ज

डीएम ने 23 मामलों का मौके पर किया निस्तारण, बोले—अब हर शिकायत का होगा गुणवत्तापूर्ण समाधान

महराजगंज (राष्ट्र की परंपरा)। जनसमस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान को लेकर तहसील नौतनवां में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में भारी संख्या में फरियादी पहुंचे। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने स्वयं जनशिकायतों की सुनवाई करते हुए प्रशासनिक अमले को संवेदनशील, जिम्मेदार और जवाबदेह बनने का सख्त संदेश दिया।
संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान कुल 117 जनशिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 23 मामलों का निस्तारण जिलाधिकारी द्वारा मौके पर ही कर दिया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को भेजते हुए डीएम ने निर्देश दिया कि हर शिकायत का निस्तारण तय समय-सीमा में, एस ओपी के अनुसार और शिकायतकर्ता की पूर्ण संतुष्टि के साथ किया जाए। औपचारिकता नहीं, समाधान चाहिए—डीएम ने दो टूक कहा कि शिकायत निस्तारण सिर्फ फाइलों तक सीमित न रहे। अधिकारी स्वयं निगरानी करें, अंतिम आख्या से पहले शिकायतकर्ता से संवाद करें और निस्तारण की पुष्टि हेतु स्पॉट मेमो अनिवार्य रूप से संलग्न किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही या मनमानी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईजीआरएस पोर्टल व तहसील दिवस से संबंधित प्रकरणों का निस्तारण गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतें प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी हैं, इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
ठंड में राहत, बाल विवाह पर सख्त पहरा
ठंड के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डीएम ने डीपीआरओ और सभी अधिशासी अधिकारियों को सार्वजनिक स्थानों व ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव की समुचित व्यवस्था करने तथा रैन बसेरों को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश दिए।साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मैरेज हॉल या आयोजन स्थल पर बाल विवाह नहीं होना चाहिए। इसके लिए मैरेज हॉल संचालकों से शपथ पत्र लेना अनिवार्य किया गया है।
इस दौरान संपूर्ण समाधान दिवस में पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीना, डीएफओ निरंजन सुर्वे, एसडीएम नवीन प्रसाद, परियोजना निदेशक रामदरश चौधरी, तहसीलदार नौतनवा कर्ण सिंह, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कन्हैया यादव, सहायक आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता सुनील गुप्ता, जिला सूचना अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी, डीपीआरओ श्रेया मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहें।

पराविधिक स्वयं सेवक बनने का अवसर, आवेदन 08 जनवरी तक

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद न्यायाधीश मोहन लाल विश्वकर्मा के निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र नाथ गोस्वामी द्वारा जनपद में पराविधिक स्वयं सेवक भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
इस भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत अध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, चिकित्सक, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न समितियों के सदस्य, जनपद अथवा प्रदेश स्तर के खिलाड़ी, ट्रांजेंडर समुदाय के सदस्य अथवा कोई भी शिक्षित व्यक्ति जो सामाजिक सेवा में रुचि रखता हो, आवेदन करने के लिए पात्र है।
पराविधिक स्वयं सेवक भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 08 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय, न्यायालय परिसर, संत कबीर नगर में संपर्क कर सकते हैं अथवा न्यायालय की वेबसाइट santkabirnagar.dcourts.gov.in पर विवरण देख सकते हैं।

संपूर्ण समाधान दिवस में डीएम–एसपी ने सुनी फरियादियों की समस्याएं, भूमि विवाद के त्वरित निस्तारण के निर्देश


बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को तहसील सदर बलिया में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। डीएम–एसपी ने एक-एक कर फरियादियों की शिकायतें गंभीरता से सुनीं और संबंधित विभागीय अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण व पारदर्शी निस्तारण के स्पष्ट निर्देश दिए। संपूर्ण समाधान दिवस में कुल 175 आवेदन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 11 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। प्राप्त शिकायतों में अवैध भूमि कब्जा, जमीन वरासत, शौचालय निर्माण, जाति प्रमाण पत्र, वृद्धा पेंशन, राशन कार्ड तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मामले शामिल रहे। इनमें सर्वाधिक शिकायतें भूमि विवाद से संबंधित थीं। जिलाधिकारी ने भूमि विवाद के मामलों में राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित कर मौके पर जाकर त्वरित समाधान कराने के निर्देश दिए, ताकि अनावश्यक विवाद और कानून व्यवस्था की समस्या न उत्पन्न हो।विकास खंड दुबहर के ग्राम शिवपुर से एक शिकायत आई, जिसमें एक वृद्ध व्यक्ति की पेंशन को गलत तरीके से मृत्यु दर्शाकर बंद किए जाने की बात कही गई। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला समाज कल्याण अधिकारी को मामले की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।विकास खंड सोहांव के ग्राम सुरही में पंचायत भवन निर्माण को कुछ ग्रामीणों द्वारा रोके जाने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने संबंधित खंड विकास अधिकारी को मौके पर जाकर तत्काल समाधान कराने को कहा। वहीं फेफना क्षेत्र में नहर से पानी आने के कारण किसानों की फसल नष्ट होने की शिकायत पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को स्थल निरीक्षण कर शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए।पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने कहा कि थाना स्तर से संबंधित मामलों का समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस अवसर पर एसडीएम सदर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश, वन विभाग के अधिकारी, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विजय यादव, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केशरी प्रसाद सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

भूमि विवाद का मामला अब प्रशासनिक कार्यशैली पर किए सवाल खड़े

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र के किशोर चेतन किशोर गांव में भूमि विवाद का मामला अब प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिलाधिकारी बलिया द्वारा मौके का निरीक्षण कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद जमीन पर जबरन जोताई कर गेहूं की बोआई करने वालों पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे पीड़ित के साथ-साथ ग्रामीणों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है।
ग्राम संठी चतुर, थाना व तहसील सिकंदरपुर निवासी रामप्रवेश राय पुत्र खेदन राय का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2008 में मौजा किशोर चेतन की आराजी संख्या 478, रकबा 0.069 हेक्टेयर भूमि का विधिवत बैनामा कराया था। आरोप है कि किशोर चेतन निवासी परशुराम चौबे, गुड्डू चौबे, सोनू चौबे, मन्नू चौबे और पिंटू चौबे ने 21 नवंबर 2025 की रात अवैध रूप से उनकी भूमि जोतकर उसमें गेहूं की बोआई कर दी।
पीड़ित ने बताया कि उसने नियमानुसार सरकारी शुल्क जमा कराकर भूमि का सीमांकन कराया था, लेकिन 30 अक्टूबर 2025 को विपक्षियों ने सीमांकन का सरकारी पत्थर उखाड़कर फेंक दिया। इस मामले में 31 अक्टूबर और 15 नवंबर को तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल वह कानूनगो की रिपोर्ट में वास्तविक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया गया। एक कोने पर पत्थर के स्थान पर ईंट गड़ी मिलने के बावजूद सरकारी चिन्ह उखाड़ने वालों के खिलाफ न तो प्राथमिकी दर्ज की गई और न ही अन्य विधिक कार्रवाई की गई। रामप्रवेश राय ने जिलाधिकारी से पुनः मांग की है कि उनके आदेश का अनुपालन कराते हुए मौके का निरीक्षण कराया जाए और जबरन खेती करने तथा सरकारी सीमांकन चिन्ह हटाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले को लेकर तहसील क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और प्रशासन की भूमिका पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

126 लीटर अवैध देशी शराब के साथ अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में अवैध शराब तस्करी के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान “ऑपरेशन प्रहार” के तहत थाना श्रीरामपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक दोपहिया मोटरसाइकिल से ले जाई जा रही 126 लीटर अवैध देशी शराब बरामद करते हुए एक अंतर्राज्यीय शराब तस्कर को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह तथा क्षेत्राधिकारी भाटपाररानी श्री अंशुमन श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। थानाध्यक्ष श्रीरामपुर डॉ. महेन्द्र कुमार के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने सोमवार सुबह मार्निंग वॉकर चेकिंग के दौरान बजाज शुगर मिल बाइपास रोड, प्रतापपुर के पास यह सफलता प्राप्त की।पुलिस ने मोटरसाइकिल संख्या BR 29AA 4947 से बिहार ले जाई जा रही दो बोरियों में रखी 14 पेटी अवैध देशी शराब (ब्राण्ड– बन्टी बबली) बरामद की। प्रत्येक पेटी में 45 पाउच एवं प्रत्येक पाउच 200 एमएल का था। कुल बरामदगी 126 लीटर आंकी गई।गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान प्रभुदयाल कुमार सिंह पुत्र नन्द जी सिंह, निवासी मैदनिया (बड़की), थाना मैरवा, जनपद सिवान (बिहार) के रूप में हुई है। अभियुक्त के विरुद्ध पूर्व में भी शराब तस्करी से संबंधित मामला दर्ज है।इस संबंध में थाना श्रीरामपुर पर मु0अ0सं0 04/2026, धारा 60/72 आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही की जा रही है।पुलिस के अनुसार बरामद शराब की अनुमानित कीमत लगभग 40 हजार रुपये तथा मोटरसाइकिल की कीमत करीब 50 हजार रुपये है।गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक राघवेन्द्र सिंह, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार, कांस्टेबल रवि प्रकाश पटेल एवं कांस्टेबल राजेन्द्र राव शामिल रहे।

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों का आलेख्य प्रकाशन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)तक आमंत्रितउप जिला निर्वाचन अधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अर्हता तिथि 1 जनवरी 2026 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों का आलेख्य प्रकाशन 6 जनवरी 2026 को किया जाएगा। इसके साथ ही नामावली में नाम जोड़ने, हटाने अथवा संशोधन से संबंधित दावे एवं आपत्तियां प्राप्त करने की अवधि 6 फरवरी 2026 तक निर्धारित की गई है।उन्होंने बताया कि सभी पात्र नागरिकों के नाम निर्वाचक नामावली में सम्मिलित करने के उद्देश्य से विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके युवा मतदाताओं के नाम अधिक से अधिक संख्या में निर्वाचक नामावली में जोड़े जाने पर जोर दिया जा रहा है।उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने आम नागरिकों से अपील की कि वे समय रहते अपनी पात्रता की जांच कर निर्वाचक नामावली में नाम दर्ज कराएं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

भूमि सीमांकन न होने से भड़के लिलकर के ग्रामीण, 8 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी

सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

तहसील क्षेत्र के मौजा लिलकर में भूमि सीमांकन को लेकर प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। गाटा संख्या 619 व 620, कुल रकबा लगभग 350 एकड़ की पैमाइश और सीमांकन की मांग को लेकर समस्त ग्रामवासी आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 जनवरी 2026 तक सीमांकन की कार्रवाई नहीं कराई गई तो 8 जनवरी से तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जिलाधिकारी बलिया द्वारा 15 अक्तूबर 2025 को काश्तकारों और पट्टेदारों की भूमि का सीमांकन कराने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया था। इसके अनुपालन में अपर जिलाधिकारी बलिया ने 24 नवंबर 2025 को राजस्व टीम गठित कर पैमाइश कराने का निर्देश भी दिया, लेकिन इसके बावजूद अब तक सीमांकन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। ग्रामीणों के अनुसार सीमांकन न होने के कारण काश्तकारों और पट्टेदारों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। भूमि विवाद के चलते खेती-बाड़ी प्रभावित हो रही है और गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कदम न उठाए जाने से लोगों का धैर्य जवाब देने लगा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल सीमांकन कराए जाने की मांग की है। धरना-प्रदर्शन की चेतावनी देने वालों में भागवत, संतोष यादव, धुव्रचंद राम, बरमेश्वर नाथ मिश्रा और रामाशंकर यादव प्रमुख रूप से शामिल हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। चेतावनी के बाद तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

यूपी पुलिस भर्ती 2025: योगी सरकार का बड़ा फैसला, आयु सीमा में 3 साल की छूट, लाखों युवाओं को राहत

लखनऊ / उत्तर प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों पर प्रस्तावित सीधी भर्ती-2025 के लिए अधिकतम आयु सीमा में एकमुश्त तीन वर्ष का शिथिलीकरण देने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।

32,679 पदों पर होगी भर्ती, सभी वर्गों को मिलेगा लाभ

सीधी भर्ती-2025 के अंतर्गत कुल 32,679 पदों को भरे जाने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। शासनादेश के अनुसार निम्न पदों पर भर्ती के लिए सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को एक बार के लिए आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दी जाएगी—

• आरक्षी नागरिक पुलिस (पुरुष/महिला)
• आरक्षी पीएसी / सशस्त्र पुलिस (पुरुष)
• आरक्षी विशेष सुरक्षा बल (पुरुष)
• महिला बटालियन हेतु महिला आरक्षी
• आरक्षी घुड़सवार पुलिस (पुरुष)
• जेल वार्डर (पुरुष एवं महिला)

यह निर्णय उत्तर प्रदेश लोक सेवा (भर्ती के लिए आयु सीमा का शिथिलीकरण) नियमावली-1992 के नियम-3 के तहत लिया गया है। यह शिथिलीकरण 31 दिसंबर 2025 को जारी भर्ती विज्ञप्ति के क्रम में 5 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के माध्यम से प्रभावी किया गया है।

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आयु सीमा के कारण बाहर हो रहे युवाओं को मिलेगा मौका

इस फैसले से ऐसे हजारों-लाखों अभ्यर्थियों को भर्ती में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो अब तक केवल आयु सीमा पूरी हो जाने के कारण आवेदन नहीं कर पा रहे थे। लंबे समय से भर्ती न होने के कारण युवाओं में जो निराशा थी, उसे यह निर्णय काफी हद तक दूर करेगा।

युवाओं के हित में योगी सरकार का बड़ा कदम

योगी आदित्यनाथ सरकार का यह निर्णय साफ दर्शाता है कि प्रदेश सरकार युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता दे रही है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को न्यायसंगत अवसर देना, रोजगार के नए रास्ते खोलना और प्रशासनिक निर्णयों में संवेदनशीलता बनाए रखना सरकार की नीति का हिस्सा है।

पुलिस भर्ती में आयु सीमा शिथिलीकरण का यह फैसला न केवल लाखों युवाओं की उम्मीदों को नया बल देगा, बल्कि यह भी साबित करता है कि योगी सरकार में युवाओं का भविष्य नीति निर्धारण के केंद्र में है।

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टकरसन गांव में मकान तोड़ने का आरोप, पीड़िता ने थाने में दी तहरीर

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के टकरसन गांव में पुश्तैनी मकान तोड़कर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित महिला ने आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए थाने में लिखित तहरीर दी है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

जेसीबी से मकान ध्वस्त करने का आरोप

पीपरपांती निवासी विजयलक्ष्मी मिश्रा ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि टकरसन गांव में कांशीराम आवास के समीप उनका पुश्तैनी मकान स्थित है। आरोप है कि गांव के ही सोमारु यादव और अनिल यादव ने रविवार को जेसीबी लगाकर उनके मकान को गिरवा दिया।
पीड़िता के अनुसार, जब उन्हें मकान तोड़े जाने की सूचना मिली तो वह तत्काल मौके पर पहुंचीं। वहां देखा कि जेसीबी से मकान पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है। विरोध करने पर आरोपितों ने मकान को अपना बताते हुए कब्जे का दावा किया।

डायल 112 पर दी गई सूचना

महिला ने बताया कि उन्होंने तुरंत डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार्य को रुकवाया गया। हालांकि, तब तक पूरा मकान गिराया जा चुका था और अंदर रखा घरेलू सामान भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पीड़िता थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

पीड़िता का आरोप है कि अवैध कब्जा करने वालों को पुलिस संरक्षण प्राप्त है, इसी कारण वे खुलेआम जेसीबी से मकान तोड़ने का दुस्साहस कर सके। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस का पक्ष

इस संबंध में थानाध्यक्ष वंश बहादुर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आवेदिका के ससुर द्वारा उक्त भूमि पूर्व में विक्रय की जा चुकी है। यादव पक्ष के लोग अपनी खरीदी गई भूमि का समतलीकरण करा रहे थे।
थानाध्यक्ष के अनुसार महिला की शिकायत प्रथम दृष्टया निराधार प्रतीत हो रही है, फिर भी पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।

सुखपुरा में शिव मंदिरों में चोरी से मचा हड़कंप, शिवलिंग व आभूषण उड़ा ले गए चोर

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। सुखपुरा कस्बा स्थित प्रसिद्ध बुढ़वा शिव मंदिर समेत दो शिवालयों में हुई सनसनीखेज चोरी से पूरे क्षेत्र में आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त है। रविवार देर रात चोरों ने बुढ़वा शिव मंदिर को निशाना बनाते हुए वहां स्थापित शिवलिंग को ही जमीन खोदकर निकाल लिया, जिस पर करीब तीन किलो चांदी का पत्तर लगा हुआ था। इसके साथ ही अरघा और नाग देवता पर चढ़ी चांदी भी चोर उड़ा ले गए।

इतना ही नहीं, मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा से सोने के आभूषण—नथिया, चूड़ी, कुंडल सहित अन्य श्रृंगार सामग्री—भी चोरी कर ली गई। चोरों ने वारदात को इतनी सफाई से अंजाम दिया कि किसी को भनक तक नहीं लगी।

तड़के सामने आई चोरी की घटना

घटना का खुलासा सोमवार तड़के उस समय हुआ, जब मंदिर के पुजारी प्रभु नाथ उपाध्याय रोज की तरह सुबह करीब 3:30 बजे मंदिर की साफ-सफाई के लिए पहुंचे। उन्होंने देखा कि शिवलिंग गायब है और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ के स्पष्ट निशान मौजूद हैं। इसके बाद तत्काल सुखपुरा थाना प्रभारी सुशील कुमार दुबे को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए जांच शुरू कर दी गई।

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दूसरे शिव मंदिर में भी चोरी

इसी रात पूर्व प्रधान शिवदान सिंह के घर के पास स्थित एक अन्य शिव मंदिर में भी चोरों ने ताला तोड़कर दानपेटिका चोरी कर ली। सुबह खेतों की ओर गई महिलाओं ने टूटी हुई दानपेटिका देखी, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्र किए।

वरिष्ठ अधिकारियों ने किया निरीक्षण

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक कृपाशंकर और क्षेत्राधिकारी उस्मान ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जल्द खुलासे का भरोसा दिलाया है। पुलिस कुछ संदिग्ध घुमक्कड़ जातियों के लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

लगातार मंदिरों में हो रही चोरी की घटनाओं से श्रद्धालुओं में भारी रोष है। स्थानीय लोगों ने रात्रि गश्त बढ़ाने और मंदिरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की मांग की है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर चोरी गए सामान की बरामदगी की जाएगी।

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देवरिया में हैरान करने वाला मामला: तीन साल की बच्ची को छोड़ मुंहबोले भांजे संग फरार हुई महिला, 10 लाख के जेवर भी ले गई

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला अपने तीन साल की मासूम बच्ची को छोड़कर मुंहबोले भांजे (प्रेमी) के साथ घर से फरार हो गई। हैरानी की बात यह है कि महिला का पति विदेश में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। परिजनों और पति की तमाम मिन्नतों के बावजूद दोनों पर इश्क का जुनून इस कदर सवार था कि उन्होंने परिवार और समाज की परवाह नहीं की।

मामला बनकटा थाना क्षेत्र के एक गांव का है। जानकारी के मुताबिक, घटना 24 दिसंबर की रात हुई। महिला और उसका प्रेमी पहले भी परिजनों द्वारा आपत्तिजनक हालत में पकड़े जा चुके थे। उस समय घर वालों ने दोनों को समझाने की कोशिश की थी और पति ने भी विदेश से फोन पर पत्नी से रिश्ते बचाने की गुहार लगाई थी, लेकिन बात नहीं बनी।

विदेश से लौटकर पति ने दर्ज कराई शिकायत

महिला के अचानक गायब होने की सूचना मिलने पर पति दुबई/सऊदी से भारत लौटा और बनकटा थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी युवक पति के चचेरे भाई का साला बताया जा रहा है, जो खुद भी शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है।

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10 लाख रुपये के गहने और नकदी लेकर फरार

पीड़ित पति का आरोप है कि उसकी पत्नी घर से भागते समय करीब 10 लाख रुपये के जेवर और नकदी भी साथ ले गई है। पति की शादी पांच साल पहले हुई थी और वह बेहतर भविष्य के लिए विदेश में नौकरी कर रहा था। लेकिन पत्नी अपने से दो साल छोटे युवक के प्रेम में इस कदर डूब गई कि उसने पति, बच्ची और सामाजिक मर्यादाओं तक को नजरअंदाज कर दिया।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट की शादी की तस्वीरें

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि फरार होने के बाद दोनों ने शादी कर ली है और इसकी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट भी की हैं। इस घटना के बाद गांव और आसपास के इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

बनकटा थाना प्रभारी विशाल उपाध्याय के अनुसार, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। महिला और युवक की तलाश की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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बलिया में नवजात और धात्री महिलाओं के पोषण पर संकट, पीएचसी-सीएचसी पर नहीं मिल रहा दूध और ब्रेड

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद बलिया में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर प्रसव के बाद धात्री महिलाओं और नवजात शिशुओं को मिलने वाला पौष्टिक आहार—दूध, ब्रेड और हल्का भोजन—उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि मां और नवजात दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी पैदा कर रही है।

स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, संस्थागत प्रसव के बाद प्रसूता महिला को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य केंद्र पर निगरानी में रखा जाना अनिवार्य है। इस दौरान महिला को दूध, ब्रेड, दलिया जैसे पौष्टिक आहार दिए जाने का प्रावधान है, ताकि प्रसव के बाद शरीर की कमजोरी दूर हो और नवजात को पर्याप्त स्तनपान मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बलिया के कई पीएचसी और सीएचसी पर यह सुविधा केवल कागजों तक सिमटकर रह गई है।

ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं का आरोप है कि प्रसव के बाद उन्हें न दूध दिया जाता है और न ही कोई पौष्टिक भोजन। कई मामलों में परिजनों को बाहर से दूध, बिस्किट या अन्य खाद्य सामग्री लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बनता है। कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि प्रसव के कुछ घंटों बाद ही उन्हें घर भेज दिया जाता है, जबकि नियमों के अनुसार इस अवधि में चिकित्सकीय निगरानी बेहद आवश्यक होती है।

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चिंताजनक बात यह है कि सीएचसी जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्रों पर भी हालात अलग नहीं हैं। कहीं रसोई न होने का हवाला दिया जा रहा है, तो कहीं बजट और सप्लाई की कमी बताकर जिम्मेदारी से बचा जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों की कमी और लापरवाही का सीधा असर नवजात शिशुओं की देखभाल पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त पोषण न मिलने से धात्री महिलाओं में एनीमिया, कमजोरी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जबकि नवजात का वजन और रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के बाद के पहले 48 घंटे मां और बच्चे दोनों के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। इस दौरान उचित पोषण और देखरेख न मिलने पर भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और निगरानी में लापरवाही बरती जा रही है।

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कुल मिलाकर, बलिया जनपद में प्रसव के बाद दी जाने वाली पोषण व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आती है। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल हस्तक्षेप करे, पीएचसी और सीएचसी पर दूध, ब्रेड और अन्य पोषण सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करे तथा लापरवाह कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ प्रसूता महिलाओं और नवजात शिशुओं तक पहुंच सके।

महामृत्युंजय मंत्र: भय से मुक्ति और चेतना के उत्थान का वैदिक सूत्र

कैलाश सिंह
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय वैदिक परंपरा में महामृत्युंजय मंत्र केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के बीच संतुलन स्थापित करने वाला आध्यात्मिक सूत्र है। यह मंत्र भय, रोग, संकट और मृत्यु-बोध से ऊपर उठकर मानव चेतना को आत्मिक शांति और जीवन की पूर्णता की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करता है। हजारों वर्ष पूर्व रचित यह मंत्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना अपने वैदिक काल में था।

ऋग्वेद से आधुनिक युग तक मंत्र की यात्रा

महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति ऋग्वेद के सप्तम मंडल में मानी जाती है, जिसके द्रष्टा ऋषि मार्कंडेय बताए जाते हैं। इसके बाद यजुर्वेद और अथर्ववेद में भी इसका उल्लेख मिलता है, जो इसकी व्यापक स्वीकृति और आध्यात्मिक महत्ता को प्रमाणित करता है। वैदिक ऋषियों के लिए मंत्र कोई जादुई शब्द नहीं, बल्कि चेतना को जाग्रत करने का साधन थे।

मृत्यु पर नहीं, मृत्यु-भय पर विजय का मंत्र

यह समझना आवश्यक है कि महामृत्युंजय मंत्र का उद्देश्य मृत्यु पर विजय पाना नहीं, बल्कि मृत्यु के भय से मुक्ति है। वैदिक दर्शन प्रकृति के नियमों के विरुद्ध नहीं, बल्कि उनके साथ सामंजस्य स्थापित करने पर बल देता है। यह मंत्र असमय मृत्यु, रोग और मानसिक भय से रक्षा की कामना करता है, ताकि मनुष्य संतुलित और शांत जीवन जी सके।

पौराणिक कथा और गूढ़ अर्थ

पौराणिक मान्यता के अनुसार, अल्पायु ऋषि मार्कंडेय ने भगवान शिव की आराधना में इस मंत्र का जप कर मृत्यु-भय से मुक्ति प्राप्त की। यह कथा किसी चमत्कार से अधिक आत्मिक जागरण और चेतना के विस्तार का संकेत देती है।

मंत्र के शब्द— “त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।”

यहाँ त्र्यम्बक शिव के त्रिनेत्र स्वरूप, सुगंधि जीवनदायी ऊर्जा और उर्वारुक (पका फल) के माध्यम से रोग, भय और आसक्ति के बंधनों से सहज मुक्ति की प्रार्थना की गई है। इसमें अमरत्व की नहीं, बल्कि मृत्यु के भय और पीड़ा से मुक्ति की भावना निहित है।

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विज्ञान और मनोविज्ञान भी मानते हैं प्रभाव

आधुनिक विज्ञान और मनोविज्ञान यह स्वीकार करते हैं कि ध्वनि और कंपन का मानव मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से मानसिक स्थिरता, तनाव में कमी और आत्मबल में वृद्धि होती है। इसी कारण रोग, संकट और मानसिक दबाव के समय इस मंत्र को विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है।

आज के युग में मंत्र की प्रासंगिकता

महामृत्युंजय मंत्र उस काल में रचा गया, जब जीवन को केवल शरीर नहीं, बल्कि चेतना के व्यापक स्वरूप के रूप में देखा जाता था। ऋषियों का अनुभव था कि भय ही सबसे बड़ा रोग है, और भयमुक्त चेतना ही वास्तविक अमृत। आज विज्ञान और तकनीक में प्रगति के बावजूद मानव भय, असुरक्षा और मानसिक तनाव से मुक्त नहीं हो पाया है। ऐसे समय में यह मंत्र आत्मिक संतुलन और आंतरिक शक्ति की याद दिलाता है।

कालजयी वैदिक चेतना का प्रतीक

वास्तव में महामृत्युंजय मंत्र की उत्पत्ति केवल वैदिक इतिहास की घटना नहीं, बल्कि मानव चेतना के उत्थान की शाश्वत कथा है। मृत्यु का भय शाश्वत है और उससे मुक्ति की तलाश भी—इसी कारण यह मंत्र आज भी जीवंत, प्रभावशाली और प्रासंगिक बना हुआ है।

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