
एम.आर. ख़ान की रिपोर्ट
प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। न्याय को आम जनता की भाषा में सुलभ बनाने की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। हाईकोर्ट के एक लाख न्यायिक फैसलों का हिंदी में अनुवाद पूरा कर लिया गया है। ये सभी फैसले न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध हैं। इस पहल से हिंदी भाषी लोगों, कानून के विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं और शोधकर्ताओं को न्यायिक निर्णयों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के अवसर पर मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर एक लाखवें हिंदी अनुवादित फैसले को स्वयं अपलोड किया। इसके साथ ही न्यायिक निर्णयों के हिंदी अनुवाद की यात्रा और अब तक हासिल की गई उपलब्धियों को संकलित करने वाली विशेष स्मारिका ‘द वर्नाकुलर वॉयस ऑफ जस्टिस’ का विमोचन भी किया गया। यह उपलब्धि न्यायिक व्यवस्था में भारतीय भाषाओं के महत्व और आम नागरिकों तक कानून की जानकारी पहुंचाने के प्रयासों को नई मजबूती देती है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रशासनिक समिति के सदस्य न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा, न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा उपस्थित रहे। इसके अलावा एआई असिस्टेड लीगल ट्रांसलेशन एडवाइजरी, ई-एएचसीआर एवं आईएलआर समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा समिति के सदस्य न्यायमूर्ति समीर जैन और न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
स्थानीय भाषाओं में न्याय उपलब्ध कराने की पहल
न्यायिक फैसलों को देश की विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराने की परिकल्पना उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ की पहल से आगे बढ़ी। इसी दिशा में उनके निर्देशों के क्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट में 16 अगस्त 2023 को सुवास प्रकोष्ठ की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य न्यायिक निर्णयों का हिंदी में अनुवाद कर उन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
इस पहल के तहत 23 अगस्त 2023 को हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर पहला हिंदी अनुवादित फैसला अपलोड किया गया था। इसके बाद अनुवाद कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा और 12 दिसंबर 2025 को 50 हजारवें फैसले का अनुवाद पूरा होने की उपलब्धि हासिल हुई। अब एक लाखवें फैसले को वेबसाइट पर अपलोड किए जाने के साथ इस अभियान ने नया मुकाम प्राप्त कर लिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह उपलब्धि न्यायिक जानकारी को सरल और सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब हिंदी भाषी नागरिकों को महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को समझने के लिए केवल अंग्रेजी पाठ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वेबसाइट पर उपलब्ध अनुवादित निर्णयों के माध्यम से आम लोग अपने कानूनी अधिकारों, न्यायिक प्रक्रियाओं और विभिन्न मामलों में अदालतों की टिप्पणियों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे कानून के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ न्याय व्यवस्था और आम जनता के बीच संवाद भी मजबूत होने की उम्मीद है।
