पुत्रों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए माताओं ने रखा व्रत, घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत के अवसर पर शनिवार को घाघरा नदी के सरयू तट स्थित पार्वती भागलपुर गांव के कालीचरण घाट समेत क्षेत्र के विभिन्न नदी घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पुत्रों की लंबी आयु, सुख-शांति और समृद्धि की कामना को लेकर माताओं ने श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया।सुबह से ही सरयू नदी के तट पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। महिलाएं अपने साथ पूजन सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचीं और पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार जिउतिया पूजन किया। पूजन के दौरान माताओं ने अपने पुत्रों के स्वस्थ, दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना की।जिउतिया पर्व में बरियार पौधे का विशेष महत्व रहा। माताएं शाम से ही बरियार पौधा लेकर घाटों पर पहुंचीं। विधि-विधान से पूजन के बाद पौधे को जमीन में रोपित किया गया। बरियार की मजबूती को पुत्रों के जीवन, परिवार की खुशहाली और वंश की निरंतर उन्नति से जोड़कर देखा जाता है।जीवित्पुत्रिका व्रत से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका संबंध महाभारत काल की कथा से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अश्वत्थामा ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे अभिमन्यु के पुत्र को नष्ट करने का प्रयास किया था, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से उसे जीवनदान मिला और वही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित कहलाया। वहीं, जिउतिया पर्व की एक अन्य प्रचलित कथा जिमूतवाहन के त्याग और परोपकार से जुड़ी है।क्षेत्र के तेलिया अफगान, तेलिया शुक्ला, मईल, बलिया उत्तर और बलिया दक्षिण सहित विभिन्न घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। माताएं निजी साधनों, दोपहिया वाहनों और ई-रिक्शा से घाटों तक पहुंचीं। पूजन-अर्चन के बाद दान-दक्षिणा भी की गई।सरयू नदी में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। नदी किनारे बांस-बल्ली लगाकर बैरिकेडिंग की गई थी, ताकि श्रद्धालु निर्धारित सीमा से आगे गहरे पानी में न जाएं। बाढ़ की स्थिति के बावजूद महिलाओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। जिउतिया पर्व ने सरयू तट पर धार्मिक आस्था, मातृ प्रेम और लोक परंपरा की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।