संयोग से नहीं समझदारी से बने परिवार
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) परिवार की खुशियाँ इस बात में शामिल हैं जब परिवार का आकार संयोग से नहीं बल्कि दंपति की इच्छा और उनकी आवश्यकता के अनुसार हो। इसके लिए मौजूदा समय में आधुनिक परिवार नियोजन के कई विकल्प मौजूद हैं । बावजूद इसके जनपद की 27.6 फीसदी महिलाएँ जिन्हें अभी या भविष्य में बच्चे नहीं चाहिए लेकिन वह परिवार नियोजन का कोई भी साधन नहीं अपना रही हैं। ऐसे में न चाहते हुए भी उन्हें अनचाहे गर्भ या बड़े परिवार का बोझ उठाना पड़ता है। राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य पर्वेक्षण 2019-21 के अनुसार जनपद में 27.6 फीसदी यानि 1.42 लाख से अधिक दंपति अभी या भविष्य में बच्चे नहीं चाहते लेकिन इसके लिए वह कोई भी परिवार नियोजन साधन उपयोग नहीं कर रहे हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सतीश कुमार सिंह ने बताया कि इसके समाधान के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों में 18 जनवरी से पखवाड़ा चलाया जा रहा है । इसमें ऐसे जागरूक दंपति को आगे लाया जा रहा है जिन्होंने अपने व अपने परिवार की खुशहाली के लिए सही समय पर सही निर्णय लेकर परिवार को नियोजित किया है।
ऐसे ही जागरूक दंपति दिनेश व लक्ष्मी हैं । मिहींपुरवा ब्लॉक के चफरिया गाँव निवासी 41 वर्षीय दिनेश सिंह के दो बच्चे हैं । उन्होंने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने व पत्नी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए दो बच्चों के बाद यह निर्णय लिया कि उन्हें अब परिवार का आकार नहीं बढ़ाना है । साथ ही वह अनचाहे गर्भ की चिंता से भी मुक्त रहना चाहते थे । इसके लिए उन्होंने गाँव की आशा से मिलकर परिवार नियोजन का स्थायी साधन नसबंदी के बारे में पूरी जानकारी ली। दिनेश सिंह कहते हैं कि नसबंदी तो पत्नी की भी हो सकती थी लेकिन मैंने अपनी नसबंदी कराने का निर्णय लिया । इसकी दो वजह थीं । पहला पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी से आसान थी और इसमें भर्ती होने या चीरा टांका लगने का भी झंझट नहीं था । दूसरी वजह इससे भी बड़ी थी कि अब तक दो बच्चों को जन्म देने से लेकर उनके पालन-पोषण आदि सभी जिम्मेदारियों को पत्नी नंदिनी ने ही निभाया था। ऐसे में एक और जिम्मेदारी मैं उन्हें नहीं देना चाहता था । मेरे इस निर्णय से न सिर्फ वह सहमत हो गईं बल्कि सहभागिता की इस सोंच से हम दोनों में पहले से अधिक प्यार बढ़ गया । प्रदेश के बनेंगे रोल मॉडल -जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सहभागिता बढ़ाने के लिए अब दिनेश सिंह अपनी पत्नी नंदनी के साथ प्रदेश के सभी होर्डिंग्स,बोर्डिंग्स व बैनर पर अपनी मुस्कान बिखेरते नज़र आएंगे। वहीं सात वर्ष पहले दो बच्चों के बाद कॉपर-टी अपना चुकी चफरिया निवासी 34 वर्षीय लक्ष्मी को परिवार नियोजन का अस्थायी साधन कॉपर-टी के लिए चयन किया गया है। लक्ष्मी कहती हैं कि परिवार की खुशियों के लिए परिवार नियोजन साधनों की जानकारी सभी दंपति को होनी चाहिए ताकि समय आने पर वह अपनी पसंद के साधनों का चुनाव कर सकें । ऐसा होने पर बच्चों का जन्म संयोग से नहीं होगा बल्कि पति-पत्नी की इच्छा और उनकी आवश्यकता के अनुसार होगा । लक्ष्मी अब प्रदेश की सभी महिलाओं को कॉपर-टी की खूबियां बताती नजर आएंगी। यह है जनसंख्या नीति का लक्ष्य – उत्तर प्रदेश की जनसंख्या नीति 2021-30 के अनुसार परिवार नियोजन के लक्ष्य को आधुनिक साधनों द्वारा 75 प्रतिशत की मांग संतुष्टि को प्राप्त करने के लिए वर्ष 2025 तक प्रदेश की अपूरित मांग को 12.9 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक लाना होगा।
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