नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मंगलवार देर रात अतिक्रमण-विरोधी अभियान के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। मैक्स हॉस्पिटल रोड को चौड़ा करने की योजना के तहत नागरिक निकाय की टीम ने बुलडोजर की मदद से सड़क किनारे मौजूद कथित अवैध ढांचों को हटाया। कार्रवाई की जद में मदीना मस्जिद का एक हिस्सा और आसपास के कुछ निर्माण भी आए।
कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई और विरोध-प्रदर्शन के बीच पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी।
तीन नोटिस के बाद हुई कार्रवाई का दावा
प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े पक्ष के अनुसार, मस्जिद के इमाम को परिसर खाली करने के लिए निर्धारित अवधि में तीन नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद जगह खाली नहीं होने पर अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। क्षेत्र में सड़क को करीब 30 मीटर तक चौड़ा करने की योजना के तहत पिछले कई सप्ताह से सड़क किनारे बने कथित अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया चल रही थी।
बताया गया है कि इसी परियोजना के तहत मई और जून में भी इलाके में कार्रवाई की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में मकानों को हटाया गया था।
मौके पर पहुंचे AIMIM नेता शोएब जमाई
मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई की सूचना मिलने पर AIMIM दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमाई देर रात शालीमार बाग पहुंचे। उन्होंने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे असंवैधानिक बताया।
जमाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि मस्जिद के खिलाफ देर रात करीब तीन बजे बुलडोजर कार्रवाई की गई। उन्होंने प्रशासन पर लोगों को घटनास्थल के आसपास जाने से रोकने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि मस्जिद के इमाम और कमेटी के सदस्यों को अंदर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि धार्मिक सामग्री और कुरान की प्रतियां सुरक्षित बाहर निकाली जा सकें।
AIMIM नेता ने इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुई एक पूर्व कार्रवाई से करते हुए इसे ‘सहारनपुर पार्ट-2’ न बनने देने की बात कही। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप और दावे हैं।
आज जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक
शालीमार बाग की घटना के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से 23 सितंबर को दिल्ली में बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों में मस्जिदों और मदरसों से जुड़े ढांचों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के मुद्दे पर चर्चा प्रस्तावित है।
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी की ओर से बुलाई गई इस बैठक में कानूनी पहलुओं के साथ आगे की रणनीति पर भी विचार किए जाने की संभावना है। मुस्लिम संगठनों की ओर से ऐसी कार्रवाइयों को लेकर पहले भी चिंता जताई जाती रही है।
फिलहाल शालीमार बाग में हुई कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक पक्ष, स्थानीय लोगों और राजनीतिक संगठनों के बीच अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मामले से जुड़े न्यायालयीन आदेश और आधिकारिक दस्तावेज इस पूरे घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण होंगे।