गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
आइये आके महफिल जमा दीजिए,
आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए।
पास उजड़े हुए इस चमन के कभी,
बैठ के खुद ब खुद मशवरा कीजिए।
आंसुओ के समंदर से बाहर लिकल,
साज दिल का कभी गुनगुना दीजिए।
आइना दर्द सुनने को बेताब है,
रूबरू जा के सब कुछ बता दीजिये।
आज अपनों से अपनी लड़ाई में फिर,
हार कर फ़र्ज अपना अदा कीजिए।
टूट जाने का अपने गिला न करें,
फूल बनके गुलिस्तां सजा दीजिए।
लुट गए हैं तो क्या इश्क में हम सभी,
दिल लगाने की फिर से खता कीजिए।
कब मिला है किसी को मुकम्मल जहाँ,
शौक से जिंदगी का मजा लीजिये।
आइये आके महफिल जमा दीजिए,
आप भी बेवजह मुस्कुरा दीजिए।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश की इकाई महिला व्यापार मंडल देवरिया की…
नशामुक्त युवा कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने लिया नशे से दूर रहने का संकल्प बलिया (राष्ट्र…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। एकेडमिक ग्लोबल स्कूल, जंगल धूसड़ में दादा-दादी दिवस समारोह हर्षोल्लास और…
देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधीर पाण्डेय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में…
बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बांसडीह कोतवाली में तैनात सिपाही पारितोष मिश्रा का शव सोमवार को…
बलिया (राष्ट्र की परम्परा ) बांसडीह कोतवाली में तैनात सिपाही पारितोष मिश्रा का शव सोमवार…