चारा घोटाले में 25 साल से फरार आरोपी गिरफ्तार! लखनऊ रेलवे स्टेशन पर CBI का शिकंजा, 10 करोड़ की दवा आपूर्ति का मामला

रांची/लखनऊ (✍️ राष्ट्र की परम्परा)। चारा घोटाले के एक मामले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी सत्येंद्र कुमार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार आरोपी को दबोच लिया गया। आरोपी के खिलाफ अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी था। गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले जा रही है, जहां संबंधित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। इस कार्रवाई को चारा घोटाले से जुड़े पुराने मामलों में जांच एजेंसी की बड़ी सफलता माना जा रहा है। गुप्त सूचना पर CBI ने लखनऊ स्टेशन पर बिछाया जाल जांच एजेंसी को गुप्त सूचना मिली थी कि सत्येंद्र कुमार मध्यप्रदेश के गुना से ट्रेन में सवार होकर लखनऊ पहुंचने वाला है। सूचना मिलते ही सीबीआई की टीम ने रेलवे स्टेशन पर निगरानी बढ़ा दी और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखने लगी। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही अधिकारियों ने संबंधित बोगी में उसकी पहचान की और उसे हिरासत में ले लिया। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेने की प्रक्रिया पूरी की गई। करीब ढाई दशक तक कानून की पकड़ से बाहर रहे आरोपी की गिरफ्तारी से इस पुराने मामले में आगे की न्यायिक कार्रवाई का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। 10 करोड़ रुपये से अधिक की दवा आपूर्ति पर सवाल सत्येंद्र कुमार पर चारा घोटाले के दौरान पशुपालन विभाग को दवाइयों की आपूर्ति के नाम पर सरकारी खजाने से कथित तौर पर फर्जी तरीके से रकम निकालने का आरोप है। जांच से जुड़े विवरणों के मुताबिक, उसने अपने सहयोगी दिनेश राय के साथ मिलकर दवा आपूर्ति का कारोबार खड़ा किया था। आरोप है कि इस फर्म के माध्यम से 10 करोड़ रुपये से अधिक की दवाइयों की आपूर्ति दर्शाकर सरकारी धन के गबन में भूमिका निभाई गई। बताया जाता है कि सत्येंद्र का परिवार रांची में कचहरी के पास रहता था। सत्येंद्र कुमार और दिनेश राय ने रांची स्थित बीआईटी मेसरा से बी-फार्मा की पढ़ाई की थी। इसके बाद दोनों ने दवा निर्माण से जुड़ी कंपनी बनाई। इसी कंपनी के जरिए पशुपालन विभाग को बड़े पैमाने पर दवाओं की आपूर्ति दिखाए जाने का मामला जांच के दायरे में आया। हालांकि, आरोपी पर लगे आरोपों के संबंध में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा। 2001 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद से था फरार इस मामले में दिनेश राय को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और अदालत उसे सजा भी सुना चुकी है। दूसरी ओर, सत्येंद्र कुमार वर्ष 2001 में सीबीआई की ओर से आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद से फरार बताया जा रहा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पटना स्थित अपना आवास भी छोड़ दिया था। जांच एजेंसी को फरारी के दौरान उसके नेपाल में दवा कंपनी शुरू करने और वहां रहने की सूचना भी मिली थी। लगातार तलाश के बावजूद वह लंबे समय तक सीबीआई की पकड़ से बाहर रहा। अदालत से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद उसकी तलाश जारी थी। आखिरकार, गुप्त सूचना के आधार पर लखनऊ रेलवे स्टेशन पर की गई कार्रवाई में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। क्या है चारा घोटाला? चारा घोटाला एकीकृत बिहार के समय पशुपालन विभाग में सरकारी खजाने से कथित तौर पर फर्जी बिलों और कागजी आपूर्ति के जरिए धन निकासी से जुड़ा बहुचर्चित मामला है। वर्ष 1996 में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान सरकारी धन की अवैध निकासी से जुड़े कई मामले सामने आए। इस घोटाले के विभिन्न मामलों में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समेत कई नेताओं, अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं को अदालतों से सजा सुनाई जा चुकी है। सत्येंद्र कुमार की गिरफ्तारी ने एक बार फिर इस बहुचर्चित घोटाले की यादें ताजा कर दी हैं। अब सभी की नजरें रांची में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर रहेंगी, जहां आरोपी को पेश किए जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी।