किसानों के लिए बड़ी पहल: आगरा में कल जुटेंगे तीन मंडलों के कृषि विशेषज्ञ, रबी की फसल बढ़ाने की मिलेगी आधुनिक तकनीक की जानकारी

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। किसानों की उपज बढ़ाने, खेती को अधिक लाभकारी बनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को आगरा में संयुक्त मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया जाएगा। मंडलायुक्त सभागार में होने वाली इस गोष्ठी में अलीगढ़, आगरा और बरेली मंडल के कृषि विभागों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा चयनित कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। कार्यक्रम में किसानों को रबी फसलों के बेहतर उत्पादन, नवीन कृषि तकनीकों और कृषि विपणन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। जिलाधिकारी मनीष बंसल के अनुसार, गोष्ठी में संबंधित मंडलों के कार्यक्षेत्र में स्थित राज्य कृषि विश्वविद्यालयों और तीन से पांच अग्रणी कृषि विज्ञान केंद्रों की सहभागिता रहेगी। आयोजन के दौरान कृषि तकनीक, खेती में नवाचार और फसलों के विपणन से संबंधित जानकारी देने के लिए विशेष स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से किसानों को खेती के नए तरीकों और उपलब्ध तकनीकी विकल्पों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम के सफल आयोजन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी, आगरा को नोडल अधिकारी नामित किया है। संबंधित विभागों और जनपदों को शासन के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक तैयारियां समय से पूरी करने तथा आयोजन की सभी व्यवस्थाएं व्यवस्थित ढंग से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। रबी का मौसम किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान गेहूं, सरसों, चना और अन्य मौसमी फसलों की खेती की जाती है। ऐसे में उन्नत कृषि तकनीक, बेहतर फसल प्रबंधन और उपज के उचित विपणन की जानकारी किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है। आगरा में होने वाली यह गोष्ठी कृषि विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के बीच अनुभव साझा करने का अवसर भी बनेगी। अब इस आयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य यही रहेगा कि कृषि से जुड़ी नई जानकारियां किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें और उनका लाभ खेतों में उत्पादन बढ़ाने के रूप में दिखाई दे। यदि गोष्ठी में साझा किए जाने वाले तकनीकी सुझावों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जाता है, तो इससे रबी फसलों की उत्पादकता और खेती की कार्यक्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।