
मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को गुरुवार शाम मुंबई पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि, बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों में उनके हिरासत में लिए जाने की खबर का खंडन किया गया। पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने दीपके को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था और इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
बताया गया कि दीपके अपने समर्थकों के साथ मुंबई के मरीन ड्राइव इलाके में तख्तियां लेकर खड़े थे। इसी दौरान पुलिस उन्हें थाने ले गई। घटना को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने से स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी रही।
CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई गई है। संगठन ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रोकने और चुनाव आयोग से संबंधित कानूनी ढांचे में बदलाव की मांग भी रखी है। ये मांगें आंदोलनकारियों की ओर से उठाई जा रही हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने अपने कामकाज को लेकर लगाए गए विभिन्न आरोपों पर असहमति जताई है।
इससे पहले मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस का कहना था कि शिवाजी पार्क में इस तरह के आयोजन की अनुमति देने का अधिकार उसके पास नहीं है। इसके अलावा यातायात, लोगों की आवाजाही और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को भी अनुमति से जुड़े कारणों में शामिल किया गया।
पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बाद अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर, यानी गांधी जयंती के दिन ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने का ऐलान किया। उन्होंने राजनीतिक दलों के साथ आम लोगों से भी आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
दीपके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी चिंताओं के मुद्दे पर सामूहिक रूप से आवाज उठाने की जरूरत है। उनके ऐलान के बाद अब गांधी जयंती के दिन मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
