चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 सितंबर यानी आज अमेरिका के दौरे पर पहुंचेंगे। यह 11 साल बाद उनकी अमेरिका की पहली यात्रा होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद ज्वाइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर शी जिनपिंग का स्वागत कर सकते हैं।

किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का खुद एयरपोर्ट पहुंचना सामान्य नहीं माना जाता। इससे पहले ट्रंप ने अगस्त 2025 में अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एयरफील्ड पर स्वागत किया था।

व्हाइट हाउस में होगा स्टेट डिनर

शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका पहुंचेंगे। व्हाइट हाउस में उनके सम्मान में स्टेट डिनर का आयोजन भी किया जाएगा।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, 23 सितंबर को ट्रंप ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर शी जिनपिंग और पेंग लियुआन का स्वागत करेंगे। इसके अगले दिन यानी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में औपचारिक स्टेट अराइवल सेरेमनी होगी।
इसके बाद ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच वॉशिंगटन में द्विपक्षीय बातचीत होगी।

चार महीने बाद फिर आमने-सामने होंगे ट्रंप-जिनपिंग

ट्रंप और शी जिनपिंग की 2026 में यह दूसरी प्रमुख आमने-सामने मुलाकात होगी। इससे पहले दोनों नेताओं की मई 2026 में बीजिंग में मुलाकात हुई थी।

ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन के दौरे पर गए थे और 14 मई को दोनों नेताओं ने बीजिंग में बातचीत की थी।
इस बार दोनों नेताओं की बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक और रणनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार बातचीत चल रही है।

टैरिफ और व्यापार पर रहेगी नजर

ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत में टैरिफ और अमेरिका-चीन व्यापार प्रमुख मुद्दों में रह सकते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव का असर वैश्विक बाजार और सप्लाई चेन पर भी पड़ता है।

बैठक में व्यापार असंतुलन का मुद्दा भी उठ सकता है। इसके अलावा चीन से अमेरिका में होने वाले निवेश, दुर्लभ खनिजों और अन्य व्यापारिक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की संभावना है।

AI और ताइवान भी अहम मुद्दे

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भी ट्रंप-जिनपिंग बैठक का अहम मुद्दा हो सकता है। अमेरिका और चीन दोनों AI और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

ताइवान भी दोनों नेताओं की बातचीत का संवेदनशील मुद्दा रहेगा। चीन ताइवान को लेकर अमेरिकी सैन्य समर्थन और हथियारों की बिक्री का विरोध करता है।

रूस से तेल खरीद और ईरान युद्ध पर भी चर्चा संभव

रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में महत्वपूर्ण हो सकता है। अमेरिका उन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाने की धमकी दे चुका है, जो रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं।

चीन और भारत दोनों रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं। रूस को लेकर अमेरिका की नीति में बदलाव या चीन के साथ किसी तरह की सहमति का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।

इसके अलावा ईरान युद्ध भी बातचीत का एक संभावित मुद्दा हो सकता है। चीन और अमेरिका के बीच ईरान को लेकर मतभेद हैं। मध्य पूर्व की स्थिति का असर तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है।