Friday, January 23, 2026
Homeउत्तर प्रदेशमहंगी होती शिक्षा, सस्ता होता भविष्य: बढ़ती फीस और घटते रोजगार के...

महंगी होती शिक्षा, सस्ता होता भविष्य: बढ़ती फीस और घटते रोजगार के बीच फंसा युवा वर्ग

कैलाश सिंह 

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा को हमेशा से विकास और उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव माना गया है, लेकिन मौजूदा हालात इस धारणा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आज शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है, जबकि रोजगार के अवसर सिमटते जा रहे हैं। ऐसे में युवा वर्ग बढ़ती शिक्षा लागत और घटती नौकरियों के बीच असमंजस की स्थिति में फंसता नजर आ रहा है।

शिक्षा का बढ़ता बोझ, परिवारों पर आर्थिक दबाव

शहरों से लेकर कस्बों और गांवों तक अभिभावक बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी आय से कहीं अधिक खर्च करने को मजबूर हैं। निजी स्कूलों की भारी फीस, महंगी किताबें, यूनिफॉर्म, परिवहन शुल्क और कोचिंग संस्थानों का बढ़ता दबाव मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़ रहा है। कई परिवार बच्चों की शिक्षा के लिए कर्ज लेने तक को विवश हैं, लेकिन इसके बावजूद शिक्षा की गुणवत्ता और उसके परिणामों पर सवाल बने हुए हैं।

डिग्री है, नौकरी नहीं

आज हालात यह हैं कि युवाओं के हाथ में डिग्रियां तो हैं, लेकिन रोजगार की कोई गारंटी नहीं। सरकारी आंकड़े और जमीनी हकीकत दोनों बताते हैं कि शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंजीनियर, स्नातक और परास्नातक युवा वर्षों की पढ़ाई के बाद भी नौकरी के लिए भटक रहे हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में सीमित पदों के लिए लाखों आवेदन निराशा और हताशा को जन्म दे रहे हैं।

शिक्षा का निजीकरण बना बड़ी चुनौती

शिक्षा का बढ़ता निजीकरण इसे सेवा के बजाय व्यवसाय में बदलता जा रहा है। निजी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय मुनाफे की दौड़ में फीस बढ़ा रहे हैं, वहीं कोचिंग माफिया सफलता के सपने महंगी फीस के साथ बेच रहा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण क्षेत्रों और कमजोर आर्थिक वर्ग के मेधावी छात्रों को उठाना पड़ रहा है, जो संसाधनों के अभाव में पीछे छूट जाते हैं।

बढ़ती असमानता और सामाजिक असर

शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ती खाई समाज में आर्थिक और सामाजिक असमानता को और गहरा कर रही है। महंगे संस्थानों में पढ़ने वाले कुछ छात्रों को बेहतर अवसर मिल जाते हैं, जबकि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले युवा केवल संघर्ष और प्रतीक्षा में अपने कीमती वर्ष गंवा देते हैं। इसका असर देश के सामाजिक संतुलन और आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा है।

ये भी पढ़ें – UP Police Recruitment 2026: 32679 सिपाही भर्ती में सामान्य वर्ग को आयु सीमा छूट मिलने की संभावना कम

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत

शिक्षाविदों का मानना है कि मौजूदा शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार समय की मांग है। शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उसे रोजगारोन्मुख और कौशल आधारित बनाना होगा। व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता, डिजिटल स्किल्स और नैतिक मूल्यों को शिक्षा का हिस्सा बनाना जरूरी है, ताकि छात्र पढ़ाई के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।

सरकारी संस्थानों को मजबूत करना जरूरी

सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाना बेहद आवश्यक है। इससे निजी संस्थानों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और शिक्षा फिर से आम आदमी की पहुंच में आएगी।
यदि शिक्षा लगातार महंगी और भविष्य लगातार सस्ता होता गया, तो यह स्थिति देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे के लिए घातक साबित हो सकती है।

ये भी पढ़ें – बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं की हत्या के विरोध में आक्रोश मार्च

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments