
खाकी शर्मसार!
जमशेदपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जिस पुलिस थाने में पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिलने की उम्मीद होती है, वहीं एक महिला के साथ दुष्कर्म की कथित घटना ने पूरे पुलिस महकमे को कठघरे में खड़ा कर दिया है। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में सामने आए इस गंभीर मामले ने कानून के रखवालों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घरेलू विवाद की शिकायत लेकर थाने पहुंची महिला ने एक पुलिसकर्मी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने सख्त कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मदद के बहाने कमरे में ले जाने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता गुरुवार को पारिवारिक विवाद से परेशान होकर शिकायत दर्ज कराने गम्हरिया थाने पहुंची थी। आरोप है कि वहां तैनात आरक्षी नीरज लकड़ा ने मदद करने के बहाने महिला को थाने के एक कमरे में ले जाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
मुख्य आरोपी गिरफ्तार, जांच के लिए SIT गठित
मामले में आरोपी सिपाही नीरज लकड़ा को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की ओर से उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। एसपी के निर्देश पर सरायकेला के एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, जो पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है।
जांच टीम ने थाने पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और संबंधित कमरे को सील कर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की। पीड़िता के लिखित आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। साथ ही, नियमानुसार महिला की मेडिकल जांच भी कराई जा रही है।
थानेदार समेत चार पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
इस मामले में कर्तव्य के प्रति लापरवाही और गंभीर चूक के आरोप में थाना प्रभारी संजय प्रसाद, सब-इंस्पेक्टर मनोज साहू, अनिरुद्ध सिंह और आरक्षी संतोष राय को निलंबित किया गया है। पुलिस अधिकारियों की भूमिका और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत साक्ष्य जुटाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
इस घटना ने पुलिस थानों में महिलाओं की सुरक्षा, शिकायतकर्ताओं के साथ व्यवहार और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, मामले में आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही होगी। पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना भी आवश्यक है।
