कवि सम्मेलन व मुशायरे में बही संवेदना और व्यंग्य की धारा बजती रही तालियां
विभिन्न शहरों से आए कवियों ने शब्दों से बांधा समां, अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर हुआ सम्मान गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में…
