
पीलीभीत वोटर लिस्ट में बड़ा खेल! 10,470 मतदाता प्रविष्टियों पर घिरे दो SDM, चुनाव आयोग ने दिए निलंबन के आदेश
पीलीभीत (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची की कथित गड़बड़ियों ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। विधानसभा क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में 10,470 प्रविष्टियों में अनियमितताओं की जांच के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने तत्कालीन मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) एवं एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक और निर्वाचन तंत्र में खलबली मच गई है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र तैयार कर जांच के लिए निर्वाचन आयोग को सौंपे जाएं। साथ ही आयोग की पूर्व अनुमति के बिना उन्हें बहाल नहीं किया जा सकेगा। मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। 13 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम बदलने का आरोप मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब कांग्रेस ने लखनऊ में पीलीभीत की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया गया कि 13 हजार से अधिक मतदाताओं के पुराने ईपीआईसी (EPIC) नंबर बरकरार रखते हुए उनके नाम बदल दिए गए। कांग्रेस का दावा था कि यह बदलाव एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद किया गया और मुस्लिम समुदाय के मतदाता इससे प्रभावित हुए। आरोपों के मुताबिक, यदि संबंधित मतदाता अपने पुराने ईपीआईसी नंबर के आधार पर मतदान करने पहुंचते, तो सूची में नाम नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी हो सकती थी। हालांकि, इन आरोपों और प्रत्येक प्रविष्टि की स्थिति का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगा। एफआईआर में नई धारा जोड़ने के निर्देश निर्वाचन आयोग ने दोनों ईआरओ और कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने का निर्देश भी दिया है। इसके अलावा सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े पांच सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की रिपोर्ट भी तलब की गई थी। जिला निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट राज्य के निर्वाचन अधिकारियों को भेज दी है। तबादलों के बाद अब निलंबन, जांच का दायरा बढ़ा प्रकरण सामने आने के बाद तत्कालीन एसडीएम को उनके पदों से हटाकर प्रशासनिक स्तर पर नई तैनातियां की गई थीं। पूरनपुर में नागेंद्र पांडे, बीसलपुर में प्रमेश कुमार, अमरिया में राजकुमार बैठा और कलीनगर में पवन कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि सदर में एसडीएम श्रद्धा सिंह तैनात हैं। मामले में अमरिया और ललौरीखेड़ा क्षेत्र के कुछ अन्य अधिकारियों के संबंध में भी रिपोर्ट भेजी गई है। इनमें संबंधित बीडीओ और बीईओ के साथ अमरिया के तहसीलदार का नाम शामिल है। जांच की प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार के अनुसार, मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। एसएसआर के तहत अशुद्धियों को दूर करने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। ईआरओ और एईआरओ को मतदाता सूची की शुद्धता के मानकों के बारे में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में किन-किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है और मतदाता सूची में सामने आई कथित गड़बड़ियों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। निर्वाचन आयोग के सख्त रुख से साफ है कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
