Tag: संपादकीय

संकल्प दिवस: राष्ट्रीय अस्मिता और अखंडता का प्रश्न

महर्षि कश्यप की तपोभूमि का एक-एक इंच हमारा है! 22 फरवरी 1994 का दिन भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है। इसी दिन संसद ने…

अंत्योदय से राष्ट्रोदय तक: पंडित दीनदयाल उपाध्याय का कालजयी चिंतन

भारतीय राजनीति और चिंतन के इतिहास में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्थान केवल एक विचारक या संगठनकर्ता का नहीं, बल्कि एक ऐसे द्रष्टा का है, जिसने भारत को उसकी आत्मा…

मोबाइल की लत: संस्कारों से आत्मघात तक की खतरनाक यात्रा

लेखक – नवनीत मिश्र आज के दौर में मोबाइल फोन ने जीवन को जितना सुविधाजनक बनाया है, उतना ही वह बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक भी साबित हो रहा…

बजट 2026: पूर्वी उत्तर प्रदेश में निवेश और विकास की उम्मीद, लेकिन आयकर राहत नहीं, मध्यम वर्ग निराश

त्वरित टिप्पणी: नवनीत मिश्र भारत सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया, जिसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के लिए कई…

बंगलादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं की हत्या: भय और लापरवाही का अंजाम

बंगलादेश में एक और अल्पसंख्यक हिन्दू की निर्मम हत्या ने इस बात को जोरदार तरीके से उजागर कर दिया है कि वहाँ धार्मिक सहिष्णुता केवल शब्दों में मौजूद है। यह…

विश्व हिंदी दिवस: माँ भारती के माथे पर सजी भाषा की अमिट आभा

हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना की धुरी है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर यह अनुभूति और गहरी हो जाती है कि हिंदी माँ…

अदालत के आदेश पर बुलडोजर, जवाब में पत्थर-यह विरोध नहीं, खुली बगावत है

तुर्कमान गेट की घटना कोई अचानक उभरा गुस्सा नहीं, बल्कि कानून और संविधान को ठेंगा दिखाने की सोची-समझी मानसिकता का आईना है। अदालत के आदेश से जब अवैध निर्माण हटाया…

योगी-मोदी मुलाक़ात: मुस्कान, आत्मविश्वास और राजनीतिक संकेत

दिल्ली में हुई योगी-मोदी मुलाक़ात को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में देखना इसके राजनीतिक निहितार्थों को सीमित कर देना होगा। तस्वीरों में दिखाई देती मुस्कान, चेहरे की सहज चमक…

उच्च शिक्षा में नई इबारत लिखती पूर्वांचल की बेटियाँ

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय और उसके 355 संबद्ध महाविद्यालयों के सत्र 2025–26 के प्रवेश आँकड़े यह साबित करते हैं कि पूर्वांचल, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर में उच्च शिक्षा अब सामाजिक परिवर्तन…

समकालीन भारत और विश्व: संक्रमण काल की तस्वीर

भारत और विश्व इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ पुराने ढाँचे तेजी से बदल रही वास्तविकताओं से टकरा रहे हैं। यह केवल नए वर्ष का आरंभ…

परमानंद की प्राप्ति का मार्ग: ‘अहम्’ का विसर्जन और आत्मविचार, रमण महर्षि का आध्यात्मिक संदेश

आधुनिक युग के महान ऋषि और संत रमण महर्षि का सम्पूर्ण आध्यात्मिक चिंतन एक अत्यंत सूक्ष्म किंतु क्रांतिकारी सत्य पर केंद्रित है। ‘अहम्’ का लय और आत्मविचार द्वारा आत्मसाक्षात्कार। उन्होंने…

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर लगातार हमले: लोकतंत्र और मानवाधिकारों की अग्निपरीक्षा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय पर हो रहे लगातार हमले केवल एक देश की आंतरिक समस्या नहीं हैं, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक मूल्यों, धार्मिक सहिष्णुता और मानवाधिकारों…

यूं ही कोई जेटली नहीं बन जाता

भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल पद से नहीं, बल्कि प्रभाव से होती है। अरुण जेटली ऐसे ही नेता थे। राजनीति, कानून और नीति निर्माण,…