जीवन में प्रचंड चक्रवात, तूफान
का आना भी अति आवश्यक है,
तभी हमें पता चलता है कि कौन
हमारा हाथ पकड़ कर चलता है।
दुनिया स्वार्थ में अन्धी होती है,
अक्सर लोग साथ छोड़ जाते हैं,
संस्कारहीनता सामाजिक बुराई,
भौतिक आधुनिकता के धन्धे हैं।
पेड़, पौधे, नदियाँ पूजी जाती हैं,
उनका अनादर अनर्थकारी होता है,
इस अनादर का परिणाम किसी न
किसी को तो भुगतना ही पड़ता है।
अहंकार मन मस्तिष्क में रखकर
कुछ भी प्राप्त नहीं हो सकता है,
समर्पण की श्रद्धांजलि बनाकर
कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
शब्द और जीवन व्यवस्थित हों,
तभी अर्थ है, वरना सब व्यर्थ हैं,
आदित्य किसी हार का कोई भी
अर्थ नहीं, हम विजयी जन्मे हैं।
पटना में 90 फीट के रावण का धू-धूकर दहन! आंखों से निकले अंगारे, मुंह से…
बांकुड़ा/पश्चिम बर्धमान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की महाअष्टमी की रात…
कुशीनगर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। दशहरे की तैयारियों और मेले की रौनक के बीच चार परिवारों…
गोरखपुर में विजयादशमी पर दिखा गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत संगम! योगी की शोभायात्रा पर बरसे…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। लार थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक पर…
पिता को खाना पहुंचाकर लौटते समय सेमरा घाट पर हुआ हादसा, परिजनों में मचा कोहराम…