इंदौर (राष्ट्र की परम्परा)। शरद पूर्णिमा की उजली रात, चाँदनी की शीतल आभा और राधा-कृष्ण की दिव्य रासलीला के आध्यात्मिक भावों को समेटे कवि, लेखक एवं समीक्षक संजय एम. तराणेकर ने अपनी कविता के माध्यम से भक्ति, प्रेम, प्रकृति और सुख-समृद्धि का सुंदर चित्रण किया है। कविता में शरद पूर्णिमा की चाँदनी, वृंदावन की प्रेममयी छटा, मां लक्ष्मी के आगमन की मंगल बेला तथा मानवीय संवेदनाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया है।

शरद पूर्णिमा पर विशेष कविता

ये शरद की उजली रात है, और चाँदनी का नूर,
प्रकृति के कण-कण में छाया भक्ति का सुरूर।
नील गगन में चाँद दमके, तारे यहाँ करते श्रृंगार,
अमृत बरसाएँ चाँदनी, करती मन को पारावार।
आज चाँदनी में नहाई धरती, शीतल मंद बयार,
यूं भक्ति-भाव से गूँज उठे मंदिर और घर-द्वार।
ये राधा-कृष्ण की रासलीला, प्रेम सुधा बरसाए,
मुरली की मधुरिम तान हृदय में रस घोल जाए।
वृंदावन की कुंज गलियों में प्रेम का हैं मधुमास,
कृष्ण के संग है राधा-रानी, भक्ति का उल्लास।
गोपियों के नृत्य में झलकता आत्मा का संगीत,
प्रेम जहाँ पूजा बन जाए, जीवन हो पावन-प्रीत।
देखो माँ लक्ष्मी के आगमन की मंगल बेला आई,
धन-धान्य एवं सुख-समृद्धि की शुभ आशा लाई।
व्रत, पूजन और दीप जलाकर करें प्रभु का ध्यान,
मन के भीतर ज्योति जले, मिट ही जाए अज्ञान।
हाँ, खीर की कटोरी चाँद तले श्रद्धा से सज जाए,
हर एक परिवार के आँगन में खुशियों की धुन गाए।
प्रेम, दया और सत्य का दीप हृदय में ऐसे जलाएँ,
दीन-दुखियों के जीवन में आशा के फूल खिलाएँ।
कवि: संजय एम. तराणेकर
कवि, लेखक एवं समीक्षक
इंदौर-452011, मध्य प्रदेश