भारतीय सनातन संस्कृति
और परम्परा को नकारकर,
आतताइयों ने कब्जा किया,
भारत को ग़ुलाम बना लिया।

ग़ुलामी की जंजीरें काटकर,
महापुरुषों ने देश आज़ाद किया,
अंग्रेज़ी परम्परा को दुत्कार कर
भारत ने स्वराज स्थापित किया।

सैकड़ों सालों की परतंत्रता,
अंग्रेजियत अब भी क़ायम है,
अंग्रेज़ चले गए अंग्रेज़ी छोड़ गये,
हिंदी अब भी राष्ट्रभाषा नहीं है।

हिंदी हमारी सर्वमान्य, सबसे
अधिक बोली जाती भाषा है,
सारे मतभेद और मनभेदों को
भूल हिंदी राष्ट्रभाषा बनाना है।

आदित्य विदेशी भाषा भगाओ,
अपनी मातृभाषा को अपनाओ,
सबसे अधिक बोली जाने वाली,
भारत में हिंदी राष्ट्रभाषा बनाओ।

  • डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
    ‘आदित्य’