Tag: इतिहास लेखन

भारतीय दृष्टि से लिखा जाए इतिहास, औपनिवेशिक सोच से बाहर निकलने का समय: डॉ. बालमुकुंद पांडे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय इतिहास को विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और औपनिवेशिक इतिहासकारों के नजरिए तक सीमित रखना देश के गौरवशाली अतीत के साथ अन्याय है। समय की मांग…

स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास लेखन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 19-20 को

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में महायोगी श्री गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ में 19…

अभिलेख और मुद्राओं से इतिहास लेखन होता है प्रमाणिक: डॉ. यशवन्त सिंह राठौर

प्राचीन भारतीय मुद्राओं की निर्माण तकनीक और विकास पर राष्ट्रीय व्याख्यान सम्पन्न गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)।‘‘प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं – अभिरुचि कार्यशाला’’ राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत प्राचीन इतिहास,…

राष्ट्र की धरोहरों का अविस्मरणीय योगदान

12 दिसंबर के अविस्मरणीय विदाई दिवस: राष्ट्र को मार्ग दिखाने वाले महान व्यक्तित्वों का स्मरण 12 दिसंबर भारतीय इतिहास में उन महापुरुषों की स्मृति लेकर आता है, जिनके योगदान ने…