
जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले बड़ा एक्शन! ध्रुव राठी समेत CJP के कई नेता हिरासत में, दिल्ली में सुरक्षा सख्त; राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार जाएंगे, यह सरकार जाएगी
गुरुग्राम/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली-एनसीआर में सियासी हलचल तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले संगठन के प्रमुख अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका, सौरव दास और पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके आवास से हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, ध्रुव राठी को हिरासत में लिए जाने की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों को रोकने तथा हिरासत में लेने की खबरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया, नागरिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। गुरुग्राम स्थित आवास से ध्रुव राठी को हिरासत में लेने का दावा प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, ध्रुव राठी 8 अक्टूबर को भारत पहुंचे थे। इसके बाद वह बेंगलुरु में एसआईआर और निर्वाचन आयोग के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। 9 अक्टूबर की रात दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने इंडिया गेट से एक वीडियो भी साझा किया था। इसके बाद वह गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित अपने आवास चले गए थे। शनिवार को उन्हें जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना था। बताया जा रहा है कि सुबह दिल्ली पुलिस की एक टीम उनके आवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया। उस समय उनकी मां भी घर पर मौजूद थीं। कुछ रिपोर्टों में पुलिस टीम में करीब 50 सदस्यों के होने का दावा किया गया है। हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने तक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। विमान के भीतर से हिरासत में लिए गए CJP के नेता सीजेपी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक आशुतोष रांका तथा सौरव दास को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से उतरने से पहले ही हिरासत में लिए जाने की खबर है। बताया गया है कि तीनों बेंगलुरु में प्रदर्शन के बाद मुंबई गए थे और शनिवार सुबह विमान से दिल्ली पहुंचे थे। प्राप्त विवरण के अनुसार, विमान के दिल्ली में उतरने के बाद पुलिसकर्मी उनके पास पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए। इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती थी। हिरासत में लिए जाने के समय अभिजीत दीपके ने कथित तौर पर कहा कि वह गिरफ्तारी का सामना करने के लिए ही दिल्ली आए हैं। सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की सूचना है। इन कार्रवाइयों के बाद प्रदर्शन से पहले ही संगठन के कई प्रमुख चेहरों के पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, हिरासत में लिए गए सभी लोगों की मौजूदा स्थिति, कार्रवाई के कानूनी आधार और उन्हें कहां ले जाया गया, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है। सीजेपी की क्या हैं प्रमुख मांगें? सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। संगठन का आरोप है कि एसआईआर की प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं। इसी आधार पर पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की मांग उठाई है। संगठन की अन्य प्रमुख मांगों में एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाना और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव करना शामिल है। सीजेपी चाहती है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित व्यवस्था में नागरिक समाज की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। इन मांगों को लेकर पार्टी ने प्रदर्शन की योजना बनाई थी। राहुल गांधी का सरकार पर हमला, बोले- लोकतंत्र की मरम्मत शुरू होगी सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर देश की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।” राहुल गांधी के इस बयान को निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष के राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने सीजेपी के प्रदर्शन से प्रत्यक्ष दूरी बनाए रखने के बावजूद अपने बयानों के जरिए एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित पार्टी के कई नेताओं ने पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध दर्ज कराया था। हालांकि, शनिवार को राहुल गांधी के चेन्नई में छात्रों के एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना होने की जानकारी भी सामने आई। जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी को किले में तब्दील कर दिया गया है और जगह-जगह सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। उनके अनुसार, मताधिकार और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर चिंतित युवाओं के शांतिपूर्ण विरोध से सरकार घबराई हुई है। रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और उनके कार्यकाल से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 में संसद से पारित कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण दिया गया। कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को नैतिक अनिवार्यता बताते हुए चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा बहाल करने की मांग की। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की आवश्यकता जताई और दावा किया कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार पर असर पड़ा है। कांग्रेस ने चुनावी व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए एसआईआर को रद्द करने की मांग भी दोहराई है। हालांकि, मतदाता सूची से प्रभावित लोगों की संख्या और प्रक्रिया के वास्तविक प्रभाव से जुड़े दावों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। ध्रुव राठी की नागरिकता और वीजा को लेकर भी उठे सवाल ध्रुव राठी की नागरिकता और भारत में उनकी आव्रजन स्थिति को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया है। बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर राठी की नागरिकता, भारत में प्रवेश के लिए इस्तेमाल किए गए पासपोर्ट, वीजा की श्रेणी और प्रवास संबंधी शर्तों की जांच कराने का अनुरोध किया है। राव के मुताबिक, राठी बेंगलुरु में एसआईआर के विरोध में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन्होंने निर्वाचन आयोग की आलोचना की थी। राव ने सवाल उठाया कि भारत में किसी विशेष वीजा या अनुमति के आधार पर रह रहे विदेशी नागरिक को राजनीतिक प्रदर्शन में भाग लेने अथवा उसे संबोधित करने की कितनी कानूनी अनुमति है। उन्होंने गृह मंत्रालय से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि राठी की वर्तमान नागरिकता क्या है, वह किस पासपोर्ट पर भारत आए और उनके प्रवास पर कौन-सी शर्तें लागू हैं। साथ ही, यदि जांच में विदेशी अधिनियम, वीजा नियमों या अन्य लागू कानूनों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। हालांकि, किसी व्यक्ति की नागरिकता या वीजा शर्तों के उल्लंघन को लेकर लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं हैं। इस मामले में संबंधित दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की आधिकारिक जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, प्रदर्शन से पहले कार्रवाई पर सवाल जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने की खबर है। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की सूचनाएं भी सामने आई हैं। प्रदर्शन से पहले नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। एक ओर पुलिस प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर विपक्ष और प्रदर्शनकारियों की ओर से शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि हिरासत में लिए गए नेताओं और ध्रुव राठी के संबंध में पुलिस क्या आधिकारिक जानकारी देती है, कार्रवाई का कानूनी आधार क्या है और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है। निर्वाचन आयोग, एसआईआर और मताधिकार से जुड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है।
