सीएम योगी वनटांगिया समुदाय के बीच मनाएंगे दीपावली

जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था का वन टांगिया तिनकोनिया नंबर 1 में लिया जायजा

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में वनटांगिया समुदाय के बीच दिवाली 24 अक्टूबर को मनाएंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन को लेकर जिला प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी सभी तैयारियां शुरू कर दी है आज डीएम एसएसपी सीडीओ एसपी सिटी सहित आला अधिकारी जनप्रतिनिधियों के साथ पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा। योगी पिछले कई सालों से उनके गांव आकर दिवाली मनाते हैं और इस बार भी समुदाय के लोग उनके आने को लेकर बेहद उत्साहित हैं हालांकि, योगी वनटांगिया समुदाय से लगाव काफी पहले से है।
योगी आदित्यनाथ सियासत में कदम रखा तो गोरखपुर को अपनी कर्मभूमि बनाई इसके बाद योगी वनटांगियों से संपर्क हुआ, तब से वो इनके विकास के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गए और हर साल दिवाली उन्हीं के बीच मनाते हैं।
वनटांगिया लोगों को आजादी के इतने साल बाद भी किसी राजनीतिक दल या सरकारों ने सुध नहीं ली, उन्हें मुख्य धारा में जोड़ने का काम योगी आदित्यनाथ ने शुरू किया योगी ने इनके बीच आना-जाना शुरू किया और तब से लगातार उनके बीच दिवाली मनाते आ रहे हैं। 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वनटांगिया गांव पहुंच कर ग्राम वासियों के साथ दीपावली मनाएंगे वहां उसके लिए बच्चों को ग्राम वासियों को उपहार बाटेंगे जिसका ग्रामवासी बेसब्री से इंतजार करते हैं कि कब दीपावली आए और मुख्यमंत्री हम लोगों के बीच आकर उपहार बांटे और दीपावली मनाएं 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री के आगमन से पहले जिला प्रशासन अपनी तैयारियां शुरू कर दी है आज शुक्रवार को जिलाधिकारी कृष्ण करुणेश वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ गौरव ग्रोवर सीडीओ संजय कुमार मीना एसपी सिटी कृष्ण विश्नोई सहित अन्य आला अधिकारी और जनप्रतिनिधि राजस्व ग्रामवनटांगिया गांव तिनकोनिया नंबर 1 पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया संबंधित को आवश्यक दिशा निर्देश दिया।
बता दें कि गोरखपुर से करीब 11 किलोमीटर दूर पिपराइच रोड पर वनटांगिया गांव शुरू हो जाते हैं गोरखपुर के अलावा महाराजगंज और श्रावस्ती से लेकर गोंडा के कई गांवों में वनटांगिया समुदाय के लोग रहते हैं मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर, महाराजगंज और गोंडा के ऐसे कई गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किया था।
हालांकि, वनटांगिया समुदाय के गांवों में स्कूल, अस्पताल, बिजली, सड़क, पानी जैसी कोई सुविधा थी ही नहीं एक तरह से वनटांगिया खानाबदोश की जिंदगी जी रहे थे उन्हें लोकसभा और विधानसभा में वोट देने का अधिकार 1995 में मिला इससे आप इनकी उपेक्षा का अंदाजा लगा सकते हैं
दरअसल करीब सौ साल पहले अंग्रेजों के शासन में पूर्वी उत्तर प्रदेश में रेल लाइन बिछाने, सरकारी विभागों की इमारत के लिए लकड़ी मुहैया कराने के लिए बड़े पैमाने पर जंगल काटे गए थे अंग्रेजों को उम्मीद थी कि काटे गए पेड़ों की खूंट से फिर जंगल तैयार हो जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ
इसके बाद जंगल क्षेत्र में पौधों की देखरेख करने के लिए मजदूर रखे गए थे. इसके लिए 1920 में बर्मा (म्यांमार) में आदिवासियों द्वारा पहाड़ों पर जंगल तैयार करने के साथ-साथ खाली स्थानों पर खेती करने की पद्धति ‘टोंगिया’ को आजमाया, इसलिए इस काम को करने वाले श्रमिक वनटांगिया कहलाए
वनटांगिया श्रमिक भूमिहीन थे, इसलिए अपने परिवार को साथ लेकर रहने लगे. दूसरी पीढ़ी में उनका अपने मूल गांव से संपर्क कट गया और वे जंगल के ही होकर रह गए. उन्हें खेती के लिए जमीन दी जाती थी, लेकिन यह जमीन वन विभाग की होती थी, उस पर इन श्रमिकों का कोई अधिकार नहीं था.
देश जब आजाद हुआ तो इनके गांवों को न तो राजस्व ग्राम की मान्यता मिली और न ही इन लोगों को संविधान के तहत नागरिकों के मूलभूत अधिकार दिए गए. मतलब वनटांगियों को वे अधिकार हासिल नहीं हुए जो देश के आम नागरिकों को मिले

Editor CP pandey

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