RBI का बड़ा झटका! रेपो रेट बढ़कर 5.50%, होम-कार लोन की EMI होगी महंगी

मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई पर काबू पाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने तीन दिवसीय बैठक के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला किया है। इसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गई है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने नीतिगत ब्याज दर में इजाफा किया है।
5 से 7 अक्टूबर तक चली MPC की बैठक में दर बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी बदलते हुए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध और सोच-समझकर मौद्रिक सख्ती का संकेत दिया है। इसका मतलब है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हो गई है।
RBI के इस फैसले का असर सीधे बैंक ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ने की संभावना है। हालांकि वास्तविक असर अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ब्याज दरों में बदलाव पर निर्भर करेगा।
RBI गवर्नर मल्होत्रा ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को भी मौद्रिक नीति के लिए चुनौतीपूर्ण बताया। दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी, वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव, व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है।
गवर्नर के मुताबिक वैश्विक आर्थिक विकास फिलहाल मजबूत बना हुआ है, लेकिन आगे इसकी रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड बढ़ना और अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी वैश्विक वित्तीय बाजारों में दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
RBI ने माना कि जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों के कारण वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार व्यापक बनी हुई है और अर्थव्यवस्था के आगे भी मजबूती से बढ़ने की उम्मीद है।
महंगाई के मोर्चे पर RBI ने बदलती परिस्थितियों को लेकर सतर्कता दिखाई है। केंद्रीय बैंक को महंगाई की उम्मीदों में बढ़ोतरी और कीमतों पर दबाव के कुछ संकेत मिले हैं। हालांकि अभी ऐसे सीमित प्रमाण हैं कि सप्लाई साइड से पैदा हुआ दबाव कंपनियों के मूल्य निर्धारण के फैसलों में व्यापक रूप से शामिल हो गया है।
RBI ने यह भी चेताया कि सप्लाई से जुड़े झटकों का दूसरा दौर महंगाई की उम्मीदों और कंपनियों की कीमत तय करने की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे असर को नियंत्रित करने में मौद्रिक नीति को कुछ समय लग सकता है। इसी वजह से MPC ने नीतिगत दर में बदलाव को जरूरी माना।
केंद्रीय बैंक ने मॉनेटरी और क्रेडिट एग्रीगेट्स में तेज बढ़ोतरी से जुड़े जोखिमों पर भी नजर रखी है। हालांकि मांग की तरफ से महंगाई का दबाव बढ़ने के फिलहाल सीमित संकेत मिले हैं।
रेपो रेट बढ़ाने के साथ RBI ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगे की नीति महंगाई और आर्थिक विकास की दिशा को देखकर तय की जाएगी। यानी भविष्य में हर बैठक में परिस्थितियों के आधार पर फैसला होगा। निकट अवधि में ब्याज दर घटने की संभावना कम है, जबकि दर को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने या जरूरत पड़ने पर और सख्ती करने का विकल्प खुला रखा गया है।
RBI के इस फैसले से कर्ज लेने वाले ग्राहकों के लिए आने वाला समय अहम हो गया है। खासकर जिन लोगों की EMI पहले से बजट पर दबाव डाल रही है, उन्हें ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर महसूस हो सकता है।
