गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
आइये आके महफिल जमा दीजिए,
आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए।
पास उजड़े हुए इस चमन के कभी,
बैठ के खुद ब खुद मशवरा कीजिए।
आंसुओ के समंदर से बाहर लिकल,
साज दिल का कभी गुनगुना दीजिए।
आइना दर्द सुनने को बेताब है,
रूबरू जा के सब कुछ बता दीजिये।
आज अपनों से अपनी लड़ाई में फिर,
हार कर फ़र्ज अपना अदा कीजिए।
टूट जाने का अपने गिला न करें,
फूल बनके गुलिस्तां सजा दीजिए।
लुट गए हैं तो क्या इश्क में हम सभी,
दिल लगाने की फिर से खता कीजिए।
कब मिला है किसी को मुकम्मल जहाँ,
शौक से जिंदगी का मजा लीजिये।
आइये आके महफिल जमा दीजिए,
आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए।
देशभर की 76 टीमें बनाएंगी रॉकेट और उपग्रह फोटो Ai निर्मित कुशीनगर में विद्यार्थियों की…
🌾 बेमौसम बारिश का कहर! अन्नदाता की बढ़ी चिंता परमेश्वर दयाल मिश्र की रिपोर्ट देवरिया…
शिविर, विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे इलाज; जांच, दवाएं और कई ऑपरेशन भी मुफ्त! गोरखपुर (राष्ट्र की…
करवा चौथ के दिन दूधिया श्रवण की संदिग्ध मौत! मरने से पहले भाई को किया…
ग्लेशियल झील फटने से हड़कंप! असम-बंगाल पर बाढ़ का खतरा, हजारों लोग सुरक्षित ठिकानों पर…
कसया के शिक्षा विभाग में कथित वसूली का मामला गरमाया! खेलकूद, ऑडिट और एमडीएम रजिस्टर…