यूपी में ठेकेदारों की बड़ी मांग: कोषागार पोर्टल से हटे प्री-चेकर व्यवस्था, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र; गोरखपुर-जौनपुर का दिया उदाहरण

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों की समस्याओं को लेकर उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने प्री-चेकर व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कोषागार पोर्टल पर खण्डीय लेखाधिकारियों एवं लेखाकारों को चेकर के रूप में दी गई मान्यता समाप्त करने की मांग की है। समिति का कहना है कि इस व्यवस्था के कारण खण्डीय स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं और कार्यदायी संस्थाओं के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। समिति ने अपने पत्र में गोरखपुर और जौनपुर समेत अन्य जिलों का उदाहरण देते हुए व्यवस्था की समीक्षा कराने का आग्रह किया है। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्यमंत्री से व्यवस्था में बदलाव की मांग
22 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने कहा है कि अपर मुख्य सचिव वित्त की अध्यक्षता में 20 मार्च 2023 को हुई बैठक के कार्यवृत्त के प्रस्तर-2 में प्रपत्र 103 के तहत लेखाधिकारियों को कोषागार पोर्टल पर चेकर के रूप में कार्य कराने का निर्णय लिया गया था। समिति के अनुसार, इस व्यवस्था से खण्डीय स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्वहन और कार्यप्रणाली को लेकर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। समिति ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि लेखाधिकारियों को कार्यदायी संस्थाओं के खण्डीय कार्यालयों में उनके निर्धारित दायित्वों के अनुरूप कार्य करने दिया जाए और कोषागार पोर्टल पर चेकर के रूप में उनकी मान्यता समाप्त की जाए।
कोषाधिकारी को चेकर बनाने का प्रस्ताव
समिति का तर्क है कि जब कोषागार में कोषाधिकारी की व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो चेकर की जिम्मेदारी भी कोषाधिकारी से ही निभाई जानी चाहिए। समिति के मुताबिक, इससे जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होगा और वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। समिति ने यह भी अनुरोध किया है कि खण्डीय लेखाधिकारियों को उनके मूल कार्यक्षेत्र तक सीमित रखते हुए कोषागार पोर्टल की जांच संबंधी जिम्मेदारी अलग की जाए। अब इस मांग पर शासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों की निगाहें रहेंगी।
शासन और वित्त विभाग को भी भेजी गई प्रतिलिपि
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि निदेशक, कोषागार निदेशालय उत्तर प्रदेश, अपर मुख्य सचिव वित्त, प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), वित्त विभाग के संबंधित अधिकारियों तथा लोक निर्माण विभाग और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंताओं को भी भेजी गई है। समिति ने अपने पत्र में कोषागार निदेशालय के 19 अप्रैल 2024 के पत्र का भी संदर्भ दिया है। अब देखना होगा कि शासन इस व्यवस्था की समीक्षा करता है या नहीं और ठेकेदारों की मांग पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं। निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति की मांग का मुख्य उद्देश्य कोषागार पोर्टल पर चेकर की जिम्मेदारी में बदलाव कर वित्तीय प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनाना है। फिलहाल यह समिति की ओर से उठाई गई मांग है; इस संबंध में शासन के निर्णय या किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।