
अरुणाचल में भारत-चीन सीमा पर फिर बढ़ी हलचल! LAC पर PLA से कई जगह आमना-सामना, कुछ मोर्चों पर अब भी तनाव
ITBP प्रमुख शत्रुजीत सिंह कपूर का बड़ा खुलासा, ‘शौर्य कमांडो’ की सतर्कता और साहस की सराहना; पूर्वी सेक्टर में सीमा सुरक्षा को लेकर बढ़ी निगरानी
अरुणाचल प्रदेश (✍️ राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत-चीन सीमा पर एक बार फिर सैन्य हलचल की खबर सामने आई है। अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास भारतीय सुरक्षा बलों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के बीच कई स्थानों पर आमना-सामना होने की जानकारी सामने आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर के बयान के मुताबिक, कुछ स्थानों पर ऐसी परिस्थितियां अभी भी बनी हुई हैं। इस घटनाक्रम ने भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था और दोनों देशों के बीच तनाव प्रबंधन को लेकर एक बार फिर ध्यान खींचा है। ITBP प्रमुख ने बल के स्थापना दिवस से जुड़े विशेष सम्मान समारोह के दौरान जवानों को संबोधित करते हुए हालात का जिक्र किया। उन्होंने चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की परिस्थितियों में अनुशासन, सतर्कता और पेशेवर कौशल दिखाने के लिए ITBP की नई कॉम्बैट टीम ‘शौर्य कमांडो’ की सराहना की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब पूर्वी सेक्टर में सीमा की निगरानी और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता महत्वपूर्ण बनी हुई है। सीमा पर आमना-सामना क्यों होता है? भारत और चीन के बीच LAC की स्थिति को लेकर दोनों देशों की धारणाएं कई क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। यही अंतर कई बार गश्त के दौरान विवाद, सैनिकों के आमने-सामने आने और स्थानीय स्तर पर तनाव की वजह बनता है। अरुणाचल प्रदेश सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए सैनिकों की सतर्कता, संवाद और स्थापित सैन्य प्रक्रियाओं का पालन अहम माना जाता है। हालांकि, सामने आई जानकारी से हर स्थान पर आमना-सामना होने की सटीक वजह, संबंधित क्षेत्रों की पहचान और मौजूदा स्थिति के विस्तृत परिचालन संबंधी विवरण स्पष्ट नहीं होते हैं। इसलिए इसे व्यापक सैन्य टकराव या गोलीबारी की घटना मानना उचित नहीं होगा। पूर्वी सेक्टर में सैन्य संवाद का महत्व भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को नियंत्रित करने के लिए सैन्य तथा राजनयिक स्तर पर बातचीत होती रही है। लद्दाख सेक्टर में चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारी पहले भी कई दौर की वार्ता कर चुके हैं। वहीं, पूर्वी सेक्टर से जुड़े मुद्दों पर सैन्य संवाद का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सीमा की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा हो सकता है। सितंबर में कोर कमांडर स्तर की बैठक होने की जानकारी भी इस घटनाक्रम के संदर्भ में सामने आई है। हालांकि, पूर्वी सेक्टर में हालिया आमना-सामना किन विशिष्ट स्थानों पर हुआ और बातचीत में किन मुद्दों पर सहमति बनी, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूरी है। गलवान की घटना के बाद और संवेदनशील हुए सीमा संबंध जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। इस घटना में दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई थी। इसके बाद LAC पर तनाव कम करने, सैनिकों की तैनाती से जुड़े विवादों को सुलझाने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सैन्य कमांडर स्तर तथा राजनयिक स्तर की वार्ताओं का महत्व और बढ़ गया। भारत और चीन के बीच सीमा पर स्थिरता बनाए रखना केवल सैन्य दृष्टि से ही नहीं, बल्कि व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर होने वाले आमना-सामने के मामलों को समय रहते संवाद और निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से नियंत्रित करना दोनों पक्षों के लिए अहम चुनौती है। अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बाद घटनाक्रम पर नजर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा और सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के बाद सामने आए इस घटनाक्रम पर भी नजर रखी जा रही है। हालांकि, केवल घटनाओं के समय के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हालिया आमना-सामना किसी यात्रा या कूटनीतिक पहल का सीधा परिणाम है। फिलहाल, ITBP प्रमुख के बयान ने अरुणाचल प्रदेश में सीमा सुरक्षा की स्थिति को चर्चा में ला दिया है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सैन्य संवाद, सीमा पर गश्त की व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि ऐसी परिस्थितियों को किस तरह नियंत्रित किया जाता है। निष्कर्ष: भारत-चीन सीमा पर शांति बनाए रखना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है। अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की खबर के बीच वास्तविक स्थिति, आधिकारिक जानकारी और आगे होने वाली सैन्य वार्ताओं पर नजर बनी रहेगी।
