✍️ डॉ० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
सच बोलना मानव की मूल प्रवृत्ति है,
सच से ही जीवन में पवित्रता सृजित है।
झूठ सुनकर जब मन व्यथित हो जाता है,
तो झूठ कहने से भी हमें बचना चाहिए।
बचपन में हम निष्कपट, सरल होते हैं,
मन में कपट के बीज नहीं बोते हैं।
ज्यों-ज्यों बढ़ती उम्र और स्वार्थ आता है,
झूठ का आवरण मन पर छा जाता है।
किसी के हित में कहा गया मधुर झूठ,
कभी-कभी बन जाता है प्रिय सत्य का रूप।
पर लालच में जो छल की राह पकड़ता है,
वह अंततः अपने ही हाथों बिखरता है।
“भेड़िया आया” की कथा याद कर लो,
झूठ से विश्वास का दीपक न जलने दो।
जो बार-बार असत्य का सहारा लेते हैं,
अपने ही अपनों से दूर हो जाते हैं।
नकारात्मक छवि जब बन जाती है,
सच्ची बातें भी संदेह में आ जाती हैं।
यदि विवश होकर असत्य कहना पड़े,
तो स्वीकार कर क्षमा माँग लेना पड़े।
जीवन में झूठ की उतनी ही जगह रहे,
जितना भोजन में नमक सदा सधे।
अधिक नमक स्वाद भी बिगाड़ देता है,
और स्वास्थ्य पर भी आघात देता है।
उत्तम उद्देश्य हेतु कहा गया वचन,
यदि सत्य न हो तो भी रहे सावधान मन।
पर गलत इरादे से बोला गया असत्य,
जीवन में घोल देता है घोर विष व्यस्त।
झूठ से पहले दस बार मनन कर लो,
शब्दों को बोलने से पहले परख लो।
यदि विकल्प हो झूठ और मौन का कभी,
तो मौन ही बेहतर है — यही नीति सभी।
गोरखपुर गोरक्ष प्रांत योजना बैठक—कार्ययोजना 2026 यह बैठक विश्व हिंदू परिषद, गोरक्ष प्रांत, गोरखपुर, योजना…
नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की राह पर कदम बढ़ाएंगी छात्राएं, 19 से 22 वर्ष आयु वर्ग…
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीण…
अनूप तिवारी देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अमर शहीद शिवराज उर्फ सोना सोनार के 84वें शहादत…
सरदार भगत सिंह ने ‘किरती’ में लिखी वीरों की गाथा काकोरी ट्रेन एक्शन केवल सरकारी…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कृषि संकाय में शुक्रवार को "सतत कृषि…