Category: लेख

दूषित हवा, दूषित समाज और मोहन राकेश की चेतावनी

जयंती पर विशेष: पुनीत मिश्र “जिस हवा में फूल अपने पूरे सौन्दर्य के साथ नहीं खिल सकता, वह हवा अवश्य दूषित हवा है। जिस समाज में मनुष्य अपने व्यक्तित्व का…

हिंदी मेरे तन- मन में

हिंदी हमारी प्यारी मातृभाषा है,देवभाषा संस्कृत की बेटी यहसंस्कृत भाषा की सहभाषा है,भारतीय बड़े भाग की भाषा है। हिंदी मेरे तन में, हिंदी मेरे मन में है,हिंदी मेरी आत्मा में…

दूषित जल: अनदेखी की भारी कीमत

दूषित जल आज केवल पर्यावरण या स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के समग्र विकास, अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती बन चुका…

अरावली पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: राहत जरूर, लेकिन संतुष्ट होने की कोई गुंजाइश नहीं

✍️ इंदरजीत सिंह/संजय पराते 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वत श्रृंखला से जुड़े अपने ही फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद देशभर में एक अस्थायी राहत…

योगी-मोदी मुलाक़ात: मुस्कान, आत्मविश्वास और राजनीतिक संकेत

दिल्ली में हुई योगी-मोदी मुलाक़ात को केवल औपचारिक शिष्टाचार के रूप में देखना इसके राजनीतिक निहितार्थों को सीमित कर देना होगा। तस्वीरों में दिखाई देती मुस्कान, चेहरे की सहज चमक…

भारतेन्दु हरिश्चंद्र : हिंदी के पितामह-नवजागरण के शिल्पकार

नवनीत मिश्र ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल’…यह पंक्ति मात्र एक काव्य-सूत्र नहीं, बल्कि उस वैचारिक क्रांति की उद्घोषणा है, जिसने आधुनिक हिंदी साहित्य की दिशा और दृष्टि…

लोकतांत्रिक और सेकुलर मिज़ाज के कारण उर्दू सदैव जीवंत रहेगी: डॉ महबूब हसन

मुंबई यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में डीडीयूजीयू के डॉ. महबूब हसन का विशिष्ट व्याख्यान मुंबई (राष्ट्र की परम्परा)। मुंबई यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में दीनदयाल उपाध्याय…

डिजिटल इंडिया का सपना साकार हुआ, तो सही मायनों में देश का हो जाएगा बेड़ा पार

डिजिटल इंडिया का डिजिटल इंडिया का सपना अगर सच हो जाए, तो जो काम आज आम नागरिक के लिए सिरदर्द बने हुए हैं, वे चुटकियों में पूरे हो सकते हैं।…

🕉️ आज का पंचांग | 05 जनवरी 2026, सोमवार

(माघ कृष्ण पक्ष द्वितीया | विक्रम संवत 2082 | शक संवत 1947)📅 आज का संपूर्ण हिन्दू पंचांग (05/01/2026)📌 तिथि- कृष्ण पक्ष द्वितीया – 09:56 AM तकउपरांत तृतीया – 06 जनवरी…

“इतिहास के पन्नों में अमर 5 जनवरी: वे विभूतियाँ जिनका जाना एक युग का अंत था”

5 जनवरी भारतीय एवं विश्व इतिहास में केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ऐसी महान विभूतियों की स्मृति का दिन है, जिनके योगदान ने समाज, संस्कृति, प्रशासन और कला को गहराई…

इतिहास के पन्नों में 5 जनवरी: जब खेल, विज्ञान, राजनीति और युद्ध ने रचा समय का अमिट दस्तावेज़

इतिहास केवल तिथियों का संग्रह नहीं, बल्कि उन निर्णयों, उपलब्धियों और घटनाओं का जीवंत दस्तावेज़ है, जिन्होंने मानव सभ्यता की दिशा बदली। 5 जनवरी ऐसी ही एक तिथि है, जिसने…

मटमैला पानी: विकास के दावों पर भारी पड़ती जमीनी हकीकत

देश के स्वच्छता सर्वेक्षणों में लगातार अव्वल रहने वाला इंदौर आज एक ऐसे गंभीर सवाल के घेरे में है, जो सीधे आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है—क्या शहर…

निर्विरोध चुनाव, NOTA और संविधान: क्या यह जन-सहमति का हनन है?

भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रत्येक नागरिक को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार प्राप्त है। चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता…

जंगलों से पहाड़ों तक: मानव और पर्यावरण का बढ़ता टकराव

सुनीता कुमारी, बिहार इसमें कहीं कोई संदेह नहीं है कि मनुष्य ने पहले जंगल काटकर जानवरों का विनाश किया और अब पर्वत–पहाड़ काटकर पर्यावरण को नष्ट कर रहा है। जिस…

विश्व शांति का शाश्वत मार्ग : सनातन चिंतन की प्रासंगिकता

कैलाश सिंह महाराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।आज की वैश्विक परिस्थितियां अशांति, युद्ध, आतंकवाद, वैमनस्य और मानसिक तनाव से घिरी हुई हैं। आधुनिक युग में भौतिक प्रगति ने मानव जीवन को सुविधाजनक…