
नई व्यवस्था लागू होते ही बदले नियम, पुराने मामलों के आवेदकों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का रुख करना होगा
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था बृहस्पतिवार से लागू हो गई है। अब जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के दो साल से अधिक समय बाद दिए जाने पर प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को अनिवार्य कर दिया गया है। इसका सीधा असर पुराने मामलों में प्रमाण पत्र बनवाने वाले आवेदकों पर पड़ेगा।
नए नियम के तहत यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक साल के बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सत्यापन और आदेश की आवश्यकता होगी।
वहीं, जन्म या मृत्यु की घटना को दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद पंजीकरण कराने के लिए अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करना होगा। यानी ऐसे पुराने मामलों में संबंधित विभाग केवल आवेदन के आधार पर प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकेगा।
बताया गया है कि यह बदलाव जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में किए गए संशोधन के अनुरूप लागू किया गया है। केंद्रीय स्तर पर संचालित जन्म-मृत्यु पंजीकरण पोर्टल पर भी नई व्यवस्था को लागू कर दिया गया है।
नई व्यवस्था का असर पुराने लंबित आवेदनों की प्रक्रिया पर भी दिखाई देने लगा है। नगर निगम के जन्म-मृत्यु अनुभाग के प्रभारी अनिल शुक्ला के अनुसार, दो साल से अधिक पुराने मामलों की ऑनलाइन फीडिंग के दौरान प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की संख्या मांगी जा रही है। इसके बिना आवेदन आगे बढ़ाना संभव नहीं हो रहा है।
इस बदलाव के बाद जिन लोगों के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण लंबे समय से नहीं हुआ है, उन्हें प्रमाण पत्र बनवाने से पहले संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट से आवश्यक आदेश प्राप्त करना होगा। इससे पुराने मामलों में प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ गई है।
