पुनीत मिश्र
महादेव गोविंद रानाडे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन महान चिंतकों और समाज सुधारकों में अग्रणी थे, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का त्याग किया। वे केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी न्यायविद, अर्थशास्त्री और सामाजिक सुधारक भी थे।
रानाडे का मानना था कि राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक है जब समाज सामाजिक कुरीतियों से मुक्त हो। उन्होंने स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और सामाजिक समानता के पक्ष में सशक्त आवाज उठाई। उस समय जब समाज रूढ़ियों में जकड़ा हुआ था, रानाडे ने सुधारवादी सोच को नई दिशा दी।
उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उदारवादी विचारधारा के माध्यम से संवैधानिक सुधारों पर बल दिया। उनके विचारों में राष्ट्र निर्माण, नैतिकता और सामाजिक न्याय का स्पष्ट समन्वय दिखाई देता है।
महादेव गोविंद रानाडे का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची राष्ट्रसेवा केवल संघर्ष के मैदान में ही नहीं, बल्कि विचार, लेखन और सामाजिक सुधार के माध्यम से भी की जा सकती है। उनकी पुण्यतिथि हमें यह स्मरण कराती है कि राष्ट्रहित के लिए व्यक्तिगत स्वार्थों का त्याग ही सच्ची देशभक्ति है।
रानाडे के आदर्श और विचार आज भी समाज को प्रगति, समानता और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देते हैं।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार एवं पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना…
सरकारी और निजी संस्थानों में नियुक्ति का झांसा देकर वसूली जाती थी मोटी रकम, फर्जी…
केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर उपलब्धियां गिनाईं, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान में…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के…
शाहजहाँपुर (राष्ट्र की परम्परा )l तिलहर-दातागंज स्टेट हाईवे पर शनिवार सुबह बड़ा सड़क हादसा हो…
भलुअनी/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) शनिवार को स्थानीय नगर के शिव मंदिर परिसर के पास अखिल भारतीय…