पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा और राजद के बीच 51 सीटों पर सीधी टक्कर ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इन सीटों में तेजस्वी यादव की राघोपुर और सम्राट चौधरी की तारापुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीटें शामिल हैं, जहां दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर है। उत्तर बिहार से लेकर सीमांचल और मगध तक फैले इन क्षेत्रों में अब हर दिन राजनीतिक समीकरण नए रंग ले रहे हैं।
बिहार की राजनीति में इस बार मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प हो गया है। भाजपा जहां 101 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है, वहीं राजद 143 सीटों पर ताल ठोक रही है। इनमें से 51 सीटों पर भाजपा और राजद के बीच सीधा आमना-सामना है।
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2020 के चुनाव में दोनों दलों का प्रदर्शन लगभग बराबर रहा था — राजद ने 75 और भाजपा ने 74 सीटें जीती थीं। यही वजह है कि इस बार इन 51 सीटों के नतीजे पूरे राज्य की सत्ता समीकरण तय करेंगे।
राघोपुर सीट पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और तारापुर में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आमने-सामने हैं। इसके अलावा भाजपा के पूर्व सांसद रामकृपाल यादव (दानापुर) और सुनील कुमार पिंटू (सीतामढ़ी) भी विधानसभा की जंग में उतर चुके हैं, जहां उनकी भिड़ंत राजद प्रत्याशियों से होगी।
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ये 51 सीटें सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों की भी परीक्षा हैं — मधुबन, मोतिहारी, सीवान, हाजीपुर, छपरा, तारापुर, राघोपुर, मुंगेर, जमुई जैसी सीटों पर मतदाताओं की भूमिका निर्णायक होगी।
राज्य के हर इलाके में फैली ये सीटें बताती हैं कि इस बार मुकाबला सिर्फ नेताओं का नहीं बल्कि पूरे बिहार की दिशा तय करने वाला है।
