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ईओ हिमांशु सिंह प्रकरण से देवरिया में हलचल, थाने पहुंचे कई नगर पंचायतों के अध्यक्ष और कर्मचारी

तरकुलवा, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले में नगर पंचायतों की टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। पथरदेवा नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) हिमांशु सिंह को कथित तौर पर अगवा करने की कोशिश किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें जबरन गाड़ी में बैठाने का प्रयास किया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और मामले में दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।घटना के बाद नगर पंचायतों से जुड़े जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों में हलचल मची हुई है। नगर पंचायत पथरदेवा के अध्यक्ष कमलेश सिंह उर्फ क्रांति सिंह की ओर से थाना तरकुलवा में दी गई तहरीर के मुताबिक, अधिशासी अधिकारी हिमांशु सिंह 8 अक्टूबर को किसी काम से देवरिया आए थे। आरोप है कि इसी दौरान कुछ अपरिचित लोग उनकी गतिविधियों पर नजर रखने लगे। इसके बाद गुरुवार की रात उन्हें कथित तौर पर घेरकर मारपीट की गई और जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश की गई। तहरीर में घटना के पीछे नगर पंचायतों की टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विवाद की आशंका भी जताई गई है। शिकायत के अनुसार, घटना के दौरान अधिशासी अधिकारी पर टेंडर खुलवाने को लेकर दबाव बनाने का आरोप भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि उन्हें गाड़ी में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाने और बाद में नगर पंचायत पथरदेवा कार्यालय पहुंचाने को लेकर भी विवाद हुआ। हालांकि, घटनाक्रम की पूरी परिस्थितियों, कथित दबाव और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस कथित अपहरण के प्रयास, मारपीट और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विवाद समेत विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान, उनकी भूमिका और मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। इस घटनाक्रम के बाद थाना तरकुलवा परिसर में कई नगर पंचायतों के अध्यक्षों और कर्मचारियों के पहुंचने की भी जानकारी मिली है। थाने पर जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों की मौजूदगी के बीच मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सभी की निगाहें पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। नगर पंचायतों में सरकारी विकास कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में किसी अधिकारी को कथित तौर पर धमकाने, उसके साथ मारपीट करने या टेंडर खुलवाने के लिए दबाव बनाने जैसे आरोप गंभीर हैं। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, पुलिस की जांच पूरी होने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में अधिशासी अधिकारी का विस्तृत पक्ष और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।