कुछ लोग ग़ज़ब के होते थे,
वे जानते थे जीना कैसे है,
और मौत सामने आए जब,
तब फिर मरना उनको कैसे है।
कोटि कोटि नमन मेरा है उनको,
आज जन्मदिन उनका पावन है,
नाम पंडित चन्द्र शेखर आज़ाद,
जो हो गये शहीदे वतन भारत हैं।
एक दिन सरदार भगतसिंह ने
हंसते हुए कहा, “पंडित जी,
आपके लिए अंग्रेजों को दो
रस्सियों की जरूरत पड़ेगी।
एक आपकी मोटी कमर के लिए
और दूसरी आपकी गर्दन के लिए,
बोले आज़ाद सुनो भगत! रस्सा-
फस्सा तुम लोग अपने लिए रखो।
मेरे पास जब तक यह ‘बमतुल
बुखारा’ यानी उनकी पिस्टल है,
तब तक कोई भी अंग्रेज बहादुर
आज़ाद को छू भी नहीं सकता है।
पंद्रह गोलियां उन पर दागूंगा,
सोलहवी से खुद को उड़ा लूंगा,
पंडित जियेगा तो भी आज़ाद,
आदित्य मरूँगा तो भी आजाद।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के आचार्य प्रो. अजय…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के तहत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के महिला…
घर के बाहर निकलते समय बिगड़ा संतुलन- सड़क पर गिरने के बाद ट्रैक्टर से हुए…
लीलकर गांव में घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, पुलिस महिला को सुरक्षित उतारने में जुटी सिकंदरपुर…
सगी बड़ी भाभी ने ही रची थी साजिशपुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा,जेवर और नकदी बरामद…
योजना के छह वर्ष पूरे होने पर लोक कल्याण मेला आयोजित,उत्कृष्ट पथ विक्रेताओं को मिला…