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कोलंबो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। श्रीलंका क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अनुभवी ऑलराउंडर धनंजय डी सिल्वा ने टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से कप्तान का पद छोड़ दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह खिलाड़ी के तौर पर श्रीलंका की राष्ट्रीय टीम के लिए उपलब्ध रहेंगे। उनके इस फैसले के बाद अब टीम की अगुवाई की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस पर चर्चा तेज हो गई है।
धनंजय डी सिल्वा को जनवरी 2024 में श्रीलंका की टेस्ट टीम का कप्तान नियुक्त किया गया था। उन्होंने श्रीलंका की चयन समिति को लिखे पत्र में कहा कि अब नेतृत्व की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपने का समय आ गया है। उनका मानना है कि नए खिलाड़ियों को नेतृत्व का अवसर देने से टीम को भविष्य के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि कप्तानी छोड़ने का अर्थ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी बनाना नहीं है। वह बतौर खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे और टीम के लिए अपना योगदान जारी रखना चाहते हैं।
धनंजय डी सिल्वा की कप्तानी में श्रीलंका की टेस्ट टीम का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा। साल 2024 में टीम को वेस्टइंडीज और भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बावजूद उनकी कप्तानी में श्रीलंका ने कई अहम जीत भी दर्ज कीं, जिसने टीम की क्षमता को साबित किया।
कप्तान के रूप में धनंजय डी सिल्वा के लिए साल 2024 कई मायनों में यादगार रहा। श्रीलंका ने बांग्लादेश के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-0 से शानदार जीत हासिल की। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में 2-1 से पिछड़ने के बावजूद श्रीलंकाई टीम ने ओवल के मैदान पर जीत दर्ज कर अपनी ताकत दिखाई। इसके अलावा घरेलू मैदान पर न्यूजीलैंड को 2-0 से हराना भी उनकी कप्तानी की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।
धनंजय डी सिल्वा के कप्तानी छोड़ने के फैसले को श्रीलंका क्रिकेट में पीढ़ीगत बदलाव की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब चयनकर्ताओं के सामने नए कप्तान के चयन की चुनौती होगी। टीम प्रबंधन को ऐसे खिलाड़ी की तलाश करनी होगी, जो टेस्ट क्रिकेट में श्रीलंका को निरंतर सफलता दिलाने के साथ युवा खिलाड़ियों को भी बेहतर दिशा दे सके। फिलहाल धनंजय डी सिल्वा का ध्यान खिलाड़ी के तौर पर टीम के लिए योगदान देने पर रहेगा।

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