गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विज्ञान और साहित्य के संगम का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दो शोधार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की खगोल-भौतिकी विज्ञान हिंदी प्रतियोगिता-2026 में शानदार सफलता हासिल की है। गणित एवं सांख्यिकी विभाग की गणितीय-खगोल विज्ञान प्रयोगशाला से जुड़े शोधार्थी शुभम शर्मा और आफताब अंसारी ने हिंदी निबंध और कविता प्रतियोगिताओं में द्वितीय स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया। राजभाषा विभाग, आयुका (IUCAA), पुणे की ओर से हिंदी पखवाड़ा-2026 के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के घोषित परिणाम में शुभम शर्मा ने ‘भारत की अंतरिक्ष यात्रा’ विषय पर निबंध लिखकर दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं आफताब अंसारी ने ‘मैं कृष्ण विवर हूँ (मैं ब्लैक होल हूँ)’ शीर्षक से कविता प्रस्तुत कर राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया। गणित एवं सांख्यिकी विभाग के सहायक आचार्य और गणितीय-खगोल विज्ञान प्रयोगशाला के कोऑर्डिनेटर डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि दोनों शोधार्थी ब्लैक होल और न्यूट्रॉन तारों से जुड़ी गणितीय समस्याओं पर शोध कर रहे हैं। वैज्ञानिक विषय से जुड़े शोधार्थियों की साहित्यिक उपलब्धि यह संदेश देती है कि वैज्ञानिक चिंतन और रचनात्मक अभिव्यक्ति एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। आफताब अंसारी की कविता ‘मैं कृष्ण विवर हूँ’ में ब्लैक होल की वैज्ञानिक अवधारणा को काव्यात्मक रूप दिया गया है। कविता में गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश, घटना क्षितिज, समय और ब्रह्मांड के रहस्यों को सहज भाषा में अभिव्यक्त किया गया है।‘मैं कृष्ण विवर हूँ’मैं कृष्ण विवर हूँ,मैं अंतरिक्ष की गहराई में छिपा, एक अनकहा राज़ हूँ,रोशनी भी मुझमें खो जाए, मैं ऐसा गहरा आग़ाज़ हूँ।तारे हों या धूल के कण, सबको अपनी ओर बुलाता हूँ,अपने असीम गुरुत्व के आगे, सबको झुका जाता हूँ।मुझे कोई देख नहीं सकता, फिर भी मेरा असर है,मेरे भीतर क्या छिपा है, आज भी दुनिया बेखबर है।घटना क्षितिज के पार मेरी, एक अनजानी दुनिया है,जहाँ समय भी थम-सा जाए, ऐसी मेरी कहानी है।मैं सिर्फ अंधेरा नहीं, ब्रह्मांड का एक सवाल हूँ,मैं ब्लैक होल हूँ-अनंत रहस्यों में छिपा एक कमाल हूँ।मैं कृष्ण विवर हूँ!दोनों शोधार्थियों को राजभाषा विभाग, आयुका, पुणे की ओर से नकद पुरस्कार और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने दोनों शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। खगोल-भौतिकी जैसे कठिन वैज्ञानिक विषयों को हिंदी के माध्यम से समाज तक पहुंचाने का प्रयास विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि शोध को समाज तक सीधे पहुंचाने की पहल ऐसी उपलब्धियों से और मजबूत होगी। शोधार्थियों की सफलता पर गणित एवं सांख्यिकी विभागाध्यक्ष प्रो. हिमांशु पांडे, डॉ. राजेश कुमार और विभाग के शिक्षकों ने शुभकामनाएं दीं। विश्वविद्यालय के लिए यह उपलब्धि शोध, विज्ञान, भाषा और साहित्य के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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